Punjab Congress Infighting: पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी धड़ेबंदी और सियासी खींचतान के बीच 15 कांग्रेसी विधायकों ने हाईकमांड से मुलाकात के लिए समय मांगा है। यह मांग ऐसे समय में आई है जब ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान के दौरान पार्टी में खुली कलह देखने को मिली। और बस यहीं से शुरू हुई पंजाब कांग्रेस की असली समस्याओं की कहानी।
दिलचस्प बात यह है कि विधायकों ने जो शिकायतें लिखित रूप में भेजी हैं, उनमें राजा वड़िंग, भूपेश बघेल और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच चल रहे झगड़े का खुलासा है। समझने वाली बात यह है कि यह सब 2027 की विधानसभा चुनाव से पहले हो रहा है, जब पार्टी को एकजुट होना चाहिए था।
हर बूथ कांग्रेस मजबूत: मजबूती की जगह कमजोरी सामने आई
31 जुलाई से 8 अगस्त तक चलाए गए ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान में जो कुछ हुआ, वह पार्टी के लिए शर्मनाक था। नारेबाजी, हूटिंग, ‘गो बैक’ के नारे और राजा वड़िंग का जमकर विरोध – यह सब भूपेश बघेल की मौजूदगी में हुआ।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जिस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्टी को मजबूत करना था, वही कार्यक्रम धड़ेबंदी का मंच बन गया।
अभियान के दौरान हुई घटनाएं:
- राजा वड़िंग के खिलाफ नारेबाजी
- चन्नी समर्थकों का हंगामा
- मंच पर खुली बहस
- एक-दूसरे पर बिना नाम लिए आरोप
- पोस्टर वार
- अपने ही कार्यकर्ताओं को RSS एजेंट कहना
संगरूर घटना: राजा वड़िंग का एक्सपोज़
संगरूर में एक दिलचस्प घटना हुई। एक युवक ने राजा वड़िंग का विरोध किया, और अगले ही पल उसी युवक को मंच से ‘राजा वड़िंग जिंदाबाद’ के नारे लगवा दिए गए। यानी कि राजा वड़िंग खुद ही इस केस में एक्सपोज़ हो गए।
अगर गौर करें तो, यह साफ दिखता है कि नारेबाजी कुदरती नहीं थी, बल्कि किसी धड़े द्वारा करवाई जा रही थी। और कई वीडियो क्लिप्स हाईकमांड तक पहुंच गई हैं कि कैसे और किसके कहने पर नारेबाजी हो रही थी।
15 MLA ने क्यों मांगा समय? क्या है शिकायत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मानसून सत्र के बाद लगभग 15 कांग्रेसी विधायक दिल्ली जाकर पार्टी की टॉप लीडरशिप से मुलाकात करेंगे। उन्होंने समय मांग लिया है और मोस्ट प्रॉबबली समय मिल भी जाएगा।
MLA की शिकायतें:
- धड़ेबंदी से नुकसान: पार्टी नेताओं के बीच लड़ाई का सबसे ज्यादा असर सिटिंग MLA पर पड़ रहा है क्योंकि उन्हें हलकों में जाना है, लोगों का सामना करना है।
- वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी: जो नेता लोगों को मोबलाइज करते हैं, जिनका रसूख है, वे घर बैठ गए हैं। वे कहते हैं – इस कीचड़ में हम नहीं उतरेंगे।
- बिना काम के बयानबाजी: मंच पर बयानबाजी हो रही है लेकिन जमीनी काम नहीं हो रहा।
- 2027 चुनाव की चिंता: चुनाव नजदीक है और पार्टी में अराजकता है।
- हाईकमांड की उदासीनता: दिल्ली से आए नेता भी स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पा रहे।
तीन धड़े, तीन नेता: भूपेश बघेल, राजा वड़िंग, चन्नी
पंजाब कांग्रेस में फिलहाल तीन मुख्य धड़े हैं:
1. भूपेश बघेल धड़ा:
- हाईकमांड द्वारा मालवा को मजबूत करने भेजे गए
- लेकिन उनकी मौजूदगी में ही हंगामा हुआ
- भूपेश का रोल सवालों के घेरे में
2. राजा वड़िंग धड़ा:
- युवा नेता, परिवारिक पृष्ठभूमि नहीं
- नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे हैं
- लेकिन विरोध भी झेल रहे हैं
- सोमवार को KC वेणुगोपाल से मुलाकात
3. चरणजीत सिंह चन्नी धड़ा:
- पूर्व मुख्यमंत्री
- मजबूत जनाधार
- पिछले हफ्ते हाईकमांड को तलब किया गया था
हाईकमांड की कई सर्वे टीमें, अलग-अलग रिपोर्ट्स
पंजाब कांग्रेस की स्थिति जानने के लिए हाईकमांड ने कई टीमें भेजी हैं:
1. AICC सर्वे टीम:
- आधिकारिक सर्वे
- बूथ लेवल फीडबैक
2. भूपेश बघेल की रिपोर्ट:
- मालवा क्षेत्र पर फोकस
- हर बूथ कांग्रेस मजबूत अभियान की रिपोर्ट
3. सुनील कणुगोलू की टीम:
- अलग लेवल पर सर्वे
- लगातार रिपोर्ट भेज रहे हैं
4. AICC ऑफिस की टीमें:
- अलग-अलग टीमें अलग-अलग फीडबैक दे रही हैं
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इतनी सर्वे टीमों के होने के बावजूद स्थिति नियंत्रण में नहीं है। इसका मतलब है कि समस्या गहरी है।
MLA का बड़ा सवाल: हमें लोग क्यों फेस करें?
