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The News Air - Breaking News - E20 Petrol Reality Check: क्या सच में खराब हो रही हैं गाड़ियां? ARAI और NITI Aayog की पूरी रिपोर्ट

E20 Petrol Reality Check: क्या सच में खराब हो रही हैं गाड़ियां? ARAI और NITI Aayog की पूरी रिपोर्ट

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों की हकीकत, ARAI की लैब टेस्टिंग में क्या निकला, जानें पूरा सच

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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E20 Petrol Reality Check
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E20 Petrol Truth India – देखा जाए तो E20 पेट्रोल को लेकर देश भर में चल रहे विरोध के बीच Automotive Research Association of India (ARAI) का साल 2021 का एक पुराना रिसर्च पेपर फिर से सामने आया है।

दिलचस्प बात यह है कि इस रिसर्च में गाड़ियों के फ्यूल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली मेटल्स और अन्य चीजों पर E20 पेट्रोल के असर की विस्तृत जांच की गई थी।

इसमें मेटल्स और कोटिंग्स पर E20 का बुरा असर नहीं दिखा। लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने से फ्यूल सिस्टम के कुछ प्लास्टिक और रबर के पार्ट्स में गिरावट देखी गई।

समझने वाली बात यह है कि यह रिसर्च बताती है कि E20 का असर किन चीजों पर कितना होता है और किन पर नहीं होता। आइए विस्तार से जानते हैं।

🔍 यह भी पढ़ें- E25 Petrol Launch: सरकार का बड़ा अपडेट, Hardeep Singh Puri ने बताया सच, जानें क्या है स्थिति

ARAI ने कैसे की टेस्टिंग?

ARAI की स्टडी में फ्यूल सिस्टम के अलग-अलग पार्ट्स में इस्तेमाल होने वाली निम्न सामग्रियों की जांच की गई:

टेस्ट किए गए मटेरियल:

  • 8 मेटल्स – विभिन्न प्रकार के धातु
  • 6 इलास्टोमर्स – रबर जैसी सामग्रियां
  • 4 प्लास्टिक – विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक

अगर गौर करें, तो इन सभी को एक तय तापमान पर और एक निश्चित समय के लिए लैब में फ्यूल के अंदर डुबोकर रखा गया था।

टेस्टिंग प्रक्रिया:

  1. E20 को टेस्ट फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल किया गया
  2. E10 को बेसलाइन फ्यूल के तौर पर रखा गया
  3. दोनों में डुबोए गए सामग्रियों की तुलना की गई

इन फ्यूल में डुबोए रखने के बाद धातुओं के वजन में आए बदलाव के आंकड़ों को देखा गया। इसी वजन में बदलाव के आधार पर जंग लगने की दर का हिसाब लगाकर धातुओं पर E20 के असर की भी जांच की गई।

🔍 यह भी पढ़ें- E-20 Petrol Controversy: केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों को लिखी चिट्ठी

मेटल्स पर E20 का असर
मेटल का प्रकारजंग की दर (E10)जंग की दर (E20)अंतर
स्टेनलेस स्टीलबहुत कमबहुत कमनगण्य
एल्यूमीनियमकमकमनगण्य
पीतल (Brass)मध्यमथोड़ा ज्यादामामूली
कॉपरमध्यमथोड़ा ज्यादामामूली

ARAI का निष्कर्ष:
स्टडी में सामने आया कि जंग लगने की दर के आधार पर जांचे गए मेटल्स पर E20 का असर बहुत मामूली पाया गया।

उम्मीद की किरण यह है कि धातुओं पर E20 से कोई गंभीर नुकसान नहीं होता।

प्लास्टिक और रबर पार्ट्स पर असर

लेकिन चिंता का विषय यह था कि E20 के असर को समझने के लिए इलास्टोमर्स (रबर जैसी सामग्री) और प्लास्टिक के गुणों में आए बदलाव को देखा गया।

टेस्ट पैरामीटर:

  • वजन में बदलाव
  • वॉल्यूम में बदलाव
  • टेंसाइल स्ट्रेंथ (खिंचाव सहने की क्षमता)
  • बढ़ाव (Elongation)
  • इंपैक्ट स्ट्रेंथ (झटका सहने की क्षमता)
  • हार्डनेस (कठोरता)

हालांकि रिपोर्ट में आगे यह भी जोड़ा गया कि कमर्शियल गैसोलीन की तुलना में निम्न सामग्रियों पर E20 का असर ज्यादा था:

प्रभावित सामग्रियां:

  1. NBR (Nitrile Butadiene Rubber) – रबर सील्स और गैस्केट्स में इस्तेमाल
  2. PVC (Polyvinyl Chloride) – पाइप्स और होज़ में
  3. Epichlorohydrin – विशेष प्रकार के सील्स में
  4. PA66 (Polyamide 66) – फ्यूल लाइन्स में
सामग्रीवजन में बदलाववॉल्यूम में बदलावटेंसाइल स्ट्रेंथ में कमी
NBR+3.5%+4.2%-8.5%
PVC+2.8%+3.1%-6.2%
Epichlorohydrin+4.1%+5.0%-10.1%
PA66+2.2%+2.8%-7.3%

ध्यान देने वाली बात यह है कि PA66 की टेंसाइल स्ट्रेंथ और वॉल्यूम में बदलाव पर भी E20 का असर ज्यादा देखा गया।

इन पार्ट्स का इस्तेमाल कहां होता है?

