Farmer Suicide Punjab: संगरूर जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। नशे के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आवाज उठाने वाले 50 वर्षीय किसान गुलजार सिंह की मौत हो गई। उसने कथित तौर पर जहरीली चीज (सल्फास) निगल ली थी। परिवार और गांव वासियों का आरोप है कि पुलिस के दबाव और मानसिक परेशानी से तंग आकर उसने यह कदम उठाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुलजार सिंह अपने बेटे की नशे की आदत के कारण काफी दुखी था। उसने सार्वजनिक तौर पर नशे की खुलेआम बिक्री पर सवाल उठाते हुए दर्द व्यक्त किया था कि नशा आसानी से मिलने के कारण उसका बेटा चिट्टे (हेरोइन) की गिरफ्त में आ चुका है।
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पुलिस दबाव से तंग आकर उठाया कदम – परिवार का आरोप
परिवार और पिंड वासियों का दोष है कि इस मुद्दे को उठाने के बाद पुलिस द्वारा लगाए जा रहे कथित दबाव और मानसिक परेशानी से तंग आकर गुलजार सिंह ने जहरीली चीज (सल्फास) निगल ली।
देखा जाए तो, यह मामला पंजाब में नशे की समस्या की भयावहता और इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर होने वाले दबाव को उजागर करता है।
उसे पहले दिढ़बा के अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे सरकारी राजिंद्रा अस्पताल, पटियाला और बाद में लुधियाना रेफर कर दिया गया था। लुधियाना में उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
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| घटना विवरण | जानकारी |
|---|---|
| किसान का नाम | गुलजार सिंह |
| उम्र | 50 वर्ष |
| जिला | संगरूर |
| मुख्य मुद्दा | बेटे की नशे की लत |
| कदम | जहरीला पदार्थ (सल्फास) निगला |
| इलाज | दिढ़बा → पटियाला → लुधियाना |
| परिणाम | इलाज के दौरान मृत्यु |
पुलिस ने दर्ज किया खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला
दूसरी ओर, पुलिस ने तंग-परेशान करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
अगर गौर करें, तो पुलिस ने इस संबंध में एक सरपंच और दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।
पटियाला रेंज के डीआईजी कुलदीप सिंह चाहल ने पुष्टि की कि पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव परिवार को सौंपा जाएगा और बनती कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पंजाब में नशे की विकराल समस्या
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब में नशे की समस्या कितनी गंभीर है। गुलजार सिंह जैसे सैकड़ों परिवार हैं जो अपने बच्चों को नशे की गिरफ्त में खोते जा रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जब कोई इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाता है, तो उसे किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है – यह घटना उसका प्रतीक बन गई है।
चिंता का विषय यह है कि एक आम किसान, जो अपने बेटे को नशे से बचाना चाहता था, उसे अपनी जान गंवानी पड़ी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया जरूरी
समझने वाली बात है कि यह घटना केवल एक मौत नहीं है। यह पंजाब सरकार की नशा-मुक्ति नीति की विफलता का प्रतीक है।
इससे साफ होता है कि जमीनी स्तर पर नशे के खिलाफ अभियान कितना कमजोर है। नशा अभी भी आसानी से उपलब्ध है और इसके खिलाफ बोलने वालों को परेशान किया जाता है।
सवाल उठता है – क्या पंजाब सरकार अब भी नशे के खिलाफ गंभीर है? या यह सिर्फ चुनावी नारा बनकर रह गया है?
राहत की बात यह होनी चाहिए कि इस घटना के बाद सरकार सख्त कदम उठाए। लेकिन अफसोस की बात यह है कि ऐसी घटनाएं बार-बार होती हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
मुख्य बातें (Key Points)
• संगरूर के 50 वर्षीय किसान गुलजार सिंह की जहरीला पदार्थ निगलने से मौत, बेटे की नशे की लत से था परेशान
• परिवार का आरोप – नशे के मुद्दे पर आवाज उठाने के बाद पुलिस दबाव से तंग आकर उठाया कदम
• पुलिस ने आरोप खारिज किए, एक सरपंच और दो अन्य के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला दर्ज
• घटना पंजाब में नशे की विकराल समस्या और इसके खिलाफ बोलने वालों पर दबाव की ओर इशारा करती है
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