IMD Weather Alert: देश के मौसम में अब तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। India Meteorological Department (IMD) ने 23 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए अगले दो सप्ताह के मौसम पूर्वानुमान की जानकारी दी है। देखा जाए तो इस बार का पूर्वानुमान काफी चिंताजनक है क्योंकि एक तरफ देश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में भीषण गर्मी और लू की मार पड़ने वाली है, तो वहीं पूर्वोत्तर भारत में अत्यधिक भारी बारिश का खतरा मंडरा रहा है।
पिछले सप्ताह का मौसम: क्या रहा खास?
22 अप्रैल 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में देश के मौसम ने कई रिकॉर्ड बनाए। समझने वाली बात यह है कि 18 अप्रैल से हरियाणा में शुरू हुई लू की लहर धीरे-धीरे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वी मध्य प्रदेश तक फैल गई।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले सप्ताह देश में तापमान के दोनों छोर देखने को मिले। एक तरफ पश्चिम उत्तर प्रदेश के सरसावा में न्यूनतम तापमान 14.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, तो वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के बांदा में अधिकतम तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह इस सीजन का अब तक का सबसे उच्च तापमान रहा।
पूर्वोत्तर भारत में बारिश का कहर
पूर्वोत्तर भारत में सप्ताह के दूसरे हिस्से में व्यापक बारिश हुई। 21 अप्रैल को असम और मेघालय के अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की गई। 19 और 20 अप्रैल को असम व मेघालय में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हुई। इसके साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी 19 और 20 अप्रैल को भारी बारिश का दौर जारी रहा।
अगर गौर करें तो अरुणाचल प्रदेश में 21 और 22 अप्रैल को भारी वर्षा हुई, जबकि ओडिशा में 22 अप्रैल को कई स्थानों पर तेज बारिश देखी गई।
ओलावृष्टि ने मचाई तबाही
मध्य महाराष्ट्र में 18, 20 और 22 अप्रैल को अलग-अलग स्थानों पर ओलावृष्टि हुई। मराठवाड़ा में भी 18 और 22 अप्रैल को ओलों की बारिश हुई। इसके अलावा हरियाणा, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 18 अप्रैल को, तेलंगाना में 20 अप्रैल को और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 22 अप्रैल को ओलावृष्टि दर्ज की गई।
तापमान में हुई असामान्य वृद्धि
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले सप्ताह औसत अधिकतम तापमान उत्तर, उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। वहीं औसत न्यूनतम तापमान उत्तर, उत्तर-पश्चिम और आसन्न मध्य तथा पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से 1-3 डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा।
22 अप्रैल को ओडिशा के झारसुगुड़ा में देश का सबसे उच्च तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि आज पंजाब के गुरदासपुर में सबसे कम न्यूनतम तापमान 18.0 डिग्री सेल्सियस रहा।
बारिश का आंकड़ा: देश भर में कमी
22 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के दौरान देश में कुल मिलाकर बारिश लंबी अवधि के औसत से 45% कम रही। हालांकि, 1 मार्च 2026 से 22 अप्रैल 2026 तक प्री-मॉनसून सीजन की संचयी बारिश सामान्य से 4% अधिक रही है।
क्षेत्रवार देखें तो पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सीजनल बारिश सामान्य से 18% अधिक रही, मध्य भारत में 22% अधिक, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में 8% और दक्षिण प्रायद्वीप में 17% की कमी दर्ज की गई।
अगले दो सप्ताह का मौसम पूर्वानुमान
पहला सप्ताह (23 से 29 अप्रैल 2026):
उत्तर-पश्चिम भारत के लिए चेतावनी
समझने वाली बात है कि जम्मू-कश्मीर-लद्दाख क्षेत्र में 23 से 25 अप्रैल और 28 अप्रैल को हल्की से मध्यम बारिश/बर्फबारी के साथ गरज, बिजली और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में 24, 25, 28 और 29 अप्रैल को तथा उत्तराखंड में 25, 26, 28 और 29 अप्रैल को ऐसी ही स्थिति रहेगी।
पंजाब और हरियाणा, चंडीगढ़ में 26 से 28 अप्रैल तथा उत्तर प्रदेश में 28 और 29 अप्रैल को हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज, बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की हवाओं का अनुमान है।
पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट
यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 23 अप्रैल को; असम और मेघालय में 23 तथा 25 से 29 अप्रैल के दौरान; और अरुणाचल प्रदेश में 23 तथा 25 से 29 अप्रैल तक व्यापक बारिश, गरज, बिजली और 30-50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं की संभावना है।
दिलचस्प बात यह है कि असम और मेघालय में 25 से 27 अप्रैल तक आंधी (50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं जो 70 किमी प्रति घंटे तक जा सकती हैं) की संभावना है।
