Mukh Mantri Sehat Yojna के तहत अब तक करीब 1 लाख डायलिसिस सत्र पूरे हो चुके हैं, जिनकी कुल कीमत 16.5 करोड़ रुपये है। भगवंत मान सरकार की यह पहल पंजाब में किडनी रोगियों के लिए असली राहत साबित हो रही है। जब देश भर में क्रॉनिक किडनी डिजीज तेजी से बढ़ रही है, तब सरकार द्वारा समर्थित कैशलेस डायलिसिस प्रोग्राम जीवनरेखा बनकर उभरा है।
लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी भी दे रहे हैं कि मरीज की जिंदगी अब भी इलाज की उपलब्धता और किफायत पर निर्भर है, इलाज पर नहीं।
लुधियाना के धियान सिंह की कहानी
लुधियाना के धियान सिंह हफ्ते में दो बार अस्पताल आते हैं। लंबे समय से डायलिसिस करा रहे किसी भी मरीज के लिए शारीरिक और मेटाबोलिक समस्याएं आम हैं, भले ही नियमित इलाज चल रहा हो। लेकिन जब बात आर्थिक मदद की आती है, तो सेहत कार्ड एक बड़ी राहत देता है।
“जब से मैंने Mukh Mantri Sehat Yojna में रजिस्ट्रेशन कराया है, तब से मुझे सिमरिता नर्सिंग होम में बिल्कुल मुफ्त डायलिसिस मिल रहा है,” धियान सिंह कहते हैं। अब तक वह दर्जन भर से ज्यादा बार कैशलेस इलाज ले चुके हैं।
समझने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि हजारों मरीजों की हकीकत है।
डायलिसिस पर जिंदगी निर्भर
क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से जूझ रहे मरीजों के लिए जिंदगी दिन या हफ्तों में नहीं, बल्कि मशीन के चक्कर में चलती है। हफ्ते में दो से तीन बार, करीब चार घंटे तक खून को शरीर से निकाला जाता है, डायलिसिस यूनिट से फिल्टर किया जाता है और फिर साफ करके वापस शरीर में डाला जाता है। जिन विषैले तत्वों को असफल किडनी अब साफ नहीं कर सकती, उन्हें मशीन साफ करती है। यह प्रक्रिया जिंदगी बचाती है, लेकिन सेहत वापस नहीं लाती।
देखा जाए तो यह एक survival therapy है, cure नहीं।
भारत में बढ़ता किडनी रोग का संकट
पूरे भारत में CKD एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गई है, जो मधुमेह और उच्च रक्तचाप के बढ़ते बोझ से जुड़ी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि हर साल लाखों मरीज एंड-स्टेज किडनी डिजीज तक पहुंच जाते हैं, जिन्हें जिंदा रहने के लिए या तो लंबे समय तक डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है।
वैश्विक स्तर पर, विश्व स्वास्थ्य संगठन CKD को सबसे तेजी से बढ़ती गैर-संचारी बीमारियों में से एक मानता है। लेकिन भारत में यह संकट और भी गहरा है – कारण है कीमत।
प्राइवेट सेक्टर में एक हीमोडायलिसिस सत्र की कीमत 1,500 से 4,000 रुपये तक होती है। हफ्ते में दो से तीन सत्र चाहिए होते हैं, तो सालाना खर्च कई लाख तक पहुंच जाता है – जो ज्यादातर परिवारों की पहुंच से बाहर है।
दिलचस्प बात यह है कि कई परिवारों के लिए इलाज का फैसला चिकित्सा जरूरत से ज्यादा आर्थिक स्थिति तय करती है।
Mukh Mantri Sehat Yojna की भूमिका
ऐसे में पंजाब की Mukh Mantri Sehat Yojna (MMSY) जैसी सरकारी योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस योजना के तहत सरकारी और सूचीबद्ध प्राइवेट अस्पतालों में डायलिसिस सेवाएं मुफ्त दी जाती हैं। इससे जेब से होने वाले खर्च में कमी आई है, जो पहले कई मरीजों को सत्र छोड़ने या टालने पर मजबूर करता था।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “सेहत योजना के तहत अब तक 16.5 करोड़ रुपये के 1 लाख मुफ्त डायलिसिस उपचार दिए गए हैं। कोई भी मरीज कीमत की वजह से डायलिसिस नहीं छोड़ेगा।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा है।
निरंतरता ही जीवन है
दिल्ली हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, मोगा के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सौरव गोयल ने बताया कि डायलिसिस देखभाल में वित्तीय कवरेज का प्रभाव सुविधा से कहीं आगे है।
“डायलिसिस इलाज नहीं है, यह जीवन-निर्वाह थेरेपी है। अगर मरीज एक या दो सत्र भी छोड़ दे, तो विषैले तत्व तेजी से जमा होते हैं और जटिलताएं जानलेवा हो सकती हैं,” डॉ. गोयल कहते हैं। “कैशलेस एक्सेस जो सुनिश्चित करता है, वह है निरंतरता। और डायलिसिस देखभाल में, निरंतरता ही जीवन है।”
उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “हम हर महीने पहले से ज्यादा डायलिसिस सत्र करते हैं, और कई कैशलेस इलाज के तहत होते हैं। यह मरीजों के लिए बहुत बड़ा सहारा है और हम डॉक्टरों के लिए भी राहत है, क्योंकि इससे आर्थिक बोझ के कारण इलाज रुकने से बचता है।”
असली चुनौती: जल्दी पता लगाना
डॉ. गोयल ने यह भी बताया कि भारत की बड़ी चुनौती शुरुआती पहचान है। “ज्यादातर मरीजों का निदान बहुत देर से होता है, जब किडनी का कार्य पहले से ही गंभीर रूप से खराब हो चुका होता है। उस स्तर पर, विकल्प सीमित होते हैं – डायलिसिस या ट्रांसप्लांट।”
चिकित्सा शोध लगातार दिखाता है कि भारत में CKD मरीजों का एक बड़ा हिस्सा विनाशकारी स्वास्थ्य खर्च का सामना करता है। परिवार अक्सर इलाज शुरू होने के महीनों के भीतर बचत खत्म कर देते हैं या कर्ज में डूब जाते हैं।
योजना का विस्तार और भविष्य
MMSY ने सिर्फ सेवा ही नहीं दी, बल्कि उम्मीद भी जगाई है। अब तक 1 लाख डायलिसिस सत्र एक मील का पत्थर है, लेकिन यात्रा अभी लंबी है। सरकार लगातार इस योजना का विस्तार कर रही है और ज्यादा अस्पतालों को जोड़ रही है।
अगर गौर करें, तो यह एक स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत है – जहां गरीब और मध्यम वर्ग को जीने का अधिकार मिल रहा है।
मुख्य बातें (Key Points):
- Mukh Mantri Sehat Yojna के तहत 1 लाख डायलिसिस सत्र पूरे हुए
- 16.5 करोड़ रुपये का कैशलेस इलाज दिया गया
- किडनी मरीजों के लिए जीवनरेखा साबित हुई योजना
- विशेषज्ञों ने कहा – निरंतरता ही जीवन है
- जल्दी पता लगाना सबसे बड़ी चुनौती