जानकारी के लिए बता दें कि NBR, PVC, Epichlorohydrin और PA66 जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल फ्यूल सिस्टम के विभिन्न पार्ट्स में किया जाता है:

उपयोग स्थान:

  • गैस्केट्स (Gaskets) – लीकेज रोकने के लिए
  • सील्स और O-rings – joints को सील करने के लिए
  • पाइप्स और होज़ (Pipes and Hoses) – फ्यूल ले जाने के लिए
  • फ्यूल लाइन्स – इंजन तक पेट्रोल पहुंचाने के लिए

अगर गौर करें, तो ये सभी महत्वपूर्ण पार्ट्स हैं जो फ्यूल सिस्टम को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं।

इंजन टेस्टिंग में क्या निकला?

ARAI ने BS6 टर्बो चार्ज इंजन की जब 265 घंटे तक लगातार ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग की, तो उसमें कुछ समस्या या खराबी देखी गई।

लेकिन राहत की बात यह है कि BS6 इंजन और टू व्हीलर्स (दोपहिया वाहनों) का परफॉर्मेंस अच्छा रहा और टू व्हीलर्स में कोई भी समस्या नहीं देखी गई।

इंजन टेस्ट के परिणाम:

वाहन का प्रकारटेस्ट अवधिसमस्यानिष्कर्ष
BS6 टर्बो चार्ज इंजन265 घंटेकुछ खराबी देखी गईआगे टेस्टिंग जरूरी
BS6 सामान्य इंजन300+ घंटेकोई समस्या नहींसुरक्षित
टू व्हीलर्स250+ घंटेकोई समस्या नहींपूरी तरह सुरक्षित
एमिशन और ड्राइवेबिलिटी टेस्ट

इसके अलावा एमिशन (धुआं) और ड्राइवेबिलिटी (गाड़ी चलाने की क्षमता) की जांच में सामने आया कि:

एमिशन टेस्ट:

  • गाड़ी से निकलने वाला धुआं कानूनी सीमा के अंदर ही था
  • CO, HC, NOx जैसे प्रदूषकों का स्तर मानक के अनुरूप
  • E20 से प्रदूषण में कोई वृद्धि नहीं

ड्राइवेबिलिटी टेस्ट:

  • गाड़ियों के स्टार्ट होने में कोई दिक्कत नहीं
  • गर्म और ठंडे दोनों मौसम में सामान्य परफॉर्मेंस
  • चलने में कोई समस्या नहीं देखी गई

समझने वाली बात यह है कि E20 पेट्रोल से गाड़ी का बुनियादी performance प्रभावित नहीं होता।

NITI Aayog की रिपोर्ट क्या कहती है?

जून 2021 में जारी Ethanol Blending के रोडमैप पर NITI Aayog की एक रिपोर्ट ने ARAI के रिपोर्ट की पुष्टि की है।

NITI Aayog के मुख्य निष्कर्ष:

  1. माइलेज में गिरावट:
    व्हीकल लेवल स्टडीज में औसत आधार पर फ्यूल की बचत या माइलेज में 6% तक की कमी देखी गई है।
  2. पार्ट्स को नुकसान:
    • Entity-Driven Narrative: प्लास्टिक या इलैस्टोमर्स के अलावा बाकी पार्ट्स को कोई नुकसान नहीं देखा गया
    • फ्यूल सिस्टम में रबर और प्लास्टिक के पार्ट्स को होने वाले नुकसान को एथेनॉल अपग्रेड किट से ठीक किया जा सकता है
  3. स्टार्टिंग और परफॉर्मेंस:
    • टेस्ट किए गए वाहनों ने E10 और E20 टेस्ट फ्यूल के साथ गर्म और ठंडे दोनों तरह के मौसम में स्टार्ट होने और चलने के टेस्ट को पास किया
    • सभी मामलों में गाड़ी चलाने के किसी भी चरण में कोई गंभीर खराबी या गाड़ी के बंद होने की समस्या नहीं देखी गई
  4. इंजन की स्थिति:
    • सड़क पर माइलेज ट्रायल पूरा होने के बाद इंजन के पार्ट्स में कोई घिसावट नहीं पाई गई
    • डिपॉजिट (कचरा जमा होना) नहीं देखा गया
    • इंजन ऑयल की क्वालिटी में कोई खराबी नहीं पाई गई
सोशल मीडिया के दावे vs वैज्ञानिक रिसर्च

हाल ही में बहुत सारे लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चिंता जताई है कि किसी भी मैकेनिकल खराबी, डिपॉजिट यानी कि कचरा जमा होने या समय से पहले जंग लगने की मुख्य वजह E20 फ्यूल है।

लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि:

सोशल मीडिया के दावे:

  • इंजन में कचरा जमा हो रहा है
  • जंग लग रही है
  • पार्ट्स खराब हो रहे हैं
  • गाड़ी की परफॉर्मेंस कम हो रही है

वैज्ञानिक रिसर्च का निष्कर्ष:

  • NITI Aayog: “सड़क पर माइलेज ट्रायल पूरा होने के बाद इंजन के पार्ट्स में कोई घिसावट, डिपॉजिट या इंजन ऑयल की क्वालिटी में कोई खराबी नहीं पाई गई।”
  • ARAI: “मेटल्स पर E20 का असर बहुत मामूली पाया गया।”

सवाल उठता है कि फिर सोशल मीडिया पर ये दावे क्यों हो रहे हैं?

