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The News Air - Breaking News - गाज़ा पर सरकार की चुप्पी को लेकर Sonia Gandhi का हमला, मोदी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

गाज़ा पर सरकार की चुप्पी को लेकर Sonia Gandhi का हमला, मोदी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने एक विस्तृत लेख में मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा - गाज़ा जेनोसाइड पर चुप्पी ने भारत की पारंपरिक विदेश नीति को किया पलट

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
सोमवार, 29 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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sonia gandhi
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Sonia Gandhi Gaza Statement : भारत की विदेश नीति में एक बड़ी बहस छिड़ गई है। 27 जून को कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने एक सख्त शब्दों में लिखा गया लेख जारी किया है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर गाज़ा में चल रहे मानवीय संकट पर चुप्पी साधने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिस तरह से भारत सरकार ने फिलिस्तीनी मुद्दे पर अपना रुख बदला है, वह भारत की दशकों पुरानी विदेश नीति का विश्वासघात है।

यह लेख सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है। यह उस बड़ी बहस का हिस्सा है जो भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान, मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को लेकर चल रही है।

🔍 यह भी पढ़ें- Mamata और Sonia की मुलाकात: INDIA Bloc को नई दिशा

सोनिया गांधी ने क्या कहा – मुख्य आरोप

देखा जाए तो सोनिया गांधी के इस लेख में कई स्तरों पर मोदी सरकार की आलोचना की गई है। पहला और सबसे बड़ा आरोप यह है कि भारत ने गाज़ा में हो रहे नरसंहार पर जानबूझकर मौन साध रखा है। उनका कहना है कि जिस तरह से इज़रायल ने गाज़ा में सैन्य अभियान चलाया, उसमें हजारों निर्दोष नागरिकों की मौत हुई। अस्पताल, स्कूल और शरणार्थी शिविर तक नहीं बख्शे गए।

लेकिन भारत ने न तो खुलकर इसकी निंदा की, न ही अपने राजनयिक प्रभाव का इस्तेमाल किया।

दूसरा बड़ा आरोप यह है कि मोदी सरकार ने भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति से विचलन किया है। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत हमेशा से उत्पीड़ित लोगों का साथ देने वाला देश रहा है। गुटनिरपेक्षता, औपनिवेशिकता विरोध और फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन – ये भारतीय विदेश नीति के स्तंभ रहे हैं।

आज वह सब कहाँ गया?

🔍 यह भी पढ़ें- Top Headlines 26 March 2026: Epstein Files से लेकर Sonia Gandhi की सेहत तक, दिनभर की 20 बड़ी खबरें

गाज़ा संकट की पृष्ठभूमि – क्या हुआ था 7 अक्टूबर 2023?

समझने वाली बात यह है कि यह विवाद अचानक नहीं उठा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इज़रायल में घुसकर हमला किया था। सैकड़ों नागरिकों को मार डाला गया और कई को बंधक बना लिया गया। इसके जवाब में इज़रायल ने गाज़ा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया।

लेकिन जो सैन्य अभियान था, वह जल्द ही एक मानवीय त्रासदी में बदल गया। खाना, पानी, बिजली, दवाइयां – सब कुछ रोक दिया गया। हजारों बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग मारे गए।

संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने इसे युद्ध अपराध करार दिया। लेकिन भारत का रुख रहस्यमय बना रहा।

भारत की पारंपरिक स्थितिवर्तमान स्थिति
फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय का समर्थनइज़रायल के साथ गहरे रक्षा संबंध
गुटनिरपेक्षता और संतुलित नीतिइज़रायल की ओर स्पष्ट झुकाव
मानवाधिकारों की वकालतनागरिक हत्याओं पर चुप्पी
सोनिया गांधी ने ‘जेनोसाइड’ शब्द क्यों इस्तेमाल किया?

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सोनिया गांधी ने अपने लेख में गाज़ा में हुए विनाश को “जेनोसाइड” (नरसंहार) कहा है। यह शब्द कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बेहद संवेदनशील है।

संयुक्त राष्ट्र के जेनोसाइड कन्वेंशन के अनुसार, नरसंहार का मतलब है किसी धार्मिक, जातीय या राष्ट्रीय समूह को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट करने का जानबूझकर प्रयास।

अभी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इज़रायल के खिलाफ इसी आरोप की सुनवाई चल रही है। कई देशों और विशेषज्ञों का मानना है कि गाज़ा में जो हुआ, वह इसी परिभाषा में आता है।

लेकिन इज़रायल इसे पूरी तरह खारिज करता है और कहता है कि वह केवल आत्मरक्षा में काम कर रहा है।

🔍 यह भी पढ़ें- Sonia Gandhi Citizenship Case: वोटर लिस्ट में नाम और नागरिकता पर सवाल, कोर्ट में जारी सुनवाई

