Gold Investment 2026: सोने पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है। सरकार द्वारा सीमा शुल्क 6% बढ़ाकर 15% किए जाने के बाद देश में सोने का आयात करीब 70% तक घट गया है। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, जहां पहले हर महीने 75 से 100 टन सोना आयात होता था, वहीं अब यह घटकर सिर्फ 25 से 30 टन के बीच रह गया है। देखा जाए तो यह नया शुल्क 13 मई 2025 से लागू किया गया था, जिसके बाद से आयात में तेज गिरावट दर्ज की गई है। सवाल उठता है कि क्या लोगों का सोने से मोहभंग हो गया है या यह सरकार की रणनीति का हिस्सा है?
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मात्रा में गिरावट, कीमत में बढ़ोतरी
अगर बात करें तो मात्रा में गिरावट के बावजूद कीमत के लिहाज से तस्वीर अलग नजर आती है। मई महीने में सोने का आयात मूल्य सालाना आधार पर 34% बढ़कर $3.41 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की ऊंची कीमतें रही। दिलचस्प बात यह है कि इसी तरह अप्रैल और मई के दौरान कुल आयात 60.14% बढ़कर 9.04 बिलियन डॉलर हो गया।
वहीं पूरे वित्त वर्ष की अगर बात करें तो सोने का आयात 24% बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन मात्रा के लिहाज से इसमें 4.76% की गिरावट आई है और यह 721.03 टन रहा।
| अवधि | मात्रा (टन) | मूल्य (बिलियन $) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| पहले (प्रति माह) | 75-100 | – | आधार |
| अब (प्रति माह) | 25-30 | – | 70% गिरावट |
| मई 2025 | – | 3.41 | +34% (सालाना) |
| पूरा वित्त वर्ष | 721.03 | 71.98 | मात्रा -4.76%, मूल्य +24% |
इससे यह साफ है कि कीमतें बढ़ने के कारण कम मात्रा में भी ज्यादा मूल्य का आयात हो रहा है।
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भारत क्यों है सोने का दीवाना?
भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। यहां सोने की मांग मुख्य रूप से आभूषण उद्योग से आती है।
समझने वाली बात है कि भारतीय संस्कृति में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि शादी-ब्याह, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठानों का अभिन्न हिस्सा है। अक्षय तृतीया, धनतेरस, दीवाली जैसे मौकों पर सोने की खरीदारी चरम पर होती है।
लेकिन बड़े पैमाने पर सोने का आयात देश से विदेशी मुद्रा के भारी आउटफ्लो का कारण बनता है। यही वजह है कि सरकार इस पर नियंत्रण चाहती है।
पीएम मोदी की सादगी की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले सोने की अनावश्यक खरीद को लेकर सादगी अपनाने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि अगर लोग सोने की जगह अन्य निवेश विकल्पों को चुनें, तो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
फिलहाल देश के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी 5% से ज्यादा है, जो अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाती है। अगर गौर करें तो यह कच्चे तेल के बाद दूसरा सबसे बड़ा आयात मद है।
वहीं पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितताओं के चलते आयात लागत और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता अब जरूरी वस्तुएं जैसे कच्चा तेल, उर्वरक, औद्योगिक कच्चा माल और पूंजीगत सामान के आयात पर विदेशी मुद्रा खर्च करना है ताकि आर्थिक गतिविधियों और खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिल सके।
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सरकार की रणनीति: विदेशी मुद्रा बचाना
विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क बढ़ाकर सरकार दो उद्देश्य साधना चाहती है:
1. विदेशी मुद्रा का संरक्षण: हर साल $70 बिलियन से अधिक का सोना आयात होता है। इस पैसे को अगर जरूरी वस्तुओं पर खर्च किया जाए तो अर्थव्यवस्था को ज्यादा फायदा होगा।
2. घरेलू निवेश को बढ़ावा: सरकार चाहती है कि लोग सोने की जगह शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, सरकारी बॉन्ड जैसे उत्पादक निवेशों में पैसा लगाएं।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि सोने में निवेश से देश को कोई उत्पादक लाभ नहीं मिलता, जबकि शेयर बाजार में निवेश से कंपनियों को पूंजी मिलती है और रोजगार सृजन होता है।
आम आदमी पर क्या असर?
आयात शुल्क बढ़ने से सोने की कीमतें और बढ़ गई हैं। जो लोग शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, उन्हें अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
वर्तमान में सोने की कीमत:
- 24 कैरेट सोना: लगभग ₹75,000-78,000 प्रति 10 ग्राम (शहर के अनुसार)
- 22 कैरेट सोना: लगभग ₹68,000-71,000 प्रति 10 ग्राम
ज्वैलर्स का कहना है कि शुल्क बढ़ने के बाद से खरीदारी में कमी आई है। खासकर मध्यम वर्ग के लोग अब सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं।
राहत की बात यह है कि डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ETF जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं, जो फिजिकल सोने से सस्ते और सुरक्षित हैं।
ज्वैलर्स इंडस्ट्री की चिंता
आभूषण उद्योग इस शुल्क वृद्धि से परेशान है। All India Gems and Jewellery Domestic Council ने सरकार से शुल्क कम करने की अपील की है।
उनका कहना है कि:
- ऊंची कीमतों से बिक्री घट रही है
- छोटे कारीगरों और दुकानदारों पर असर पड़ रहा है
- शादी के सीजन में मांग कम हो रही है
- अवैध तस्करी बढ़ने का खतरा है
दिलचस्प बात यह है कि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे शुल्क से सोने की तस्करी बढ़ सकती है, जो सरकार के लिए नई चुनौती बन सकती है।
निवेश के बेहतर विकल्प
अगर आप निवेश के लिए सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो ये विकल्प बेहतर हो सकते हैं:
1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): सरकार द्वारा जारी, सुरक्षित और 2.5% सालाना ब्याज भी मिलता है।
2. गोल्ड ETF: शेयर बाजार में ट्रेड होता है, कोई मेकिंग चार्ज नहीं।
3. डिजिटल गोल्ड: छोटी रकम से शुरू कर सकते हैं, चोरी का डर नहीं।
4. म्यूचुअल फंड या शेयर: लंबी अवधि में सोने से बेहतर रिटर्न की संभावना।
वैश्विक कीमतों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। अमेरिका में मंदी की आशंका, यूरोप में आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $2,300-2,400 प्रति औंस के आसपास है। अगर यह और बढ़ता है तो भारत में भी कीमतें बढ़ सकती हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- सोने का आयात 70% घटकर 25-30 टन प्रति माह रह गया
- सीमा शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% किया गया (13 मई से लागू)
- मात्रा घटी लेकिन ऊंची कीमतों के कारण मूल्य में 24% वृद्धि
- सरकार की प्राथमिकता विदेशी मुद्रा बचाना और उत्पादक निवेश को बढ़ावा
- SGB, गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड बेहतर निवेश विकल्प













