AAP Rajya Sabha MPs Defection को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी ने पंजाब के लोगों के साथ कथित गद्दारी करते हुए भाजपा में शामिल हुए अपने सातों राज्यसभा सांसदों की सदस्यता समाप्त कराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
देखा जाए तो यह मामला केवल दल-बदल का नहीं है, बल्कि राजनीतिक नैतिकता और संवैधानिक प्रावधानों की लड़ाई का है। AAP के वरिष्ठ नेता व सांसद संजय सिंह ने शनिवार को ऐलान किया कि वह राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति को पत्र लिखेंगे और सभी प्रासंगिक नियमों का हवाला देते हुए भाजपा में गए सभी सातों सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।
असंवैधानिक और गैर-कानूनी कदम: संजय सिंह
शनिवार को आम आदमी पार्टी मुख्यालय पर प्रेसवार्ता करते हुए संजय सिंह ने कहा कि शुक्रवार को एक गैर-संवैधानिक, गैर-कानूनी और नियमों के विपरीत जाकर सात लोगों ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया।
अगर गौर करें तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह कानूनी रूप से पूरी तरह से गलत है। दल-बदल विरोधी कानून साफ तौर पर कहता है कि किसी भी प्रकार की टूट विधानसभा, राज्यसभा या लोकसभा में नहीं हो सकती। इसे कोई वैधानिक मान्यता नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने शिवसेना के केस का हवाला दिया और कहा कि यह मामला वहां भी साफ तौर पर सामने आ चुका है कि दल-बदल को वैधानिक मान्यता नहीं दी जा सकती।
संविधान की 10वीं अनुसूची में साफ लिखा है
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि संजय सिंह ने संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफ तौर पर लिखा हुआ है कि किसी भी प्रकार की टूट, चाहे वह भले ही दो-तिहाई संख्या की हो या सात की जगह आठ हो, उसे कोई वैधानिक मान्यता नहीं है।
समझने वाली बात यह है कि भले ही दो-तिहाई सांसद टूट जाएं, फिर भी उन्हें दल-बदल से छूट नहीं मिल सकती। यह कानून बेहद स्पष्ट है।
इसलिए आम आदमी पार्टी के जो सात राज्यसभा सांसद टूटे हैं, वह पूरी तरह से गैर-कानूनी, गलत, गैर-संवैधानिक और संसदीय नियमों के विपरीत है। और बस यहीं से शुरू होती है कानूनी लड़ाई की कहानी।
राज्यसभा सभापति को लिखा जाएगा पत्र
संजय सिंह ने ऐलान किया कि मैं आज राज्यसभा के सभापति, उपराष्ट्रपति को इन सारे नियमों का हवाला देते हुए पत्र दूंगा कि इन सातों राज्यसभा सांसदों की सदस्यता पूरी तरीके से समाप्त की जाए।
उन्होंने बताया कि इनमें से तीन लोग राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल तो शुक्रवार को साफ तौर पर भाजपा के दफ्तर भी गए थे। बाकी जो चार लोगों को लेकर दावा किया जा रहा है, उन सबके खिलाफ भी उनकी सदस्यता को समाप्त करने के लिए आज मैं राज्यसभा के सभापति, उपराष्ट्रपति महोदय को पत्र दूंगा।
सौरभ भारद्वाज: डर गए थे सभी सांसद
वहीं, AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आम आदमी पार्टी आम कार्यकर्ताओं ने बनाई थी और यह आम कार्यकर्ताओं की ही पार्टी है। इन नेताओं जैसे कितने आए और कितने गए।
उन्होंने कहा कि यह आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किल समय है। दिल्ली की सत्ता छिन गई है, नेताओं को जेल भेजा जा रहा है, रोज ED के छापे पड़ रहे हैं और सरकार ने तो पार्टी का ऑफिस तक छीन लिया था। ऐसे हालात में कुछ लोग तो भागेंगे ही और छोड़कर जाएंगे ही।
दिलचस्प बात यह है कि सौरभ भारद्वाज ने साफ कहा कि ये सभी सांसद बहुत पहले ही डर गए थे और भाजपा से सवाल पूछने बंद कर दिए थे। इनके जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
हर संस्था पर कब्जा कर लिया: भारद्वाज
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने सारी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है। अब सरकार से सख्त सवाल नहीं पूछे जाते और सरकार की कमियों को नहीं दिखाया जाता। हर चीज में केवल वाह-वाही और मोदी जी की तारीफ चल रही है।
मगर इसके बावजूद सरकार परेशान है। चिंता का विषय यह है कि सरकार परेशान है तभी तो वह रोज छापे मार रही है। बंगाल, दिल्ली और चंडीगढ़ में रोज छापे पड़ रहे हैं। वे उन लोगों से परेशान हैं जो सवाल पूछ रहे हैं।
