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The News Air - Breaking News - Elon Musk Attack BJP: आखिर ‘प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ क्यों कहा?

Elon Musk Attack BJP: आखिर ‘प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ क्यों कहा?

एलॉन मस्क ने दो पुरानी रिपोर्ट्स शेयर कर रिलायंस से जुड़ी कंपनियों और भाजपा की फंडिंग का मुद्दा फिर उठाया।

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, बिज़नेस, राष्ट्रीय
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Elon Musk Attack BJP
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Elon Musk Attack BJP का मामला अब सिर्फ एक कारोबारी तकरार नहीं रहा। पिछले कुछ दिनों से एलॉन मस्क सीधे मुकेश अंबानी पर हमला कर रहे थे कि भारत के अंदर असली बॉस अंबानी हैं, और देर रात तो उन्होंने “प्राइम मिनिस्टर मुकेश अंबानी” तक कह दिया।

अब कुछ ही देर पहले मस्क ने एक और ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने सीधे भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने दो रिपोर्ट्स शेयर की हैं और चुनावों के दौरान होने वाले डोनेशन व फंडिंग के कनेक्शन को जोड़ने की कोशिश की है।

🔍 यह भी पढ़ें- 28 June in History: WWI की शुरुआत, Elon Musk Birthday और Treaty of Versailles

‘पहली रिपोर्ट : Facebook पर 2019 के चुनाव का विज्ञापन विवाद’

पहली रिपोर्ट अल जजीरा की है, जो 2022 में प्रकाशित हुई थी। इसका शीर्षक था कि कैसे एक रिलायंस-फंडेड फर्म ने Facebook पर भाजपा के कैंपेन को बूस्ट किया।

मामला 2019 के आम चुनाव का है। रिपोर्ट में एक डिजिटल मीडिया कंपनी की गतिविधियों की पड़ताल की गई, जिसका नाम है न्यू इमर्जिंग वर्ल्ड ऑफ जर्नलिज्म।

आरोप यह है कि यह मीडिया कंपनी, जो Jio प्लेटफॉर्म की ही सब्सिडरी बताई गई, भाजपा उम्मीदवारों के फेवर में कंटेंट प्रमोट कर रही थी और विपक्षी नेताओं को क्रिटिसाइज किया जा रहा था।

‘सरोगेट विज्ञापन : जब विज्ञापन को खबर बताकर दिखाया गया’

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कुछ विज्ञापन ऐसे भी थे जिन्हें न्यूज रिपोर्ट्स की तरह दिखाया जा रहा था, जबकि असल में वे विज्ञापन थे।

नियम साफ है : अगर आप कोई विज्ञापन दिखा रहे हैं तो लोगों को स्पष्ट पता होना चाहिए कि यह विज्ञापन है। अगर उसे खबर बताकर परोसा जाए तो पाठक उसे जेन्युइन और न्यूट्रल मान लेता है, और यहीं से प्रभाव पड़ना शुरू होता है।

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जांच में यह भी आरोप लगा कि विज्ञापनों में भ्रामक और झूठे दावे शामिल थे।

‘आंकड़ों में पहली रिपोर्ट’
बिंदुआंकड़ा
अवधिफरवरी 2019 से नवंबर 2020
राजनीतिक विज्ञापन718
कुल व्यूज290 मिलियन
अनुमानित खर्चलगभग ₹52 लाख
‘दूसरी रिपोर्ट : इलेक्टोरल बॉन्ड और क्विक सप्लाई चेन’

दूसरा स्क्रीनशॉट मस्क ने इंडियन एक्सप्रेस का लगाया, जो 2024 का है। इसमें लिखा था कि रिलायंस-लिंक्ड क्विक सप्लाई ने भाजपा को ₹385 करोड़ और शिवसेना को ₹25 करोड़ दिए।

