Ravneet Bittu SC Commission: केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू आज पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए। निजी कारणों का हवाला देते हुए उन्हें दिल्ली जाना पड़ा। हालांकि, उनकी ओर से दो वकील एडवोकेट रमनदीप सिंह और एडवोकेट अनुतेज सिंह कमिशन के दफ्तर पहुंचे और मंत्री का पक्ष रखा।
देखा जाए तो यह मामला 26 मई को नगर निगम और नगर परिषद चुनावों के दौरान का है। धूरी में पुलिस कर्मचारियों के साथ हुई मामूली झड़प के दौरान बिट्टू ने अनजाने में कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसी को लेकर पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उन्हें नोटिस जारी किया था।
आज की सुनवाई में संगरूर के एसपी राजेश छिब्बर भी मौजूद रहे। कमिशन ने मामले की अगली सुनवाई 15 जून को रखते हुए बिट्टू को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
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क्या था पूरा मामला
26 मई को चुनाव के दौरान धूरी इलाके में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की पुलिस कर्मचारियों के साथ मामूली बहस हो गई थी। इस दौरान उनकी ओर से कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग हुआ जिन्हें आपत्तिजनक माना गया।
दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में किसी ने शिकायत नहीं की थी, बल्कि पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने खुद इसका संज्ञान लिया। समझने वाली बात है कि आयोग को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों में स्वत: कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
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बिट्टू ने पहले ही मांगी थी माफी
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने इस मामले में व्यक्तिगत तौर पर माफी मांग ली थी। उन्होंने स्वीकार किया था कि अनजाने में उनसे कुछ अनुचित शब्द निकल गए थे। लेकिन कानूनी प्रक्रिया अपनी गति से चल रही है।
कमिशन का रुख सख्त
पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। आयोग ने बिट्टू को 15 जून को खुद उपस्थित होने के सख्त निर्देश दिए हैं।
अगर गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े नेता को ऐसे आयोग के समक्ष पेश होना पड़ा हो। लेकिन एक केंद्रीय मंत्री का ऐसे मामलों में फंसना राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।
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कानूनी पहलू
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आयोग को व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। वह किसी भी ऐसे मामले में जांच कर सकता है जहां SC/ST समुदाय के खिलाफ अपमानजनक भाषा या व्यवहार का इस्तेमाल हुआ हो।
हालांकि, बिट्टू की ओर से पेश वकीलों ने आज कमिशन को समझाने की कोशिश की कि यह सब अनजाने में हुआ था और मंत्री ने पहले ही माफी भी मांग ली है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस मामले पर अभी तक किसी बड़े राजनीतिक दल ने खुलकर टिप्पणी नहीं की है। लेकिन पंजाब की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्षी दलों की नजर 15 जून की सुनवाई पर टिकी है।
समझने वाली बात यह भी है कि चुनाव के दौरान नेताओं के बयान अक्सर विवादों में फंस जाते हैं। लेकिन जब मामला SC/ST आयोग तक पहुंचता है, तो इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू आज पंजाब SC कमिशन के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए
- उनकी ओर से दो वकीलों ने कमिशन में पक्ष रखा
- 26 मई को धूरी में पुलिस कर्मचारियों के साथ बहस के दौरान आपत्तिजनक शब्दों के मामले में कार्रवाई
- आयोग ने अगली सुनवाई 15 जून को रखी और बिट्टू को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए
- बिट्टू ने पहले ही इस मामले में व्यक्तिगत तौर पर माफी मांगी थी













