LIC IPO : एलआईसी के अच्छे प्रदर्शन से सरकार को मिला तगड़ा बूस्ट, अब निवेशकों को मिलेगा ज्यादा कमाई का मौका

LIC IPO : लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (Life Insurance Corporation) यानी एलआईसी के आईपीओ की स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग के साथ ही उसके प्रदर्शन में सुधार होने का अनुमान है। सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी ने 31 मार्च, 2022 को समाप्त वित्त वर्ष में अपने फर्स्ट ईयर प्रीमियम में (first-year premium collection) अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए अहम माना जाने वाला यह आंकड़ा 7.9 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 1.98 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

मार्च में 51 फीसदी बढ़ा प्रीमियम कलेक्शन

लाइवमिंट के मुताबिक, वित्त वर्ष 22 के अंत तक LIC का मार्केट 63.25 फीसदी रहा। हालांकि सालाना आधार पर इसमें कमी दर्ज की गई है। मार्च में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी का प्रीमयम कलेक्शन एक साल पहले की तुलना में 51 फीसदी बढ़कर 42,319.22 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। विशेष रूप से मार्च में ऊंचे प्रीमियम कलेक्शन से सरकार को LIC के शेयरों की बिक्री को लेकर तगड़ा बूस्ट मिलेगा।

एलआईसी ने बेची 2.17 करोड़ पॉलिसी

31 मार्च, 2022 को समाप्त वित्त वर्ष के दौरान, LIC ने 2.17 करोड़ बीमा पॉलिसी बेचीं, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 3.54 फीसदी ज्यादा रहीं। इस प्रकार, पॉलिसी बेचने के मामले में कंपनी का मार्केट शेयर बढ़कर 74.6 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया।

वैल्यूएशन कम, लेकिन ज्यादा हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार LIC IPO के टाइमिंग और साइज को अंतिम रूप देने के लिए इस सप्ताह के अंत तक एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन करेगी। बीमा कंपनी की अपनी वैल्यूएशन 30 फीसदी तक घटाने और 7 फीसदी शेयर ऑफर करने की योजना है। पहले सरकार की एलआईसी में अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना थी। सरकार अब LIC IPO की लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पर विचार कर रही है, जबकि पहले 16 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन की उम्मीद लगाई जा रही है।

एलआईसी के प्रदर्शन पर निर्भर है आईपीओ की सफलता

लाइवमिंट ने कहा, “जहां मार्च में LIC का सिंगल प्रीमियम कलेक्शन (single premium collections) 61 फीसदी बढ़कर 4,018.33 करोड़ रुपये हो गया, वहीं ग्रुप का सिंगल प्रीमियम 48.1 फीसदी बढ़कर 30,052.86 करोड़ रुपये हो गया।”

LIC IPO की सफलता काफी हद तक बीमा कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर है, वैसे सरकार 65,000 करोड़ रुपये के डिसइनवेस्टमेंट टारगेट को हासिल करने के लिए इसकी शेयर सेल पर निर्भर है।

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