LPG Cylinder Price Hike ने देश के बड़े औद्योगिक शहरों दिल्ली, नोएडा और गुजरात में इन दिनों एलपीजी गैस की कमी और बढ़ती कीमतों ने प्रवासी मजदूरों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात इतने मुश्किल हो चुके हैं कि बड़ी संख्या में कामगार अब शहर छोड़कर अपने गांव लौटने लगे हैं।
रोजगार, महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों के बीच संतुलन बनाना उनके लिए दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है। रेलवे स्टेशनों पर इसकी साफ झलक देखने को मिल रही है। कई प्रमुख स्टेशन पर अचानक मजदूरों की भीड़ बढ़ गई है।
खाना बनाना हो गया सबसे बड़ी समस्या
दिल्ली और सूरत जैसे शहरों से लौट रहे कामगारों का कहना है कि उनके सामने बड़ी समस्या खाना बनाने की हो गई है। गैस या तो आसानी से मिल नहीं रही या अगर मिल भी रही है तो इतनी महंगी कि उसे खरीदना संभव नहीं है।
दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। कई मजदूरों ने मजबूरी में अपने कमरे का चूल्हा बंद कर दिया है। अब वह बाहर खाना खाने को मजबूर हैं, जहां एक दिन का खर्च ₹100 से भी ज्यादा हो जाता है।
देखा जाए तो कमाई सीमित है और खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में शहर में टिके रहना उनके लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा है। किराया, बिजली, पानी और आने-जाने का खर्च पहले ही उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा खा जाता है।
फैक्ट्रियों में काम भी घटा
अब गैस की बढ़ती कीमतों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी है। कई फैक्ट्रियों में उत्पादन कम हो गया है। गैस की कमी के चलते काम प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर मजदूरों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है।
अचानक हजारों कामगारों का रेलवे स्टेशन पर पहुंचना इस संकट की गंभीरता को दिखाता है। अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन करना पड़ा। फिर भी भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लोगों को जनरल डब्बों में किसी तरह सफर करना पड़ रहा है।
गर्मी ने बढ़ाई मुसीबत
कई मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्रियों में काम घट गया है और उन्हें नियमित काम नहीं मिल पा रहा। गर्मी ने भी स्थिति को और खराब कर दिया है। तेज तापमान में लंबे समय तक काम करना आसान नहीं है। मजदूरों का कहना है कि स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि कई लोगों ने यह भी बताया कि शादी-विवाह का मौसम होने के कारण वे पहले ही घर लौटने का फैसला कर चुके थे। लेकिन मौजूदा हालात ने इस निर्णय को और जल्दी लेने पर मजबूर कर दिया।
मजदूरों की आपबीती
कामगार बताते हैं कि शहर में रहना अब पहले जैसा नहीं रहा। खर्च बढ़ गया है लेकिन कमाई वैसी नहीं रही। ऐसे में गांव लौटना ही बेहतर विकल्प है।
दूसरे मजदूर ने कहा कि फैक्ट्री मालिक ने गैस महंगी होने की वजह से काम कम कर दिया, जिससे आमदनी घट गई। अब गांव में ही कुछ काम तलाशने की योजना है।
अगर गौर करें तो लोगों का कहना है कि गैस की कमी के कारण उन्हें लकड़ी या अन्य साधनों से खाना बनाना पड़ रहा है, जो खुद महंगे हो चुके हैं। छोटे सिलेंडर की कीमत भी इतनी बढ़ गई है कि वे आम मजदूरों की पहुंच से बाहर हो गए हैं।
कमर्शियल सिलेंडर का असर
जब पूरे महीने की कमाई सीमित हो तो किराया देना और खाना बनाना दोनों साथ निभाना मुश्किल हो जाता है। दूसरी ओर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी हाल में बढ़ोतरी हुई है।
इसका असर सीधे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे खाद्य व्यवसायों पर पड़ा है। इन व्यवसायों की लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका बोझ आखिरकार आम लोगों पर ही आएगा।
घरेलू सिलेंडर में राहत, लेकिन छोटू गैस महंगा
हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन छोटू गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ने से निम्न आय वर्ग के लोगों पर असर पड़ा है।
