प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वापिस लिए कृषि क़ानूनों पर किसान संगठन की प्रतिक्रिया

The News Air-प्रधानमंत्री मोदी जी ने 19 नवम्बर, 2021 की सुबह राष्ट्र के नाम संदेश में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है। संयुक्त किसान मोर्चा को मीडिया के ज़रिए सूचना मिली है की बुधवार 24 नवम्बर को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि कानून को वापस लेने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी।

तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर देश भर में किसान पिछले एक साल से ज़्यादा वक़्त से विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे।

किसानों ने इस घोषणा का स्वागत किया और उम्मीद जतायी कि सरकार इस वचन को जल्द से जल्द पूरा करेगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री मोदी जी को एक खुला पत्र लिखकर अवगत कराया कि उनकी माँग सिर्फ़ 3 काले कानूनों को रद्द कराने की नहीं है।

एसकेएम ने सरकार के साथ वार्ता की शुरुआत से ही तीन और माँगो से अवगत कराया जिसमें प्रमुख माँग खेती की सम्पूर्ण लागत पर स्वामिनाथन कमिशन की रिपोर्ट पर आधारित (C2+50%) लाभकारी समर्थन मूल्य फसलों पर सभी किसानों का क़ानूनी हक़ बना देने पर है ताकि देश के हर किसान को अपनी पूरी फ़सल पर कम से कम सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ख़रीद की गारंटी हो सके।

किसानो ने प्रधानमंत्री के उस वक्तत्व को जिसमें उन्होंने उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों के फ़ायदों पर अपनी तमाम तपस्या और अपने प्रयासों के बावजूद
कुछ किसानों को इन कानूनों के फ़ायदे समझा नहीं पाए, का खंडन किया है। उनका ये कहना है कि ये तीनों कृषि क़ानून किसानों के साथ बिना वार्ता किये बग़ैर बनाए गए थे और असंवैधानिक तरीक़े से संसद के दोनों सदनों में पास कराए गए थे।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, ”एमएसपी को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए, ऐसे सभी विषयों पर, भविष्य को ध्यान में रखते हुए, निर्णय लेने के लिए, एक कमिटी का गठन किया जाएगा. इस कमिटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे, किसान होंगे, कृषि वैज्ञानिक होंगे, कृषि अर्थशास्त्री होंगे।”

एसकेएम ने प्रधानमंत्री मोदी को अवगत कराया कि स्वयं उनकी अध्यक्षता में बनी समिति ने 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी को यह सिफ़ारिश दी थी और आपकी सरकार ने संसद में भी इसके बारे में घोषणा की थी, पर उसके बावजूद 2014 में चुनाव जीतने के बाद 2015 में माननीय उच्च न्यायालय में प्रधान मंत्री मोदी ने यह हलफ़नामा दाख़िल किया कि वह स्वामिनाथन फ़ॉर्मूले पर लाभकारी समर्थन मूल्य कृषि उपज पर नहीं दे पाएंगे।

इस बात से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है की मुख्यमंत्री मोदी तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के पक्ष में थे पर प्रधानमंत्री बनते-बनते उनका हृदय परिवर्तन हो गया। किसानों ने यह आकांक्षा जतायी है कि अगर लाभकारी समर्थन मूल्य पर कोई कमिटी बैठी और समय पर फ़ैसला नहीं हुआ तो किसान का भारी नुक़सान निश्चित होना तय है। क़र्ज़े में डूबा किसान किस तरह अपना और अपने परिवार का लालन-पालन करेगा, इस के बारे में सरकार अभी चुप है।

एसकेएम ने अपने खुले पत्र के ज़रिए सरकार को यह अवगत कराया कि उनके प्रस्तावित “विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक” 2020/2021 का ड्राफ्ट अभी तक वापस नहीं लिया गया है जो कि वार्ता के दौरान सरकार ने वादा किया था कि इसे भी वापस लिया जाएगा। एसकेएम ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इससे जुड़े क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोजक अधिनियम 2021 में किसानों को सजा देने का प्रावधान हटाए जाने (सेक्शन-15 के माध्यम से फिर किसान को सजा की गुंजाइश बना दी गई है) के बारे में सरकार का ध्यान केंद्रित किया है।

किसानों ने प्रधानमंत्री मोदी को यह बताया कि यह ऐतिहासिक आंदोलन न सिर्फ़ तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए किया गया है बल्कि उनको अपनी मेहनत के दाम की क़ानूनी गारंटी के मिलने के विषय में भी है।

दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड और अनेक राज्यों में हज़ारों किसानों को इस आंदोलन के दौरान सैकड़ों मुकदमों में फँसाया गया है। एसकेएम इन केसों को तत्काल वापस लेने की माँग भी करती है।

लखीमपुर खीरी हत्याकांड के सूत्रधार और सेक्शन 120-B के अभियुक्त अजय मिश्रा टेनी आज भी गृह राज्यमंत्री बने हुए हैं वो आपके और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मंच भी साझा करते हैं उन्हें बर्खास्त कर सरकार को विश्वास दिलाना चाहिए कि किसानों को उनका हक़ मिलेगा।इस आंदोलन में अभी तक 700 से ज़्यादा किसान शहादत दे चुके हैं, पर उनके परिवारों के मुआवज़े और पुनर्वास के बारे में प्रधानमंत्री मोदी जी ने कुछ भी नहीं कहा है।

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आत्मजीत सिंह

किसान प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हैं कि वो इन बातों की घोषणा भी जल्द करें और लाभकारी समर्थन मूल्य के लिए बनाए जाने वाली कमिटी की समय सीमा निर्धारित कर इसका निवारण करे।

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