Heavy Rainfall Alert India: देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में अगले 5-6 दिनों तक भारी से अत्यंत भारी बारिश का दौर जारी रहने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 5 अगस्त 2026 को मेघालय के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी है। वहीं, केरल और कर्नाटक में भी अगले 4 दिनों तक मूसलाधार बारिश का अनुमान है।
देखा जाए तो यह चेतावनी उन इलाकों के लिए बेहद गंभीर है जहां पिछले 24 घंटों में ही सब-हिमालयन वेस्ट बंगाल और सिक्किम के कूचबिहार में 25 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर में बना हुआ है, जिसके चलते कई राज्यों में जलभराव, भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
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मेघालय में सबसे खतरनाक स्थिति, सोहरा में 17 सेमी बारिश
अगर गौर करें तो मेघालय में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। पिछले 24 घंटों में सोहरा में 17 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है और अगले 24 घंटों में यह आंकड़ा 20 सेंटीमीटर से भी पार जा सकता है। यही कारण है कि IMD ने इस इलाके के लिए एक्सट्रीमली हैवी रेनफॉल की चेतावनी जारी की है।
दिलचस्प बात यह है कि पूर्वोत्तर भारत के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, और हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली में भी मध्यम से भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। उत्तराखंड के मुसोरी में 16 सेंटीमीटर, जबकि हिमाचल के जट्टन बैराज में 14 सेंटीमीटर बारिश पिछले 24 घंटों में दर्ज हुई है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में व्यापक बारिश का अनुमान
समझने वाली बात यह है कि यह केवल एक-दो दिन की बारिश नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 5 अगस्त से 11 अगस्त तक लगातार फेयरली वाइडस्प्रेड से वाइडस्प्रेड बारिश होने की संभावना है।
वहीं, पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड, ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल और सब-हिमालयन वेस्ट बंगाल एंड सिक्किम में भी अगले एक हफ्ते तक बारिश का सिलसिला बना रहेगा। बिहार के मधुबनी में 14 सेंटीमीटर, जबकि नागालैंड के चिफोबोजू नेरहेमा में 11 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
केरल और कर्नाटक में भी भारी बारिश का अलर्ट
दक्षिण भारत की बात करें तो केरल और कर्नाटक में अगले 4 दिनों तक आइसोलेटेड हैवी से वेरी हैवी रेनफॉल की संभावना है। पिछले 24 घंटों में केरल के पनथूर (कासरगोड जिला) में 9 सेंटीमीटर, जबकि कोस्टल कर्नाटक के कोल्लूर (उडुपी जिला) में 10 सेंटीमीटर और साउथ इंटीरियर कर्नाटक के अगुंबे (शिवमोग्गा जिला) में 13 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन इलाकों में तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 60 किमी प्रति घंटे तक) के साथ गरज और बिजली गिरने की भी आशंका है। इसलिए स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने की सलाह दी गई है।
उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का मिजाज
उत्तर-पश्चिम भारत में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद और उत्तराखंड में 5 से 11 अगस्त तक फेयरली वाइडस्प्रेड से वाइडस्प्रेड बारिश होने का अनुमान है। उत्तराखंड में 5-6 अगस्त को आइसोलेटेड वेरी हैवी रेनफॉल की संभावना है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 5 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राठ (हमीरपुर) में 15 सेंटीमीटर, पूर्वी उत्तर प्रदेश के बांदा में 11 सेंटीमीटर और हरियाणा के कोसली में 12 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी – क्योंकि ये इलाके आमतौर पर इतनी ज्यादा बारिश के आदी नहीं हैं।
दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा मौसम?