बॉन्ड की कहानी समझिए। इलेक्टोरल बॉन्ड्स 2018 में आए थे, एनडीए सरकार इन्हें लेकर आई थी। तर्क यह था कि राजनीतिक दलों को भारी कैश फंडिंग मिलती है, इसलिए एक सीमा से ऊपर का भुगतान कैश में नहीं, बैंक ट्रांजैक्शन से होगा।

व्यवस्था यह थी कि कोई कंपनी या व्यक्ति एसबीआई से बॉन्ड खरीदे, वह बॉन्ड पार्टी को दे, और पार्टी बैंक जाकर पैसा कलेक्ट कर ले।

‘विपक्ष का सबसे बड़ा एतराज और सुप्रीम कोर्ट का फैसला’

विपक्ष का आरोप था कि सरकार को तो सारा ट्रांजैक्शन पता होगा। कांग्रेस को यह नहीं पता चलेगा कि भाजपा को कौन फंड कर रहा है, लेकिन भाजपा सरकार के जरिए जान लेगी कि कांग्रेस को कौन फंड कर रहा है : और फिर उसे परेशान किया जाएगा।

मामला सुप्रीम कोर्ट गया। अदालत ने कहा कि बॉन्ड स्कीम असंवैधानिक है और यह अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत वोटर्स के अधिकार के खिलाफ जाती है।

‘क्विक सप्लाई चेन का रिलायंस कनेक्शन कैसे जुड़ा’

रिपोर्ट के मुताबिक क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड ने 410 करोड़ के बॉन्ड्स खरीदकर राजनीतिक दलों को दिए। इसमें से करीब 385 करोड़ भाजपा और करीब 25 करोड़ शिवसेना को गए।

रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में हुई फाइलिंग के मुताबिक रिलायंस की तीन कंपनियां : रिलायंस ग्रुप सपोर्ट, रिलायंस फायर ब्रिगेड और रिलायंस हॉस्पिटल मैनेजमेंट : इस कंपनी में कुल 50% हिस्सेदारी रखती हैं।

इतना ही नहीं, क्विक सप्लाई चेन के डायरेक्टर रिलायंस से जुड़ी कई कंपनियों में भी डायरेक्टर बताए गए।

‘कुल बॉन्ड तस्वीर : 82% हिस्सा एक ही पार्टी के पास’
मदआंकड़ा
कुल खरीदे गए बॉन्ड3800 करोड़ रुपये से ज्यादा
भाजपा को मिला3157 करोड़ रुपये (करीब 82%)
बाकी सभी दलों को668 करोड़ रुपये
‘स्टारलिंक की असली जड़ : मस्क क्यों नाराज हैं’

मस्क बार-बार अंबानी को इसलिए निशाना बना रहे थे क्योंकि उनका कहना है कि स्टारलिंक के भारत आने से मोनोपोली टूट जाएगी।

हालांकि सीधा लिंक बनता नहीं दिखता। भारत में इंटरनेट दुनिया के मुकाबले काफी सस्ता है, जबकि स्टारलिंक अपने आप में महंगा होगा : और बहुत कम लोग उसे अफोर्ड कर पाएंगे।

शहरी इलाकों में इसकी जरूरत भी कम है। असली उपयोग आपदा के समय, ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज के द्वीपीय क्षेत्रों में हो सकता है, जहां नेटवर्क नहीं पहुंचता।

‘सरकार का पक्ष और जवाबी हमला’

भारत सरकार का कहना है कि सबके लिए नियम एक समान हैं। सैटेलाइट और राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला होने के कारण जांच चल रही है। Jio और Airtel ने भी सैटेलाइट के लिए आवेदन किया है, लेकिन अभी तक किसी को परमिशन नहीं मिली है।

दूसरी ओर, जैसे ही मस्क ने भाजपा पर हमला किया, बहुत से लोगों ने उन्हें ही घेर लिया : 2024 के अमेरिकी चुनाव में उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और उनके पार्टी कैंडिडेट्स को 288 मिलियन डॉलर दिए थे, जो उस समय तक के पूरे चुनाव साइकिल में सबसे बड़ा फंडिंग बताया जाता है।

