Manish Tewari Congress: पंजाब की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। चंडीगढ़ से तीन बार सांसद रहे दिग्गज कांग्रेस नेता मनीष तिवारी को पार्टी की नई संगठनात्मक सूची से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इस फैसले के बाद तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी के भीतर फैली ‘असुरक्षा’ पर करारा तंज कसा है। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए एक बड़ी सियासी उलझन बनता जा रहा है।
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सोशल मीडिया पर फूटा मनीष तिवारी का गुस्सा
देखा जाए तो चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरे सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने जब पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए नई संगठनात्मक नियुक्तियों का ऐलान किया, तो उसमें तिवारी का नाम कहीं नहीं था।
एक्स (X) प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने लिखा: “काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं की इनसिक्योरिटी (असुरक्षा) का कोई इलाज होता।” उन्होंने आगे जोड़ा, “कांग्रेस ने मुझे पिछले 45 सालों में काफी कुछ दिया है और मैंने भी अपनी पूरी एडल्ट जिंदगी दशकों से कांग्रेस की सेवा में लगा दी है। क्या होगा? क्या होगा? जो होगा वो होगा।”
यह टिप्पणी साफ तौर पर पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी और दुख को दर्शाती है।
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किसे मिली कौन सी बड़ी जिम्मेदारी?
अगर गौर करें तो AICC ने इस बार पंजाब कांग्रेस में बड़े पैमाने पर संगठनात्मक फेरबदल किया है। पार्टी ने चार नई समितियों का गठन किया है और कई दिग्गज नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
| पद/जिम्मेदारी | नेता का नाम |
|---|---|
| कैंपेन कमेटी चेयरमैन | चरणजीत सिंह चन्नी |
| इलेक्शन मैनेजमेंट एंड कोऑर्डिनेशन कमेटी चेयरमैन | विजय इंदर सिंगला |
| कोर कमेटी चेयरमैन | सुखजिंदर सिंह रंधावा |
| मैनिफेस्टो कमेटी चेयरमैन | अमरजीत सिंह |
| पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष | अमरिंदर सिंह राजा वडिंग (बरकरार) |
| विरोधी धिर के नेता | प्रताप सिंह बाजवा (बरकरार) |
| वर्किंग प्रेसिडेंट (तीन) | सुखविंदर सिंह डेनी, राजकुमार वेरका, संगत सिंह गिलजियान |
दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा है, जबकि प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में विरोधी धिर के नेता बने रहेंगे।
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चरणजीत चन्नी और रंधावा भी खामोश
समझने वाली बात यह है कि सिर्फ मनीष तिवारी ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य दिग्गज नेता भी इस फेरबदल से पूरी तरह खुश नजर नहीं आ रहे। सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का चेयरमैन बनाया गया है, लेकिन वे असल में पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी के दावेदार थे।
इसी तरह सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी प्रधानगी की दौड़ में शामिल थे। हैरान करने वाली बात है कि चन्नी और रंधावा ने अब तक अपने एक्स (X) अकाउंट पर कांग्रेस हाईकमान का धन्यवाद करने वाली कोई पोस्ट साझा नहीं की है।
रंधावा ने हालांकि सचिन पायलट की नई सूची वाली लिस्ट को रीट्वीट जरूर किया है, लेकिन खुद से कोई स्वागत संदेश नहीं दिया।
कौन हैं मनीष तिवारी?
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मनीष तिवारी कोई साधारण नेता नहीं हैं। वे फिलहाल चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद हैं और तीन बार संसद पहुंच चुके हैं। साल 2019 में वे पंजाब के आनंदपुर साहिब से सांसद रहे, इससे पहले लुधियाना से भी उन्होंने जनप्रतिनिधि के तौर पर काम किया है।
तिवारी एक अनुभवी पार्लियामेंट्रियन और राष्ट्रीय स्तर के प्रवक्ता भी रहे हैं। उन्हें पार्टी में एक विचारक और रणनीतिकार के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज करना पंजाब कांग्रेस के लिए एक बड़ा सवालिया निशान बन गया है।
AICC की प्रेस रिलीज और खड़गे की मंजूरी
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल की प्रेस रिलीज के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इन सभी नियुक्तियों को तुरंत प्रभाव से मंजूरी दे दी है।
पार्टी ने यह स्पष्ट किया है कि यह फेरबदल 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है। कांग्रेस का मानना है कि इन नई समितियों के जरिए चुनावी तैयारियों को और मजबूत किया जा सकेगा।
पार्टी में असुरक्षा का माहौल?
