UPI Payment Charges Above 2000: आजकल काफी चर्चा चल रही है कि सरकार बहुत जल्द UPI Payment पर भी चार्जेस लगा सकती है। खासकर ₹2000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर। अभी तक लंबे समय से आप जो भी UPI पेमेंट करते आए हो, बिना सोचे-समझे जिसको ट्रांसफर करना हो कर देते हैं – बिना कोई चार्ज के।
लेकिन ध्यान रखिएगा, कोई भी सर्विस अगर आप इस्तेमाल करते हो तो उसके पीछे पूरा एक तंत्र काम कर रहा होता है। पूरा सिस्टम वर्क कर रहा होता है, जिसका कॉस्ट लगता है। और वह कॉस्ट अभी तक डायरेक्टली कस्टमर से नहीं लिया जा रहा था। लेकिन अब सरकार कानून में बदलाव कर रही है।
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क्या है पूरा मामला?
सरकार ने Payment and Settlement System Act, 2007 में अमेंडमेंट प्रपोज किया है। देखा जाए तो जब से UPI 2016 से लागू हुआ है, यह अब तक का सबसे बड़ा डेवलपमेंट आप कह सकते हैं।
इससे होगा क्या कि केंद्र सरकार के पास पावर आ जाएगी कि वो आगे फ्यूचर में जो MDR (Merchant Discount Rate) है, वो कौन चार्जेस लगाएगा, कितना चार्जेस लगाएगा – रुपए डेबिट कार्ड के ट्रांजैक्शन के ऊपर, UPI के ऊपर – ये सारी चीजों के ऊपर एक प्रकार से जो कंट्रोल है, सरकार बेसिकली जो लीगल है, लीगल तरीका है वो उसके थ्रू जाना चाहती है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार कानून के अंदर बदलाव करना चाहती है ताकि फ्यूचर में जो भी बदलाव करना है वो आसानी से कर सके।
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UPI फ्री नहीं है – असली सच्चाई
समझिए कि जब भी आप UPI पेमेंट करते हो – चाहे आप अपने किसी फ्रेंड को कर रहे हो, रिश्तेदार को कर रहे हो या फिर मार्केट में जाकर स्कैन कर रहे हैं – जब भी आप यह पेमेंट करते हैं तो यहां पर बहुत सारे इंस्टीट्यूशंस एक साथ काम करते हैं ताकि आपका ट्रांजैक्शन सक्सेसफुल हो सके:
- आपका बैंक
- मर्चेंट का बैंक (दुकानदार जिससे आप खरीदारी कर रहे हैं)
- NPCI (National Payments Corporation of India)
- पेमेंट ऐप्स (Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM आदि)
- साइबर सिक्योरिटी सिस्टम
- फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम
- डेटा सेंटर्स
अगर गौर करें तो यहां पर जो इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट है वो हजारों करोड़ में जाता है हर साल। क्यों? ताकि आप UPI पेमेंट कर सकें।
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पहले क्या व्यवस्था थी?
2020 जनवरी से (कोविड के जस्ट पहले से) सरकार ने UPI ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए, रुपए डेबिट कार्ड को बढ़ावा देने के लिए – जो भी इसके ऊपर चार्जेस लगते थे उसको खत्म कर दिया। उसे हम कहते थे Merchant Discount Rate (MDR)।
तो उसकी वजह से क्या हुआ? अल्टीमेटली ये जो पैसा है वो कौन बेयर कर रहा है? क्योंकि कस्टमर से तो वो पैसा लिया नहीं जा रहा था।
दिलचस्प बात यह है कि इसके पीछे जो बैंक्स हैं, जो पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स हैं और इसके अलावा सरकार भी क्या कर रही थी? हर साल यहां पर कुछ सब्सिडी दे रही थी। कुछ करोड़ों रुपए यहां पर सरकार अलग से साइड कर देती थी ताकि जो भी कॉस्ट बेयर करना है उसमें सरकार की भी हिस्सेदारी हो।
UPI इतना सक्सेसफुल क्यों हुआ?
