Punjab Cabinet Meeting Decisions के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में सोमवार को हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए गए। इस बैठक में जहां एक तरफ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘रंजनगढ़ विकास प्राधिकरण (RDA) विधेयक 2026’ को मंजूरी दी गई, वहीं दूसरी तरफ पंजाब सरकार ने सरकारी तबादलों और पोस्टिंग में कथित लेन-देन के आरोपों की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का एक बड़ा और बेहद आक्रामक नीतिगत निर्णय लिया है।
अगर गौर करें तो कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पत्रकारों से बातचीत में साफ किया कि पंजाब में पिछली सरकारों ने पहले से ही राज्य में सीबीआई के सीधे प्रवेश और सामान्य सहमति (General Consent) पर रोक लगाई हुई है। इसी आधार पर मान सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस जांच का पुरजोर विरोध करेगी।
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‘तबादला-पोस्टिंग विवाद और सीबीआई जांच का पूरा सच’
देखा जाए तो यह पूरा विवाद तब गरमाया जब याचिकाकर्ता निखिल सराफ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब सरकार के उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के कुछ करीबी लोगों पर तबादलों और पोस्टिंग में भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी पंजाब के डीजीपी को तीन अलग-अलग पत्र लिखकर सरकारी पोस्टिंग में चल रहे इस कथित लेन-देन की ओर इशारा किया था।
समझने वाली बात यह है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाले बेंच ने इस मामले को बेहद गंभीर माना और कहा कि पंजाब पुलिस की अब तक की कार्रवाई बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं रही है। अदालत ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का हवाला देते हुए मामला सीबीआई को सौंपने और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का सख्त हुक्म सुनाया, जिसके खिलाफ अब राज्य सरकार कानूनी मोर्चा खोलने जा रही है।
‘कैबिनेट बैठक के प्रमुख फैसले और उनका स्वरूप’
इस महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में लिए गए अन्य प्रशासनिक फैसलों का पूरा ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विभाग / क्षेत्र | स्वीकृत प्रस्ताव व निर्णय | लक्षित लाभार्थी / उद्देश्य |
|---|---|---|
| पर्यटन एवं संस्कृति | रंजनगढ़ विकास प्राधिकरण (RDA) विधेयक, 2026 को हरी झंडी | रंजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी बांध क्षेत्रों का ईको-टूरिज्म विकास |
| कानून एवं न्याय | हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील का निर्णय | राज्य के प्रशासनिक अधिकारों की रक्षा और केंद्रीय एजेंसी के हस्तक्षेप का विरोध |
| चुनाव विभाग | मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय में ड्राइवरों के नए पदों का सृजन | चपरासी के पदों को सरेंडर कर प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाना |
| चिकित्सा शिक्षा | पंजाब नर्सिंग शिक्षा सेवा नियम 2016 के परिशिष्ट-बी में संशोधन | अमृतसर और पटियाला नर्सिंग कॉलेजों में स्टाफ नर्सों की बतौर ट्यूटर पदोन्नति |
| शिक्षा व आईटी | ‘पिक्टस’ (PICTES) के तहत कार्यरत गैर-शिक्षण संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण | संविदा कर्मचारियों को स्थायी कर निर्धारित वेतनमान का लाभ देना |
‘रंजनगढ़ विकास प्राधिकरण (RDA) से बदलेगी पर्यटन की तस्वीर’
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी: पंजाब सरकार ने पठानकोट क्षेत्र में स्थित रंजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी बांध के आसपास के सुंदर इलाकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए रंजनगढ़ विकास प्राधिकरण (RDA) के गठन को वैधानिक मंजूरी दे दी है। यह प्राधिकरण पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में काम करेगा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस नवनिर्मित अथॉरिटी के पास भूमि प्रबंधन, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन और विकास को विनियमित करने के लिए व्यापक प्रशासनिक, वित्तीय और विनियामक अधिकार होंगे। इस विशेष बोर्ड के चेयरमैन खुद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान होंगे, जबकि पर्यटन मंत्री इसके वाइस-चेयरमैन होंगे। दैनिक कामकाज और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की जिम्मेदारी मुख्य सचिव (Chief Secretary) की अध्यक्षता वाली कार्यकारी समिति को सौंपी गई है।
‘प्रशासनिक सुधार, कर्मचारियों को नियमित करने और सीबीआई जांच की जंग का विश्लेषण’
यदि सरकार के इन फैसलों का एक स्वतंत्र पत्रकार के नाते विश्लेषण किया जाए, तो स्पष्ट होता है कि मान सरकार इस समय दोहरे मोर्चे पर काम कर रही है। एक तरफ पर्यटन के विकास और नर्सिंग स्टाफ की पदोन्नति जैसे फैसलों से वह पंजाब के विकास और सरकारी तंत्र को मजबूत करने का संदेश दे रही है, तो दूसरी तरफ सीबीआई जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला उसके राजनीतिक अस्तित्व और संघीय ढांचे की लड़ाई को दर्शाता है।
तबादलों में भ्रष्टाचार के आरोपों की आंच सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचना सरकार की बेदाग छवि के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यही वजह है कि सरकार इस मामले की जांच को किसी भी हाल में केंद्रीय एजेंसी के हाथ में नहीं रहने देना चाहती, क्योंकि आने वाले समय में इसके गंभीर राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं, ‘पिक्टस’ के तहत लंबे समय से ठेके पर काम कर रहे गैर-शिक्षण कर्मचारियों को पक्का करने का फैसला आगामी चुनावों से पहले कर्मचारियों के बड़े वर्ग को साधने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा सरकारी तबादलों में रिश्वत के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश के बाद पंजाब की सियासत में भूचाल आ गया है। इस आदेश ने सीधे तौर पर राज्य पुलिस की जांच क्षमता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, रंजीत सागर बांध क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित था, जिसे पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए लंबे समय से एक विशेष वैधानिक संस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी, जिसे अब मान सरकार ने पूरा किया है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी: मान सरकार तबादला-पोस्टिंग रिश्वत मामले में हाईकोर्ट द्वारा आदेशित सीबीआई जांच को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
- RDA का गठन: रंजीत सागर और शाहपुर कंडी बांध क्षेत्रों के सुनियोजित और पर्यावरण-अनुकूल विकास के लिए रंजनगढ़ विकास प्राधिकरण की स्थापना होगी।
- नर्सिंग स्टाफ को पदोन्नति: पटियाला और अमृतसर के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में स्टाफ नर्सों को आवश्यक योग्यता के आधार पर ट्यूटर के पद पर पदोन्नत किया जाएगा।
- कर्मचारी हुए पक्के: पीआईसीटीईएस (PICTES) के तहत अनुबंध पर काम कर रहे गैर-शिक्षक कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित कर दिया गया है।












