LIVE | ...
मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - NEWS-TICKER - Raghav Chadha Defamation Case: कोर्ट से झटका, सिर्फ 5 पोस्ट हटाने का आदेश

Raghav Chadha Defamation Case: कोर्ट से झटका, सिर्फ 5 पोस्ट हटाने का आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने राघव चड्ढा की व्यापक राहत की मांग खारिज की, कहा राजनीतिक आलोचना व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
बुधवार, 1 जुलाई 2026
in NEWS-TICKER, सियासत
A A
0
Raghav Chadha Quits AAP
104
SHARES
693
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Raghav Chadha Defamation Case : बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को बड़ा झटका देते हुए उनकी कथित मानहानीकारक ऑनलाइन सामग्री हटाने की व्यापक मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने केवल पांच विशिष्ट पोस्ट हटाने के आदेश दिए हैं, जबकि बाकी सामग्री को राजनीतिक आलोचना मानते हुए किसी भी अंतरिम रोक से इनकार कर दिया।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि बाकी सामग्री मानहानीकारक नहीं लगती। देखा जाए तो यह फैसला सोशल मीडिया युग में राजनीतिक आलोचना की सीमाओं और सार्वजनिक हस्तियों की संवेदनशीलता को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है।

🔍 यह भी पढ़ें- Raghav Chadha Joins BJP: राघव चड्ढा समेत 7 सांसद BJP में, मजीठिया बोले- अभी तो ट्रेलर है

क्या था पूरा मामला

यह मुकदमा इस साल आम आदमी पार्टी (आप) से भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा द्वारा दायर किया गया था। चड्ढा ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर एआई-जनरेटेड डीपफेक, हेराफेरी वाले वीडियो, सिंथेटिक वॉइस क्लोनिंग, मॉर्फ्ड तस्वीरें, बनावटी भाषण और अन्य गुमराहकुन डिजिटल सामग्री फैलाई जा रही है।

दिलचस्प बात यह है कि चड्ढा ने कई पोस्ट्स का विशेष उल्लेख किया जिनमें उन्हें साड़ी पहने हुए मॉर्फ्ड इमेज और एक अन्य जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन पर पैसे लुटा रहे हैं। इन पोस्ट्स के जरिए गलत तरीके से यह सुझाव दिया गया कि उन्होंने भाजपा में शामिल होने के लिए पैसे लिए हैं।

🔍 यह भी पढ़ें- Two-Thirds Rule Raghav Chadha: क्यों नहीं लगेगा दलबदल कानून, समझें गणित और कानूनी पहलू

कोर्ट ने क्यों खारिज की व्यापक राहत की मांग

21 मई को अंतरिम रोक की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुरुआती नजरिए से देखा कि विवादित सामग्री में व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन शामिल नहीं है। बल्कि यह ज्यादातर राजनीतिक आलोचना है।

जस्टिस प्रसाद ने नोट किया कि राजनीतिक फैसलों की आलोचना लंबे समय से लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा रही है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि अदालत ने आर.के. लक्ष्मण के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्टूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यंग्य और आलोचना हमेशा से राजनीति का हिस्सा रहे हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि हालांकि सोशल मीडिया ने ऐसी आलोचना की पहुंच को बढ़ा दिया है, पर यह अपने आप व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

🔍 यह भी पढ़ें- क्या बिखर रही है Kejriwal की टीम? Raghav Chadha क्यों गए BJP में? पढ़ें इनसाइड स्टोरी?

राजनेताओं को कितनी आलोचना बर्दाश्त करनी चाहिए

समझने वाली बात यह है कि कोर्ट ने मानहानी के दावे और व्यक्तित्व के अधिकारों की सुरक्षा के लिए दायर मुकदमे में फर्क किया। अदालत ने संकेत दिया कि चड्ढा द्वारा उठाए गए मुद्दे मानहानी के क्षेत्र में ज्यादा आते जापते हैं।

इस सवाल पर कि राजनीतिक आगूओं को सार्वजनिक आलोचना को कितना बर्दाश्त करना चाहिए, जस्टिस प्रसाद ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि विवादित सामग्री किसी राजनीतिक फैसले पर टिप्पणी जापती है। उन्होंने कहा: “एक राजनीतिक आगू के रूप में, क्या आप इतने संवेदनशील हो सकते हैं?”

यह टिप्पणी भारतीय राजनीति में एक बड़ी बहस को जन्म देती है।

पांच पोस्ट हटाने का आदेश

अगर गौर करें तो कोर्ट ने पूरी तरह से राहत देने से तो इनकार कर दिया, लेकिन चड्ढा द्वारा पहचानी गई पांच विशेष पोस्टों को हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा: “मैं पांच दस्तावेजों को हटाने का हुक्म दिया है। बाकी सामग्री मानहानीकारक नहीं है।”

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन सी पांच पोस्ट हैं जो हटाई जानी हैं।

यह भी पढे़ं 👇

Top 5 News Today

Top 5 News Today: हूतियों की Saudi को धमकी से लेकर UPI Charges तक, जानें आज की बड़ी खबरें

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
Jio ₹999 Plan

Jio ₹999 Plan: 98 दिन वैलिडिटी, 2GB Daily Data और ₹35,000 के Free Benefits!