सवाल उठता है कि आखिर क्यों एक दिग्गज नेता को इस तरह बाहर रखा गया? मनीष तिवारी के शब्दों में “इनसिक्योरिटी” का यह माहौल क्या दर्शाता है?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस में कई धड़े सक्रिय हैं। कुछ नेताओं को लगता है कि तिवारी जैसे प्रभावशाली और मुखर नेता उनकी स्थिति को कमजोर कर सकते हैं। इसी असुरक्षा की भावना के चलते शायद उन्हें संगठन से बाहर रखा गया हो।
दूसरी ओर, कुछ सूत्रों का कहना है कि पार्टी में आंतरिक धड़ेबंदी इतनी गहरी हो चुकी है कि हाईकमान भी सबको खुश नहीं कर पा रहा। एक को जिम्मेदारी देने का मतलब दूसरे को नाराज करना बन गया है।
राजा वडिंग का धन्यवाद, बाकी खामोश
इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने नई सूची आने के तुरंत बाद कांग्रेस हाईकमान का धन्यवाद किया था। वे अपने पद पर बरकरार रहे हैं, इसलिए उनकी खुशी समझ में आती है।
लेकिन प्रताप सिंह बाजवा के एक्स खाते पर भी कोई धन्यवादी पोस्ट नजर नहीं आई। साबका मंत्री परगट सिंह, जो प्रधानगी के दावेदार थे, ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेताओं की यह खामोशी ‘तूफान से पहले की शांति’ जैसी लग रही है।
क्या होगा आगे?
यह सवाल अब सबके जहन में है। पंजाब कांग्रेस में यह अंदरूनी कलह चुनाव से पहले पार्टी को कितना नुकसान पहुंचाएगी?
देखा जाए तो कांग्रेस पहले ही पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) से बुरी तरह हार चुकी है। ऐसे में अगर पार्टी अपने अनुभवी और जनप्रिय नेताओं को साइडलाइन करती रहेगी, तो 2027 में भी उसकी स्थिति कमजोर हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को अपनी आंतरिक एकता पर फौरन ध्यान देने की जरूरत है। नहीं तो यह धड़ेबंदी किसी बड़े विद्रोह में भी बदल सकती है।
पंजाब की सियासत में नया मोड़
इस पूरे मामले ने एक बात साफ कर दी है कि पंजाब कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है। मनीष तिवारी जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता की नाराजगी, चन्नी और रंधावा की खामोशी, और पार्टी के भीतर असुरक्षा का माहौल- यह सब मिलकर एक बड़ी सियासी उथल-पुथल की ओर इशारा कर रहे हैं।
हाईकमान ने चार समितियां बनाकर सबको साधने की कोशिश जरूर की है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मनीष तिवारी अपनी इस नाराजगी को और आगे ले जाते हैं, या फिर पार्टी अनुशासन के नाम पर चुप रह जाते हैं। और क्या कांग्रेस हाईकमान इस मामले को सुलझाने के लिए कोई कदम उठाएगा?
मुख्य बातें (Key Points)
- मनीष तिवारी को पंजाब कांग्रेस की नई संगठनात्मक सूची से पूरी तरह बाहर रखा गया
- तिवारी ने सोशल मीडिया पर पार्टी के भीतर ‘असुरक्षा’ पर तंज कसा और 45 साल की सेवा का जिक्र किया
- चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन, सुखजिंदर रंधावा को कोर कमेटी का चेयरमैन बनाया गया
- अमरिंदर सिंह राजा वडिंग PCC अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा विरोधी धिर के नेता बरकरार
- चन्नी, रंधावा और अन्य दिग्गज नेताओं ने सोशल मीडिया पर कोई धन्यवादी पोस्ट साझा नहीं की
- पार्टी में आंतरिक धड़ेबंदी और असंतोष के संकेत मिल रहे हैं
- विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है













