Punjab Cotton Subsidy 2026 को लेकर प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए BT कॉटन हाइब्रिड और देसी कपास के बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी देने का ऐलान किया है।
यह सब्सिडी पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा प्रमाणित बीजों पर दी जाएगी। देखा जाए तो यह कदम उन किसानों को बड़ी राहत देगा जो धान की खेती छोड़कर कम पानी वाली फसलों की ओर जाना चाहते हैं।
87 अनुमोदित किस्मों पर मिलेगी सब्सिडी
इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 87 अनुमोदित BT कॉटन हाइब्रिड और देसी कपास की चार किस्में—LD-1019, LD-949, FDK-124 और PBD-88—में से किसी भी किस्म का चयन करने वाले किसानों को बीज लागत का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सब्सिडी के रूप में दिया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि किसानों के पास विकल्पों की भरमार है। वे अपनी जमीन और जलवायु के अनुसार उपयुक्त किस्म चुन सकते हैं।
पिछले साल 19% की वृद्धि दर्ज
अगर गौर करें तो यह योजना पहली बार नहीं है। मंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों ने इस सब्सिडी मॉडल को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। पिछले खरीफ सीजन में नरमा की खेती के तहत क्षेत्र में 19 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
यह क्षेत्र खरीफ 2024 के 1 लाख हेक्टेयर से बढ़कर खरीफ 2025 में 1.19 लाख हेक्टेयर हो गया। इससे साफ होता है कि किसान इस योजना पर भरोसा कर रहे हैं।
खरीफ 2026 में 1.25 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य
उन्होंने आगे बताया कि खरीफ 2026 के लिए 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को नरमा खेती के अंतर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है। समझने वाली बात यह है कि यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी है लेकिन पिछले साल की सफलता को देखते हुए प्राप्त करने योग्य है।
कपास है “सफेद सोना”
कपास को “सफेद सोना” बताते हुए कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किसानों से अधिक पानी की खपत करने वाली धान की फसल के स्थान पर वैकल्पिक फसलें अपनाने की अपील की।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। धान की खेती में भारी मात्रा में पानी लगता है। ऐसे में कपास जैसी कम पानी वाली फसल एक बेहतर विकल्प है।
ऑनलाइन आवेदन पोर्टल 20 अप्रैल से खुला
उन्होंने बताया कि Punjab Cotton Subsidy 2026 का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल 20 अप्रैल से खोल दिया गया है। किसान अब घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल पंजीकृत डीलरों से प्रमाणित बीज खरीदें और आवेदन करते समय पक्का बिल अपलोड करें। सत्यापन के बाद 33 प्रतिशत सब्सिडी सीधे लाभार्थी किसानों के बैंक खातों में भेज दी जाएगी।
सीधे बैंक खाते में आएगी सब्सिडी
और बस यहीं से शुरू होती है पारदर्शिता की कहानी। कोई बिचौलिया नहीं, कोई दलाली नहीं। सब्सिडी की राशि सीधे किसान के खाते में DBT के माध्यम से ट्रांसफर होगी।
वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित किस्में
यह पहल किसानों को वित्तीय राहत प्रदान करने के साथ-साथ अन्य लाभ भी देगी। इससे किसानों को वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित, उच्च उत्पादकता वाली नरमा और कपास की किस्में अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रमाणित बीजों की गुणवत्ता पर पूरा भरोसा किया जा सकता है। ये किस्में पंजाब की मिट्टी और जलवायु के लिए विशेष रूप से विकसित की गई हैं।
पारंपरिक कपास पट्टी का पुनरुद्धार
मंत्री ने कहा कि देसी कपास और PAU-प्रमाणित BT हाइब्रिड बीजों पर सब्सिडी से पंजाब की पारंपरिक कपास पट्टी को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।
राहत की बात यह है कि पंजाब कभी कपास उत्पादन में अग्रणी था। पिछले कुछ दशकों में धान के प्रभुत्व के कारण कपास का रकबा घट गया था। अब फिर से इसे बढ़ावा मिल रहा है।
मालवा क्षेत्र में विशेष फोकस
मंत्री ने कहा कि इस सब्सिडी योजना से लागत में कमी आएगी और विशेष रूप से मालवा क्षेत्र में नरमा खेती का और विस्तार होने की उम्मीद है।
मालवा क्षेत्र, जिसमें बठिंडा, मानसा, फाजिल्का, मुक्तसर आदि जिले आते हैं, पहले से ही कपास उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है। यहां सब्सिडी से और बढ़ावा मिलेगा।
जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
उन्होंने सभी मुख्य कृषि अधिकारियों को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और प्रत्येक पात्र किसान के लिए ऑनलाइन पोर्टल तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
यह दर्शाता है कि सरकार चाहती है कि कोई भी किसान जानकारी या डिजिटल पहुंच की कमी के कारण इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। चिंता का विषय यह रहा है कि कई बार सरकारी योजनाओं की जानकारी सभी तक नहीं पहुंच पाती।
गुणवत्तापूर्ण बीज से बढ़ेगी उत्पादकता
मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराकर राज्य उत्पादकता और लाभ दोनों में वृद्धि सुनिश्चित करेगा। उन्होंने सभी कपास उत्पादकों से समय रहते पोर्टल पर आवेदन कर इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।
किसानों पर होगा सकारात्मक प्रभाव
समझने वाली बात यह भी है कि Punjab Cotton Subsidy 2026 से किसानों की आय में वृद्धि होगी। 33 प्रतिशत सब्सिडी का मतलब है कि बीज की लागत में काफी कमी आएगी। इससे बचे हुए पैसे का इस्तेमाल किसान अन्य जरूरी कृषि इनपुट्स में कर सकेंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
- Punjab Cotton Subsidy 2026 के तहत BT हाइब्रिड और देसी कपास के बीजों पर 33% सब्सिडी
- 87 अनुमोदित BT कॉटन हाइब्रिड और 4 देसी किस्मों पर लागू
- खरीफ 2026 के लिए 1.25 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य, पिछले साल 19% वृद्धि दर्ज
- ऑनलाइन आवेदन पोर्टल 20 अप्रैल से खुला, सब्सिडी सीधे बैंक खाते में
- मालवा क्षेत्र में विशेष फोकस, धान के विकल्प के रूप में कपास को बढ़ावा