राजधानी दिल्ली और NCR की बात करें तो यहां अगले 4 दिनों तक बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश के दौर चलेंगे। 5 अगस्त को दिल्ली में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ आइसोलेटेड जगहों पर भारी बारिश की संभावना है, जिसके साथ दोपहर से शाम तक गरज और बिजली गिर सकती है।
तापमान की बात करें तो अधिकतम तापमान 32-34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 22-27 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। पिछले 24 घंटों में दिल्ली के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है, जिससे अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है।
| तारीख | अधिकतम तापमान | न्यूनतम तापमान | बारिश की संभावना |
|---|---|---|---|
| 05 अगस्त | 32-34°C | 24-27°C | हल्की से भारी बारिश |
| 06 अगस्त | 31-33°C | 22-24°C | हल्की से मध्यम बारिश |
| 07 अगस्त | 32-34°C | 22-24°C | हल्की से मध्यम बारिश |
| 08 अगस्त | 33-35°C | 23-25°C | हल्की बारिश |
मध्य भारत में बारिश का पैटर्न
मध्य भारत की बात करें तो पश्चिम मध्य प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। पश्चिम मध्य प्रदेश के भिंड में 16 सेंटीमीटर, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश के गौरीहार (छतरपुर) में 10 सेंटीमीटर बारिश हुई है।
5-6 अगस्त को पश्चिम मध्य प्रदेश में आइसोलेटेड हैवी रेनफॉल की संभावना है, जबकि 7 अगस्त को वेरी हैवी रेनफॉल हो सकती है। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में 8 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई है और अगले कुछ दिनों में यह क्षेत्र भी भारी बारिश की चपेट में आ सकता है।
पश्चिम भारत में मानसून की सक्रियता
पश्चिम भारत में कोंकण और गोवा में 5 से 11 अगस्त तक फेयरली वाइडस्प्रेड से वाइडस्प्रेड बारिश होने का अनुमान है। मध्य महाराष्ट्र में भी 5-6 अगस्त को आइसोलेटेड वेरी हैवी रेनफॉल की संभावना है। गोवा के सांगुएम में 9 सेंटीमीटर, जबकि मध्य महाराष्ट्र के कोयना-नवजा (सतारा) में 13 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
गुजरात क्षेत्र में 8-10 अगस्त के बीच फेयरली वाइडस्प्रेड बारिश होने की संभावना है, जबकि सौराष्ट्र और कच्छ में आइसोलेटेड से स्कैटर्ड बारिश का अनुमान है।
फ्लैश फ्लड का खतरा, इन इलाकों में अलर्ट
चिंता का विषय यह है कि कई इलाकों में फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) का खतरा मंडरा रहा है। सब-हिमालयन वेस्ट बंगाल एंड सिक्किम के मानगन, गंगटोक, पाक्योंग, दार्जिलिंग, उत्तरी दिनाजपुर, दक्षिणी दिनाजपुर और मालदा जिलों में लो टू मॉडरेट फ्लैश फ्लड रिस्क है।
इसी तरह असम और मेघालय के कोकराझार, बोंगाईगांव, चिरांग, धुबरी, बारपेटा, कछार, ईस्ट खासी हिल्स, वेस्ट जैंतिया हिल्स, ईस्ट जैंतिया हिल्स और गारो हिल्स जिलों में भी फ्लैश फ्लड का खतरा है।
जम्मू-कश्मीर के डोडा, कठुआ और ऊधमपुर; हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर; तथा उत्तराखंड के देहरादून, टेहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और नैनीताल जिलों में भी लो फ्लैश फ्लड रिस्क बना हुआ है।
मछुआरों के लिए खास चेतावनी
समुद्र में जाने वाले मछुआरों को भी सावधान रहने की सलाह दी गई है। अरब सागर में सोमालिया, ओमान के तट के साथ-साथ वेस्ट सेंट्रल और साउथवेस्ट अरब सागर के कुछ हिस्सों में 10 अगस्त तक ऊंची लहरों का खतरा है। कर्नाटक, केरल के तट, लक्षद्वीप क्षेत्र और आसपास के समुद्री इलाकों में 5 से 9 अगस्त तक खतरनाक स्थिति रहेगी।
बंगाल की खाड़ी में अंडमान सागर और दक्षिण श्रीलंका तट पर 5 से 10 अगस्त तक, जबकि दक्षिण बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में 5 से 7 अगस्त तक खराब मौसम की स्थिति रहेगी।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कई अहम सलाह दी हैं। अरुणाचल प्रदेश में धान, मक्का, सोयाबीन और फिंगर मिलेट के खेतों, बागों और निचले इलाकों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। सभी परिपक्व ककड़ी, लौकी और अन्य कद्दूवर्गीय सब्जियों को तुरंत काट लें और सुरक्षित स्थान पर रखें।
