LIVE | ...
गुरूवार, 6 अगस्त 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Kidney Disease India: ₹10 की पेनकिलर से ₹40,000 के डायलिसिस तक का सफर, क्यों 40 की उम्र से पहले खो रहे हैं भारतीय अपनी किडनी

Kidney Disease India: ₹10 की पेनकिलर से ₹40,000 के डायलिसिस तक का सफर, क्यों 40 की उम्र से पहले खो रहे हैं भारतीय अपनी किडनी

WHO रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े, भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज की दर दुनिया से दोगुनी, सिर्फ 2600 विशेषज्ञ डॉक्टर 140 करोड़ आबादी के लिए

Ajay Kumar by Ajay Kumar
गुरूवार, 6 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, हेल्थ
A A
0
Kidney Disease India
104
SHARES
690
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Kidney Disease India Crisis: आइए सबसे पहले कुछ नंबर्स से शुरुआत करते हैं। पहला नंबर है ₹10 – इतनी ही कीमत होती है उस पेनकिलर स्ट्रिप की जो आप मेडिकल शॉप से बिना पर्चे के खरीद लेते हैं। सिरदर्द के लिए, कमर दर्द के लिए, बुखार के लिए – एक गोली खाएंगे और काम खत्म। दूसरा नंबर है ₹400 से लेकर ₹40,000 महीने का – यह खर्चा होता है डायलिसिस का। जब किसी की किडनी काम करना बंद कर देती है, तो हफ्ते में तीन बार डायलिसिस कराना पड़ता है – जीवन भर।

देखा जाए तो आज इस खबर का यही मुख्य उद्देश्य है कि पहले नंबर से दूसरे नंबर तक का सफर भारत में क्यों इतना छोटा होता जा रहा है। कहां ₹10 से खर्चा बढ़कर हजारों तक पहुंच जा रहा है।

🔥 यह भी पढ़ें- 5 अगस्त: History में आज के दिन हुई ये बड़ी घटनाएं, Houdini के करतब से लेकर Nelson Mandela की गिरफ्तारी तक

दुनिया और भारत में किडनी ट्रांसप्लांट: चौंकाने वाले आंकड़े

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में दुनिया भर में 1,73,000 से ज्यादा ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए – अब तक के सबसे ज्यादा। और इनमें से करीब 65% मामले किडनी के थे। यानी दुनिया में सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट होने वाला ऑर्गन किडनी है।

अब देशों का नंबर्स देखें तो:

  • अमेरिका: हर साल करीब 49,000 ट्रांसप्लांट्स (हर 10 लाख लोगों में 143)
  • स्पेन: डोनेशन रेट में नंबर वन (हर 10 लाख पर 49 डोनर्स)
  • भारत: डिसीज्ड डोनेशन रेट – प्रति 10 लाख पर 1 से भी कम

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि टोटल नंबर में भारत दुनिया के टॉप तीन देशों में है (अमेरिका और चाइना के साथ)। लिविंग डोनर किडनी ट्रांसप्लांट में तो भारत दुनिया में नंबर वन है। 2022 में ही करीब 10,000 से ज्यादा ट्रांसप्लांट्स हुए।

लेकिन प्रॉब्लम यह है कि हमारी आबादी 140 करोड़ है। पर मिलियन के हिसाब से देखें तो हम दुनिया में सबसे नीचे आते हैं।

🔥 यह भी पढ़ें- बड़ा अलर्ट: Meghalaya में Extreme Heavy Rainfall, पूर्वोत्तर भारत पर मंडरा रहा खतरा

देशप्रति 10 लाख ट्रांसप्लांटडोनेशन रेट
स्पेन13649
अमेरिका14349
भारत1-20.8
भारत में किडनी की बीमारी: दुनिया से दोगुनी दर

अब वो नंबर जो पूरी तस्वीर को बदल कर रख देंगे: दुनिया में Chronic Kidney Disease (CKD) करीब 9% लोगों को होता है – यानी 85 करोड़ लोग।

भारत में यह नंबर 15 से 17% है – यानी दुनिया के एवरेज से लगभग दोगुना। यानी हर छः-सात में से एक भारतीय को यह प्रॉब्लम हो जाती है।

सवाल उठता है कि भारतीय अपनी किडनी दुनिया से पहले और 40 साल से भी पहले क्यों खो रहे हैं?