ट्रंप के सामने मोदी की बेइज्जती: भारद्वाज
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सौरभ भारद्वाज ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लोग प्रधानमंत्री मोदी जी से पूछ रहे हैं कि वे 11 साल से कह रहे थे कि विदेशों में भारत का डंका बज रहा है, लेकिन जब मौका मिलता है तो ट्रंप भारत और भारतीयों के बारे में भद्दी बातें करके बेइज्जती करते हैं।
ट्रंप का जब मन करता है वह भारत पर टैरिफ लगा देते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की जुबान नहीं खुलती। भारतीयों को बेड़ियों में बांधकर हिंदुस्तान भेजा जाता है और वे चुप रहते हैं।
उन्होंने कहा कि ट्रंप कह देते हैं कि पाकिस्तान के साथ सीजफायर कर लो और प्रधानमंत्री उसे मान लेते हैं, वे ट्रंप से एक सवाल तक नहीं पूछ पाते। ऑपरेशन सिंदूर चलता है और भारत पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलता है।
मोदी सवालों से परेशान हैं
सौरभ भारद्वाज ने कार्यकर्ताओं से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सवालों से परेशान हैं। जो सात सांसद गए हैं वे वैसे भी सवाल नहीं पूछते थे और उन्होंने बहुत पहले ही सवाल पूछने बंद कर दिए थे। इसलिए उनके जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
लेकिन जो कार्यकर्ता सवाल पूछ रहे हैं, उन्हें सवाल पूछना बंद नहीं करना चाहिए। समझने वाली बात यह है कि भाजपा के लोग आम आदमी पार्टी को एक छोटी-सी, सुपारी जितनी पार्टी बताते थे, लेकिन आज उसी पार्टी की पंजाब में सरकार बची है और इसके बावजूद भाजपा के पेट में दर्द है।
ED का छापा पड़ा तो BJP में शामिल
सौरभ भारद्वाज ने तंज कसते हुए कहा कि जिसके यहां ED का छापा पड़ा, उसे ही भाजपा ने अपनी पार्टी में ले लिया। यानी तीन दिन पहले वे भ्रष्टाचारी थे, इसलिए ED के छापे पड़ रहे थे, लेकिन आज वे भाजपा के काम के हो गए हैं।
राहत की बात यह है कि कार्यकर्ताओं को सवाल पूछना बंद नहीं करना है। बड़े-बड़े नेता जिनके पास बहुत पैसा है वे ED, CBI और इनकम टैक्स से डर सकते हैं।
फक्कड़ कार्यकर्ता किसी से नहीं डरते
मगर आम आदमी पार्टी का आम कार्यकर्ता तो फक्कड़ है, उसे नौकरी से तनख्वाह मिलती है, वह उसे खर्च करता है और अगले महीने फिर तनख्वाह मिल जाती है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को किस बात का डर है?
और बस यहीं से शुरू होती है असली ताकत की कहानी। असल में प्रधानमंत्री मोदी को डर भी इन्हीं फक्कड़ कार्यकर्ताओं से है।
कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की साजिश
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन उन्हें अपना मनोबल नहीं टूटने देना है। उन्हें लगातार सवाल पूछते रहना है।
सरकार कितनी बार और कितने लोगों को जेल भेजेगी? किसी को डरना नहीं है और देश को बचाना है, वरना ये लोग सब कुछ लूटकर भाग जाएंगे और देश में कुछ नहीं छोड़ेंगे।
AAP Rajya Sabha MPs Defection का राजनीतिक प्रभाव
इस पूरे मामले का असर यह होगा कि अब दल-बदल विरोधी कानून की व्याख्या फिर से अदालतों में होगी। राज्यसभा सभापति इस मामले पर क्या निर्णय लेते हैं, यह देखना होगा।
यह दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में दल-बदल एक गंभीर समस्या बनी हुई है और संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद इस पर अंकुश लगाना मुश्किल साबित हो रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- AAP Rajya Sabha MPs Defection मामले में संजय सिंह लिखेंगे उपराष्ट्रपति को पत्र, 7 सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग
- संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दो-तिहाई टूट को भी वैधानिक मान्यता नहीं
- राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल शुक्रवार को भाजपा दफ्तर गए थे
- सौरभ भारद्वाज ने कहा ये सांसद पहले से ही डरे हुए थे, सवाल पूछना बंद कर दिए थे
- कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की साजिश लेकिन सवाल पूछना बंद नहीं होगा













