LPG Cylinder Price — क्या आप जानते हैं कि आपके घर आने वाले एलपीजी सिलेंडर की असली लागत 1600 रुपये से भी ज्यादा है? वेस्ट एशिया संकट की वजह से घरेलू एलपीजी के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि इतने भारी नुकसान के बावजूद भारत में आज भी दुनिया की सबसे सस्ती रसोई गैस मिल रही है।
देखा जाए तो यह पूरी कहानी सिर्फ कीमत बढ़ने की नहीं, बल्कि एक ऐसे संकट की है जिसका असर सीधे हर रसोई तक पहुंच रहा है।
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क्यों बढ़े दाम
समझने वाली बात यह है कि वेस्ट एशिया संकट की वजह से लगातार लागत बढ़ रही है। इसी कारण रविवार से घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई। सरकार ने साफ किया है कि इस बढ़ोतरी के बाद भी भारतीय घरों को दुनिया में सबसे सस्ती गैस मिल रही है।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। चिंता का विषय यह है कि कंपनियों को हर सिलेंडर पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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हर सिलेंडर पर 700 रुपये का नुकसान
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत आज बढ़कर 1600 रुपये से ज्यादा हो गई है। इतनी ऊंची लागत की वजह से सरकार और पब्लिक सेक्टर की मार्केटिंग कंपनियों को प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये का भारी नुकसान हो रहा है। इस नुकसान को “अंडर रिकवरी” कहा जाता है, जिसे सरकार और कंपनियां मिलकर उठा रही हैं।
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इंटरनेशनल बाजार में क्या हुआ
अगर गौर करें तो कीमतों में यह तेज उछाल इंटरनेशनल बेंचमार्क में जुड़ी बड़ी वृद्धि की वजह से आया। हॉर्मुज में रुकावट आने के कारण मिडिल ईस्ट गल्फ से होने वाले एक्सपोर्ट पर सख्ती हो गई। इसी वजह से फरवरी महीने से सऊदी अरामको के एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में लगभग 46% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
| आइटम | रुकावट से पहले | अप्रैल | जून |
|---|---|---|---|
| ब्लेंडेड सऊदी CP (50-50 मिक्स) | $542.50 प्रति टन | $75 | $90 प्रति टन |
इस दौरान प्रोपेन CP में 39% और ब्यूटेन में 52% की बढ़ोतरी देखी गई। इस बड़े बदलाव के साथ ही इंपोर्ट किए गए मॉलिक्यूल की लैंडेड कॉस्ट भी काफी बढ़ गई। यही वजह है कि घरेलू सिलेंडर की इंपोर्ट लिंक सप्लाई कॉस्ट 1600 रुपये के पार पहुंच गई।
फिर भी सबसे सस्ती गैस कैसे
दिलचस्प बात यह है कि इतनी बढ़ोतरी के बाद भी भारत में खाना पकाने वाली गैस की कीमतें दुनिया भर में सबसे कम बनी हुई हैं। दिल्ली में आम ग्राहक प्रति सिलेंडर 942 रुपये चुकाते हैं, जो बाजार की असली कीमत से करीब 700 रुपये कम है।
इसके अलावा पीएम उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को हर साल पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलता है, जिससे उन्हें असल में सिर्फ 642 रुपये चुकाने पड़ते हैं। 942 रुपये की कीमत पर भी आम लोग अंतरराष्ट्रीय कीमत से 45% कम भुगतान कर रहे हैं, जबकि उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए यह 60% तक कम है।
दूसरे देशों से तुलना
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में सिलेंडर की कीमतें पड़ोसी और विकसित देशों से काफी कम हैं।
| देश | सिलेंडर की कीमत (लगभग) |
|---|---|
| भारत (दिल्ली) | ₹942 |
| पाकिस्तान | ₹1,146 |
| नेपाल | ₹1,127 |
| बांग्लादेश | ₹1,225 |
| श्रीलंका | ₹1,121 |
| अमेरिका | ₹1,755 |
| ऑस्ट्रेलिया | ₹1,765 |
| कनाडा | ₹2,411 |
भारत ने कैसे संभाली सप्लाई
राहत की बात यह है कि हॉर्मुज में रुकावट के बावजूद भारत ने अपनी सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित कर ली। भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल है जिसने एनर्जी कारगो की सप्लाई जारी रखी।
इंपोर्ट में आई कमी को पूरा करने के लिए घरेलू एलपीजी प्रोडक्शन को 60% से ज्यादा बढ़ाकर 52 TMT कर दिया गया। साथ ही सप्लाई के लिए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए देशों को भी जोड़ा गया। इसके अलावा कमर्शियल मार्केट में चोरी रोकने के लिए OTP आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन को 90% तक बढ़ाया गया।
आम आदमी पर असर
समझने वाली बात यह है कि भले ही सरकार और कंपनियां हर सिलेंडर पर 700 रुपये का घाटा झेल रही हों, पर आम परिवार की जेब पर इस वैश्विक संकट का सीधा बोझ काफी हद तक रोक लिया गया है। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से इस सब्सिडी वाले संसाधन को बचाने और ऊर्जा बचाने वाले तरीके अपनाने का आग्रह भी किया है।
जानें पूरा मामला
वेस्ट एशिया संकट और हॉर्मुज जलमार्ग में रुकावट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें तेजी से बढ़ीं। इसी का असर भारत में घरेलू सिलेंडर के दाम पर पड़ा और 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई। बढ़ती लागत के बावजूद सरकार और मार्केटिंग कंपनियां सप्लाई सुरक्षित रखने और कीमतें कम बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी, दिल्ली में अब 942 रुपये।
- सप्लाई लागत 1600 रुपये के पार, हर सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का नुकसान।
- वेस्ट एशिया संकट और हॉर्मुज रुकावट से सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में 46% उछाल।
- तमाम बढ़ोतरी के बाद भी भारत में दुनिया की सबसे सस्ती रसोई गैस।