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
Gold Price Prediction 2027

Gold Price Prediction 2027: क्या ₹3 लाख पार जाएगा सोना? जानें भारत में कितना महंगा होगा

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
political parties using AI

Rajya Sabha Elections : 11 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान, हरदीप सिंह पुरी की सीट पर सस्पेंस

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
अमिकस क्यूरी नियुक्ति पर विचार

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि वह एक अमिकस क्यूरी (न्यायालय का मित्र) नियुक्त करने पर विचार कर सकती है क्योंकि ऑनलाइन सामग्री के कथित सृजनकर्ताओं की पहचान नहीं हुई थी।

हालांकि, चड्ढा के वकील ने बेनती की कि कोर्ट पहले अंतरिम राहत की पेटिशन पर फैसला करे। विस्तृत दलीलें सुनने के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने पांच विशेष पोस्टों को हटाने का निर्देश दिया जबकि बाकी सामग्री के खिलाफ कोई व्यापक अंतरिम हुक्म जारी करने से इनकार कर दिया।

जांच में रह गई खामियों का सवाल

चड्ढा के वकील ने जांच की खामियां गिनाते हुए कहा था कि जांच अधिकारी ने मुल्जिम और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत रिकॉर्ड नहीं की और न ही कोई आजाद गवाह शामिल किया।

लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एक बार जब अदालत द्वारा अपराध का नोटिस (कॉग्नीजेंस) ले लिया जाता है, तो सिर्फ जांच की किसी कथित खामी के आधार पर दुबारा जांच के हुक्म नहीं दिए जा सकते।

सोशल मीडिया युग में राजनीतिक आलोचना

यह मामला डिजिटल युग में राजनीतिक आलोचना की सीमाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। पारंपरिक कार्टून और व्यंग्य की तरह, क्या AI-जनरेटेड कंटेंट और मॉर्फ्ड इमेज भी राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आते हैं?

कोर्ट का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है। देखने वाली बात यह होगी कि सरकारी कंपनियां और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह की सामग्री को कैसे नियंत्रित करते हैं।


मुख्य बातें (Key Points):

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने राघव चड्ढा की व्यापक अंतरिम राहत की मांग खारिज की
  • केवल पांच विशिष्ट पोस्ट हटाने के आदेश दिए गए
  • अदालत ने कहा राजनीतिक आलोचना व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं
  • राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक आलोचना बर्दाश्त करनी चाहिए: कोर्ट
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: राघव चड्ढा का मानहानी मामला क्या है?

राघव चड्ढा ने AAP से BJP में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर फैली AI-जनरेटेड डीपफेक, मॉर्फ्ड इमेज और गुमराहकुन डिजिटल सामग्री के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया था।

प्रश्न 2: कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यापक अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और केवल पांच विशिष्ट पोस्ट हटाने के आदेश दिए। बाकी सामग्री को राजनीतिक आलोचना माना गया।

प्रश्न 3: कोर्ट ने राजनीतिक आलोचना पर क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक फैसलों की आलोचना लंबे समय से लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा है और सोशल मीडिया पर इसकी पहुंच बढ़ने से यह व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं बन जाती।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

1 जुलाई का इतिहास: Battle of Gettysburg से लेकर Canada Day तक, जानें आज के दिन की वो घटनाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया

Next Post

Powercom Contract Decision: 3500 आउटसोर्स कामगारों को बड़ी राहत, हड़ताल खत्म

Ajay Kumar

Ajay Kumar

पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

Related Posts

Top 5 News Today

Top 5 News Today: हूतियों की Saudi को धमकी से लेकर UPI Charges तक, जानें आज की बड़ी खबरें

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
Jio ₹999 Plan

Jio ₹999 Plan: 98 दिन वैलिडिटी, 2GB Daily Data और ₹35,000 के Free Benefits!

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
Gold Price Prediction 2027

Gold Price Prediction 2027: क्या ₹3 लाख पार जाएगा सोना? जानें भारत में कितना महंगा होगा

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
political parties using AI

Rajya Sabha Elections : 11 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान, हरदीप सिंह पुरी की सीट पर सस्पेंस

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
New E-commerce Rules India 2027

New E-commerce Rules India 2027: ऑनलाइन शॉपिंग का नया दौर, जानें क्या बदलेगा!

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
IMD Alert

IMD Alert: Odisha-Chhattisgarh में 24 सितंबर को Extremely Heavy Rainfall, Depression बनने की आशंका

मंगलवार, 22 सितम्बर 2026
Next Post
Workers

Powercom Contract Decision: 3500 आउटसोर्स कामगारों को बड़ी राहत, हड़ताल खत्म

Petrol Price Cut

Petrol Price Cut: पेट्रोल 5 रुपए सस्ता, 2 साल बाद पहली कटौती

Sunder Sham Arora

Punjab Vigilance Bureau: सुंदर शाम अरोड़ा को बड़ा झटका, नई जांच खारिज

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।