‘असली फर्क : पारदर्शिता बनाम गोपनीयता’

यहां फर्क समझना जरूरी है। अमेरिका में मस्क खुलकर सामने आए, मंच पर जाकर ट्रंप को समर्थन देने की बात कही : लोगों को पता था कि वे कितना फंड कर रहे हैं।

मामला तब गड़बड़ होता है जब किसी को पता ही न चले। अगर कोई बड़ी कंपनी भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी : सबको पैसा दे रही है, तो पता कैसे चलेगा?

सवाल उठता है कि क्या फंडिंग का मतलब सीधे भ्रष्टाचार है? सीधे तो नहीं कह सकते। भारत में शायद ही कोई पार्टी होगी जो बिजनेस हाउस से फंडिंग न लेती हो। शक यही रहता है कि सत्ता में आने के बाद फंडिंग देने वाले को फेवर मिल सकता है, लेकिन यह सब अदालत में साबित करना बेहद मुश्किल होता है।

‘जानें पूरा मामला’

एलॉन मस्क की स्टारलिंक सेवा की भारत में एंट्री को लेकर लंबे समय से चर्चा है। मस्क का आरोप है कि उनकी एंट्री रोकी जा रही है और इसके पीछे मोनोपोली है। इसी क्रम में उन्होंने मुकेश अंबानी पर तीखे हमले किए और अब दो पुरानी रिपोर्ट्स : 2019 के चुनाव से जुड़ा Facebook विज्ञापन मामला और 2024 का इलेक्टोरल बॉन्ड खुलासा : शेयर कर राजनीतिक फंडिंग का मुद्दा दोबारा गरमा दिया है।

‘मुख्य बातें (Key Points)’
  • मस्क ने दो रिपोर्ट्स शेयर कर रिलायंस और भाजपा के कथित फंडिंग कनेक्शन पर सवाल उठाए।
  • अल जजीरा रिपोर्ट : फरवरी 2019 से नवंबर 2020 के बीच 718 राजनीतिक विज्ञापन, 290 मिलियन व्यूज, करीब ₹52 लाख खर्च।
  • क्विक सप्लाई चेन ने 410 करोड़ के बॉन्ड खरीदे, करीब 385 करोड़ भाजपा और 25 करोड़ शिवसेना को।
  • कुल 3800 करोड़ से ज्यादा के बॉन्ड में से 3157 करोड़ (82%) अकेले भाजपा को मिले; सुप्रीम कोर्ट ने स्कीम असंवैधानिक करार दी।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एलॉन मस्क ने कौन सी दो रिपोर्ट्स शेयर की हैं?

पहली अल जजीरा की 2022 की रिपोर्ट, जिसमें रिलायंस-फंडेड फर्म द्वारा Facebook पर भाजपा कैंपेन बूस्ट करने का आरोप है। दूसरी इंडियन एक्सप्रेस की 2024 की रिपोर्ट, जिसमें रिलायंस-लिंक्ड क्विक सप्लाई द्वारा भाजपा को ₹385 करोड़ और शिवसेना को ₹25 करोड़ देने की बात है।

2. इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम का क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट ने इस स्कीम को असंवैधानिक करार दिया था और कहा था कि यह अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत वोटर्स के अधिकार के खिलाफ जाती है।

3. मस्क अंबानी को निशाना क्यों बना रहे हैं?

मस्क का कहना है कि स्टारलिंक के भारत आने से मोनोपोली टूट जाएगी और उनकी एंट्री रोकी जा रही है। सरकार का पक्ष है कि सैटेलाइट व राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला होने के कारण जांच जारी है और अभी Jio व Airtel समेत किसी को परमिशन नहीं मिली।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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