NEET Exam Row Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को एक NEET उम्मीदवार की कथित आत्महत्या के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत के नौजवानों की एक पूरी पीढ़ी उस हद तक कीमत चुका रही है, जिस हद तक प्रधानमंत्री ने पिछले 12 सालों में शिक्षा प्रणाली को बर्बाद किया है।
देखा जाए तो यह हमला उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश के मौगंज जिले की एक NEET उम्मीदवार आकांक्षा चतुर्वेदी ने NEET-UG परीक्षा में बेनियमियों की रिपोर्टों के बाद Depression में आकर नागपुर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
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आकांक्षा की कहानी दिल दहला देने वाली
राहुल गांधी ने X (Twitter) पर हिंदी में अपनी पोस्ट में लिखा, “आकांक्षा डॉक्टर बनकर अपने देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। आकांक्षा के पिता एक किसान हैं। अपनी बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए, उन्होंने अपने किसान क्रेडिट कार्ड पर 3 लाख रुपये का कर्ज लिया।”
कहने का मतलब साफ है कि यह सिर्फ एक छात्रा की कहानी नहीं, बल्कि भारत के करोड़ों मध्यमवर्गीय और किसान परिवारों की कहानी है।
गांधी ने आगे लिखा, “उन्होंने खुद नागपुर में रसोइए के रूप में काम भी किया, ताकि उनकी बेटी वहां कोचिंग क्लासों में जा सके।”
दिलचस्प बात यह है कि एक पिता ने हर संभव कोशिश की। अपनी जमीन गिरवी रखी, कर्ज लिया और खुद मजदूरी करने लगा। यह त्याग किसी भी भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार की सच्चाई है।
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पेपर लीक ने तोड़ दिया सपना
विपक्ष के नेता ने कहा, “एक पिता ने हर संभव कोशिश की। फिर, NEET का पेपर लीक हो गया। परीक्षा रद्द कर दी गई। उस अनिश्चितता के बीच, आकांक्षा हमें हमेशा के लिए छोड़ गई।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि NEET-UG 2026 की परीक्षा 3 मई को हुई थी। 12 मई को पेपर लीक होने की खबरें आईं। इसके बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई।
समझने वाली बात यह है कि जिन छात्रों ने महीनों मेहनत की, अपने परिवारों ने लाखों रुपये खर्च किए, वे सब एक झटके में बेकार हो गए। यह किसी भी छात्र और उसके परिवार के लिए तोड़ देने वाला अनुभव है।
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यह आत्महत्या नहीं, सिस्टम फेलियर है
गांधी ने दोष लगाया कि आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं थी – यह प्रधानमंत्री मोदी के अधीन एक भ्रष्ट और टूटी हुई प्रणाली का दुखदाई नतीजा है।
अगर गौर करें तो राहुल गांधी ने इसे सीधे-सीधे सरकारी विफलता करार दिया है। उनका कहना है कि जब सिस्टम ही भ्रष्ट हो, तो इसकी जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर है।
शिक्षा मंत्री अभी भी पद पर
गांधी ने कहा, “श्री धर्मेंद्र प्रधान? वह आज भी अपने पद पर मजबूती से बैठे हैं। वही पुरानी कमेटियां। वही पुराने तबादले। वही पुरानी जांचें। कोई सुधार नहीं; कोई इंसाफ नहीं।”
यह सीधा निशाना शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर है। गांधी का कहना है कि इतनी बड़ी विफलता के बाद भी कोई जवाबदेही नहीं तय की गई।
समझने वाली बात यह भी है कि NEET पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ सालों में कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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12 सालों में शिक्षा प्रणाली तबाह
कांग्रेस नेता ने कहा, “श्री मोदी, सत्ता स्थाई नहीं होती – यह आती-जाती रहती है। लेकिन भारत के नौजवानों की एक पूरी पीढ़ी अब उस कीमत को चुका रही है, जिस हद तक आपने पिछले 12 सालों में शिक्षा प्रणाली को बर्बाद किया है।”
यह बेहद तीखा हमला है। राहुल गांधी ने सीधे मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि उसने शिक्षा व्यवस्था को नष्ट कर दिया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिर्फ NEET का मामला नहीं है। JEE, CUET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अनियमितताओं की खबरें आती रहती हैं।
NEET-UG 2026 विवाद की पृष्ठभूमि
National Testing Agency (NTA) द्वारा 3 मई को ली गई NEET (UG) 2026 परीक्षा को 12 मई को पेपर लीक होने के दोषों के बीच रद्द कर दिया गया था। अब इसकी जांच CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) द्वारा की जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि परीक्षा हुए सिर्फ 9 दिन ही हुए थे कि पेपर लीक की खबरें आने लगीं। सोशल मीडिया पर परीक्षा के सवाल पहले से वायरल होने की तस्वीरें सामने आईं।
मुड़-परीक्षा 21 जून के लिए तय की गई है। यानी छात्रों को फिर से तैयारी करनी होगी, फिर से परीक्षा देनी होगी। यह मानसिक दबाव किसी भी युवा को तोड़ सकता है।
आकांक्षा की व्यथा
आकांक्षा के पिता एक साधारण किसान हैं। उन्होंने अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था। इसके लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड से 3 लाख रुपये का कर्ज लिया।
नागपुर जैसे शहर में रहकर कोचिंग करवाना महंगा है। इसलिए पिता ने खुद वहां रसोइए का काम किया ताकि बेटी पढ़ाई पर ध्यान दे सके।
कहने का मतलब साफ है कि यह परिवार अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा चुका था। और फिर पेपर लीक की खबर आई, परीक्षा रद्द हो गई। आकांक्षा को लगा कि उसकी सारी मेहनत बेकार गई। और उसने यह कदम उठा लिया।
छात्रों पर बढ़ता दबाव
NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं पहले से ही बेहद दबाव भरी होती हैं। लाखों छात्र कुछ हजार सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
ऊपर से अगर पेपर लीक जैसी घटनाएं हों, तो छात्रों का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ जाता है। उन्हें लगता है कि मेहनत से नहीं, पैसे से नंबर आते हैं।
और बस यहीं से शुरू होता है वह मानसिक दबाव जो कई युवाओं को गलत कदम उठाने के लिए मजबूर कर देता है।
सरकार की प्रतिक्रिया
अभी तक सरकार की ओर से राहुल गांधी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शिक्षा मंत्रालय ने केवल यह कहा है कि CBI जांच चल रही है और दोषियों को सजा मिलेगी।
लेकिन समझने वाली बात यह है कि जांच तो हर बार होती है, लेकिन सिस्टम में सुधार कब होगा? यह सवाल अनुत्तरित है।
मुख्य बातें (Key Points)
- MP की NEET उम्मीदवार आकांक्षा चतुर्वेदी की कथित आत्महत्या पर राहुल गांधी ने PM मोदी पर हमला किया
- गांधी ने कहा – पिछले 12 सालों में शिक्षा प्रणाली बर्बाद की गई
- आकांक्षा के पिता ने किसान क्रेडिट कार्ड से 3 लाख रुपये कर्ज लिया, खुद रसोइए का काम किया
- NEET-UG 2026 परीक्षा 12 मई को पेपर लीक के कारण रद्द हुई, CBI जांच जारी
- राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा – कोई जवाबदेही नहीं
- मुड़-परीक्षा 21 जून को होगी
- गांधी ने कहा – यह आत्महत्या नहीं, भ्रष्ट सिस्टम की विफलता है












