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The News Air - Breaking News - NEET UG 2026 Scam: नीट परीक्षा में बायोमेट्रिक हैक! सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड निकले मेडिकल छात्र

NEET UG 2026 Scam: नीट परीक्षा में बायोमेट्रिक हैक! सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड निकले मेडिकल छात्र

पावापुरी और पटना मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने रची साजिश, 10-12 लाख में बेची सीटें, 30 गिरफ्तार, बायोमेट्रिक स्टाफ से मिलीभगत

Ajay Kumar by Ajay Kumar
सोमवार, 22 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, नौकरी, राष्ट्रीय
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NEET UG 2026 Scam
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NEET UG 2026 Scam : पटना/लखीसराय। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पता चला है कि कुख्यात ‘सॉल्वर गैंग’ ने परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में ही सेंध लगा दी थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे काले धंधे के मास्टरमाइंड पावापुरी और पटना मेडिकल कॉलेज के वही छात्र निकले जिन्हें कल डॉक्टर बनना था। अंदरूनी स्टाफ की मदद से प्रति उम्मीदवार 10 से 12 लाख रुपये लेकर फर्जी परीक्षार्थी बैठाए गए।

देखा जाए तो यह सिर्फ एक परीक्षा घोटाला नहीं बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और चिकित्सा क्षेत्र की नैतिकता पर एक बड़ा सवालिया निशान है। जिस बायोमेट्रिक सिस्टम के भरोसे पूरी परीक्षा थी, सॉल्वर गैंग ने उसी में सेंध लगा दी। अब तक 30 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

🔍 यह भी पढ़ें- NEET-UG 2026: Haryana में Multi-Layer Security, जानें क्या-क्या होगी पाबंदी

बायोमेट्रिक सत्यापन में ही लगाई सेंध

NEET UG 2026 Scam की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि गिरोह ने पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगा दी थी। बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थियों को वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश दिलाया गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में यह साफ हुआ है कि पावापुरी मेडिकल कॉलेज राजगीर का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क का मुख्य संचालक था। उसने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को सॉल्वर के रूप में तैयार कर परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई थी।

समझने वाली बात यह है कि बायोमेट्रिक सत्यापन को सबसे सुरक्षित माना जाता था। फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन से यह सुनिश्चित होता है कि परीक्षा देने वाला वही व्यक्ति है जिसका रजिस्ट्रेशन है। लेकिन अगर सिस्टम चलाने वाला ही भ्रष्ट हो तो कोई भी तकनीक विफल हो जाती है।

🔍 यह भी पढ़ें- NEET Exam Centre अबू धाबी, Rahul Gandhi का बड़ा हमला: ये कैसी लापरवाही?

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सोमवार, 22 जून 2026
पटना मेडिकल कॉलेज के छात्र ने बायोमेट्रिक स्टाफ बनकर किया काम

जांच में सामने आया कि पटना मेडिकल कॉलेज के चौथे वर्ष के छात्र और हाजीपुर निवासी मयंक कश्यप ने अंकित कुमार की पहचान पर बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया। यही वह कड़ी थी जिसके जरिए गिरोह ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया और सॉल्वर्स को केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाने में सफलता हासिल की।

घोटाले का तरीका:

कदमविवरण
1. उम्मीदवार की तलाशधनी परिवारों के बच्चे जो किसी भी कीमत पर मेडिकल सीट चाहते थे
2. सौदा10-12 लाख रुपये में डील, एडवांस में 1-2 लाख
3. सॉल्वर तैयार करनामेडिकल कॉलेजों के होनहार छात्रों को सॉल्वर बनाया
4. बायोमेट्रिक स्टाफ में घुसपैठमेडिकल छात्र बायोमेट्रिक स्टाफ बनकर काम करते
5. सत्यापन में हेराफेरीफर्जी उम्मीदवार को असली के रूप में पास किया
6. परीक्षासॉल्वर ने परीक्षा दी और सवाल हल किए

दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा सिस्टम बेहद व्यवस्थित था। हर कड़ी में अलग-अलग लोग थे। कोई उम्मीदवार ढूंढता था, कोई सॉल्वर तैयार करता था, कोई बायोमेट्रिक सिस्टम संभालता था।

🔍 यह भी पढ़ें- Telegram Banned in India: NEET से पहले बड़ा सरकारी फैसला

9 सॉल्वर सभी मेडिकल छात्र, कुल 30 गिरफ्तार

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए नौ सॉल्वर सभी मेडिकल छात्र बताए जा रहे हैं। इनके अलावा बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कर्मियों और गिरोह के अन्य सदस्यों समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में एक मूल परीक्षार्थी भी शामिल है जिसने यह सेवा ली थी।

पुलिस कुछ अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ आगे बढ़ने के साथ गिरोह के नेटवर्क और इसके आर्थिक लेनदेन से जुड़े नए नाम सामने आ सकते हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी सॉल्वर खुद मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। यानी वे समझदार और शिक्षित युवा हैं। लेकिन पैसे के लालच में उन्होंने यह काम किया। सवाल यह है कि जो युवा खुद धोखाधड़ी से आगे बढ़ रहे हैं, वे कल अच्छे डॉक्टर कैसे बनेंगे?

10 से 12 लाख रुपये की डील, 1-2 लाख एडवांस

लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये में सौदा तय होने की जानकारी मिली है। इसमें 1 से 2 लाख रुपये पहले ही ले लिए गए थे, जबकि बची हुई राशि परीक्षा में सफलता और नामांकन के बाद भुगतान की जानी थी।

यह एक बड़ा आर्थिक रैकेट है। अगर मान लीजिए कि गिरोह ने केवल 50 उम्मीदवारों को भी यह सेवा दी हो तो 10 लाख के हिसाब से 5 करोड़ रुपये का धंधा बनता है। और संभावना है कि संख्या इससे कहीं ज्यादा हो।

NEET UG 2026 Scam में पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कर रही है। पैसे का ट्रेल फॉलो करके पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।

केंद्रीय विद्यालय लखीसराय में FIR दर्ज

केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्रिंसिपल सह सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत के आवेदन पर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह परीक्षा केंद्र उन केंद्रों में से एक था जहां यह धोखाधड़ी हुई थी।

एसडीपीओ का कहना है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और पूरे रैकेट में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

समझने वाली बात यह है कि यह घोटाला केवल लखीसराय तक सीमित नहीं हो सकता। NEET परीक्षा पूरे देश में एक साथ होती है। अगर एक जगह ऐसा हुआ तो दूसरी जगहों पर भी हो सकता है। NTA (National Testing Agency) को पूरे देश में जांच करनी चाहिए।

यह पहली बार नहीं, NEET में घोटालों का इतिहास

दुर्भाग्य से NEET UG 2026 Scam कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कई सालों से NEET परीक्षा में घोटाले होते रहे हैं:

NEET 2024: पेपर लीक के आरोप, कई राज्यों में जांच

NEET 2023: सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, राजस्थान और गुजरात में गिरफ्तारियां

NEET 2021: ओडिशा में बड़ा घोटाला, 30 से ज्यादा गिरफ्तार

NEET 2019: हरियाणा और राजस्थान में पेपर लीक

हर साल NTA कहता है कि सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। बायोमेट्रिक, CCTV, सख्त निगरानी—सब कुछ लगाया जाता है। फिर भी घोटाले होते रहते हैं। इसका मतलब है कि समस्या सिस्टम में गहरी है।

ईमानदार छात्रों की मेहनत पर पानी

NEET UG 2026 Scam सबसे ज्यादा उन लाखों ईमानदार छात्रों के साथ अन्याय है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। वे कोचिंग के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं। अपनी नींद और सामाजिक जीवन की कुर्बानी देते हैं। सिर्फ इसलिए कि वे डॉक्टर बनना चाहते हैं।

लेकिन जब कोई पैसे देकर शॉर्टकट से सीट हासिल कर लेता है तो यह उन ईमानदार छात्रों के साथ धोखा है। एक सीट जो किसी मेहनती छात्र को मिलनी चाहिए थी, वह किसी अयोग्य को मिल जाती है।

दिलचस्प बात यह है कि जो छात्र धोखे से डॉक्टर बनेगा, वह कल आपका या मेरा इलाज करेगा। क्या आप ऐसे डॉक्टर पर भरोसा कर सकते हैं जिसने अपना करियर ही धोखे से शुरू किया हो?

