Raghav Chadha BJP: पश्चिम बंगाल में वोटिंग का शोर मचा हुआ था। टीवी स्टूडियो में परसेंटेज का हिसाब-किताब चल रहा था। लेकिन असली गेम तो दिल्ली में खेला जा रहा था। जहां आम आदमी पार्टी को ऐसा झटका लगा जिसकी गूंज पंजाब से लेकर संसद तक सुनाई दी।
24 अप्रैल 2026 – यह तारीख AAP के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गई। AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद अचानक BJP के पाले में चले गए। ना लंबा ड्रामा, ना खुली बगावत। सीधा गेम ओवर टाइप मूव हो गया।
देखा जाए तो यह केवल राजनीतिक दलबदल नहीं था। यह एक सुनियोजित रणनीति थी जिसके पीछे की इनसाइड स्टोरी अभी सामने आ रही है। India Today की रिपोर्टर Sonal Mehrotra ने इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की है।
अब सवाल वहीं कि यह बदलाव हुआ कैसे? किसने स्क्रिप्ट लिखी? किसने प्ले किया? और AAP से कहां चूक हो गई?
चलिए पांच प्वाइंट्स में समझते हैं कि इस राजनीतिक भूचाल के पीछे असल वजह क्या है।
पहली वजह: अरविंद केजरीवाल का देर से फोन करना
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राघव चड्ढा को राज्यसभा के डिप्टी लीडर के पोस्ट से हटाया गया था। उसके बाद केजरीवाल को केवल शक था कि उनकी पार्टी के कुछ नेता BJP जॉइन कर सकते हैं।
लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि AAP के सीनियर लीडर्स और केजरीवाल में अपने सांसदों को बचाए रखने के लिए वह तेजी देखने को नहीं मिली जो 22 अप्रैल की सुगबुगाहट के बाद देखने को मिली।
22 अप्रैल को राजनीति के गलियारों में खबरें तैरने लगीं कि AAP के कुछ सांसद BJP में जा सकते हैं। तब अरविंद केजरीवाल ने अपने सारे MPs को फोन घुमाना शुरू किया था।
किसी ने फोन उठाया, किसी ने फोन नहीं उठाया। किसी ने कुछ सही बोला तो किसी ने कुछ गलत। लेकिन शायद केजरीवाल को फोन करने में देरी हो गई थी।
24 अप्रैल तक AAP के 7 MPs जा चुके थे। मतलब उन्होंने BJP जॉइन कर ली थी। यह दर्शाता है कि संकट प्रबंधन में AAP कितनी पीछे रह गई।
दूसरी वजह: होम मिनिस्ट्री का कैलेंडर में बदलाव
अगर गौर करें तो timing इस पूरे ऑपरेशन में सबसे महत्वपूर्ण थी। ऐसा माना जा रहा था कि होम मिनिस्टर अमित शाह बंगाल चुनाव में बिजी थे। 27 अप्रैल को उन्हें दिल्ली वापस लौटना था। तभी उनसे पर्सनली मुलाकात कर यह अनाउंसमेंट होना था।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उनके लौटने से पहले ही यह अनाउंसमेंट हो चुका था। क्योंकि BJP को इस बात का अंदेशा था कि कहीं अरविंद केजरीवाल अपने MPs से बात करके उनका मन ना बदल दे।
इसलिए कैलेंडर में बदलाव किया गया। 24 अप्रैल को ही घोषणा हो गई कि AAP के 7 सांसद भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं।
यह रणनीतिक चाल थी जो बताती है कि BJP ने पूरी तैयारी के साथ यह कदम उठाया था। Plan B, Plan C सब तैयार था।
तीसरी वजह: राघव चड्ढा – द आर्किटेक्ट
इस पूरे मर्जर की अगुवाई करने वाले थे राघव चड्ढा – यानी कि The Architect।
समझने वाली बात यह है कि AAP के बड़े नेताओं पर Excise Case का खतरा मंडरा रहा था। राघव चड्ढा केजरीवाल के राजदार Financial Advisor माने जाते थे। ऐसे में इन सारी समस्याओं से अछूता रहना राघव के लिए मुश्किल था।
फैमिली और Bollywood Connection से यह बात राघव तक पहुंचाई गई कि आप लंदन जाइए। अपना प्रोफाइल लो रखिए। यह डस्ट सेटल यानी केस सेटल होने के बाद ही दिल्ली आइए।