राकेश की कहानी – लाखों भारतीयों की सच्चाई

इस सवाल को समझने के लिए एक कहानी सुनिए। नाम बदल दिया गया है, लेकिन यह कहानी भारत के लाखों घरों में बिल्कुल ऐसे ही चल रही है।

राकेश, 34 साल का, सेल्स की जॉब करता है। दिन भर बाइक पर घूमता है। टारगेट का प्रेशर, बाहर का खाना, अधूरी नींद। 28 साल की उम्र में उसे कमर में दर्द शुरू हो गया। डॉक्टर के पास कौन जाए? टाइम किसके पास है?

मेडिकल शॉप पर गया। दुकानदार ने एक पेनकिलर दी। ₹10 की एक स्ट्रिप। खाई और दर्द चला गया। अगली बार फिर वही। धीरे-धीरे वो स्ट्रिप उसके बैग का इंपॉर्टेंट हिस्सा बन गई। कभी कमर के लिए, कभी सिर दर्द के लिए, कभी बस थकान के लिए भी।

छह साल ऐसे ही निकल गए। बीच में एक कंपनी चेकअप में बताया गया कि ब्लड प्रेशर थोड़ा ज्यादा है। उसने सोचा काम के स्ट्रेस से ठीक हो जाएगा। कोई दवाई शुरू करने की जरूरत नहीं।

फिर एक दिन ऑफिस में पैरों में सूजन आई, चेहरा भारी लगने लगा, सांस फूलने लगी। अस्पताल में टेस्ट किया गया और डॉक्टर ने जो बताया वो पूरे घर को हिला कर रख दिया: उसकी दोनों किडनी अपनी क्षमता का करीब 80% खो चुकी हैं। वापस जाने का कोई रास्ता नहीं। अब सिर्फ दो ही ऑप्शन – जीवन भर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट।

राकेश का सबसे पहला सवाल वही था जो आप भी सोच रहे होंगे: “मुझे पहले क्यों नहीं पता चला? मुझे तो कभी दर्द हुआ ही नहीं!”

किडनी में दर्द क्यों नहीं होता?

अगर गौर करें तो किडनी के साथ सबसे खराब बात यह है कि किडनी में दर्द की नसें उस तरह नहीं होती जिस तरह पेट में या दांत में होती हैं।

और उससे भी बड़ी बात – किडनी के पास बहुत बड़ा बैकअप सिस्टम होता है। हर किडनी में करीब 10 लाख छोटे-छोटे फिल्टर्स होते हैं जिन्हें हम नेफ्रॉन्स कहते हैं।

समझने वाली बात यह है कि जब कुछ नेफ्रॉन्स खराब होने लगते हैं तो बाकी नेफ्रॉन्स उनका काम भी अपने ऊपर ले लेते हैं। वो अपनी क्षमता से ज्यादा काम करके रिपोर्ट नॉर्मल दिखाते हैं।

इसलिए डॉक्टर्स कहते हैं कि Chronic Kidney Disease के लक्षण अक्सर तब दिखते हैं जब किडनी अपनी 60-70% क्षमता पहले ही खो चुकी होती है। यानी जब तक आपको पता चलता है, तब तक आधे से ज्यादा नुकसान already हो चुका होता है।

दिलचस्प बात यह है कि नेफ्रॉन्स दोबारा रीजनरेट नहीं होते। जैसे लीवर रीजनरेट हो जाता है, वैसे किडनी नहीं होती। इसी वजह से CKD को “साइलेंट किलर” कहा जाता है।

₹10 की गोली किडनी के साथ क्या कर रही है?