यही वजह है कि शहरों में काम करने वाले मजदूर अब अपने खर्चों को संभाल नहीं पा रहे हैं और गांव लौटना उनके लिए मजबूरी बनता जा रहा है।
प्रमुख शहरों में LPG सिलेंडर की नई कीमतें
मई के महीने की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही आम लोगों और कारोबारियों के लिए अहम बदलाव सामने आया। रसोई और व्यापार से जुड़ी सबसे जरूरी चीजों में से एक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संशोधन किया गया।
इस बदलाव ने खासतौर पर कमर्शियल और छोटे फ्री ट्रेड सिलेंडरों का इस्तेमाल करने वालों की चिंता बढ़ा दी। तेल कंपनियों ने 1 मई से 19 किग्रा वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बड़ा इजाफा किया।
19 किग्रा कमर्शियल सिलेंडर में बड़ा इजाफा
इस श्रेणी में करीब ₹93 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। जिसका मतलब यह है कि अब दिल्ली में यह सिलेंडर ₹1,871.50 में मिलेगा, जो पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है।
सिर्फ बड़े सिलेंडर ही नहीं, बल्कि 5 किग्रा वाले फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। इस छोटे सिलेंडर के दाम में ₹26 का इजाफा हुआ है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिलेंडर आमतौर पर छोटे दुकानदार, स्टॉल संचालक, सीमित उपयोग करने वाले व्यवसायों, छात्रों और दूसरे राज्य के वे लोग जिनके पास स्थाई पता नहीं है, वे इस्तेमाल करते हैं।
घरेलू सिलेंडर में राहत
इस पूरे बदलाव के बीच राहत की खबर भी है। 14.2 किग्रा वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह वही सिलेंडर है जिसका इस्तेमाल देश के करोड़ों घरों में खाना बनाने के लिए होता है।
वहीं सरकार और तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के असर से बचाने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि इस श्रेणी में फिलहाल स्थिरता बनाए रखी गई है।
आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 33 करोड़ परिवार घरेलू एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। ऐसे में यदि इस श्रेणी में कीमतें बढ़ाई जातीं तो इसका सीधा असर आम लोगों के रसोई बजट पर पड़ता।
प्रमुख शहरों में 14.2 किग्रा सिलेंडर की कीमत
अगर प्रमुख शहरों की बात करें तो 14.2 किग्रा वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं:
- दिल्ली: ₹803
- मुंबई: ₹802.50
- कोलकाता: ₹829
- चेन्नई: ₹818.50
- बेंगलुरु: ₹805.50
- हैदराबाद: ₹805
- अहमदाबाद: ₹810
- भोपाल: ₹808.50
- चंडीगढ़: ₹812.50
यानी घरेलू स्तर पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ाया गया है। लेकिन कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने का असर धीरे-धीरे आम लोगों तक पहुंच सकता है।
बाजार पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि जब कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होता है तो इसका असर बाजार में खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ता है। होटल और रेस्टोरेंट अपनी बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल सकते हैं।
फिलहाल नई दिल्ली में 19 किग्रा वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम हैं:
- दिल्ली: ₹1,871.50
- मुंबई: ₹1,824
- कोलकाता: ₹1,932
- चेन्नई: ₹2,037
समझने वाली बात यह है कि वहीं दूसरी ओर 5 किलो वाले फ्री ट्रेड सिलेंडर की कीमत बढ़ने से छोटे व्यवसायों पर भी दबाव बढ़ेगा। यह छोटे सिलेंडर सब्सिडी के दायरे में नहीं आते और उनकी कीमत बाजार के हिसाब से तय होती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 19 किग्रा कमर्शियल सिलेंडर ₹93 महंगा, अब दिल्ली में ₹1,871.50
- 5 किग्रा फ्री ट्रेड सिलेंडर में ₹26 की बढ़ोतरी
- 14.2 किग्रा घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर
- होटल-रेस्टोरेंट के खाने महंगे हो सकते हैं












