Punjab Congress Pargat Singh को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाए जाने के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर बेहद तेज हो गया है। पंजाब के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने संगरूर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के इस फैसले और उनकी अंदरूनी गुटबाजी पर तीखे सवाल उठाए हैं। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं की पूरी तरह अनदेखी करते हुए केवल विरोधी गुटों के बीच अस्थाई समझौते के आधार पर यह नया ढांचा खड़ा किया है, जिससे कांग्रेस कैडर में उत्साह की जगह मायूसी पसरी हुई है।
देखा जाए तो अमन अरोड़ा ने नए अध्यक्ष परगट सिंह को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं भी दीं, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि उनके अध्यक्ष बनने के बाद की परिस्थितियां कांग्रेस की चरमराती सांगठनिक स्थिति को बयां कर रही हैं।
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‘सिर्फ 2 घंटे की विजिट में राजा वड़िंग की छुट्टी पर उठे सवाल’
अगर गौर करें तो अमन अरोड़ा ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के हटाए जाने की प्रक्रिया पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राजा वड़िंग ने बेहद कठिन परिस्थितियों में पार्टी की कमान संभाली और साढ़े चार साल तक कार्यकर्ताओं के बीच पसीना बहाया। लेकिन पंजाब के नए प्रभारी सचिन पायलट ने महज दो घंटे के अपने संक्षिप्त पंजाब दौरे में उन्हें पद से हटाने का फरमान जारी कर दिया।
दिलचस्प बात यह है कि परगट सिंह को अध्यक्ष बने कई दिन बीत जाने के बावजूद कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने उन्हें अब तक मुलाकात का समय नहीं दिया है। अमन अरोड़ा के अनुसार, नए अध्यक्ष का दिल्ली जाकर डॉ. मनमोहन सिंह के परिवार या अंबिका सोनी से मिलना शिष्टाचार हो सकता है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा समय न देना पंजाब कांग्रेस के प्रति उनके बेरुखे रवैये को प्रदर्शित करता है।
‘संगरूर और मालवा क्षेत्र के साथ हुए कथित धोखे की कहानी’
अमन अरोड़ा ने इस नियुक्ति में क्षेत्रीय असंतुलन की ओर इशारा करते हुए एक तुलनात्मक परिदृश्य सामने रखा है, जिसे नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:
| क्षेत्र / नेता | राजनीतिक कद व उम्मीदें | कांग्रेस हाईकमान का अंतिम फैसला |
|---|---|---|
| मालवा व संगरूर क्षेत्र | विजय इंदर सिंगला का नाम लंबे समय तक अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे रहा | आखिरी समय पर नाम काटकर मालवा क्षेत्र की उम्मीदों को दरकिनार किया गया |
| नया नेतृत्व (परगट सिंह) | पूर्व ओलंपियन, पूर्व पुलिस अधिकारी और तीन बार के विधायक | दो विरोधी गुटों के बीच केवल कुछ महीने निकालने के लिए किया गया अस्थायी समझौता |
| कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया | जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव और सांगठनिक मजबूती की उम्मीद | पार्टी के भीतर भारी सन्नाटा, सोशल मीडिया पर अंदरूनी कलह उजागर |
‘नशों के खिलाफ 15,000 विलेज डिफेंस कमेटियों का महाअभियान’
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी: जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमन अरोड़ा से पंजाब में नशों के कारण हो रही मौतों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार नशों को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस मुहिम में पुलिस के साथ-साथ अब पंजाब के आम लोग भी सीधे भागीदार बन रहे हैं।
समझने वाली बात यह है कि पंजाब के करीब 15,000 गांवों और शहरी वार्डों में इस समय ‘विलेज व वार्ड डिफेंस कमेटियां’ बेहद सक्रियता से काम कर रही हैं। इन कमेटियों के सदस्य और स्थानीय सरपंच नशा बेचने वाले संदिग्ध तत्वों की सूचना सीधे पुलिस को दे रहे हैं। अरोड़ा ने स्वीकार किया कि इस काम में जुड़े सरपंचों को कई बार धमकियों और असामाजिक तत्वों के कड़े विरोध का सामना भी करना पड़ता है, इसलिए पूरे समाज को एकजुट होकर इन साहसी लोगों का मनोबल बढ़ाना होगा।
‘पंजाब कांग्रेस के नए संगठन और मान सरकार की नीतियों का राजनीतिक विश्लेषण’
यदि पंजाब की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का तटस्थ विश्लेषण किया जाए, तो कांग्रेस द्वारा परगट सिंह की नियुक्ति वास्तव में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर मचे घमासान को शांत करने की एक कोशिश है। लेकिन विजय इंदर सिंगला जैसे मजबूत हिंदू चेहरे को दरकिनार करना मालवा और संगरूर के मतदाताओं के बीच एक नकारात्मक संदेश दे सकता है, जिसका सीधा फायदा आम आदमी पार्टी उठाने की कोशिश करेगी।
वहीं, नशों के मुद्दे पर मान सरकार द्वारा डिफेंस कमेटियों को ढाल बनाना यह दर्शाता है कि केवल पुलिसिया कार्रवाई के भरोसे नशामुक्ति संभव नहीं है; इसके लिए जनभागीदारी अनिवार्य है। हाईकोर्ट द्वारा डीजीपी को भेजी गई ईडी की रिपोर्ट की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले पर अमन अरोड़ा ने बेहद सधा हुआ रुख अपनाया और कहा कि वह अदालत के आदेशों का पूरा सम्मान करते हैं और सीबीआई को इस मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच करनी चाहिए।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह के जाने के बाद से शुरू हुआ अंतर्कलह थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजा वड़िंग के स्थान पर परगट सिंह को कमान सौंपने से पार्टी के भीतर नए सत्ता समीकरण बन रहे हैं। इसी उथल-पुथल के बीच आप सरकार के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे की कमजोरियों को जनता के सामने रखकर अपनी पार्टी की स्थिति को मजबूत करने का दांव खेला है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- अस्थायी समझौते का आरोप: अमन अरोड़ा ने कांग्रेस नेतृत्व को कार्यकर्ताओं की भावनाओं के विपरीत केवल गुटों के बीच एक अस्थायी समझौता करार दिया।
- मालवा की अनदेखी: संगरूर और मालवा के नेता विजय इंदर सिंगला को अध्यक्ष न बनाकर क्षेत्र की जनता की उम्मीदों के साथ खिलवाड़ करने का दावा किया।
- सीबीआई जांच का स्वागत: तबादला-पोस्टिंग मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के हाईकोर्ट के आदेश को सिर-माथे स्वीकार करते हुए निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई।
- नशामुक्त पंजाब का संकल्प: पंजाब के 15,000 गांवों में डिफेंस कमेटियां नशा तस्करों के खिलाफ जमीनी स्तर पर पुलिस का सहयोग कर रही हैं।