जो पेनकिलर्स हम सबसे ज्यादा लेते हैं – Ibuprofen, Diclofenac और उनके जैसी दवाइयां – उन्हें NSAIDs कहते हैं।

ये काम कैसे करती हैं? ये शरीर में एक चीज को रोकती हैं जिसे हम कहते हैं Prostaglandins। यह प्रोस्टाग्लैंडिन्स सूजन और दर्द पैदा करते हैं। इसलिए जब इन्हें रोक दिया जाता है तो आपका दर्द चला जाता है।

लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात – इन प्रोस्टाग्लैंडिन्स का एक दूसरा काम भी है जो कोई आपको बताता नहीं: वे किडनी के खून की नलियों को खुला रखते हैं ताकि किडनी तक पूरा खून पहुंच सके।

तो जब आप NSAIDs लेते हैं:

  1. दर्द चला जाता है ✓
  2. किडनी का खून का बहाव भी कम हो जाता है ✗

एक बार लेने से अक्सर कुछ असर नहीं पड़ता। लेकिन जब यह सालों तक बार-बार होता रहे, तो किडनी के टिश्यू पर निशान बन जाते हैं। इसका मेडिकल नाम है: Analgesic Nephropathy।

भारत में NSAIDs के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाली यह समस्या अब बहुत नॉर्मल होती जा रही है। रिसर्च कहती है कि जो लोग नियमित NSAIDs लेते हैं, उनमें पहली बार Acute Kidney Failure का खतरा करीब तीन गुना ज्यादा होता है।

भारत में किडनी रोग के असली कारण

पेनकिलर अकेला विलेन नहीं है। वो तीसरे नंबर पर आता है। भारत में CKD के सबसे बड़े कारण हैं:

1. डायबिटीज (30-40%)
जब खून में शुगर सालों तक ज्यादा रहती है तो वो किडनी के छोटे फिल्टर्स को अंदर से खराब कर देती है। इसे Diabetic Nephropathy कहते हैं।

2. हाई ब्लड प्रेशर (20-30%)
बढ़ा हुआ प्रेशर उन नाजुक नलियों और नेफ्रॉन्स को लगातार धक्का देता रहता है।

3. पेनकिलर्स और अन्य दवाइयां

ये दो चीजें मिलाकर भारत के 60% से ज्यादा CKD के लिए जिम्मेदार हैं।

अब सबसे इंपॉर्टेंट बात सुनिए: भारत में डायबिटीज का 57% लोगों को पता ही नहीं कि उन्हें डायबिटीज है। और ब्लड प्रेशर का हाल भी सेम ऐसा ही है – आधे लोगों को पता ही नहीं लगता।

मतलब लाखों लोग वो बीमारी लेकर घूम रहे हैं जो उनकी किडनी को रोज थोड़ा-थोड़ा खा रही है और उन्हें पता भी नहीं है।

आंध्र प्रदेश का रहस्य: Unknown Etiology CKD

आंध्र प्रदेश के उड्यनम इलाके में, उसके आसपास उड़ीसा तक – गांव के गांव लोग किडनी फेलियर के शिकार हो रहे हैं।

सबसे अजीब बात: इनमें से बहुत लोगों को ना तो डायबिटीज है और ना ही ब्लड प्रेशर। इसका नाम दिया गया है: Chronic Kidney Disease of Unknown Etiology (CKDu) – यानी वो किडनी बीमारी जिसका कारण पता नहीं चल पा रहा।

रिसर्चर्स कई संभावित कारण गिन रहे हैं:

  • पानी में Heavy Metals का होना
  • तेज गर्मी में खेत में काम करते हुए बार-बार Dehydration
  • कुछ Pesticides
  • कुछ जड़ी-बूटियों वाली दवाइयां जिनमें Aristolochic Acid जैसे नुकसानदेह तत्व होते हैं

लेकिन अभी तक पूरा कोई पुख्ता जवाब नहीं मिला है। और यही प्रॉब्लम का सबसे डरावना हिस्सा है – कुछ इलाकों में लोग एक ऐसी बीमारी से मर रहे हैं जिसका हम नाम तक ठीक से नहीं जानते।

भारत में किडनी इलाज का गणित – जो मिलता ही नहीं

भारत में हर साल करीब 2,20,000 नए लोग उस स्टेज तक पहुंच जाते हैं जहां उन्हें डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है।

पूरे देश के डायलिसिस सिस्टम एक साल में करीब 1,75,000 लोगों को संभाल सकते हैं। यानी हर साल हजारों लोग लाइन में ही रह जाते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक भारत को साल भर में करीब 3 करोड़ 40 लाख डायलिसिस सेशंस चाहिए। हमारे पास हैं सिर्फ करीब 15,000 डायलिसिस सेंटर्स।