समाधान क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि NEET परीक्षा प्रणाली में कई सुधार जरूरी हैं:

पूरी तरह डिजिटल परीक्षा: कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट जहां हर छात्र को अलग-अलग प्रश्न मिलें

AI-आधारित निगरानी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता से असामान्य पैटर्न पकड़ना

बायोमेट्रिक स्टाफ की जांच: जो स्टाफ बायोमेट्रिक चलाए, उसकी भी सख्त जांच

तुरंत कार्रवाई: धोखाधड़ी पकड़ी जाए तो तुरंत सजा

जीवन भर प्रतिबंध: पकड़े गए छात्रों और सॉल्वर्स पर जीवन भर के लिए प्रतिबंध

कानूनी सख्ती: भारी जुर्माना और जेल की सजा

NTA और सरकार की जिम्मेदारी

National Testing Agency (NTA) और शिक्षा मंत्रालय को इस मामले को गंभीरता से लेना होगा। सिर्फ गिरफ्तारियां काफी नहीं हैं। पूरी परीक्षा प्रणाली की समीक्षा जरूरी है।

कुछ सवाल जो सरकार को जवाब देने होंगे:

  • बायोमेट्रिक स्टाफ की भर्ती और वेरिफिकेशन कैसे हुई?
  • क्या परीक्षा केंद्रों पर CCTV फुटेज की जांच की गई?
  • NTA की निगरानी टीम कहां थी?
  • क्या अन्य राज्यों में भी ऐसा हुआ?
  • इस घोटाले के लिए कौन जिम्मेदार है?
मुख्य बातें (Key Points)
  • NEET UG 2026 परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में सेंध, बड़े घोटाले का पर्दाफाश
  • पावापुरी और पटना मेडिकल कॉलेज के छात्र मास्टरमाइंड, रविशंकर मुख्य संचालक
  • मयंक कश्यप ने बायोमेट्रिक स्टाफ बनकर सिस्टम हैक किया
  • 10-12 लाख रुपये प्रति उम्मीदवार की डील, 1-2 लाख एडवांस
  • 9 सॉल्वर सभी मेडिकल छात्र, कुल 30 लोग गिरफ्तार
  • बैंक अकाउंट और डिजिटल लेनदेन की जांच जारी
  • ईमानदार छात्रों की मेहनत पर पानी, परीक्षा प्रणाली में सुधार जरूरी

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: NEET UG 2026 घोटाले में क्या हुआ था?

सॉल्वर गैंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन में सेंध लगाई। मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने बायोमेट्रिक स्टाफ बनकर फर्जी उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया। 10-12 लाख लेकर सॉल्वर्स ने परीक्षा दी। 30 लोग गिरफ्तार हुए।

Q2: सॉल्वर कौन थे और उन्हें कितना पैसा मिला?

सॉल्वर पावापुरी और पटना मेडिकल कॉलेज के छात्र थे। हर उम्मीदवार से 10-12 लाख रुपये लिए गए जिसमें से 1-2 लाख एडवांस था। बाकी राशि सफलता और नामांकन के बाद देनी थी।

Q3: बायोमेट्रिक सत्यापन कैसे हैक किया गया?

पटना मेडिकल कॉलेज का छात्र मयंक कश्यप फर्जी पहचान (अंकित कुमार) से बायोमेट्रिक स्टाफ बना। उसने सिस्टम में हेराफेरी करके फर्जी उम्मीदवारों को असली के रूप में पास कर दिया। यह अंदरूनी मिलीभगत थी।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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