Punjab Ballot Paper Elections: पंजाब में नगर निगम और नगर परिषद चुनाव अब बैलेट पेपर से ही होंगे। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन याचिकाओं को खारिज करते हुए काउंसिल चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने के लिए रास्ता साफ कर दिया है। याद रहे कि पंजाब में 26 मई को निगम और काउंसिल चुनावों के लिए मतदान होना है। विरोधी दलों ने राज्य चुनाव आयोग को मिलकर मांग की थी कि ये चुनाव ईवीएम मशीनों से कराए जाएं।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में ये चुनाव राज्य चुनाव आयोग द्वारा बैलेट पेपर से कराए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। बीते कल भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने अदालत में बताया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) राजस्थान से पंजाब के लिए रवाना हो चुकी हैं और शाम तक पंजाब पहुंच जाएंगी।
अंबाला पहुंच गईं 6000 ईवीएम मशीनें
देखा जाए तो यह मामला काफी दिलचस्प मोड़ लेता रहा। आज अदालत में चुनाव आयोग ने बताया कि राजस्थान से करीब छह हजार ईवीएम मशीनें अंबाला पहुंच चुकी हैं। चुनाव आयोग की ओर से सिर्फ एक-दो दिनों में ईवीएम तैयार होने का दावा किया था।
लेकिन राज्य चुनाव आयोग ने अदालत में बताया कि भारतीय चुनाव आयोग के मैनुअल के अनुसार ईवीएम की तैयारी के लिए ज्यादा दिनों की बात कही गई है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि समय की कमी को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर दीं।
मुख्य न्यायाधीश की बेंच का फैसला
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली बेंच ने फैसले में कहा है कि राज्य चुनाव आयोग द्वारा शेड्यूल जारी किया जा चुका है और चुनावों की प्रक्रिया चल रही है। अदालत ने अब देरी होने की दलील के आधार पर तीनों याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
अगर गौर करें तो कोर्ट ने यह भी माना कि चुनाव की प्रक्रिया एक बार शुरू हो जाने के बाद उसमें बीच में हस्तक्षेप करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए अदालत ने विरोधी दलों की मांग को नामंजूर कर दिया। अब ये चुनाव बैलेट पेपर से ही होंगे।
क्यों मांग रहे थे विरोधी दल ईवीएम?
समझने वाली बात यह है कि विरोधी दलों ने ईवीएम की मांग क्यों की थी। भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने एक साथ मिलकर राज्य चुनाव आयोग से मांग की थी कि स्थानीय निकाय चुनाव ईवीएम से कराए जाएं।
विरोधी दलों का तर्क था कि बैलेट पेपर से चुनाव में धांधली की संभावना ज्यादा रहती है। वहीं, ईवीएम से चुनाव पारदर्शी और तेज होते हैं। इसके अलावा वोटों की गिनती में भी ज्यादा समय नहीं लगता।
लेकिन आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने का फैसला किया। AAP का कहना था कि बैलेट पेपर से चुनाव ज्यादा भरोसेमंद होते हैं और मतदाताओं को अपनी पसंद का प्रतीक साफ दिखता है।
26 मई को होगा मतदान
26 मई 2025 को पंजाब के विभिन्न शहरों में नगर निगम और नगर परिषदों के चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर पंजाब में सियासी माहौल गर्म है। AAP, BJP, कांग्रेस और अकाली दल सभी दल पूरी ताकत से मैदान में उतरे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह चुनाव 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद पहला बड़ा चुनावी मुकाबला होगा। इसे अगले विधानसभा चुनाव से पहले की एक अहम कसौटी माना जा रहा है।
बैलेट पेपर बनाम ईवीएम: पुरानी बहस
यह बहस नई नहीं है। पूरे देश में समय-समय पर बैलेट पेपर और ईवीएम को लेकर बहस होती रही है। कुछ राजनीतिक दल और कार्यकर्ता ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं, जबकि चुनाव आयोग बार-बार ईवीएम को पूरी तरह सुरक्षित बताता है।
हालांकि, स्थानीय निकाय चुनावों में अभी भी कई राज्यों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। पंजाब में भी पहले स्थानीय चुनाव बैलेट पेपर से ही होते रहे हैं।
विरोधी दलों की निराशा
विरोधी दलों के लिए यह फैसला निराशाजनक है। BJP के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वे इस फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन बैलेट पेपर से चुनाव में पारदर्शिता की चिंता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि उनके पोलिंग एजेंट हर बूथ पर सतर्क रहेंगे।
वहीं, कांग्रेस नेताओं ने भी कहा कि वे चुनाव प्रक्रिया पर पैनी नजर रखेंगे और किसी भी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
AAP सरकार का पक्ष
AAP सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर सबसे पुराना और भरोसेमंद तरीका है और जनता को पूरा अधिकार है कि वह अपनी पसंद का चुनाव साफ तरीके से करे।
हालांकि, विरोधी दलों का आरोप है कि AAP को डर है कि ईवीएम से उनकी हार हो सकती है, इसलिए उन्होंने बैलेट पेपर का रास्ता चुना।
क्या होगी चुनौतियां?
बैलेट पेपर से चुनाव कराने में कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती वोटों की गिनती में लगने वाला समय है। ईवीएम से कुछ घंटों में नतीजे आ जाते हैं, जबकि बैलेट पेपर से कई दिन लग सकते हैं।
इसके अलावा, बैलेट पेपर को सुरक्षित रखना, ढुलाई और फिर गिनती के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी बड़ी जिम्मेदारी है। चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर स्तर पर कोई गड़बड़ी न हो।
अब सभी की नजरें 26 मई पर
अब सभी की नजरें 26 मई पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि पंजाब की जनता किस पार्टी को अपना समर्थन देती है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सभी दल बैलेट पेपर के हिसाब से अपनी रणनीति बना रहे हैं।
इस चुनाव के नतीजे पंजाब की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। अगर AAP अच्छा प्रदर्शन करती है तो उनकी सरकार को मजबूती मिलेगी। वहीं, अगर विरोधी दल बेहतर करते हैं तो सरकार के लिए यह चेतावनी होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ईवीएम से चुनाव की मांग वाली याचिकाएं खारिज कीं
- 26 मई को निगम और काउंसिल चुनाव बैलेट पेपर से होंगे
- राजस्थान से 6000 ईवीएम अंबाला पहुंच चुकी हैं लेकिन उनका इस्तेमाल नहीं होगा
- विरोधी दलों ने ईवीएम की मांग की थी, AAP ने बैलेट पेपर का समर्थन किया
- चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत ने दखल देने से इनकार किया













