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The News Air - Breaking News - IMD Weather Forecast: अगले दो हफ्तों में भारी बारिश का अलर्ट, 13 राज्यों में ऑरेंज-रेड अलर्ट जारी

IMD Weather Forecast: अगले दो हफ्तों में भारी बारिश का अलर्ट, 13 राज्यों में ऑरेंज-रेड अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने जारी किया विस्तृत पूर्वानुमान, उत्तराखंड-हिमाचल में अत्यधिक बारिश की चेतावनी, किसानों के लिए विशेष सलाह जारी

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शुक्रवार, 7 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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IMD Weather Forecast
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IMD Weather Forecast Monsoon 2026: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो हफ्तों (6 से 19 अगस्त 2026) के लिए महत्वपूर्ण मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। देश के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है, खासकर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, मध्य भारत और पश्चिमी घाट में।

देखा जाए तो यह पूर्वानुमान किसानों, यात्रियों और आम जनता सभी के लिए महत्वपूर्ण है। गुजरात के अंबिका (सूरत जिला) में 1 अगस्त को 61 सेंटीमीटर (610 मिमी) की असाधारण बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून की अब तक की सबसे भारी बारिश है।

🔍 यह भी पढ़ें- IMD Weather Alert 31 July 2026: महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना में अति भारी बारिश की चेतावनी, 21 CM से अधिक वर्षा संभव

पिछले सप्ताह का मौसम: क्या रहा हाल?

30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक के सप्ताह में देश भर में बारिश सामान्य श्रेणी में रही (लॉन्ग पीरियड एवरेज से 7% अधिक)। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस सामान्य आंकड़े के पीछे क्षेत्रीय विविधता बहुत ज्यादा है।

साप्ताहिक बारिश का विवरण:

  • दक्षिण प्रायद्वीप: अतिरिक्त श्रेणी (39% अधिक)
  • मध्य भारत: सामान्य (14% अधिक)
  • पूर्व और पूर्वोत्तर भारत: सामान्य (2% अधिक)
  • उत्तर-पश्चिम भारत: कमी श्रेणी (22% कम)

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 1 जून से 5 अगस्त 2026 तक संचयी बारिश देश भर में सामान्य से 11% कम रही है। यह चिंता का विषय है, खासकर खरीफ फसलों के लिए।

🔍 यह भी पढ़ें- IMD Weather Alert: ओडिशा में अत्यधिक भारी बारिश का Red Alert, Deep Depression पश्चिम बंगाल तट पार करेगा

क्षेत्रसाप्ताहिक बारिश (30 जुलाई-5 अगस्त)मानसून संचयी बारिश (1 जून-5 अगस्त)
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत2% अधिक (सामान्य)-27% (कमी)
उत्तर-पश्चिम भारत-22% (कमी)-12% (कमी)
मध्य भारत14% अधिक (सामान्य)2% (सामान्य)
दक्षिण प्रायद्वीप39% अधिक (अतिरिक्त)-18% (कमी)
पूरा देश7% अधिक (सामान्य)-11% (सामान्य)
पिछले हफ्ते की चरम घटनाएं: जब बारिश ने तोड़े रिकॉर्ड

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले सप्ताह कई जगहों पर असाधारण और अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई:

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असाधारण भारी बारिश (Exceptionally Heavy – 61 cm):

  • गुजरात: अंबिका (सूरत जिला) – 61 सेमी (1 अगस्त)

अत्यधिक भारी बारिश (Extremely Heavy):

  • छत्तीसगढ़: 30 जुलाई
  • मध्य महाराष्ट्र: 31 जुलाई और 1 अगस्त
  • विदर्भ, मराठवाड़ा: 31 जुलाई
  • केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक: 1-2 अगस्त
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश, तटीय कर्नाटक: 2 अगस्त
  • सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम: 3 और 5 अगस्त
  • कोंकण और गोवा: 3 अगस्त

अगर गौर करें तो ये आंकड़े दर्शाते हैं कि मानसून का व्यवहार इस साल काफी अनियमित रहा है। कहीं अत्यधिक बारिश तो कहीं सूखे जैसे हालात।

मौसम तंत्र: क्या चल रहा है आसमान में?

