Punjab DGP Gaurav Yadav appointment ने राज्य के पुलिस प्रशासन में पिछले कई सालों से चली आ रही अनिश्चितता को आखिरकार खत्म कर दिया है। पंजाब सरकार ने एक अहम और बहुप्रतीक्षित फैसला लेते हुए 1992 बैच के अनुभवी आईपीएस अधिकारी गौरव यादव को राज्य का नियमित (रेगुलर) डीजीपी (DGP) नियुक्त कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कार्यकारी डीजीपी की लंबी नियुक्ति को लेकर सरकार को कड़ी कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा था।
देखा जाए तो पिछले करीब चार सालों से पंजाब पुलिस बिना किसी रेगुलर मुखिया के ही काम कर रही थी। गौरव यादव खुद जुलाई 2022 से कार्यकारी (Acting) डीजीपी के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने यह नियुक्ति का नोटिफिकेशन शुक्रवार को ही जारी कर दिया, जबकि 13 अक्टूबर को हाईकोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई होनी थी।
अगर गौर करें तो यह साफ दर्शाता है कि सरकार अदालत की सख्ती से बचना चाहती थी। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी: हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर को ही सरकार को साफ निर्देश दे दिए थे कि वह रेगुलर डीजीपी की नियुक्ति पर जल्द और उचित फैसला ले।
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‘UPSC का पैनल और पुलिस मुखिया की दौड़’
समझने वाली बात यह है कि किसी भी राज्य में रेगुलर डीजीपी की नियुक्ति इतनी आसान नहीं होती। इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भूमिका सबसे अहम होती है। राज्य सरकार नाम भेजती है और UPSC उनमें से योग्य अधिकारियों का एक पैनल छांटकर वापस सरकार को भेजता है।
पंजाब पुलिस के मुखिया के पद के लिए UPSC ने जो अंतिम तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए थे, उनमें गौरव यादव का नाम प्रमुखता से शामिल था।
| अधिकारी का नाम | बैच / पदनाम | पैनल में स्थिति |
| गौरव यादव | आईपीएस (1992 बैच) | रेगुलर DGP नियुक्त |
| शरद सत्य चौहान | वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी | UPSC पैनल में शामिल |
| हरप्रीत सिंह सिद्धू | वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी | UPSC पैनल में शामिल |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार को यह पैनल जुलाई के महीने में ही मिल गया था, लेकिन इसके बावजूद रेगुलर डीजीपी की नियुक्ति कई महीनों तक लटकी रही। जब एडवोकेट निखिल थमन ने लंबे समय तक कार्यकारी डीजीपी रखने की व्यवस्था को हाईकोर्ट में चुनौती दी, तब जाकर प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आई।
‘कार्यकाल और आगे की चुनौतियां’
राहत की बात यह है कि अब पंजाब पुलिस को एक स्थायी नेतृत्व मिल गया है। गौरव यादव की सेवानिवृत्ति (Retirement) 30 अप्रैल 2029 को होनी है, जिसका मतलब है कि उनके पास राज्य की कानून व्यवस्था सुधारने और पुलिस बल को आधुनिक बनाने के लिए पर्याप्त समय है।
आम जनता के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थायी नेतृत्व से पुलिस की जवाबदेही बढ़ती है और राज्य में सुरक्षा नीतियों को लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के लागू किया जा सकता है। यह सूबे के लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है कि अब कानून व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी।
‘जानें पूरा मामला’
पंजाब में पिछले लगभग चार सालों से रेगुलर डीजीपी की नियुक्ति नहीं हुई थी और काम चलाऊ (कार्यकारी) व्यवस्था के तहत पुलिस बल चल रहा था। जुलाई 2022 में गौरव यादव को कार्यकारी डीजीपी बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि राज्यों में कार्यकारी डीजीपी की नियुक्ति लंबे समय तक नहीं की जा सकती। इसके बावजूद पंजाब में यह स्थिति बनी रही, जिसे एडवोकेट निखिल थमन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने 1 अक्टूबर को कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा को आदेश दिया था कि 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई तक हलफनामा दायर कर बताएं कि रेगुलर नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही है। अदालत के इसी दबाव के चलते सरकार ने सुनवाई से पहले ही गौरव यादव को स्थायी डीजीपी नियुक्त कर दिया।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव यादव अब पंजाब के कार्यकारी नहीं, बल्कि रेगुलर डीजीपी बन गए हैं।
वे जुलाई 2022 से राज्य में कार्यकारी पुलिस महानिदेशक के तौर पर काम कर रहे थे।
UPSC द्वारा भेजे गए तीन अधिकारियों के पैनल में शरद सत्य चौहान और हरप्रीत सिंह सिद्धू भी शामिल थे।
हाईकोर्ट ने सरकार को 13 अक्टूबर तक रेगुलर नियुक्ति को लेकर जवाब दाखिल करने का सख्त आदेश दिया था।