डॉक्टर्स की कमी:
पूरे भारत में Nephrologists (किडनी के विशेषज्ञ) करीब 2,600 ही हैं। 140 करोड़ की आबादी में मात्र 2,600! मतलब 5 लाख से ज्यादा लोगों पर एक किडनी स्पेशलिस्ट। और इनमें से ज्यादातर बड़े शहरों में ही मिलेंगे।

यानी छोटे जिलों में रहने वाले आम आदमी के लिए किडनी का स्पेशलिस्ट अक्सर 100-200 किमी दूर ही मिलेगा।

ऑर्गन डोनेशन – भारत की सबसे बड़ी चुनौती

ट्रांसप्लांट की बात करें तो भारत में वेट करने वालों की लाइन कभी खत्म होती ही नहीं। क्योंकि हर साल जितने नए मरीज आते हैं, उनके मुकाबले ट्रांसप्लांट बहुत कम हो पाते हैं।

भारत में किडनी ट्रांसप्लांट का बहुत बड़ा हिस्सा Living Donor से होता है – मतलब घर का कोई अपना अपनी एक किडनी डोनेट कर देता है। इसी वजह से भारत लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट में दुनिया में सबसे आगे है।

लेकिन Deceased Donation (मृत व्यक्ति का ऑर्गन डोनेशन) में हम बहुत पीछे हैं – हर 10 लाख में से 1 से भी कम। जबकि स्पेन में नंबर 49 है।

क्यों नहीं होता डोनेशन?

  1. जानकारी नहीं – बहुत कम लोगों को पता है कि Brain Death के बाद भी ऑर्गन डोनेट कर सकते हैं
  2. परिवार की सहमति नहीं मिलती – उस मौत के पल में यह फैसला लेना बहुत मुश्किल हो जाता है
  3. कानून के मुताबिक परिवार की सहमति जरूरी है

स्पेन ने इसे Presumed Consent सिस्टम से solve किया – मान लिया जाता है कि व्यक्ति दान के लिए तैयार था जब तक उसने खुद मना नहीं किया हो।

भारत में NOTTO (National Organ & Tissue Transplant Organisation) इसके लिए काम कर रही है।

यह भी पढे़ं 👇

UPI Charges

UPI Payment Charges: ₹2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर लग सकता है चार्ज, सरकार ला रही कानून में बदलाव

गुरूवार, 6 अगस्त 2026
Shakib Al Hasan House Attack

Shakib Al Hasan House Attack: हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शाकिब के घर पर पेट्रोल बम से हमला

गुरूवार, 6 अगस्त 2026
Father Last Rites Video Call

Father Last Rites Video Call: ‘हमारे पास समय नहीं’, तीन बेटियों ने वीडियो कॉल पर देखा पिता का अंतिम संस्कार

गुरूवार, 6 अगस्त 2026
Sri Harmandir Sahib Live

Sri Harmandir Sahib Live: 1000+ प्लेटफॉर्म्स पर गुरबाणी प्रसारण, SGPC ने बदला रुख

गुरूवार, 6 अगस्त 2026
सरकार ने क्या किया?

2016 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम शुरू हुआ। इसके तहत जिले के सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को मुफ्त डायलिसिस दी जाती है।

यह असली राहत की कहानी है क्योंकि प्राइवेट में वही डायलिसिस महीने में ₹25,000 से ₹40,000 तक चला जाता है।

लेकिन समझने वाली बात यह है – डायलिसिस प्रोग्राम एक इलाज है। वो उस आदमी के लिए है जिसकी किडनी पहले ही जा चुकी है।

जो चीज सबसे ज्यादा चाहिए वो इलाज नहीं, जांच है। क्योंकि अगर राकेश का ब्लड प्रेशर 28 साल की उम्र में ही कंट्रोल हो जाता और अगर उसने पेनकिलर डॉक्टर से पूछकर ली होती, तो वो कभी उस कुर्सी तक पहुंचता ही नहीं।

एक डायलिसिस मशीन की कीमत लाखों में होती है। और एक यूरिन टेस्ट की कीमत मात्र ₹50 होती है।

