Farmers Protest को लेकर पंजाब में एक बार फिर किसान सड़कों पर उतर आए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 1 सितंबर से 7 सितंबर तक मोहाली को चंडीगढ़ से जोड़ने वाली सड़क पर सात दिन का पक्का मोर्चा शुरू कर दिया है। देखा जाए तो यह सिर्फ एक स्थानीय धरना नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़ा संदेश है।
सेक्टर 48-सी इलाके में आईसर टी-प्वाइंट से ट्रिब्यून चौक की ओर जाने वाली सड़क पर किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ डेरा डाल चुके हैं। खाने-पीने का सामान और जरूरी सप्लाई लेकर पहुंचे किसानों का इरादा साफ है – या तो मांगें मानो, या फिर आंदोलन जारी रहेगा।
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32 किसान संगठनों की ताकत
इस आंदोलन की खासियत यह है कि इसमें 32 किसान संगठन एक मंच पर आए हैं। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल), भारतीय किसान यूनियन (डकौंदा), कीर्ति किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) और पंजाब किसान यूनियन जैसे बड़े नाम इस मोर्चे का हिस्सा हैं। दिलचस्प बात यह है कि बीकेयू एकता उग्राहां, हालांकि सहयोगी सदस्य है, लेकिन डिप्टी कमिश्नरों के दफ्तरों के बाहर अलग से प्रदर्शन कर रही है।
अगर गौर करें तो यह एकता 2020-21 के किसान आंदोलन की याद दिलाती है, जब किसानों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाला था। आज भी वही जज्बा, वही एकजुटता नजर आ रही है।
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मांगों की लंबी फेहरिस्त
किसानों की मांगें सिर्फ फसलों की कीमतों तक सीमित नहीं हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये मांगें कृषि, अर्थव्यवस्था और पंजाब के अधिकारों से जुड़ी हैं।
एमएसपी की कानूनी गारंटी: यह आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा है। किसान चाहते हैं कि MSP (Minimum Support Price) को स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले C2 + 50 के आधार पर तय किया जाए और इसे कानूनी रूप से लागू किया जाए। समझने वाली बात यह है कि फिलहाल MSP सिर्फ एक घोषणा है, कानूनी अधिकार नहीं। किसान चाहते हैं कि अगर कोई व्यापारी MSP से कम दाम देता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई हो सके।
पंजाब के पानी के अधिकार: पंजाब की नदियों के पानी की बंटवारे से जुड़े पुराने समझौतों को रद्द करने की मांग की गई है। किसान चाहते हैं कि पंजाब विधानसभा इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाए। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में पंजाब के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
पूरा कर्ज माफी: किसानों और खेतिहर मजदूरों दोनों के कर्जों को पूरी तरह माफ करने की मांग है। देखा जाए तो पंजाब के किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और आत्महत्याओं की खबरें आम हो गई हैं।
FTA विरोध: असली चिंता क्या है?