अरुणाचल प्रदेश में 23 तथा 25 से 29 अप्रैल तक; असम और मेघालय में 25 से 29 अप्रैल; और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में 28 और 29 अप्रैल को भारी वर्षा संभावित है। अत्यधिक भारी वर्षा अरुणाचल प्रदेश में 27 से 29 अप्रैल और असम व मेघालय में 26 से 29 अप्रैल तक हो सकती है।
पूर्वी भारत में मौसम का मिजाज
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम तथा ओडिशा में 23 से 29 अप्रैल; गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल और बिहार में 24 से 29 अप्रैल; और झारखंड में 26 से 29 अप्रैल तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज, बिजली और 30-50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं का अनुमान है।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 25 अप्रैल को, बिहार में 25 और 26 अप्रैल को, झारखंड में 26 और 27 अप्रैल को तथा गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 26 से 28 अप्रैल तक आंधी (50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार) की चेतावनी जारी की गई है।
झारखंड में 26 और 27 अप्रैल को ओलावृष्टि की भी संभावना है।
मध्य और दक्षिण भारत का हाल
छत्तीसगढ़ में 26 और 27 अप्रैल को तथा मध्य प्रदेश में 27 अप्रैल को हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज, बिजली और 40-50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं का अनुमान है।
केरल व माहे, कर्नाटक में 23 से 27 अप्रैल; तटीय आंध्र प्रदेश व यनम में 23 से 25 अप्रैल; रायलसीमा व तेलंगाना में 23 और 24 अप्रैल को हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज और बिजली की संभावना है।
कोंकण और गोआ, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा में 23 से 25 अप्रैल तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज, बिजली और 30-50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाएं चल सकती हैं। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 23 और 24 अप्रैल को ओलावृष्टि की भी संभावना है।
लू की भयंकर चेतावनी: कहां-कहां रहें सतर्क
अगर गौर करें तो यह सबसे गंभीर चेतावनी है। लू की स्थिति निम्न स्थानों पर संभावित है:
- पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली: 23 और 24 अप्रैल
- पश्चिम उत्तर प्रदेश: 23 और 24 अप्रैल
- राजस्थान: 23 से 29 अप्रैल (पूरे सप्ताह)
- मध्य प्रदेश: 23 से 27 अप्रैल
- ओडिशा: 23 और 24 अप्रैल
- झारखंड: 23 और 24 अप्रैल
- केरल: 23 और 24 अप्रैल
- गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल: 23 अप्रैल
- बिहार: 23 से 25 अप्रैल
- पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़: 24 से 27 अप्रैल
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि गर्म और आर्द्र मौसम की स्थिति कोंकण, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 23 से 25 अप्रैल; तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश और तटीय कर्नाटक में 23 से 27 अप्रैल; और तटीय गुजरात में 24 और 25 अप्रैल को बनी रहेगी।
गर्म रातों की स्थिति हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली में 23 से 26 अप्रैल और पश्चिम उत्तर प्रदेश व ओडिशा में 23 से 25 अप्रैल तक बनी रह सकती है।
तापमान में बदलाव का पूर्वानुमान
उत्तर-पश्चिम भारत में 26 अप्रैल तक अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि और 27 से 29 अप्रैल के दौरान 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट संभावित है।
मध्य भारत में 25 अप्रैल तक अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी, जबकि 26 से 29 अप्रैल तक कोई खास बदलाव नहीं होगा।
पूर्वी भारत में 25 अप्रैल तक अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होगा, लेकिन 26 से 29 अप्रैल के दौरान 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट होगी।
महाराष्ट्र में 25 अप्रैल तक अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि होगी और फिर 26 से 29 अप्रैल तक कोई खास बदलाव नहीं होगा।
गुजरात में 23 अप्रैल को अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होगा, लेकिन 24 से 26 अप्रैल तक 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि और 27 से 29 अप्रैल तक 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होगी।
दूसरा सप्ताह (30 अप्रैल से 6 मई 2026): स्थिति बनी रहेगी गंभीर
दूसरे सप्ताह के दौरान राजस्थान और आसन्न पंजाब व हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और विदर्भ में कुछ दिनों में लू की कम संभावना बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में सामान्य से काफी अधिक (+3.1 से +5.0 डिग्री सेल्सियस) अधिकतम तापमान रहने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश भागों तथा पूर्व व पूर्वोत्तर और भारत के पश्चिमी तट के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक (+1.6 से +3.0 डिग्री सेल्सियस) तापमान रहने की संभावना है।
