EPFO New Rules — नौकरीपेशा लोगों के मन में हर महीने सैलरी से कटने वाले PF को लेकर एक बड़ी उलझन रहती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले करोड़ों कर्मचारी जानना चाहते हैं कि उनके कटे हुए पैसे पर ब्याज कैसे जुड़ता है, और क्या पेंशन वाले हिस्से पर भी कोई ब्याज मिलता है या नहीं।
देखा जाए तो असली पेच इसी जगह छिपा है। दरअसल EPF सिस्टम को दो हिस्सों में बांटा गया है, और दोनों का काम बिल्कुल अलग है।
🔍 यह भी पढ़ें- RBI Gold Reserves Fake News: आरबीआई ने सोना बेचने की खबर को बताया झूठा
कहां जाता है आपका कटा हुआ पैसा
समझने वाली बात यह है कि कर्मचारी की सैलरी से कटने वाला पूरा योगदान EPF खाते में जाता है। लेकिन कंपनी की तरफ से दिया जाने वाला योगदान दो हिस्सों में बंट जाता है। एक हिस्सा EPF में और दूसरा हिस्सा EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना में जमा होता है।
और बस यहीं से शुरू होती है असली कहानी, क्योंकि इन्हीं दो खातों का खेल पूरे फंड की दिशा तय करता है।
💡 यह भी पढ़ें- AC Working Science: ठंडा नहीं कर रहा तो Mechanic बुलाने से पहले जानें
2025-26 के लिए कितना ब्याज
सरकार हर साल EPF पर ब्याज दर तय करती है, जो सीधे कर्मचारियों के खाते में जुड़ती है। राहत की बात यह है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPFO ने ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया।
इस साल भी 8.25% की दर से ब्याज मिलेगा, जो पहले की तरह ही लागू रहेगा। यह ब्याज आमतौर पर वित्त वर्ष खत्म होने के बाद जून या जुलाई में खातों में क्रेडिट किया जाता है। हालांकि फिलहाल नए वित्त वर्ष का ब्याज अभी खातों में नहीं आया है, लेकिन जल्द अपडेट होने की उम्मीद है।
🔍 यह भी पढ़ें- Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट
पेंशन वाले हिस्से पर ब्याज मिलता है या नहीं
अब सबसे अहम सवाल: क्या EPS यानी पेंशन वाले हिस्से पर भी ब्याज मिलता है? इस पर विशेषज्ञों की राय बिल्कुल साफ है।
पर्सनल CFO कंसल्टेंट LLP के फाउंडर और CEO सुशील जैन के अनुसार EPS खाते में जमा राशि पर किसी भी तरह का ब्याज नहीं दिया जाता। यह फंड अलग तरीके से काम करता है और सीधे पेंशन निर्माण में इस्तेमाल होता है।
उनके मुताबिक EPS का पैसा रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन का आधार बनता है, लेकिन इस पर कोई सालाना या कंपाउंड ब्याज नहीं जुड़ता।
पेंशन के लिए कितने साल जरूरी
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर कोई कर्मचारी 10 साल या उससे ज्यादा नौकरी करता है, तभी उसे पेंशन का लाभ मिलता है। 10 साल से कम सेवा पर पेंशन नहीं मिलती और उस स्थिति में कर्मचारी अपनी जमा राशि निकाल सकता है।
EPS में कंपनी की ओर से 8.33% का योगदान दिया जाता है, जो कर्मचारी की सैलरी संरचना के आधार पर तय होता है। यही योगदान भविष्य में पेंशन तय करने में अहम भूमिका निभाता है, पर इस पर ब्याज नहीं जुड़ता।
EPF और EPS में फर्क, एक नजर में
| आधार | EPF (भविष्य निधि) | EPS (पेंशन योजना) |
|---|---|---|
| ब्याज | मिलता है (8.25%) | नहीं मिलता |
| मकसद | बचत और निवेश फंड | पेंशन सुरक्षा |
| कंपनी का योगदान | EPF हिस्सा | 8.33% |
| रिटायरमेंट पर | बड़ा फंड | मासिक पेंशन |
कहां होता है सबसे बड़ा भ्रम
दिलचस्प बात यह है कि कई लोग यह मान बैठते हैं कि EPF और EPS दोनों पर एक जैसे ब्याज मिलता है। लेकिन हकीकत में दोनों योजनाओं का मकसद ही अलग है। EPF एक बचत और निवेश फंड की तरह काम करता है, जबकि EPS सिर्फ पेंशन सुरक्षा के लिए बना एक सिस्टम है।
आम कर्मचारी पर असर
समझने वाली बात यह है कि जब कर्मचारी को यह फर्क साफ पता हो, तभी वह अपने रिटायरमेंट की सही प्लानिंग कर पाता है। EPF आपका जमा फंड बढ़ाता है, जबकि EPS आपकी बुढ़ापे की पेंशन तय करता है, दोनों की भूमिका अलग पर बराबर अहम है।
मुख्य बातें (Key Points)
- EPF पर वित्त वर्ष 2025-26 में 8.25% की दर से ब्याज मिलेगा, दर में कोई बदलाव नहीं।
- EPS यानी पेंशन वाले हिस्से पर कोई ब्याज नहीं जुड़ता।
- पेंशन का लाभ कम से कम 10 साल की सेवा पर ही मिलता है।
- कंपनी EPS में सैलरी संरचना के आधार पर 8.33% योगदान देती है।













