Premanand Maharaj Controversy इस वक्त वृंदावन से निकलकर पूरे देश की चर्चा बन चुका है। 25 सितंबर 2026 को सुबह करीब साढ़े दस बजे वराह घाट स्थित गुरु कृपा कुंज इमारत की चौथी मंजिल से एक 25 वर्षीय शिष्य के गिरने की खबर आई, और वहीं से विवाद की वह कड़ी शुरू हुई जो 9 अक्टूबर तक मानवाधिकार आयोग की दखल, लापता शिष्यों के पोस्टर और एक बड़े माफीनामे तक पहुंच गई।
मामला सिर्फ एक मौत का नहीं रहा। अंगों की तस्करी, बच्चों की गुमशुदगी और जमीन के कारोबार : तीनों आरोप एक साथ सामने आए। और इन सबके बीच एक नाम ऐसा जुड़ा जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी : विराट कोहली।
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‘वह सुबह, वह कमरा और अनसुलझे सवाल’
जबलपुर के रहने वाले दीपक लोधी, जिन्हें दीक्षा के बाद रसिक दुलारी शरण नाम मिला था, 25 सितंबर की सुबह चौथी मंजिल से नीचे गिरे। पुलिस ने शुरुआत में इसे आत्महत्या का सीधा-सादा मामला माना।
लेकिन कमरे की तलाशी ने तस्वीर बदल दी। वहां खून से सनी बिजली से चलने वाली एक मार्बल कटर मशीन मिली। फॉरेंसिक जांच में सामने आया कि गिरने से पहले उन्होंने खुद को गंभीर चोट पहुंचाई थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह अत्यधिक रक्तस्राव और ऊंचाई से गिरने के कारण आई अंदरूनी चोटें बताई गईं। देखा जाए तो यही वह बिंदु था जहां एक “सामान्य केस” एक राष्ट्रीय सुर्खी में बदल गया।
‘पांच महीने पुरानी वह दरार, जिसे किसी ने गंभीरता से नहीं लिया’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ। मई 2026 से ही आश्रम प्रबंधन दो हिस्सों में बंटा नजर आने लगा था।
एक तरफ रमण रेती का मुख्य राधा केलिकुंज आश्रम, दूसरी तरफ करीब 20 किलोमीटर दूर बेलवन का यमुना विहार कुंज। बताया जाता है कि कुछ बाहरी शिष्यों की गतिविधियों और भूमाफिया से कथित संबंधों से व्यथित होकर प्रेमानंद महाराज एकांतवास के लिए बेलवन चले गए थे।
समझने वाली बात है : जब संत खुद दूरी बना लें, तो प्रबंधन की कमान किसके हाथ रहती है? यही सवाल आगे चलकर सबसे बड़ा बना।
‘दीवारों पर लापता पोस्टर और 6 अक्टूबर का बवाल’
मौत के बाद वृंदावन की दीवारों पर “लापता” पोस्टर चिपकने लगे। ओडिशा के केशवानंद और साकेत नामदेव के नाम सामने आए।
6 अक्टूबर को हालात बिगड़ गए। हाथरस के अनुज चौधरी और प्रिंस नाम के नाबालिगों के परिजन आश्रम के बाहर धरने पर बैठे, और सेवादारों से हाथापाई तक हो गई।
राहत की बात यह रही कि अनुज चौधरी बाद में बरसाना के एक दूसरे आश्रम में सुरक्षित मिल गए। कासगंज के मयंक प्रयागराज में मिले। लेकिन परिजनों का आरोप कायम रहा : आश्रम में रहने वालों का कोई ठोस रिकॉर्ड ही नहीं रखा जाता।
‘Premanand Maharaj Controversy में कोहली का नाम कैसे आया’
अब आता है वह मोड़ जिसने मामले को देशव्यापी बना दिया। श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा, जिन्हें फलाहारी बाबा कहा जाता है, ने मुख्यमंत्री और बाल संरक्षण आयोग को पत्र लिखा।
उनका दावा था कि 2023 में एक पीआर कंपनी और भूमाफिया लॉबी ने 5 करोड़ रुपये खर्च करके विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को वृंदावन बुलाया, ताकि आसपास की जमीनों के दाम चढ़ाए जा सकें।
इतना ही नहीं : उन्होंने मानव अंग तस्करी और बच्चों की तस्करी का आरोप भी लगाया, और सरकारी डॉक्टरों की टीम से प्रेमानंद महाराज के गुर्दों तथा सेहत की निष्पक्ष जांच तक की मांग कर डाली।
7 अक्टूबर को विराट कोहली के प्रवक्ता ने बयान जारी कर इन आरोपों को “पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद” बताया। कहा गया कि कोहली और अनुष्का का वृंदावन आना-जाना सिर्फ निजी आस्था से जुड़ा है।
‘9 दिन की चुप्पी, फिर आया ट्रस्ट का बयान’
दिलचस्प बात यह है कि राधा केलिकुंज ट्रस्ट पूरे नौ दिन खामोश रहा। जब बयान आया, तो उसमें कहा गया कि महाराज श्री इस पूरे घटनाक्रम से बेहद आहत हैं।