असम में धान की नर्सरी, जूट, गन्ना, सोयाबीन, अरहर, तिल और सब्जियों के खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें। केले, सब्जियों और अन्य कमजोर फसलों को तेज हवाओं से बचाने के लिए सहारा दें।
मेघालय में धान की नर्सरी और मक्का, लोबिया, भिंडी और अदरक के खेतों से उचित जल निकासी सुनिश्चित करें। नर्सरी की मेड़ों को मजबूत करें और जल निकासी नालियों को बाधा मुक्त रखें।
पश्चिम बंगाल में धान की नर्सरी और खेतों, अदरक, टमाटर, मिर्च, डालले खोरसानी, फिंगर मिलेट और फलों के बागों में उचित जल निकासी बनाए रखें। रोपित धान के खेतों में टेरेस बंड को मजबूत करें।
केरल में केले, नारियल, इलायची, अदरक, काली मिर्च के बागानों और हल्दी व सब्जियों के खेतों से अतिरिक्त बारिश का पानी निकालें। केले के पौधों और ट्रेलिस पर उगने वाली फसलों के लिए मजबूत सहारा प्रदान करें।
पशुपालकों और मछली पालकों के लिए सुझाव
पशुपालकों को सलाह दी गई है कि भारी बारिश के दौरान जानवरों को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित आहार दें। चारा और फोड्डर को सुरक्षित जगह पर स्टोर करें ताकि वह खराब न हो।
मछली पालन करने वालों को सलाह दी गई है कि तालाबों के चारों ओर उचित जाल लगाकर एक आउटलेट बनाएं ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके और ओवरफ्लो होने पर मछलियां बाहर न निकल जाएं।
बुनियादी ढांचे और यातायात पर असर
राहत की बात यह नहीं है कि इस भारी बारिश से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है। पेड़ों की शाखाएं टूट सकती हैं, केले, पपीता जैसे छोटे पेड़ उखड़ सकते हैं। कच्चे मकानों, दीवारों, झोपड़ियों और सड़कों को मामूली नुकसान हो सकता है।
तेज हवाओं के कारण ढीली वस्तुएं उड़ सकती हैं। छोटे जहाज, ट्रॉलर और नावें प्रभावित हो सकती हैं। निचले इलाकों में स्थानीय भूस्खलन, मडस्लाइड, जल भराव और बाढ़ की स्थिति बन सकती है। भारी बारिश के कारण दृश्यता में कमी आ सकती है और हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
लोगों को दी गई सलाह: सुरक्षा पहले
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि मौसम की स्थिति पर नजर रखें और यदि स्थिति बिगड़ती है तो सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें। सुरक्षित आश्रय लें और पेड़ों के नीचे शरण न लें क्योंकि बिजली गिर सकती है।
यदि बिजली गिरने की आशंका है, तो बिजली/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तुरंत अनप्लग करें, पानी के स्रोतों से बाहर निकलें और उन सभी वस्तुओं से दूर रहें जो बिजली का संचालन करती हैं। पर्यटन और मनोरंजक गतिविधियों को नियंत्रित किया जाना चाहिए। ऑनशोर और ऑफशोर गतिविधियों को सावधानीपूर्वक विनियमित किया जाना चाहिए।
मौसम प्रणालियां और कारण
इस व्यापक बारिश के पीछे कई मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। मानसून ट्रफ समुद्र तल पर अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर में स्थित है। मध्य और ऊपरी ट्रोपोस्फेरिक पछुआ हवाओं में एक पश्चिमी विक्षोभ है जिसका अक्ष समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर लगभग 71°E देशांतर के साथ 31°N अक्षांश के उत्तर में है।
उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर एक चक्रवाती परिसंचरण है। दक्षिण तमिलनाडु-पुडुचेरी पर मध्य ट्रोपोस्फेरिक स्तरों में एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण है। दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में मध्य और ऊपरी ट्रोपोस्फेरिक स्तरों पर एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण है।