भारत की विदेश नीति में बदलाव – नेहरू से मोदी तक का सफर

अगर गौर करें तो फिलिस्तीन पर भारत की नीति में समय के साथ बदलाव आया है। जवाहरलाल नेहरू के समय भारत फिलिस्तीन का प्रबल समर्थक था। उस दौर में भारत का इज़रायल से कोई राजनयिक संबंध तक नहीं था।

इंदिरा गांधी ने भी इसी नीति को जारी रखा। 1988 में भारत ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दे दी।

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लेकिन 1992 में पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार ने इज़रायल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए। यहीं से संतुलित नीति की शुरुआत हुई।

और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत-इज़रायल संबंधों में अभूतपूर्व उछाल आया। रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, जल प्रबंधन, तकनीक – हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ा।

सवाल उठता है: क्या संतुलन अब टूट गया है?

इज़रायल भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों?

दिलचस्प बात यह है कि इज़रायल भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है:

  • रक्षा सहयोग: मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, निगरानी तकनीक
  • आतंकवाद विरोधी सहयोग: खुफिया जानकारी साझा करना
  • साइबर सुरक्षा: इज़रायल इसमें विश्व में अग्रणी है
  • कृषि तकनीक: ड्रिप इरिगेशन, रेगिस्तानी खेती
  • स्टार्टअप इकोसिस्टम: तकनीकी नवाचार

लेकिन खाड़ी देश भी भारत के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं:

  • भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता क्षेत्र
  • लाखों भारतीय वहां रोजगार करते हैं
  • व्यापारिक साझेदारी तेजी से बढ़ रही है
राहुल गांधी ने भी किया समर्थन

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोनिया गांधी के रुख का समर्थन किया है। उनका कहना है कि “भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति वापस लानी होगी।”

राहुल गांधी अक्सर कहते रहे हैं कि मोदी सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव में काम करती है। फिलिस्तीन मुद्दे पर भी उनका यही आरोप है।

याद कीजिए, कुछ समय पहले प्रियंका गांधी संसद में “Palestine” लिखा बैग लेकर आई थीं, जिस पर बड़ा विवाद हुआ था।

सरकार का पक्ष – भारत की आधिकारिक स्थिति क्या है?

समझने की जरूरत यह भी है कि भारत सरकार अपनी नीति को संतुलित बताती है। सरकार के अनुसार भारत की स्थिति चार स्तंभों पर टिकी है:

  1. आतंकवाद की निंदा: 7 अक्टूबर के हमले की कड़ी निंदा
  2. इज़रायल के आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता
  3. मानवीय कानून का पालन: इज़रायल को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की अपील
  4. दो-राज्य समाधान: फिलिस्तीन और इज़रायल दोनों की सह-अस्तित्व की वकालत

भारत ने गाज़ा को मानवीय सहायता भी भेजी है – दवाइयां, खाद्य सामग्री और राहत सामग्री।

राजनीतिक विश्लेषण – घरेलू राजनीति भी है जुड़ी

दिक्कत कहां है? गाज़ा मुद्दा अब भारत में घरेलू राजनीति का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस का कहना है:

  • मोदी सरकार ने पारंपरिक नीति छोड़ दी
  • मानवीय मुद्दों पर आवाज नहीं उठाई
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा

दूसरी ओर, भाजपा का तर्क है:

  • कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति कर रही है
  • हमास के अपराधों को नजरअंदाज कर रही है
  • विदेश नीति को चुनावी मुद्दा बना रही है
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव – क्या भारत की विश्वसनीयता घटी?

सोनिया गांधी का एक बड़ा तर्क यह भी है कि गाज़ा पर चुप्पी से भारत की विश्वसनीयता घटी है। भारत जो खुद को “ग्लोबल साउथ की आवाज” बताता है, वह इस मुद्दे पर कमजोर दिखा।

खाड़ी के अरब देशों में भी यह नोटिस किया गया। हालांकि Abraham Accord के बाद कुछ अरब देश खुद इज़रायल के करीब आ गए हैं, लेकिन फिलिस्तीन का समर्थन अब भी महत्वपूर्ण है।


मुख्य बातें (Key Points)

  • सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर गाज़ा में हो रहे नरसंहार पर मौन साधने का आरोप लगाया
  • कहा कि भारत ने अपनी पारंपरिक विदेश नीति से विचलन किया है
  • इज़रायल के साथ बढ़ते संबंधों और फिलिस्तीन समर्थन में कमी की आलोचना
  • राहुल गांधी ने भी सोनिया गांधी के रुख का समर्थन किया
  • सरकार का कहना है कि भारत संतुलित नीति अपना रहा है और दो-राज्य समाधान का समर्थन करता है
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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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