मौसम विभाग ने कई महत्वपूर्ण मौसम तंत्रों की जानकारी दी है:

1. Deep Depression से Low Pressure तक का सफर:
मध्य छत्तीसगढ़ और उत्तरी आंतरिक ओडिशा पर बना Deep Depression (गहरा अवदाब) पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा। यह पहले Depression (अवदाब) में कमजोर हुआ, फिर Well-Marked Low Pressure Area बना, और अंततः 3 अगस्त की सुबह तक और कमजोर हो गया।

समझने वाली बात यह है कि यही तंत्र गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में भारी बारिश का कारण बना।

2. Monsoon Trough (मानसून ट्रफ):
मानसून ट्रफ कभी अपनी सामान्य स्थिति के दक्षिण में रहा, कभी उत्तर में। वर्तमान में यह लगभग सामान्य स्थिति के पास है।

3. El Niño की मौजूदगी:
मध्यम El Niño स्थितियां वर्तमान में प्रशांत महासागर पर मौजूद हैं। समुद्र की सतह का तापमान (SST) मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में सामान्य से अधिक है।

यहां ध्यान देने वाली बात – El Niño आमतौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करता है। यही कारण है कि इस साल मानसून सामान्य से 11% कम रहा है।

4. Indian Ocean Dipole (IOD):
वर्तमान में neutral IOD स्थितियां हैं। हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय पूर्वानुमान केंद्रों का कहना है कि सितंबर 2026 में positive IOD विकसित हो सकता है, जो मानसून के लिए अच्छा संकेत होगा।

अगले दो हफ्तों का पूर्वानुमान: सप्ताह 1 (6-12 अगस्त)

मुख्य मौसम तंत्र:

  • मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति के पास रहेगा
  • उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर एक चक्रवाती परिसंचरण बनेगा जो पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा
  • सप्ताह के अंत में (12 अगस्त के आसपास) उत्तरी बंगाल की खाड़ी पर एक नया चक्रवाती परिसंचरण बन सकता है
  • महाराष्ट्र से उत्तरी केरल तट के साथ Offshore Trough विकसित होगा
  • पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा

कहां-कहां होगी भारी बारिश:

पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र:

  • हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड: पूरे सप्ताह भर में कई दिनों भारी से अत्यधिक भारी बारिश
  • जम्मू-कश्मीर: भारी बारिश की संभावना
  • पंजाब, हरियाणा: फैली हुई बारिश

मध्य भारत:

  • अगले 2 दिनों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश

पूर्वोत्तर भारत:

  • सप्ताह के पहले भाग में भारी बारिश
  • अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, सिक्किम में अत्यधिक भारी बारिश संभव

पश्चिम भारत:

  • अगले 2-3 दिनों में कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक में भारी बारिश

महत्वपूर्ण चेतावनी:
तड़ित (बिजली गिरने) और तेज हवाओं के साथ गरज के साथ बारिश की संभावना।

सप्ताह 2 (13-19 अगस्त): क्या कहता है पूर्वानुमान?

मुख्य मौसम तंत्र:

  • मानसून ट्रफ सामान्य या उत्तर की ओर होगा
  • 12 अगस्त के आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण से 14 अगस्त के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर Low Pressure Area बन सकता है (यह महत्वपूर्ण है!)
  • महाराष्ट्र और कर्नाटक तट के साथ Offshore Trough
  • Somali Jet (सोमाली जेट) मजबूत होगा

कहां-कहां होगी बारिश:

पश्चिमी हिमालय:

  • हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड: सप्ताह के कई दिनों भारी से अत्यधिक भारी बारिश
  • जम्मू-कश्मीर: भारी बारिश

पूर्व और पूर्वोत्तर भारत:

  • अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा: सप्ताह के कई दिनों भारी से अत्यधिक भारी बारिश
  • यह Low Pressure Area के प्रभाव से होगा

पश्चिमी घाट:

  • कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल: सप्ताह के कई दिनों भारी से अत्यधिक भारी बारिश
  • शेष प्रायद्वीपीय भारत में भी बारिश

समग्र पूर्वानुमान:

  • मध्य और पूर्वी भारत तथा पश्चिमी घाट: सामान्य से अधिक बारिश
  • शेष भारत: सामान्य से कम बारिश
  • सप्ताह के दूसरे भाग में देश भर में बारिश सामान्य से अधिक होगी
तापमान का पूर्वानुमान: कहां रहेगा गर्म?

सप्ताह 1 (6-12 अगस्त):

  • उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-3°C अधिक
  • शेष देश में तापमान सामान्य (-1.5 से +1.5°C)
  • कहीं भी लू (Heat Wave) की संभावना नहीं
  • रातें सामान्य रहेंगी

सप्ताह 2 (13-19 अगस्त):

  • उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान 2-4°C अधिक
  • शेष देश में सामान्य
  • कहीं भी लू की संभावना नहीं

समझने वाली बात यह है कि मानसून के बावजूद कुछ इलाकों में तापमान अधिक रह सकता है, खासकर जहां बारिश कम होगी।

किसानों के लिए विशेष सलाह: फसलों को कैसे बचाएं?

मौसम विभाग ने Agromet Advisory जारी की है जो बेहद महत्वपूर्ण है:

कोंकण (महाराष्ट्र):

  • हल्दी, मूंगफली, रोपित धान, रागी, सब्जियों और बागों में उचित जल निकासी बनाए रखें
  • जल भराव से बचने के लिए अतिरिक्त पानी निकालें

मध्य महाराष्ट्र (घाट क्षेत्र):

  • धान की नर्सरी, मक्का, कपास, अरहर, मूंगफली में अतिरिक्त पानी निकालें
  • उर्वरक और पौध संरक्षण कार्य स्थगित करें जब तक खेत की स्थिति सुधर न जाए

गुजरात:

  • धान, कपास, बाजरा, सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, सब्जियों के खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें
  • लंबी फसलों (केला, पपीता, गन्ना) को मजबूत बांस के सहारे दें

मध्य प्रदेश:

  • सोयाबीन, मक्का, उड़द, मूंग, तिल, सब्जियों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें
  • बुवाई, सिंचाई, उर्वरक के कार्य स्थगित करें

छत्तीसगढ़:

  • धान की नर्सरी और खेतों, मूंगफली, मूंग, अरहर, सब्जियों में अतिरिक्त पानी निकालें
  • पौध के डूबने से बचाएं

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड:

  • धान, मक्का, रागी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, खीरा, सेब, नाशपाती के बागों में उचित जल निकासी
  • परिपक्व फलों की तुड़ाई करें जहां संभव हो

पंजाब और हरियाणा:

  • धान, मक्का, कपास, सोयाबीन, अरहर, मूंगफली, फलों के बागों में प्रभावी जल निकासी बनाए रखें

केरल और कर्नाटक:

  • केला, नारियल, इलायची, अदरक, काली मिर्च, सब्जियों में जल निकासी बनाए रखें
  • लंबे समय तक जल भराव से बचें

पूर्वोत्तर राज्य:

  • धान, मक्का, सोयाबीन, रागी, सब्जियों, बागों में उचित जल निकासी
  • केले, सब्जियों को सहारा या डंडे दें तेज हवाओं से बचाने के लिए

गरज-बिजली के लिए:

  • कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें या तिरपाल से ढकें
  • बागवानी फसलों और युवा फलों के पौधों को यांत्रिक सहारा दें

पशुपालन/मुर्गीपालन/मत्स्यपालन:

  • भारी बारिश के दौरान पशुओं को शेड के अंदर रखें
  • संतुलित चारा दें
  • चारा और फ़ीड को सुरक्षित जगह पर स्टोर करें
  • तालाबों के चारों ओर जाली के साथ outlet बनाएं ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके और मछलियां बाहर न निकलें
आम जनता के लिए सुरक्षा सलाह