कहने का मतलब साफ है कि दूसरे सप्ताह में गर्म रातों की स्थिति नहीं रहेगी। हालांकि, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तरी राजस्थान व उत्तरी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र व गोवा राज्यों के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक (+1.6 से +3.0 डिग्री सेल्सियस) न्यूनतम तापमान रह सकता है।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
ओलावृष्टि के प्रभाव के लिए:
मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में फलों के बागों और सब्जी के पौधों को यांत्रिक क्षति से बचाने के लिए ओला जाल या ओला टोपी का उपयोग करें। जलभराव रोकने के लिए खेतों में प्रभावी जल निकासी सुनिश्चित करें। पके हुए फलों की तुरंत तुड़ाई करें और कटी हुई उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखें।
भारी वर्षा के प्रभाव के लिए:
अरुणाचल प्रदेश में कटी हुई पत्तागोभी, मटर, सरसों, देर से पकने वाले धान और आलू की उपज को सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं। धान, मक्का, अन्य खड़ी फसलों, सब्जियों और बागों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें।
असम और मेघालय में फसल के खेतों से अतिरिक्त वर्षा जल निकालने के लिए आवश्यक व्यवस्था करें।
उच्च तापमान/लू के प्रभाव के लिए:
- महाराष्ट्र: कोंकण में हरे चने, सब्जियों और नए लगाए गए सुपारी व नारियल को सिंचाई दें। विदर्भ में ठंडे घंटों के दौरान ग्रीष्मकालीन हरे चने, मूंगफली, प्याज, सूरजमुखी, तिल, चारा फसलों, बागों और सब्जियों को आवश्यकता के अनुसार हल्की और बार-बार सिंचाई करें।
- गुजरात: क्लस्टर बीन, खीरा, तोरई, लौकी, स्पंज लौकी और करेले जैसी खड़ी फसलों को सुबह या शाम के घंटों में हल्की और बार-बार सिंचाई प्रदान करें।
- ओडिशा: धान, ग्रीष्मकालीन मक्का, हरे चने, काले चने, मूंगफली और सब्जी के खेतों में हल्की सिंचाई प्रदान करें। आम और काजू की फसलों में पर्याप्त नमी बनाए रखें।
- मध्य प्रदेश: मक्का, मूंग, उड़द, मूंगफली और सब्जी की फसलों को आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई दें।
- बिहार: खड़ी फसलों को हल्की और बार-बार सिंचाई प्रदान करें। मिट्टी की नमी के नुकसान को कम करने के लिए फसल अवशेष, पुआल या पॉलीथीन से मल्चिंग करें।
जनता के लिए सुरक्षा सलाह
आंधी/बिजली गिरने की स्थिति में:
- मौसम की स्थिति पर नजर रखें और बिगड़ती परिस्थितियों के लिए सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें।
- घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें और यदि संभव हो तो यात्रा से बचें।
- सुरक्षित आश्रय लें; पेड़ों के नीचे शरण न लें।
- कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और कंक्रीट की दीवारों के सहारे न खड़े हों।
- बिजली/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग करें।
- तुरंत जल निकायों से बाहर निकलें।
लू की स्थिति में:
- उच्च तापमान और लंबे समय तक धूप में रहने वाले या भारी काम करने वाले लोगों में गर्मी की बीमारी के लक्षणों की संभावना बढ़ जाती है।
- कमजोर लोगों जैसे शिशुओं, बुजुर्गों, पुरानी बीमारियों वाले लोगों के लिए उच्च स्वास्थ्य चिंता।
- गर्मी के संपर्क से बचें – ठंडा रहें। निर्जलीकरण से बचें।
- पर्याप्त पानी पिएं – भले ही प्यास न लगे।
- ओआरएस, घर पर बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का पानी), नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें।
पशुधन/मुर्गी पालन/मत्स्य पालन के लिए सुझाव
- भारी वर्षा के दौरान जानवरों को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित आहार प्रदान करें।
- खराब होने से बचाने के लिए चारे और चारे को सुरक्षित स्थान पर रखें।
- तालाबों के चारों ओर उचित जाली के साथ एक आउटलेट बनाएं ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके, जिससे अतिप्रवाह की स्थिति में मछलियों को बचने से रोका जा सके।
- उच्च तापमान और लू वाले क्षेत्रों में जानवरों के लिए स्वच्छ, स्वास्थ्यकर और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराएं।

मुख्य बातें (Key Points)
• India Meteorological Department ने 23 अप्रैल से 6 मई 2026 तक देश के विभिन्न हिस्सों में लू, भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है।
• राजस्थान में पूरे सप्ताह (23 से 29 अप्रैल) लू की स्थिति बनी रहेगी, जबकि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में कुछ दिनों में लू की चेतावनी है।
• अरुणाचल प्रदेश और असम-मेघालय में 25 से 29 अप्रैल तक भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा है।
• पूर्वी भारत के कई राज्यों में 25 से 28 अप्रैल तक आंधी (50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार) आने की आशंका है।
• ओडिशा के झारसुगुड़ा में पिछले सप्ताह देश का सबसे उच्च तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
• किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए समय पर सिंचाई, जल निकासी और मल्चिंग जैसे उपाय करने की सलाह दी गई है।