पूर्वोत्तर बिहार और निकटवर्ती सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम के बीच निचले और ऊपरी ट्रोपोस्फेरिक स्तरों के बीच एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण है। मध्य असम पर निचले और मध्य ट्रोपोस्फेरिक स्तरों के बीच एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
पिछले 24 घंटों में देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज की गई सबसे अधिक बारिश के आंकड़े इस प्रकार हैं:
| राज्य/क्षेत्र | स्थान | बारिश (सेमी) |
|---|---|---|
| सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम | कूचबिहार | 25 |
| मेघालय | सोहरा | 17 |
| उत्तराखंड | मुसोरी | 16 |
| पश्चिम मध्य प्रदेश | भिंड | 16 |
| पश्चिम उत्तर प्रदेश | राठ (हमीरपुर) | 15 |
| बिहार | मधुबनी | 14 |
| हिमाचल प्रदेश | जट्टन बैराज | 14 |
| साउथ इंटीरियर कर्नाटक | अगुंबे (शिवमोग्गा) | 13 |
| मध्य महाराष्ट्र | कोयना-नवजा (सतारा) | 13 |
| हरियाणा | कोसली | 12 |
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान
अगले 5-6 दिनों में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का यह सिलसिला जारी रहेगा। 6 अगस्त को असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में वेरी हैवी रेनफॉल की संभावना है। 7-8 अगस्त को ओडिशा, सब-हिमालयन वेस्ट बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश हो सकती है।
दक्षिण भारत में केरल में 6-7 अगस्त को आइसोलेटेड वेरी हैवी रेनफॉल का अनुमान है। कर्नाटक में 5-8 अगस्त तक हेवी से वेरी हैवी रेनफॉल की संभावना बनी हुई है।
उत्तर-पश्चिम भारत में उत्तराखंड में 7-11 अगस्त तक हेवी रेनफॉल होने की संभावना है, जबकि पूर्वी राजस्थान में 7-8 अगस्त को वेरी हैवी रेनफॉल हो सकती है।
मौसम का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
इससे साफ होता है कि इस व्यापक बारिश का असर न केवल आम जनजीवन बल्कि कृषि, परिवहन, व्यापार और पर्यटन पर भी पड़ेगा। खड़ी फसलों को नुकसान, सड़कों पर जल भराव, भूस्खलन से राजमार्गों का बंद होना, और उड़ानों में देरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
यह दर्शाता है कि मानसून की सक्रियता इस बार सामान्य से ज्यादा है। जिन इलाकों को आमतौर पर कम बारिश मिलती है, वहां भी इस बार अच्छी बारिश हो रही है, जो कृषि के लिहाज से तो अच्छा है लेकिन अत्यधिक बारिश से बाढ़ और जलभराव की समस्या भी गंभीर हो सकती है।
विभागीय तैयारी और निगरानी
मौसम विभाग ने सभी संबंधित राज्यों के आपदा प्रबंधन विभागों, स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट पर रखा है। ऑरेंज और रेड अलर्ट के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए। शहरी और पहाड़ी इलाकों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी के लिए कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।
जैसे-जैसे लीड पीरियड बढ़ता है, पूर्वानुमान की सटीकता कम हो जाती है, इसलिए लोगों को नियमित रूप से अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। जिला-वार विस्तृत बहु-आपदा मौसम चेतावनी IMD की वेबसाइट https://mausam.imd.gov.in/responsive/districtWiseWarningGIS.php पर उपलब्ध है।
मुख्य बातें (Key Points)
✓ मेघालय में 5 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी, रेड अलर्ट जारी
✓ पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अगले 5-6 दिनों तक भारी से अत्यंत भारी बारिश का अनुमान
✓ केरल और कर्नाटक में अगले 4 दिनों तक आइसोलेटेड हैवी से वेरी हैवी रेनफॉल की संभावना
✓ सब-हिमालयन वेस्ट बंगाल के कूचबिहार में 25 सेमी बारिश रिकॉर्ड, सबसे अधिक
✓ दिल्ली-NCR में अगले 4 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-बिजली की आशंका
✓ फ्लैश फ्लड का खतरा सब-हिमालयन वेस्ट बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में
✓ मछुआरों को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्र में न जाने की सलाह
✓ किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने और परिपक्व फसलों को सुरक्षित जगह रखने की सलाह













