Israel Iran Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की साफ मनाही के बावजूद इजरायल ने सोमवार को पश्चिमी और मध्य ईरान में फौजी ठिकानों पर जोरदार हमले किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन हमलों से कुछ ही घंटे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग का अमेरिका की शांति वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस ताजा तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 3 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।
ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर हमले रोकने की अपील की थी ताकि ईरान के साथ कोई समझौता हो सके। लेकिन इजरायल ने लेबनान के बेरूत इलाके और ईरान पर हमले जारी रखे। जवाब में ईरान ने भी इजरायल के हवाई अड्डे को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं, जिन्हें इजरायल ने हवा में ही रोकने का दावा किया है।
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ट्रंप की चेतावनी और नेतन्याहू का रुख
समझने वाली बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजरायली प्रधानमंत्री को “फैसले लेने वाले नहीं” तक कह दिया। ट्रंप का मानना था कि शांति वार्ता के दौरान हमले रोकना जरूरी है। पर नेतन्याहू ने इस चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी।
अगर गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब इजरायल ने अमेरिका की सलाह को किनारे रखा हो। मध्य पूर्व में अपनी सुरक्षा को लेकर इजरायल हमेशा से आक्रामक रुख रखता आया है। इस बार भी उसने अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ईरानी फौजी ठिकानों पर सटीक हमले किए।
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ईरान का जवाबी हमला और बढ़ता तनाव
ईरान ने चुप बैठने के बजाय तुरंत जवाबी कार्रवाई की। उसने इजरायल के हवाई अड्डे को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागीं। हालांकि इजरायल की आयरन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली ने इन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। यहां ध्यान देने वाली बात है कि दोनों देशों के बीच यह सैन्य टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।
इस तनाव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 3.43 फीसदी बढ़कर 96.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारतीय रुपया भी 17 पैसे कमजोर होकर 95.35 प्रति डॉलर पर आ गया है।
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शांति वार्ता और दोनों देशों की मांगें
देखा जाए तो ट्रंप का दावा है कि अमेरिका और ईरान जंग खत्म करने के समझौते के बहुत करीब हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। इजरायल लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी मुहिम को रोकने के लिए तैयार नहीं है।
दूसरी ओर, ईरान का स्पष्ट कहना है कि जब तक लेबनान में युद्धविराम नहीं होता, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है। ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
यह भी गौर करने वाली बात है कि ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से होने वाली तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। यह जलडमरूमध्य दुनिया की कुल तेल आपूर्ति के लगभग 20-30% हिस्से के लिए जिम्मेदार है। ईरान इस पर अपना नियंत्रण मांग रहा है।
ईरान की मुख्य मांगें
ईरान ने कुछ स्पष्ट शर्तें रखी हैं:
- उस पर लगी आर्थिक पाबंदियां हटाई जाएं
- उसके जब्त किए गए पैसे वापस किए जाएं
- परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध खत्म हों
जबकि ट्रंप प्रशासन ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए एक सख्त समझौता करना चाहता है।
भारत पर पड़ता असर
इस तनाव की मार सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रही है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 724.95 अंक टूटकर 73,518.39 पर आ गया। निफ्टी भी 222.45 अंक गिरकर 23,138.60 पर पहुंच गया।
राहत की बात यह है कि शुक्रवार को आरबीआई द्वारा विदेशी पूंजी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों से रुपया 56 पैसे मजबूत होकर 95.18 पर बंद हुआ था। यह पिछले दो महीनों की सबसे बड़ी तेजी थी। लेकिन इजरायल-ईरान तनाव ने इस सकारात्मक रुझान को पलट दिया।
वैश्विक बाजार में हलचल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स 0.42 फीसदी की तेजी के साथ 95.33 पर रहा। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) ने शुक्रवार को भारतीय बाजार से 8,776.25 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। यह दर्शाता है कि निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल है।
तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह चिंता का विषय है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। तेल की बढ़ती कीमतें सीधे मुद्रास्फीति बढ़ा सकती हैं और आम आदमी की जेब पर बोझ डाल सकती हैं।
आगे क्या होगा?
हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों देशों के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। सारी बातचीत अमेरिका के जरिए हो रही है। ट्रंप प्रशासन दोनों पक्षों को मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जमीन पर हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को भी पार कर सकती हैं। इससे न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
सवाल उठता है कि क्या ट्रंप इस संकट को सुलझा पाएंगे? या फिर मध्य पूर्व एक बार फिर लंबी जंग की आग में झुलसेगा? फिलहाल दुनिया की निगाहें इस इलाके पर टिकी हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- इजरायल ने ट्रंप की चेतावनी के बावजूद ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए हमले
- ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल के हवाई अड्डे पर दागी मिसाइलें
- कच्चे तेल की कीमतें 3.43% बढ़कर 96.28 डॉलर प्रति बैरल पहुंचीं
- भारतीय रुपया 17 पैसे कमजोर, सेंसेक्स में 724 अंकों की गिरावट
- ट्रंप ने ईरान से परमाणु समझौते की बात की, लेकिन इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ मुहिम जारी रखना चाहता है













