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The News Air - Breaking News - Holashtak 2026: कल से शुरू हो रहा अशुभ समय, 8 दिन न करें ये काम

Holashtak 2026: कल से शुरू हो रहा अशुभ समय, 8 दिन न करें ये काम

होली से आठ दिन पहले शुरू होने वाला होलाष्टक 23 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 21 फ़रवरी 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, धर्म
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Holashtak 2026
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Holashtak 2026: हिंदू धर्म में होली का पर्व जितना उल्लास और रंगों से भरा होता है, उससे पहले आने वाला होलाष्टक उतना ही गंभीर और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। होली से ठीक आठ दिन पहले शुरू होने वाले होलाष्टक को शुभ कार्यों के लिए वर्जित समय कहा जाता है। पंचांग के अनुसार इसकी शुरुआत फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है और इसका समापन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन के साथ हो जाता है। वर्ष 2026 में होलाष्टक 23 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। इस बार चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन का मुहूर्त 2 मार्च की रात को ही प्राप्त हो रहा है, इसलिए इसी दिन होलिका दहन किया जाएगा।

होलाष्टक में क्यों नहीं होते शुभ कार्य?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों को मांगलिक कार्यों के लिए उचित नहीं माना जाता। इन आठ दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया व्यापार या अन्य शुभ कार्य करने से परहेज किया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि होलाष्टक का प्रभाव पूरे भारत में समान रूप से नहीं होता। शास्त्रों और ज्योतिष ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है कि इसका प्रभाव मुख्य रूप से भारत के पश्चिमी क्षेत्रों में ही माना गया है।

किन राज्यों में माना जाता है होलाष्टक का असर?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, व्यास नदी (प्राचीन नाम विपाशा), रावी (इरावती), सतलज और त्रिपुष्कर नदी के आसपास के क्षेत्रों में होलाष्टक का दोष प्रभावी माना जाता है। इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से पंजाब, गुजरात और अजमेर के आसपास के इलाके शामिल हैं। यहां की लोक परंपरा के अनुसार इन दिनों में शुभ कार्यों से बचा जाता है। इसके विपरीत देश के उत्तर, मध्य और पूर्वोत्तर भागों में होलाष्टक का कोई विशेष प्रभाव नहीं माना गया है। यानी उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, असम और कई अन्य राज्यों में इन दिनों में भी मुहूर्त देखकर विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य लोग करते हैं। वहां इसे अशुभ समय नहीं कहा जाता।

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होलाष्टक से जुड़ी पौराणिक कथा

होलाष्टक को अशुभ मानने के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। यह कथा भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद और उनके पिता हिरण्यकश्यप से जुड़ी है। कहा जाता है कि इन आठ दिनों में हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से रोकने के लिए अनेक यातनाएं दी थीं। अंत में उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए। होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका अग्नि में भस्म हो गई। यही घटना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बन गई और होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई। इसी कारण इन आठ दिनों को संघर्ष और परीक्षा के समय के रूप में देखा जाता है।

होलाष्टक में क्या करें और क्या न करें?

होलाष्टक का समय भले ही शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया हो, लेकिन यह साधना, जप, तप और भक्ति के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है। इस दौरान भगवान विष्णु और अपने आराध्य देव की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। होली का आगमन भी इसी आध्यात्मिक वातावरण के बीच होता है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संदेश देता है।

  • न करें: विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, नए वाहन या मकान की खरीदारी, नया व्यापार शुरू करना।

  • करें: भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, दान-पुण्य, गरीबों को भोजन कराना, रामायण या भागवत कथा का श्रवण।

मुख्य बातें (Key Points)
  • होलाष्टक 2026 की शुरुआत 23 फरवरी से हो रही है, समापन 3 मार्च को होलिका दहन के साथ।

  • होलिका दहन 2 मार्च (चंद्र ग्रहण के कारण) और रंगवाली होली 3 मार्च को मनाई जाएगी।

  • पंजाब, गुजरात, अजमेर क्षेत्र में होलाष्टक का अधिक प्रभाव, यूपी-बिहार में नहीं।

  • विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए यह समय वर्जित माना गया है।

  • इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व है।

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