कुछ MLA ने अपने नोट्स में लिखा है:
“जो लीडर नारेबाजी कर रहे हैं या करवा रहे हैं, वे तो मीटिंगों तक सीमित हैं। पर हमें लोगों को फेस करना पड़ रहा है। हमारे हलकों में नुकसान हो रहा है। कौन से वर्कर टूट रहे हैं, कौन से वर्कर नजदीक नहीं आ रहे हैं। जो मोबलाइजेशन होनी चाहिए थी, वह नहीं हो रही।”
समझने वाली बात यह है कि MLA सीधे तौर पर कह रहे हैं कि नेताओं की बयानबाजी से उनकी सीटें खतरे में हैं।
16-17 अगस्त को संभावित मुलाकात
जानकारी के मुताबिक, पार्लियामेंट सेशन 13 तारीख को खत्म होगा। उसके बाद 15 अगस्त के बाद, यानी 16-17 अगस्त के आसपास MLA की हाईकमांड से मुलाकात हो सकती है।
मुलाकात में क्या होगा:
- पंजाब की स्थिति से अवगत कराना
- धड़ेबंदी की शिकायत
- 2027 चुनाव की रणनीति पर चर्चा
- नेतृत्व में बदलाव की मांग (संभावना)
- एकजुटता की अपील
अगस्त का आखिरी हफ्ता: बड़ा फैसला संभव?
सभी सर्वे रिपोर्ट्स, भूपेश बघेल की रिपोर्ट, सुनील कणुगोलू की रिपोर्ट, AICC ऑफिस की टीमों की रिपोर्ट – सब कुछ अगस्त के मध्य तक आ जाएगा। इसके बाद अगस्त का आखिरी हफ्ता या आखिरी दिन पंजाब के लिए कुछ बड़े फैसलों वाले दिन हो सकते हैं।
संभावित फैसले:
- नेतृत्व में बदलाव
- धड़ेबंदी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई
- 2027 के लिए नई रणनीति
- PCC चीफ में बदलाव
- सभी धड़ों को एकजुट करने की कोशिश
2017, 2022, अब 2027: कांग्रेस का ट्रेडमार्क कलेश
यह एक बड़ा ट्रेडमार्क हो गया है कि जब भी पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आते हैं, कांग्रेस पार्टी में कलेश शुरू हो जाता है:
- 2017 की चुनाव: अमरिंदर सिंह बनाम सिद्धू
- 2022 की चुनाव: अमरिंदर बनाम चन्नी बनाम सिद्धू (हार गए)
- 2027 की चुनाव: भूपेश बनाम राजा बनाम चन्नी (अभी जारी)
अगर गौर करें तो, पंजाब कांग्रेस ने अपनी ही गलतियों से 2022 में सत्ता गंवाई थी। क्या इतिहास फिर दोहराया जाएगा?
मुख्य बातें (Key Points)
- 15 कांग्रेसी MLA ने हाईकमांड से मांगा समय
- हर बूथ कांग्रेस मजबूत अभियान में खुली धड़ेबंदी
- भूपेश बघेल, राजा वड़िंग, चन्नी के बीच खींचतान
- MLA की शिकायत: हमारे हलके में नुकसान
- वरिष्ठ नेता घर बैठ गए
- 16-17 अगस्त को संभावित मुलाकात
- अगस्त के अंत में बड़ा फैसला संभव
- 2027 चुनाव से पहले संकट









