Premanand Maharaj Ashram यानी वृंदावन के अत्यंत प्रसिद्ध श्रीराधा केलिकुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की अचानक हुई मृत्यु के बाद विवाद बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। इस घटना के बाद आश्रम के भीतर गहरे मतभेद, गुटबाजी और बाहरी लोगों के हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लग रहे हैं। इन संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा तत्काल बढ़ाकर Z+ श्रेणी की करने की मांग की है।
देखा जाए तो जिस स्थान पर रोजाना हजारों श्रद्धालु केवल मानसिक शांति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की तलाश में पहुंचते हैं, वहां से आ रहे इस तरह के गंभीर आरोप भक्तों को बेहद परेशान करने वाले हैं।
🔍 यह भी पढ़ें- President Draupadi Murmu ने Premanand Maharaj से लिया आशीर्वाद, रचा इतिहास
‘शिष्यों के बीच गुटबाजी और भूमाफिया के कथित कनेक्शन’
अगर गौर करें तो दिनेश फलाहारी द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि संत प्रेमानंद महाराज के शिष्यों के बीच इस समय दो स्पष्ट और विरोधी गुट बन चुके हैं। उनका सीधा आरोप है कि इनमें से एक गुट जो सीधे तौर पर श्रीराधा केलिकुंज आश्रम के संचालन से जुड़ा हुआ है, उसमें कुछ असामाजिक और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग व कथित भूमाफिया शामिल हो गए हैं। यह लोग संत की प्रसिद्धि और उनके नाम की आड़ में बड़े पैमाने पर संपत्तियों की डीलिंग और वित्तीय अनियमितताएं कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इन गंभीर आंतरिक विवादों और गुटबाजी से अत्यधिक आहत होकर संत प्रेमानंद महाराज ने अपने कुछ अत्यंत करीबी और तपस्वी साथियों के साथ मिलकर यमुना पार बेलवन स्थित अपने दूसरे शांत आश्रम में शरण ले ली है। पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि यमुना खादर क्षेत्र में कथित तौर पर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम कर रहे संदिग्ध साधुओं की संपत्ति की सघन जांच होनी चाहिए और आश्रम के सीसीटीवी फुटेज को तुरंत पुलिस संरक्षण में सुरक्षित किया जाना चाहिए।
‘विवाद के मुख्य बिंदु और जांच की मांगें’
इस पूरे घटनाक्रम में जिन प्रमुख मुद्दों पर त्वरित जांच और सुरक्षात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही है, उन्हें नीचे दिए गए विवरण से समझा जा सकता है:
| विवाद का विषय | लगाए गए मुख्य आरोप | मांग की गई कानूनी कार्रवाई |
|---|---|---|
| संत की व्यक्तिगत सुरक्षा | गुटबाजी और असामाजिक तत्वों के कारण संत प्रेमानंद महाराज की जान को खतरा | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संत के लिए तत्काल Z+ श्रेणी की सुरक्षा की मांग |
| शिष्य की संदिग्ध मृत्यु | रसिक दुलारी शरण की असमय मृत्यु की परिस्थितियां संदिग्ध और विवादित | मृत्यु के कारणों की निष्पक्ष पुलिस और प्रशासनिक जांच |
| बच्चों का कथित लापता होना | अध्यात्म की आड़ में नाबालिग बालक-बालिकाओं को बंधक बनाने की आशंका | बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा स्वतंत्र जांच और सेवादारों का पुलिस वेरिफिकेशन |
| वित्तीय व भू-संपत्ति विवाद | आश्रम की आड़ में यमुना खादर में अवैध प्रॉपर्टी डीलिंग और माफियाओं का दखल | संदिग्ध साधुओं और सेवादारों की संपत्तियों की सघन वित्तीय जांच |
‘नाबालिग बच्चों को बंधक बनाने के संवेदनशील आरोप’
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी: इस पूरे विवाद का सबसे हैरान करने वाला और संवेदनशील हिस्सा नाबालिग बच्चों से जुड़ा हुआ है। पत्र में दावा किया गया है कि कई बालक और बालिकाएं भक्ति के प्रवाह में बहकर इस आश्रम में रहने के लिए घर छोड़ देते हैं और बाद में उनके लाचार माता-पिता उन्हें ढूंढते हुए आश्रम के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं।
दिनेश फलाहारी ने इसी आधार पर यह गंभीर सवाल खड़ा किया है कि कहीं अध्यात्म और सेवा की आड़ में इन बच्चों को बंधक तो नहीं बनाया जा रहा है? उन्होंने बाल अधिकार संरक्षण आयोग से इस पूरे मामले की गहनता से जांच कराने की पुरजोर वकालत की है ताकि पीड़ित परिवारों की शिकायतों का निपटारा हो सके और यदि कोई बच्चा वास्तव में लापता या बंधक है, तो उसे सकुशल उसके परिवार तक पहुँचाया जा सके। इसके साथ ही आश्रम में कार्यरत सभी बाहरी सेवादारों के अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन की भी मांग की गई है।
‘धार्मिक स्थलों की शुचिता और प्रशासन के समक्ष सुरक्षा की चुनौती’
इस पूरे विवाद का गहरा प्रशासनिक और सामाजिक विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि देश के सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्रों में से एक के भीतर से इस प्रकार के आरोपों का बाहर आना कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। जब भी किसी धार्मिक या आध्यात्मिक व्यक्तित्व की लोकप्रियता अत्यधिक बढ़ जाती है, तो उनके चारों ओर असामाजिक और व्यावसायिक हितों वाले तत्वों का जमावड़ा होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
इस मामले में केवल आरोपों को आधार मानकर किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी, लेकिन चूँकि संत प्रेमानंद महाराज के चाहने वाले दुनिया भर में करोड़ों की संख्या में हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता। यदि आश्रम के भीतर किसी भी प्रकार की आपराधिक गुटबाजी या अवैध प्रॉपर्टी डीलिंग की पुष्टि होती है, तो यह संपूर्ण ब्रज क्षेत्र की पवित्रता और विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा। प्रशासन को इस संवेदनशील मामले में बिना किसी देरी के दूध का दूध और पानी का पानी करना होगा।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
वृंदावन के श्रीराधा केलिकुंज आश्रम का संचालन संत प्रेमानंद महाराज की देखरेख में होता है, जो अपने राधा नाम संकीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए देश-विदेश में बेहद पूजनीय हैं। हाल ही में उनके परम प्रिय शिष्य रसिक दुलारी शरण की मृत्यु हो गई, जिसके बाद से ही आश्रम की आंतरिक व्यवस्थाओं, सेवादारों के व्यवहार और संपत्तियों को लेकर बाहरी और आंतरिक स्तर पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए, जिसने अब एक बड़े प्रशासनिक और सुरक्षा विवाद का रूप ले लिया है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- Z+ सुरक्षा की मांग: संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को खतरे में बताते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास ने सरकार से Z+ सुरक्षा की मांग की है।
- गंभीर गुटबाजी के आरोप: आश्रम के सेवादारों के बीच दो स्पष्ट गुट बनने और कथित भूमाफियाओं के हस्तक्षेप की बात पत्र में कही गई है।
- बच्चों के लापता होने की जांच: बाल आयोग से उन आरोपों की जांच कराने की मांग की गई है जिनमें बच्चों को बहला-फुसलाकर आश्रम में रखने या बंधक बनाने की आशंका जताई गई है।
- यमुना पार प्रस्थान: विवादों और आंतरिक कलह से व्यथित होकर संत प्रेमानंद महाराज के यमुना पार बेलवन स्थित आश्रम में चले जाने का दावा किया गया है।












