Punjab Himachal Border Protest को लेकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सूबे के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगाए गए एंट्री टैक्सों के विरोध में आज पंजाब-हिमाचल सीमा पर स्थित 55 एंट्री टैक्स पॉइंट्स पर विभिन्न संगठनों ने रोष प्रदर्शन किया। गरां मोड़ा टोल प्लाजा पर किरती किसान मोर्चा, आजाद टैक्सी यूनियन, पंजाब टैक्सी यूनियन, निहंग संगठनों और पंजाब मोर्चा के कनवीनर गौरव राणा की अगवाई में धरना दिया गया।
इस धरने के कारण हिमाचल जाने और वहां से आने वाली आवाजाही करीब चार घंटे तक प्रभावित रही। देखा जाए तो यह प्रदर्शन केवल एक जगह नहीं, बल्कि पूरी पंजाब-हिमाचल सीमा पर एक साथ हुआ, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।
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कैसे हुआ प्रदर्शन? 11 बजे शुरू, दोपहर ढाई बजे खुला जाम
धरने की शुरुआत सुबह 11 बजे की गई। पहले हिमाचल से आने वाले वाहन रोके गए, लेकिन बाद में हिमाचल प्रशासन द्वारा वाहनों को वैकल्पिक रूट पर भेजे जाने के कारण हिमाचल की ओर जाने वाली आवाजाही भी रोक दी गई।
समझने वाली बात यह है कि इस दौरान सड़क के दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। गर्मियों की छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में सैलानी हिमाचल की ओर जा रहे थे, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
दिलचस्प बात यह है कि प्रदर्शनकारियों ने एम्बुलेंस, इलाज के लिए जा रहे मरीजों, स्कूली वाहनों और फौजी जवानों को लंघने की इजाजत दी। यह दर्शाता है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण और जिम्मेदाराना था।
दोपहर करीब ढाई बजे जाम खोल दिया गया।
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प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या थीं?
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नेशनल हाईवे पर किसी भी राज्य द्वारा एंट्री टैक्स वसूलना जायज नहीं है। यह नेशनल हाईवे है, किसी राज्य की निजी संपत्ति नहीं।
उन्होंने पंजाब सरकार से भी हिमाचल से आने वाले वाहनों पर बराबर टैक्स लगाने की मांग की। यानी अगर हिमाचल पंजाब के वाहनों से टैक्स ले रहा है, तो पंजाब को भी हिमाचल के वाहनों से टैक्स लेना चाहिए।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह मुद्दा आपसी बराबरी (Reciprocity) का है।
एंट्री टैक्स में भारी बढ़ोतरी: 30 से 170 रुपये!
आगूओं ने बताया कि गरां मोड़ा के पास एंट्री टैक्स पहले 30 रुपये था, जिसे बढ़ाकर 70 और बाद में 170 रुपये कर दिया गया। विरोध के बाद अब इसे घटाकर 100 रुपये किया गया है।
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एंट्री टैक्स में बढ़ोतरी:
| अवधि | टैक्स राशि |
|---|---|
| पहले | ₹30 |
| पहली बढ़ोतरी | ₹70 |
| दूसरी बढ़ोतरी | ₹170 |
| विरोध के बाद वर्तमान | ₹100 |
चिंता का विषय यह है कि लगभग 5-6 गुना टैक्स बढ़ा दिया गया। यह आम लोगों, खासकर रोज आने-जाने वाले ड्राइवरों और व्यापारियों के लिए बहुत बड़ा बोझ है।
गर्मियों में सैलानियों को भारी परेशानी
गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में परिवार हिमाचल घूमने जाते हैं। शिमला, मनाली, धर्मशाला जैसे हिल स्टेशन इस समय सैलानियों से भरे रहते हैं।
ऐसे में चार घंटे का जाम कई परिवारों की यात्रा योजनाओं को प्रभावित करता है। बच्चे, बुजुर्ग, मरीज—सभी को गर्मी में लंबे समय तक सड़क पर रुकना पड़ा।
राहत की बात यह थी कि प्रदर्शनकारियों ने एम्बुलेंस और इमरजेंसी वाहनों को रास्ता दिया।
कौन-कौन शामिल हुए प्रदर्शन में?
इस मौके पर गौरव राणा, हरप्रीत सिंह भट्टो, सेठी शर्मा, वीर सिंह बड़वा, बाबा अच्छर सिंह महाकाल, सुखविंदर सिंह तरना दल, दलजीत सिंह राणा, बलजिंदर सिंह, बलबीर सिंह भीरी और सिकंदर सिंह समेत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मौजूद थे।
धरने के दौरान हिमाचल सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की गई।
नेशनल हाईवे पर टैक्स: कानूनी रूप से सही या गलत?
प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क यह है कि नेशनल हाईवे केंद्र सरकार के अधीन आते हैं, न कि राज्य सरकार के। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा नेशनल हाईवे पर एंट्री टैक्स लगाना संवैधानिक रूप से विवादास्पद हो सकता है।
हालांकि कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों को कुछ परिस्थितियों में टैक्स लगाने का अधिकार है। लेकिन इतनी बड़ी बढ़ोतरी निश्चित रूप से सवाल खड़े करती है।
पंजाब सरकार से बराबरी की मांग
प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार से मांग की कि अगर हिमाचल पंजाब के वाहनों से टैक्स ले रहा है, तो पंजाब को भी हिमाचल के वाहनों से बराबर टैक्स लेना चाहिए।
यह Reciprocal Taxation की मांग है। अगर एक राज्य दूसरे राज्य के वाहनों पर टैक्स लगाता है, तो दूसरा राज्य भी वैसा ही करे।
मुख्य बातें (Key Points):
- हिमाचल एंट्री टैक्स के विरोध में पंजाब-हिमाचल बॉर्डर पर 55 पॉइंट्स पर प्रदर्शन
- गरां मोड़ा टोल प्लाजा पर किरती किसान मोर्चा, टैक्सी यूनियनों ने धरना दिया
- 4 घंटे तक ट्रैफिक जाम, गर्मियों में सैलानियों को परेशानी
- एंट्री टैक्स 30 रुपये से बढ़ाकर 170 किया गया था, अब 100 रुपये
- प्रदर्शनकारियों ने एम्बुलेंस, स्कूल वाहन, फौजी जवानों को रास्ता दिया