वैसा ही कुछ हुआ। अपनी आंख की सर्जरी कराने के लिए राघव लंदन पहुंचे। हालांकि सर्जरी वास्तव में हुई थी, लेकिन लंदन में उनका Extended Stay राजनीतिक सवालों के घेरे में आया।
लंदन से लौटे तो अंदाज बदला हुआ था
जब राघव लंदन से वापस दिल्ली आए तो अंदाज कुछ बदला हुआ था। अब राघव BJP सरकार को, उसके Tax Policies को घेरते हुए नजर नहीं आ रहे थे।
उनकी टोन में आक्रामकता की बजाय न्यूट्रलिटी नजर आने लगी थी। AAP ने नोटिस किया कि राघव कॉम्प्रोमाइज्ड हैं।
राघव को राज्यसभा के डिप्टी लीडर के पोस्ट से हटाया गया। और इसी दौरान राघव ने मर्जर की स्टोरी बुनी और अपने साथ छह और सांसदों को BJP ले गए।
यह एक मास्टरस्ट्रोक था जिसे बहुत सोच-समझकर खेला गया।
चौथी वजह: AAP का ‘Et Tu Brute’ मोमेंट – संदीप पाठक का धोखा
आपने रोम के डिक्टेटर Julius Caesar की कहानी पढ़ी होगी। जब Julius पर उसके सभी अधिकारी हमला करते हैं तो Julius को बिल्कुल भी हैरानी नहीं होती।
Julius तब हैरान होता है जब उसे पीठ में चाकू उसका सबसे करीबी दोस्त Brutus मारता है। तभी Julius के मुंह से आवाज आती है – “Et Tu Brute” मतलब “इवन यू ब्रूटस”।
वैसा ही कुछ केजरीवाल और संदीप पाठक के बीच हुआ। केजरीवाल को आखिरी दिन तक यह यकीन था कि संदीप तो उनका साथ नहीं छोड़ेंगे।
संदीप पाठक कौन थे?
संदीप पाठक वही व्यक्ति हैं जिन्होंने पंजाब में AAP की जीत सुनिश्चित करवाई थी। जिला अध्यक्ष से लेकर पार्टी के उच्च कार्यकर्ताओं तक संदीप पाठक की पहुंच थी।
वे AAP के पंजाब यूनिट के मुख्य रणनीतिकार थे। भगवंत मान की सरकार बनाने में उनकी अहम भूमिका थी।
लेकिन चिंता का विषय यह है कि जब 24 अप्रैल को राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखे, तो केजरीवाल का Et Tu Brute मोमेंट हो गया।
यह सबसे बड़ा झटका था। केजरीवाल के करीबी सूत्रों के अनुसार, वे राघव से धोखा खाने के लिए तैयार थे, लेकिन संदीप पाठक का नाम सुनकर वे सन्न रह गए।
पांचवी वजह: AAP में इंडस्ट्रियलिस्ट MPs – BJP की B Team?
यहां सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला खुलासा है। AAP ने राज्यसभा का टिकट कुछ ऐसे लोगों को दिया था जो शुरू से ही संदिग्ध थे:
1. राजेंद्र गुप्ता – Founder of Trident Group
2. विक्रमजीत साहनी – Businessman
3. पद्मश्री अवॉर्डी अशोक मित्तल – Chancellor of Lovely Professional University
इन तीनों MPs का पैटर्न बहुत ही आइडेंटिकल था:
- इन्होंने संसद में पंजाब की वकालत की
- मीडिया में आकर न्यूट्रल बाइट्स दिए
- फोटोग्राफ्स के लिए AAP की टोपी पहनी
- लेकिन जब भी संसद में निर्णायक फैसलों की बारी आती थी, इनकी कुर्सियां हमेशा खाली नजर आईं
- बाद में पार्टी व्हिप को एक्सक्यूज दे दिया जाता था
ED का एंगल – अशोक मित्तल के घर रेड
इसमें अब एक ED का एंगल भी जुड़ गया है। अशोक मित्तल जिन्होंने:
- केजरीवाल को जेल से लौटने के बाद अपना बंगला दिया था
- राज्यसभा में राघव को डिप्टी लीडर के तौर पर रिप्लेस किया था
15 अप्रैल को उनके घर पर ED की रेड पड़ी। यानी कि मर्जर के ठीक 9 दिन पहले। जिसके बाद उनके पास विकल्प ही क्या बचता था?
इनसाइड स्टोरी यह बताती है कि ये सारे बिजनेसमैन Already BJP की B Team थे। बस राघव चड्ढा ने उन्हें मनाकर अब ऑफिशियली BJP का मेंबर बना दिया है।
BJP को क्या फायदा मिलेगा?
अब सवाल यह है कि इन सब से BJP को क्या फायदा मिलेगा?