सबसे बड़ा कारण था:
1. सभी कस्टमर्स के लिए फ्री
जो कस्टमर्स हैं देश भर में, उनके ऊपर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
2. कोई भी इस्तेमाल कर सकता है
जरूरी नहीं कि आप बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे हो। सिंपल सा आपके पास स्मार्टफोन होना चाहिए। अब तो बेसिक फोन से भी कर सकते हो। ऑफलाइन UPI भी आ गया।
3. इंस्टेंट सेटलमेंट
तुरंत दुकानदार को पता होना चाहिए कि पैसा डेबिट हो गया, उसके पास आ गया।
4. यूनिवर्सली एक्सेप्टेबल
जितने भी बैंक्स हैं हमारे देश में, वो इंटरकनेक्टेड हो गए इससे।
5. सरकारी पुश
डिजिटल इंडिया, जनधन योजना, आधार – सब कुछ इंटरकनेक्टेड हो गया।
MDR क्या है? सिंपल भाषा में
Merchant Discount Rate (MDR) एक फी होता है, एक चार्ज होता है जो मर्चेंट के ऊपर लगाया जाता है – ना कि कस्टमर के ऊपर।
उदाहरण:
मान लो आप किसी दुकान पर गए, ₹500 का सामान खरीदा। आपने ₹500 ही उसको पे किया। लेकिन दुकानदार के अकाउंट में क्या ₹500 आए?
नहीं। अगर MDR 0.3% है तो उसे मिलेगा सिर्फ ₹498.50। बीच का ₹1.50 बेसिकली चार्ज है जो इश्युइंग बैंक, एक्वायरिंग बैंक, पेमेंट नेटवर्क – इन सबमें आपस में डिस्ट्रीब्यूट हो जाता है।
| ट्रांजैक्शन राशि | MDR (मान लो 0.3%) | मर्चेंट को मिलेगा | कटा हुआ चार्ज |
|---|---|---|---|
| ₹500 | 0.3% | ₹498.50 | ₹1.50 |
| ₹2000 | 0.3% | ₹994.00 | ₹6.00 |
| ₹10,000 | 0.3% | ₹9,970 | ₹30 |
क्रेडिट कार्ड vs UPI में MDR
क्रेडिट कार्ड पर:
अक्सर आपने देखा होगा जब भी आप क्रेडिट कार्ड से स्वाइप करते हो तो दुकानदार कहता है: “सर, प्लीज क्रेडिट कार्ड से मत करिए, हमारे ऊपर 2% चार्ज लग जाएंगे।”
मान लो आप ₹50,000 का टीवी लेने गए और क्रेडिट कार्ड से purchase किया तो मर्चेंट को सिर्फ ₹49,000 ही मिलेगा (अगर 2% MDR है)।
UPI पर:
2019 के यूनियन बजट में सरकार ने कहा कि हम चाहते हैं कि देश भर में UPI और रुपए डेबिट कार्ड ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो। इसलिए सरकार ने कहा कि हम अपनी तरफ से कुछ रुपए सब्सिडी देंगे ताकि कस्टमर से इसका कोई चार्ज ना लगे।
UPI की सफलता – आंकड़ों में
जुलाई 2024 में 29.9 लाख करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ है – यानी ऑलमोस्ट 30 लाख करोड़।
टोटल नंबर ऑफ ट्रांजैक्शंस: 23.66 बिलियन ट्रांजैक्शंस।
समझने वाली बात यह है कि इतने बड़े स्केल पर दुनिया में शायद किसी और देश में ऐसा नहीं होता। यह सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है दुनिया में ट्रांजैक्शंस करने का।
प्रॉब्लम क्या है? Sustainability का सवाल
अब तो ये बढ़ता जा रहा है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि आगे आने वाले समय में ये और ज्यादा ग्रो करेगा। 10 गुना और ज्यादा ग्रो कर जाएगा।
लेकिन प्रॉब्लम ये है – इसका कॉस्ट कौन बेयर करेगा?
