Punjab Welfare Board: पंजाब सरकार द्वारा सूबे में चेयरमैन की फौज खड़ी की जाएगी। सूबे भर में करीब तीन हजार नए चेयरमैन बनाए जाएंगे। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सूबा सरकार ने पहले स्टेट स्तरीय 21 भलाई बोर्डों का गठन किया और अब हर जिले और हर विधानसभा क्षेत्र में भलाई बोर्ड बनेंगे।
देखा जाए तो दिलचस्प बात यह है कि इन चेयरमैनों को न तनख्वाह मिलेगी और न ही कोई भत्ता। न कोई दफ्तर मिलेगा और इतना तक कि उनका कार्यकाल भी पक्का नहीं होगा।
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हर विधानसभा क्षेत्र में 21 बोर्ड बनेंगे
पंजाब के हर विधानसभा क्षेत्र में 21 भलाई बोर्ड बनेंगे। हर बोर्ड का एक चेयरमैन, एक सीनियर वाइस चेयरमैन, एक वाइस चेयरमैन और 10 मेंबर होंगे। एक बोर्ड 13 सदस्यीय (अधिकारी सहित) होगा।
अगर गौर करें तो इस हिसाब से सूबे के 117 विधानसभा क्षेत्रों के एक-एक बोर्ड के कुल मेंबर सहित चेयरमैन आदि 1521 हो जाएंगे। इसी तरह हर जिले में 21 बोर्डों का गठन होगा और इन जिला स्तरीय बोर्डों के कुल मेंबर (चेयरमैन आदि सहित) समूचे पंजाब में 299 हो जाएंगे।
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कुल कितने चेयरमैन बनेंगे?
हर जिले और हर असेंबली क्षेत्र में 21 बोर्डों के गठन होने पर कुल मेंबर (चेयरमैन सहित) 38,220 हो जाएंगे, जिनमें चेयरमैनों की संख्या 2940 होगी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जेकर चेयरमैनों के अलावा सीनियर वाइस चेयरमैन और सीनियर चेयरमैनों का आंकड़ा भी इकट्ठा कर लिया जाए तो यह प्रमुख अधिकारी 8820 हो जाएंगे।
सरकार करेगी नियुक्ति, मर्जी से हटा सकती है
पंजाब सरकार द्वारा इन बोर्डों के अधिकारी और मेंबर नामजद किए जाएंगे। यह पद स्वेच्छा से होंगे और अधिकारी सरकार की मर्जी तक पद पर रह सकेंगे।
समझने वाली बात यह है कि पंजाब सरकार इन अधिकारियों को बिना कोई नोटिस दिए कभी मर्जी हटा सकेगी। सूबा सरकार का कहना है कि यह भलाई बोर्ड अपने-अपने समुदाय की भलाई के प्रस्ताव सरकार को देंगे और भलाई स्कीमों के असर के बारे में भी फीडबैक सरकार को देंगे।
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किन समुदायों के बोर्ड बन रहे हैं?
जिन वर्गों और समुदायों की भलाई के लिए बोर्ड बनाए जा रहे हैं, उनमें रायसिख, राजपूत, बैरागी, ब्राह्मण, विमुक्त जाति, प्रजापत समाज, सैणी समुदाय, रामगढ़िया बिरादरी, स्वर्णकार, मसीह, मुस्लिम विकास बोर्ड, सूफी संत समाज, कन्नौजिया, अग्रवाल समुदाय, कंबोज समुदाय, खत्री अरोड़ा, बाजीगर टप्परीवास और गुज्जर आदि शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह है कि पंजाब सरकार ने इससे पहले सूबा स्तरीय 21 भलाई बोर्ड बनाए थे, जिनके अधिकारियों और मेंबरों का आंकड़ा भी 273 बनता है। जिला स्तर पर इन बोर्डों के अधिकारियों और मेंबरों की नियुक्ति डिप्टी कमिश्नरों द्वारा की जाएगी।
न सैलरी, न भत्ता, न दफ्तर
पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन भलाई बोर्डों के अधिकारियों को सरकारी खजाने से कोई तनख्वाह या भत्ता नहीं मिलेगा। इन बोर्डों का कोई दफ्तर भी नहीं होगा और न ही अलग कोई स्टाफ मिलेगा।
अगर गौर करें तो इससे साफ है कि प्रमुख हस्तियों को सिर्फ चेयरमैनी की फीता ही मिलेगी। यानी एक मान-सम्मान और पद, लेकिन कोई वित्तीय लाभ नहीं।
चुनावी रणनीति का हिस्सा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में पदों का सृजन एक राजनीतिक रणनीति हो सकती है। करीब 38,000 लोगों को विभिन्न बोर्डों से जोड़कर सरकार अपना सामाजिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हालांकि इन पदों पर कोई वित्तीय लाभ नहीं है, लेकिन सामाजिक मान-सम्मान और पहचान का लाभ जरूर मिलेगा।
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मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब में करीब 3000 नए चेयरमैन बनेंगे
- हर विधानसभा क्षेत्र में 21 भलाई बोर्ड बनेंगे
- कुल 38,220 लोग विभिन्न बोर्डों से जुड़ेंगे
- न सैलरी, न भत्ता, न दफ्तर, सिर्फ चेयरमैन की फीता मिलेगी
- सरकार बिना नोटिस किसी को भी हटा सकती है