आप क्या कर सकते हैं? जरूरी कदम

1. साल में एक बार ये दो टेस्ट जरूर करवाएं:

  • Serum Creatinine (जिससे डॉक्टर आपका eGFR निकालता है – यानी किडनी कितने % काम कर रही है)
  • Urine Albumin Test (बताता है कि किडनी से प्रोटीन लीक तो नहीं हो रहा)

ये दोनों टेस्ट बहुत सस्ते हैं। खासकर अगर आपको डायबिटीज या BP है या घर में किसी को किडनी की बीमारी रही है।

2. पेनकिलर का नियम:

  • कभी-कभी की गोली अलग बात है
  • लेकिन अगर आप हफ्ते में कई बार, कई महीनों से पेनकिलर ले रहे हैं तो वह एक आदत नहीं, एक चेतावनी है
  • उस दर्द की असली वजह ढूंढिए, उसे सिर्फ दबाइए मत

3. पानी पीते रहिए:
दिन भर धूप/गर्मी में काम करने वालों के लिए बार-बार dehydrated होना सीधा किडनी पर बोझ डालता है।

4. BP और शुगर को छोटी बात मत समझिए:
यही दो चीजें भारत की 60% किडनी बीमारियों के पीछे का कारण हैं।


मुख्य बातें (Key Points)

  • भारत में Chronic Kidney Disease की दर 15-17% है – दुनिया के एवरेज (9%) से दोगुनी
  • पूरे देश में सिर्फ 2,600 Nephrologists हैं – यानी 5 लाख लोगों पर 1 डॉक्टर
  • NSAIDs (Painkillers) के लगातार इस्तेमाल से किडनी को खून का बहाव कम होता है
  • डायबिटीज और BP से 60% से ज्यादा किडनी बीमारियां होती हैं – और आधे लोगों को पता ही नहीं
  • एक डायलिसिस मशीन लाखों की, लेकिन यूरिन टेस्ट सिर्फ ₹50 का

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

किडनी में दर्द की नसें नहीं होतीं, इसलिए 60-70% damage होने तक लक्षण नहीं दिखते। पैरों में सूजन, थकान, भूख कम लगना शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

प्रश्न 2: क्या पेनकिलर बंद कर देनी चाहिए?

नहीं, कभी-कभार लेना ठीक है। लेकिन अगर हफ्ते में कई बार, महीनों से ले रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

प्रश्न 3: किडनी की जांच कितनी बार करानी चाहिए?

अगर आपको डायबिटीज, BP है या परिवार में किडनी की बीमारी रही है तो साल में एक बार Serum Creatinine और Urine Albumin टेस्ट जरूर कराएं।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

UPI Payment Charges: ₹2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर लग सकता है चार्ज, सरकार ला रही कानून में बदलाव

Ajay Kumar

Ajay Kumar

पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

Related Posts

UPI Charges

UPI Payment Charges: ₹2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर लग सकता है चार्ज, सरकार ला रही कानून में बदलाव

गुरूवार, 6 अगस्त 2026
Shakib Al Hasan House Attack

Shakib Al Hasan House Attack: हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शाकिब के घर पर पेट्रोल बम से हमला

गुरूवार, 6 अगस्त 2026
Father Last Rites Video Call

Father Last Rites Video Call: ‘हमारे पास समय नहीं’, तीन बेटियों ने वीडियो कॉल पर देखा पिता का अंतिम संस्कार

गुरूवार, 6 अगस्त 2026
Sri Harmandir Sahib Live

Sri Harmandir Sahib Live: 1000+ प्लेटफॉर्म्स पर गुरबाणी प्रसारण, SGPC ने बदला रुख

गुरूवार, 6 अगस्त 2026
ed

Punjab ED Raid: पटियाला में प्रॉपर्टी डीलर की रिहाइश पर ED की छापेमारी, रातभर चली जांच

गुरूवार, 6 अगस्त 2026
Arvind Kejriwal

Arvind Kejriwal Social Media: भारत में केजरीवाल का अकाउंट ब्लॉक, Meta से मांगा स्पष्टीकरण

गुरूवार, 6 अगस्त 2026

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।