Punjab Helmet Factory: भारत की Sports Goods Manufacturing Industry की वैल्यूएशन ₹57,000 करोड़ की है और इतनी बड़ी इंडस्ट्री का भार दो शहर अपने कंधों पर रखे हुए हैं। एक है मेरठ, दूसरा है Jalandhar।
देखा जाए तो जो 60% एक्सपोर्ट की कंट्रीब्यूशन है वो जालंधर की तरफ से आती है। यहां की बड़ी प्लेयर्स हैं – Alpha Hockey, Savi International और Shrey Sports। आपने अक्सर कई बड़े-बड़े प्लेयर्स को देखा होगा जिनके हेलमेट पर ‘श्रेय’ लिखा होता है।
IPL की सभी टीमों को हेलमेट देता है Shrey
Shrey Sports के फाउंडर Raghav Kohli ने बताया कि वे IPL की सभी टीमों को हेलमेट प्रोवाइड करते हैं। उन्होंने कहा, “हम IPL की शुरुआत से ही सभी टीमों को हेलमेट दे रहे हैं।”
एक टीम को प्रति सीजन लगभग 35 से 40 हेलमेट्स की जरूरत होती है। 2022 के आसपास यह संख्या कम होती थी लेकिन जब से ICC और BCCI का नया नियम आया है कि एक बार बॉल लग जाए तो हेलमेट चेंज करना पड़ता है, तब से संख्या बढ़ गई है।
समझने वाली बात यह है कि यह नियम सुनते ही लगता है कि कंपनी को फायदा हो गया। लेकिन राघव कहते हैं, “ऐसा कुछ नहीं है। हम तो चाहते हैं कि बॉल लगे ना, लेकिन अगर लगे तो हमारा हेलमेट प्रोटेक्ट कर लेता है।”
शुभमन गिल और विराट कोहली के हेलमेट की खासियत
दिलचस्प बात यह है कि Shubman Gill का हेलमेट बाजार में लगभग ₹17,000 से ₹18,000 में बिकता है। जबकि Virat Kohli का हेलमेट लगभग ₹24,000 से ₹25,000 में मिलता है।
विराट के हेलमेट में एक स्पेशल टेक्नोलॉजी है जिसे Koroyd कहा जाता है। यह एक पेटेंटेड टेक्नोलॉजी है जो जर्मनी में बनती है। इसमें एक्स्ट्रा प्रोटेक्शन है और ब्रीदेबिलिटी बहुत बेहतर है। साथ ही यह ज्यादा हल्का भी होता है।
Hardik Pandya, Shreyas Iyer, Yashasvi Jaiswal, Virat सभी Koroyd पसंद करते हैं। लेकिन KL Rahul, Gill, Harmanpreet Kaur जैसे कई खिलाड़ी अभी भी ट्रेडिशनल हेलमेट पसंद करते हैं। फिलहाल 50-50 का रेशियो है।
हेलमेट बनाने की पूरी प्रोसेस
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एक हेलमेट बनाने में कितना समय लगता है? पेंटेड हेलमेट को बनने में 6 से 7 दिन लगते हैं क्योंकि इसमें ड्राइंग और पेंटिंग प्रोसेस काफी लंबा होता है। लेकिन नॉर्मल हेलमेट्स लगभग 2 घंटे में तैयार हो जाते हैं – स्क्रैच से पैकिंग तक।
पहले स्टेप में कपड़े पर एम्ब्रॉयडरी की जाती है। अगर यह इंडियन टीम का हेलमेट है तो तिरंगा और BCCI का लोगो बनाया जाता है। दूसरे स्टेप में यह कपड़ा स्टिच होता है और इसके ऊपर पेस्ट किया जाता है।
तीसरे स्टेप में स्ट्रैप्स अटैच किए जाते हैं। चौथे स्टेप में असली प्रोटेक्शन आता है – EPS लाइनर को आउटर शेल के अंदर पेस्ट किया जाता है। फिर वाइज़र तैयार होते हैं – वेल्ड, शेप और टेस्ट किए जाते हैं। अंत में ग्रिल और शेल को अटैच किया जाता है और फिर पैकिंग की जाती है।
90% इंडियन प्लेयर्स इस्तेमाल करते हैं श्रेय
अगर गौर करें तो लगभग 90% इंडियन क्रिकेट टीम के प्लेयर्स श्रेय का हेलमेट इस्तेमाल करते हैं। इसमें मेन टीम, अंडर-19 और महिला टीम सभी शामिल हैं।
Smriti Mandhana भी श्रेय के हेलमेट का उपयोग करती हैं। राघव कहते हैं, “प्लेयर्स हमें इसलिए चुनते हैं क्योंकि वे श्रेय के साथ सुरक्षित महसूस करते हैं। वे अपनी सुरक्षा पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहते।”
कंपनी फिलहाल हर रोज लगभग 600 हेलमेट्स बनाती है। यह सिर्फ घरेलू बाजार के लिए नहीं है, श्रेय का हेलमेट 16 देशों में एक्सपोर्ट होता है।
टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सबसे बड़ी चुनौती
राघव ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन है। “एक देश के रूप में अगर हम प्रोटेक्शन एक्सपर्ट्स बनना चाहते हैं तो हमें बहुत सारी R&D करनी होगी। हम कोई भी सबस्टैंडर्ड प्रोडक्ट लॉन्च नहीं करना चाहते।”
टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन बहुत महंगा और समय लेने वाला है। विदेश में सर्टिफिकेशन बहुत महंगा है। श्रेय जैसी ब्रांड सिर्फ हेलमेट्स और कुछ अन्य प्रोडक्ट्स के साथ हर साल लगभग $80,000 से $1,00,000 खर्च करती है।
निश्चित रूप से राज्य या केंद्र सरकार से इस तरह का समर्थन होना चाहिए। लेकिन फिलहाल कंपनी खुद अपने दम पर आगे बढ़ रही है और भारत का नाम दुनियाभर में रोशन कर रही है।
मुख्य बातें (Key Points):
• जालंधर की Shrey Sports फैक्ट्री IPL की सभी 10 टीमों को हेलमेट सप्लाई करती है
• 90% इंडियन क्रिकेटर्स Shrey के हेलमेट इस्तेमाल करते हैं जिनमें Virat, Gill, Smriti शामिल हैं
• एक नॉर्मल हेलमेट 2 घंटे में बनता है जबकि पेंटेड हेलमेट में 6-7 दिन लगते हैं
• Virat का हेलमेट ₹24,000 में मिलता है जिसमें जर्मन Koroyd टेक्नोलॉजी है