पॉलिटिकली देखें तो:
राघव चड्ढा और संदीप पाठक को छोड़कर बाकी MPs की ग्राउंड पर उतनी पकड़ नहीं है। शायद पंजाब के इलेक्शन पर BJP को सीधे तौर पर फायदा ना मिले।
लेकिन उसने AAP को जरूर कमजोर कर दिया है। यह दर्शाता है कि AAP के भीतर की एकता खोखली थी।
राज्यसभा में BJP और मजबूत
इन सबके अलावा अब BJP राज्यसभा में और मजबूत हो गई है। यानी कि 106 मेंबर से अब 113 मेंबर हो गए हैं।
मतलब किसी भी बिल को पास कराना हो तो BJP के पास पर्याप्त संख्या बल है। यह बहुत बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है।
राज्यसभा में बहुमत के करीब:
- कुल सीटें: 245
- बहुमत के लिए जरूरी: 123
- BJP + सहयोगी: 113
- AAP का योगदान: 7 सीटें
हालांकि अभी भी बहुमत से दूर हैं, लेकिन विपक्ष को कमजोर करने में कामयाब रहे हैं।
AAP के लिए क्या मायने रखता है यह झटका?
1. पंजाब में राजनीतिक संकट:
संदीप पाठक का जाना पंजाब में AAP के लिए बड़ा झटका है। भगवंत मान सरकार के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं।
2. राज्यसभा में आवाज कमजोर:
10 में से 7 सांसद चले गए। अब केवल 3 राज्यसभा सांसद बचे हैं। संसद में AAP की आवाज बेहद कमजोर हो गई है।
3. केजरीवाल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल:
यह दर्शाता है कि केजरीवाल अपनी टीम को साथ रखने में विफल रहे। लीडरशिप पर सवालिया निशान लग गया है।
4. 2027 के चुनावों पर असर:
दिल्ली और पंजाब दोनों जगह AAP की साख पर असर पड़ेगा। विपक्ष इसे मुद्दा बनाएगा कि AAP के अपने लोग ही छोड़ रहे हैं।
किसने छोड़ा, कौन बचा?
BJP में शामिल हुए 7 सांसद:
- राघव चड्ढा – पूर्व राज्यसभा डिप्टी लीडर, वकील, Parineeti Chopra के पति
- संदीप पाठक – पंजाब के मुख्य रणनीतिकार
- राजेंद्र गुप्ता – Trident Group के संस्थापक
- विक्रमजीत साहनी – बिजनेसमैन
- अशोक मित्तल – LPU के चांसलर
- (दो और नाम जिनका ट्रांसक्रिप्ट में उल्लेख नहीं)
AAP में बचे 3 सांसद:
(इनके नाम ट्रांसक्रिप्ट में स्पष्ट नहीं हैं)
विपक्ष की प्रतिक्रिया
Congress और अन्य विपक्षी दलों ने इसे AAP की राजनीतिक मौत करार दिया है। उनका कहना है कि:
“जब आपके अपने लोग ही विश्वास नहीं करते, तो जनता क्यों करेगी?”
हालांकि AAP ने इसे BJP का दबाव और खरीद-फरोख्त बताया है।
आगे क्या होगा?
अब इस पूरे मामले की गणित BJP के लिए असल में कितनी फायदेमंद होती है, यह तो वक्त बताएगा।
लेकिन इतना तय है:
AAP के लिए:
- टीम में दरार दिखी
- लीडरशिप पर सवाल
- पंजाब में संकट
- 2027 की तैयारी प्रभावित
BJP के लिए:
- राज्यसभा में मजबूती
- AAP को कमजोर करना
- पंजाब में पैठ बनाने का मौका
- 2027 के चुनावों में बढ़त
क्या यह सिर्फ शुरुआत है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है। AAP के और भी विधायकों और नेताओं के जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
खासतौर पर पंजाब में, जहां भगवंत मान सरकार पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद 24 अप्रैल 2026 को BJP में शामिल हुए
- राघव चड्ढा इस पूरे ऑपरेशन के मुख्य आर्किटेक्ट थे
- केजरीवाल का देर से फोन करना पहली बड़ी चूक थी – 22 अप्रैल को सुगबुगाहट, 24 को घोषणा
- होम मिनिस्टर अमित शाह के 27 अप्रैल को लौटने से पहले ही 24 अप्रैल को कैलेंडर बदलकर घोषणा कर दी गई
- राघव चड्ढा को राज्यसभा डिप्टी लीडर पद से हटाया गया था
- लंदन में आंख की सर्जरी के बाद राघव की टोन में न्यूट्रलिटी आई
- संदीप पाठक का साथ छोड़ना केजरीवाल के लिए ‘Et Tu Brute’ मोमेंट था
- राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी, अशोक मित्तल जैसे इंडस्ट्रियलिस्ट MPs Already BJP की B Team थे
- 15 अप्रैल को अशोक मित्तल के घर ED की रेड – मर्जर के 9 दिन पहले
- BJP राज्यसभा में 106 से 113 सीटों पर पहुंची
- AAP के पास अब केवल 3 राज्यसभा सांसद बचे
- पंजाब में AAP के लिए राजनीतिक संकट गहराया
- 2027 के चुनावों पर बड़ा असर पड़ सकता है