भारी बारिश के प्रभाव:

  • सड़कों पर स्थानीय बाढ़, निचले इलाकों में जल भराव
  • अंडरपास बंद हो सकते हैं (विशेषकर शहरी क्षेत्रों में)
  • भारी बारिश के कारण visibility कम होना
  • शहरों में यातायात बाधित, यात्रा समय बढ़ना
  • कच्ची सड़कों को मामूली नुकसान
  • कमजोर संरचनाओं को नुकसान की संभावना
  • स्थानीय भूस्खलन/मिट्टी का खिसकना
  • फसलों को नुकसान

क्या करें:

  • अपने मार्ग पर यातायात की स्थिति जांच लें
  • जारी किए गए Traffic Advisories का पालन करें
  • जल भराव वाले इलाकों से बचें
  • कमजोर संरचनाओं में न रहें
El Niño और IOD का प्रभाव: क्यों हो रही है अनियमित बारिश?

El Niño एक जलवायु परिघटना है जो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के बढ़ने से होती है। इसका सीधा असर भारतीय मानसून पर पड़ता है।

El Niño के प्रभाव:

  • मानसून कमजोर होता है
  • बारिश असमान वितरण
  • कुछ क्षेत्रों में सूखा

Indian Ocean Dipole (IOD):
वर्तमान में neutral है, लेकिन अगर सितंबर में positive IOD विकसित होता है तो:

  • मानसून के अंतिम चरण में बारिश बढ़ सकती है
  • El Niño के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकता है

Madden-Julian Oscillation (MJO):
वर्तमान में Phase 6 में है (amplitude >1)। यह पूरे पूर्वानुमान अवधि के दौरान Phase 6 में ही रहने की संभावना है, जो बारिश के लिए अनुकूल है।

राज्यवार बारिश का हाल (30 जुलाई – 5 अगस्त)

कुछ राज्यों में बारिश का प्रदर्शन:

  • केरल: सामान्य से अधिक (अत्यधिक भारी बारिश)
  • तमिलनाडु, कर्नाटक: सामान्य से अधिक
  • गुजरात: असाधारण बारिश (अंबिका में 61 cm)
  • महाराष्ट्र: अत्यधिक भारी बारिश
  • उत्तर प्रदेश (पूर्वी): अत्यधिक भारी बारिश
  • पश्चिम बंगाल, सिक्किम: अत्यधिक भारी बारिश
  • पंजाब, हरियाणा: सामान्य से कम

मुख्य बातें (Key Points)

  • IMD ने 6 से 19 अगस्त 2026 के लिए विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया
  • गुजरात के अंबिका में 61 cm की असाधारण बारिश दर्ज – इस मानसून की सबसे भारी
  • 1 जून से 5 अगस्त तक देश भर में बारिश सामान्य से 11% कम
  • 14 अगस्त के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर Low Pressure Area बनने की संभावना
  • हिमाचल, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट
  • मध्यम El Niño स्थितियां मौजूद – मानसून कमजोर होने का कारण
  • 13 राज्यों में किसानों के लिए विशेष कृषि सलाह जारी

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: इस साल मानसून सामान्य से कम क्यों है?

मध्यम El Niño स्थितियां प्रशांत महासागर पर मौजूद हैं जो आमतौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करती हैं। इसी कारण 1 जून से अब तक बारिश सामान्य से 11% कम रही है।

प्रश्न 2: अगले दो हफ्तों में किन राज्यों में सबसे ज्यादा बारिश होगी?

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है।

प्रश्न 3: किसानों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

खेतों में उचित जल निकासी बनाए रखें, अतिरिक्त पानी निकालें, लंबी फसलों को सहारा दें, उर्वरक और पौध संरक्षण कार्य बारिश के दौरान स्थगित करें, और परिपक्व फसलों की तुड़ाई कर लें।

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अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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