- बैंक्स को तो पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर पे इन्वेस्ट करना है – सर्वर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी
- जो पेमेंट ऐप्स हैं (Google Pay, Paytm) वो भी हैवीली इन्वेस्ट करते हैं – मर्चेंट ऑनबोर्ड करते हैं, QR कोड deploy करते हैं
- सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, टेक्निकल सपोर्ट
बिना चार्जेस के ये कैसे चीजें सर्वाइव कर पाएंगी?
अब क्या बदलाव हो रहा है?
अभी जो करंट लॉ है उसमें ये कहा गया है कि कुछ स्पेसिफिक ट्रांजैक्शन में (जैसे UPI, रुपए वाला ट्रांजैक्शन) उसमें जीरो MDR लगेगा।
लेकिन अब यहां पर सरकार ने इसमें चेंजेस किया है और इस चेंज के तहत सरकार को फ्लेक्सिबिलिटी मिल जाएगी:
- कौन से पेमेंट सिस्टम के ऊपर चार्ज लगा सकते हैं
- किस तरह के ट्रांजैक्शंस के ऊपर MDR चार्ज लगा सकते हैं
- कौन से मर्चेंट्स को एक्जेंप्ट कर सकते हैं
दिलचस्पी बात यह है कि अभी ये जो बिल में चेंजेस किए जा रहे हैं, इसमें ऐसा नहीं है कि ये बोला जा रहा है कि अभी हम तुरंत MDR चार्जेस लगा देंगे। नहीं, ऐसा नहीं है।
बेसिकली इससे सरकार को पावर मिल रही है ताकि फ्यूचर में कभी भी ये चीज कर सकती है सरकार।
किन पर लगेगा चार्ज? कौन होगा अफेक्ट?
यही बोला जा रहा है कि अगर चार्जेस लगेंगे भी तो:
छूट मिल सकती है:
- छोटे मर्चेंट्स (लोकल ग्रोसरी शॉप, सब्जी विक्रेता)
- ₹2000 तक के ट्रांजैक्शन – इस पे कोई चार्ज नहीं लगेगा
- P2P ट्रांजैक्शन (दोस्त-रिश्तेदारों को भेजे गए पैसे) – चाहे वो ₹10 हो, ₹500 हो या ₹1 लाख हो
चार्ज लग सकता है:
- ₹2000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर
- बड़े मर्चेंट्स पर (जिनका टर्नओवर हाई होता है)
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
हाल ही में RBI की Monetary Policy Committee की रिपोर्ट में मीडिया पर्सन्स ने पूछा संजय मल्होत्रा जी (RBI गवर्नर) से कि आपको क्या लगता है कि UPI ट्रांजैक्शन का कॉस्ट कौन बेयर करेगा – कस्टमर या बैंक?
संजय मल्होत्रा जी का कहना था: “देखिए, अभी ये स्पेकुलेशन है। अभी तो लेजिसलेशन हो रहा है, चेंजेस हो रहे हैं कानून में। डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को सस्टेनेबल बनाने के लिए कुछ ना कुछ चार्जेस तो लगने चाहिए। अब वो चार्जेस सरकार बेयर करेगी, बैंक बेयर करेगा या पब्लिक बेयर करेगी – यह समय बताएगा।”
आम आदमी पर क्या असर?
अगर ये लागू होता है तो:
- छोटी खरीददारी (₹2000 तक) – कोई असर नहीं
- दोस्तों-परिवार को पैसे भेजना – कोई असर नहीं
- बड़ी खरीददारी (₹2000 से ऊपर) – थोड़ा चार्ज लग सकता है
लेकिन राहत की बात यह है कि सरकार अभी सिर्फ कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। अभी तुरंत कोई चार्ज नहीं लगने वाला।
मुख्य बातें (Key Points)
- सरकार Payment and Settlement System Act, 2007 में संशोधन ला रही है
- ₹2000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लग सकता है
- छोटे व्यापारी और P2P ट्रांजैक्शन को छूट मिल सकती है
- जुलाई 2024 में 30 लाख करोड़ रुपए का UPI ट्रांजैक्शन हुआ
- RBI गवर्नर ने कहा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सस्टेनेबल मॉडल जरूरी