इस आंदोलन के केंद्र में अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) का विरोध है। किसानों का तर्क है कि सस्ते कृषि उत्पादों का आयात घरेलू फसलों की कीमतों पर नीचे की ओर दबाव डालेगा। इससे साफ होता है कि किसान अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रतिस्पर्धा से चिंतित हैं।
यूरोपीय देशों के साथ भी FTA का विरोध किया जा रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि व्यापारिक समझौते खेती और सहायक ग्रामीण कारोबारों को बड़ी आयात प्रतिस्पर्धा के सामने ला सकते हैं।
बिजली और बीज कानून: नया विवाद
SKM ने बिजली बिल 2025 और बीज बिल 2025 को वापस लेने की मांग की है। उनका तर्क है कि प्रस्तावित बदलाव किसानों के खर्चों, कृषि इनपुट्स तक पहुंच और खेती नीति के व्यापक ढांचे के लिए प्रभावी हो सकते हैं। यूनियनों ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2024 को वापस लेने के अलावा डैम सेफ्टी एक्ट को रद्द करने की भी मांग की है।
गन्ने का भाव और पेंशन की मांग
किसानों ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की है। इसके साथ ही एक ऐसी प्रणाली की मांग की गई है जिसके तहत निजी क्षेत्र की मिलें एक ही काउंटर के जरिए भुगतान करें, जो सहकारी क्षेत्र की मिलों द्वारा अपनाए गए प्रबंधों के समान हो।
दिलचस्प बात यह है कि किसान सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण कारीगरों के लिए भी 10,000 रुपये प्रति माह पेंशन की मांग कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि आंदोलन का दायरा व्यापक सामाजिक सुरक्षा जाल तक फैला है।
रणनीतिक स्थान: ट्रैफिक पर असर
यह स्थान रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यह सड़क मोहाली को चंडीगढ़ और एयरपोर्ट कॉरिडोर से जोड़ती है। इसका मतलब है कि एक बड़ी लामबंदी का दोनों शहरों के बीच आवाजाही पर तुरंत प्रभाव पड़ेगा।
नतीजतन, मोहाली पुलिस ने 1 सितंबर से आईसर चौक से फेज 11 के बेस्टेक मॉल और आगे जगतपुरा के जरिए चंडीगढ़ जाने वाली सड़क को बंद करने का ऐलान किया है। पुलिस ने चंडीगढ़ पहुंचने के लिए आईसर चौक से तीन वैकल्पिक रूट सुझाए हैं।
ट्रैफिक डायवर्जन: यात्रियों के लिए सलाह
मोहाली पुलिस द्वारा जारी ट्रैफिक एडवाइजरी के अनुसार प्रभावित हिस्सा हर किस्म के वाहनों के लिए बंद रहेगा। पूर्व मार्ग पर फेडन बैरियर से चंडीगढ़ साइड की ओर जाने वाली सड़क के हिस्से पर वाहनों की आवाजाही को मोड़ दिया गया है।
और बस यहीं से शुरू हुई असली चुनौती – आम लोगों के लिए। ऑफिस जाने वाले, स्कूल-कॉलेज जाने वाले, सभी को वैकल्पिक रास्ते अपनाने होंगे। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन इस स्थिति को संभाल पाएगा?
पिछले आंदोलनों की गूंज
जमीनी मोर्गेज बैंकों के कामकाज और एरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए जमीन की प्रस्तावित प्राप्ti समेत खास मुद्दों पर मोहाली में हाल ही में और भी किसान प्रदर्शन हुए हैं। हालांकि, उन मुद्दों को मौजूदा सात दिनों के SKM मोर्चे के साथ नहीं मिलाना चाहिए। यह एक अलग और व्यापक आंदोलन है।
आगे क्या होगा?
7 सितंबर तक जारी रहने वाले इस मोर्चे के बाद क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। अगर सरकार मांगें नहीं मानती, तो क्या यह आंदोलन और तेज होगा? क्या यह 2020-21 जैसे लंबे आंदोलन में बदल सकता है?
समझने वाली बात यह है कि किसान अब पहले से ज्यादा संगठित और जागरूक हैं। सोशल मीडिया के जमाने में उनकी आवाज पहले से ज्यादा तेजी से फैलती है। सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा, वरना स्थिति हाथ से निकल सकती है।
मुख्य बातें (Key Points):
• संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 1-7 सितंबर तक मोहाली-चंडीगढ़ सड़क पर पक्का मोर्चा शुरू किया
• 32 किसान संगठन एक मंच पर, मुख्य मांगें – MSP की कानूनी गारंटी, पंजाब के पानी के अधिकार, FTA विरोध
• प्रस्तावित FTA का विरोध केंद्र में, किसानों को डर है कि सस्ते आयात से घरेलू फसलों की कीमतें गिरेंगी
• ट्रैफिक डायवर्जन लागू, मोहाली पुलिस ने वैकल्पिक रूट सुझाए, आम जनता को परेशानी होगी













