NEET UG 2026 Scam : पटना/लखीसराय। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पता चला है कि कुख्यात ‘सॉल्वर गैंग’ ने परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में ही सेंध लगा दी थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे काले धंधे के मास्टरमाइंड पावापुरी और पटना मेडिकल कॉलेज के वही छात्र निकले जिन्हें कल डॉक्टर बनना था। अंदरूनी स्टाफ की मदद से प्रति उम्मीदवार 10 से 12 लाख रुपये लेकर फर्जी परीक्षार्थी बैठाए गए।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक परीक्षा घोटाला नहीं बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और चिकित्सा क्षेत्र की नैतिकता पर एक बड़ा सवालिया निशान है। जिस बायोमेट्रिक सिस्टम के भरोसे पूरी परीक्षा थी, सॉल्वर गैंग ने उसी में सेंध लगा दी। अब तक 30 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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बायोमेट्रिक सत्यापन में ही लगाई सेंध
NEET UG 2026 Scam की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि गिरोह ने पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगा दी थी। बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थियों को वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश दिलाया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में यह साफ हुआ है कि पावापुरी मेडिकल कॉलेज राजगीर का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क का मुख्य संचालक था। उसने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को सॉल्वर के रूप में तैयार कर परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई थी।
समझने वाली बात यह है कि बायोमेट्रिक सत्यापन को सबसे सुरक्षित माना जाता था। फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन से यह सुनिश्चित होता है कि परीक्षा देने वाला वही व्यक्ति है जिसका रजिस्ट्रेशन है। लेकिन अगर सिस्टम चलाने वाला ही भ्रष्ट हो तो कोई भी तकनीक विफल हो जाती है।
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पटना मेडिकल कॉलेज के छात्र ने बायोमेट्रिक स्टाफ बनकर किया काम
जांच में सामने आया कि पटना मेडिकल कॉलेज के चौथे वर्ष के छात्र और हाजीपुर निवासी मयंक कश्यप ने अंकित कुमार की पहचान पर बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया। यही वह कड़ी थी जिसके जरिए गिरोह ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया और सॉल्वर्स को केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाने में सफलता हासिल की।
घोटाले का तरीका:
| कदम | विवरण |
|---|---|
| 1. उम्मीदवार की तलाश | धनी परिवारों के बच्चे जो किसी भी कीमत पर मेडिकल सीट चाहते थे |
| 2. सौदा | 10-12 लाख रुपये में डील, एडवांस में 1-2 लाख |
| 3. सॉल्वर तैयार करना | मेडिकल कॉलेजों के होनहार छात्रों को सॉल्वर बनाया |
| 4. बायोमेट्रिक स्टाफ में घुसपैठ | मेडिकल छात्र बायोमेट्रिक स्टाफ बनकर काम करते |
| 5. सत्यापन में हेराफेरी | फर्जी उम्मीदवार को असली के रूप में पास किया |
| 6. परीक्षा | सॉल्वर ने परीक्षा दी और सवाल हल किए |
दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा सिस्टम बेहद व्यवस्थित था। हर कड़ी में अलग-अलग लोग थे। कोई उम्मीदवार ढूंढता था, कोई सॉल्वर तैयार करता था, कोई बायोमेट्रिक सिस्टम संभालता था।
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9 सॉल्वर सभी मेडिकल छात्र, कुल 30 गिरफ्तार
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए नौ सॉल्वर सभी मेडिकल छात्र बताए जा रहे हैं। इनके अलावा बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कर्मियों और गिरोह के अन्य सदस्यों समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में एक मूल परीक्षार्थी भी शामिल है जिसने यह सेवा ली थी।
पुलिस कुछ अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ आगे बढ़ने के साथ गिरोह के नेटवर्क और इसके आर्थिक लेनदेन से जुड़े नए नाम सामने आ सकते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी सॉल्वर खुद मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। यानी वे समझदार और शिक्षित युवा हैं। लेकिन पैसे के लालच में उन्होंने यह काम किया। सवाल यह है कि जो युवा खुद धोखाधड़ी से आगे बढ़ रहे हैं, वे कल अच्छे डॉक्टर कैसे बनेंगे?