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य खुलकर समर्थन में उतरे। उनका कहना था कि टीआरपी के लिए संतों को बदनाम किया जा रहा है। बागेश्वर बाबा ने भी अपने भक्तों को सतर्क रहने की सलाह दी।
और फिर 9 अक्टूबर को वह हुआ जिसकी उम्मीद कम थी : दिनेश शर्मा ने प्रेमानंद महाराज और उनके अनुयायियों से बिना शर्त माफी मांग ली।
‘पूरे घटनाक्रम पर एक नजर’
| तारीख (2026) | क्या हुआ |
|---|---|
| मई 2026 | आश्रम प्रबंधन में दरार, महाराज बेलवन के यमुना विहार कुंज शिफ्ट |
| 25 सितंबर | गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल से शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत |
| 6 अक्टूबर | लापता नाबालिगों के परिजनों और सेवादारों में हाथापाई |
| 7 अक्टूबर | विराट कोहली के प्रवक्ता ने 5 करोड़ के आरोप को खारिज किया |
| 9 अक्टूबर | दिनेश शर्मा का बिना शर्त माफीनामा, NHRC की दखल |
‘मानवाधिकार आयोग सक्रिय, आगरा जोन के ADG को जिम्मा’
शिष्य की मौत के भयावह ब्योरे सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने खुद संज्ञान लिया। आयोग ने आगरा जोन के एडीजी को उच्चस्तरीय फॉरेंसिक जांच का निर्देश दिया है।
जांच में यह तथ्य भी दर्ज हुआ कि आश्रम के भीतर शिष्यों के मोबाइल इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी थी। चिंता का विषय यही है : जब संवाद के रास्ते बंद हों, तो परिजनों तक सूचना पहुंचे कैसे?
‘आश्रम ने बदले नियम : दर्शन बंद, ड्रेस कोड खत्म’
विवाद के बाद केलिकुंज ट्रस्ट ने कई बड़े फैसले लिए। टोकन व्यवस्था से होने वाले सार्वजनिक दर्शन फिलहाल पूरी तरह रोक दिए गए हैं।
नए लोगों को दीक्षा देने के कार्यक्रम भी बंद कर दिए गए। शिष्यों के लिए जो अनिवार्य विशेष ड्रेस कोड चल रहा था, उसे तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया। सुरक्षा और बैरिकेडिंग अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त है।
‘आम भक्त पर इसका सीधा असर क्या’
अगर गौर करें तो सबसे बड़ी चोट उस आम श्रद्धालु पर पड़ी है जो महीनों इंतजार के बाद दर्शन के लिए पहुंचता था। दर्शन और दीक्षा दोनों रुकने से हजारों लोगों की योजनाएं अटक गई हैं।
वहीं दूसरी ओर, यह मामला एक बड़ा सबक भी छोड़ रहा है : किसी भी आश्रम में रहने वाले लोगों का रजिस्टर, उनकी पहचान और परिजनों से संपर्क का रिकॉर्ड कितना जरूरी है। सवाल उठता है कि अगर यह व्यवस्था पहले से होती, तो क्या “लापता पोस्टर” वाली नौबत आती?
‘जानें पूरा मामला’
प्रेमानंद महाराज वृंदावन के चर्चित संत हैं, जिनका बड़ा अनुयायी वर्ग है और जिनके आश्रम में फिल्मी-खेल जगत की हस्तियां भी पहुंचती रही हैं। 2023 में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की यात्रा खासी चर्चा में रही थी। मई 2026 से आश्रम प्रबंधन दो धड़ों में बंटा, महाराज बेलवन चले गए, और सितंबर में एक शिष्य की मौत ने अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक बहस में बदल दिया। अब जांच का रुख तय करेगा कि आरोपों में कितना दम था।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- 25 सितंबर 2026 को वृंदावन के गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल से गिरकर 25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण (दीपक लोधी) की मौत हुई।
- दिनेश शर्मा ने अंग तस्करी, बच्चों की तस्करी और विराट कोहली से जुड़े 5 करोड़ के पीआर खर्च का आरोप लगाया, जिसे 7 अक्टूबर को कोहली के प्रवक्ता ने बेबुनियाद बताया।
- 9 अक्टूबर को दिनेश शर्मा ने बिना शर्त माफी मांगी, जबकि NHRC ने आगरा जोन के ADG को फॉरेंसिक जांच का निर्देश दिया।
- आश्रम ने सार्वजनिक दर्शन और दीक्षा रोक दी, अनिवार्य ड्रेस कोड खत्म किया और सुरक्षा बेहद सख्त कर दी।