10 से 12 लाख रुपये की डील, 1-2 लाख एडवांस
लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये में सौदा तय होने की जानकारी मिली है। इसमें 1 से 2 लाख रुपये पहले ही ले लिए गए थे, जबकि बची हुई राशि परीक्षा में सफलता और नामांकन के बाद भुगतान की जानी थी।
यह एक बड़ा आर्थिक रैकेट है। अगर मान लीजिए कि गिरोह ने केवल 50 उम्मीदवारों को भी यह सेवा दी हो तो 10 लाख के हिसाब से 5 करोड़ रुपये का धंधा बनता है। और संभावना है कि संख्या इससे कहीं ज्यादा हो।
NEET UG 2026 Scam में पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कर रही है। पैसे का ट्रेल फॉलो करके पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।
केंद्रीय विद्यालय लखीसराय में FIR दर्ज
केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्रिंसिपल सह सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत के आवेदन पर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह परीक्षा केंद्र उन केंद्रों में से एक था जहां यह धोखाधड़ी हुई थी।
एसडीपीओ का कहना है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और पूरे रैकेट में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
समझने वाली बात यह है कि यह घोटाला केवल लखीसराय तक सीमित नहीं हो सकता। NEET परीक्षा पूरे देश में एक साथ होती है। अगर एक जगह ऐसा हुआ तो दूसरी जगहों पर भी हो सकता है। NTA (National Testing Agency) को पूरे देश में जांच करनी चाहिए।
यह पहली बार नहीं, NEET में घोटालों का इतिहास
दुर्भाग्य से NEET UG 2026 Scam कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कई सालों से NEET परीक्षा में घोटाले होते रहे हैं:
NEET 2024: पेपर लीक के आरोप, कई राज्यों में जांच
NEET 2023: सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, राजस्थान और गुजरात में गिरफ्तारियां
NEET 2021: ओडिशा में बड़ा घोटाला, 30 से ज्यादा गिरफ्तार
NEET 2019: हरियाणा और राजस्थान में पेपर लीक
हर साल NTA कहता है कि सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। बायोमेट्रिक, CCTV, सख्त निगरानी—सब कुछ लगाया जाता है। फिर भी घोटाले होते रहते हैं। इसका मतलब है कि समस्या सिस्टम में गहरी है।
ईमानदार छात्रों की मेहनत पर पानी
NEET UG 2026 Scam सबसे ज्यादा उन लाखों ईमानदार छात्रों के साथ अन्याय है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। वे कोचिंग के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं। अपनी नींद और सामाजिक जीवन की कुर्बानी देते हैं। सिर्फ इसलिए कि वे डॉक्टर बनना चाहते हैं।
लेकिन जब कोई पैसे देकर शॉर्टकट से सीट हासिल कर लेता है तो यह उन ईमानदार छात्रों के साथ धोखा है। एक सीट जो किसी मेहनती छात्र को मिलनी चाहिए थी, वह किसी अयोग्य को मिल जाती है।
दिलचस्प बात यह है कि जो छात्र धोखे से डॉक्टर बनेगा, वह कल आपका या मेरा इलाज करेगा। क्या आप ऐसे डॉक्टर पर भरोसा कर सकते हैं जिसने अपना करियर ही धोखे से शुरू किया हो?
समाधान क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि NEET परीक्षा प्रणाली में कई सुधार जरूरी हैं:
पूरी तरह डिजिटल परीक्षा: कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट जहां हर छात्र को अलग-अलग प्रश्न मिलें
AI-आधारित निगरानी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता से असामान्य पैटर्न पकड़ना
बायोमेट्रिक स्टाफ की जांच: जो स्टाफ बायोमेट्रिक चलाए, उसकी भी सख्त जांच
तुरंत कार्रवाई: धोखाधड़ी पकड़ी जाए तो तुरंत सजा
जीवन भर प्रतिबंध: पकड़े गए छात्रों और सॉल्वर्स पर जीवन भर के लिए प्रतिबंध
कानूनी सख्ती: भारी जुर्माना और जेल की सजा
NTA और सरकार की जिम्मेदारी
National Testing Agency (NTA) और शिक्षा मंत्रालय को इस मामले को गंभीरता से लेना होगा। सिर्फ गिरफ्तारियां काफी नहीं हैं। पूरी परीक्षा प्रणाली की समीक्षा जरूरी है।
कुछ सवाल जो सरकार को जवाब देने होंगे:
- बायोमेट्रिक स्टाफ की भर्ती और वेरिफिकेशन कैसे हुई?
- क्या परीक्षा केंद्रों पर CCTV फुटेज की जांच की गई?
- NTA की निगरानी टीम कहां थी?
- क्या अन्य राज्यों में भी ऐसा हुआ?
- इस घोटाले के लिए कौन जिम्मेदार है?
मुख्य बातें (Key Points)
- NEET UG 2026 परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में सेंध, बड़े घोटाले का पर्दाफाश
- पावापुरी और पटना मेडिकल कॉलेज के छात्र मास्टरमाइंड, रविशंकर मुख्य संचालक
- मयंक कश्यप ने बायोमेट्रिक स्टाफ बनकर सिस्टम हैक किया
- 10-12 लाख रुपये प्रति उम्मीदवार की डील, 1-2 लाख एडवांस
- 9 सॉल्वर सभी मेडिकल छात्र, कुल 30 लोग गिरफ्तार
- बैंक अकाउंट और डिजिटल लेनदेन की जांच जारी
- ईमानदार छात्रों की मेहनत पर पानी, परीक्षा प्रणाली में सुधार जरूरी