असली समस्या क्या है?

इसके अलावा, Toyota ने एक Innova Hycross मालिक के ऐसे दावे को खारिज करते हुए कहा कि इंजन की समस्या E20 फ्यूल के इस्तेमाल से संबंधित नहीं है, बल्कि मिलावटी पेट्रोल की वजह से है।

असली समस्याएं हो सकती हैं:

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  1. मिलावटी पेट्रोल:
    • कई पेट्रोल पंप्स पर मिलावट हो रही है
    • खराब क्वालिटी का पेट्रोल इंजन खराब कर सकता है
  2. खराब मेंटेनेंस:
    • नियमित सर्विसिंग नहीं करवाना
    • फ्यूल फिल्टर न बदलना
    • इंजन ऑयल की खराब क्वालिटी
  3. पुराने वाहन:
    • 2019 से पहले की गाड़ियां E20 के लिए designed नहीं थीं
    • उनके पार्ट्स E20 के लिए compatible नहीं हो सकते
  4. ड्राइविंग स्टाइल:
    • एग्रेसिव ड्राइविंग
    • ओवरलोडिंग
    • लगातार लंबी दूरी बिना ब्रेक
Ethanol Upgrade Kit की जरूरत

फ्यूल सिस्टम में रबर और प्लास्टिक के पार्ट्स को होने वाले नुकसान को एथेनॉल अपग्रेड किट से ठीक किया जा सकता है।

लेकिन चिंता का विषय यह है कि:

  • अभी तक किसी भी कार निर्माता कंपनी ने ऐसी कोई अपग्रेड किट नहीं उपलब्ध कराई है
  • इस अपग्रेड किट का पूरा खर्चा गाड़ी मालिक को खुद ही उठाना होगा
  • किट की अनुमानित कीमत ₹5,000 से ₹15,000 के बीच हो सकती है (अनौपचारिक अनुमान)

अपग्रेड किट में क्या होगा:

  • E20 compatible फ्यूल होज़
  • नए गैस्केट्स और सील्स
  • अपग्रेडेड फ्यूल पंप (कुछ मामलों में)
  • E20 के लिए suitable फ्यूल फिल्टर
सरकार आगे क्या कदम उठा रही है?

एक और बड़ी चिंता सामने आती है कि क्या सरकार E20 के स्तर से आगे बढ़ेगी?

क्योंकि Bureau of Indian Standards (BIS) ने हाल ही में E22, E25, E27, E30 के स्टैंडर्ड्स को अधिसूचित किया है।

इसके अलावा, ARAI को मौजूद E20 और E10 अनुकूल गाड़ियों पर E25 के प्रभाव का अध्ययन करने का काम सौंपा गया है।

भविष्य का रोडमैप:

वर्षलक्ष्यस्थिति
2025-26E20 का पूर्ण रोलआउटप्रगति में
2027-28E25 की टेस्टिंग पूरीशुरुआती चरण
2028-30E25 का संभावित रोलआउटअध्ययन चल रहा
2030+E30 या अधिकयोजना चरण

तो इस बदलाव पर आपकी जो भी राय हो, कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा।

आम आदमी के लिए क्या मायने रखता है?

अगर आपकी गाड़ी 2019 के बाद की है:

  • E20 पूरी तरह सुरक्षित है
  • माइलेज में 4-6% कमी की उम्मीद रखें
  • नियमित सर्विसिंग करवाएं
  • विश्वसनीय पेट्रोल पंप से ही पेट्रोल भरवाएं

अगर आपकी गाड़ी पुरानी है (2019 से पहले):

  • सामान्य पेट्रोल ही इस्तेमाल करें
  • या manufacturer से E20 compatibility के बारे में पूछें
  • अगर upgrade kit उपलब्ध हो तो लगवाएं

सभी के लिए सलाह:

  • सोशल मीडिया की हर बात पर भरोसा न करें
  • वैज्ञानिक रिसर्च और सरकारी रिपोर्ट पढ़ें
  • अपनी गाड़ी की सही देखभाल करें
  • किसी भी समस्या में authorized service center जाएं
मुख्य बातें (Key Points)
  • ARAI की रिसर्च में मेटल्स पर E20 का असर मामूली पाया गया
  • प्लास्टिक और रबर पार्ट्स पर कुछ असर हो सकता है
  • NITI Aayog की रिपोर्ट ने E20 को सुरक्षित बताया
  • इंजन में कचरा जमने या जंग लगने का कोई प्रमाण नहीं
  • माइलेज में 6% तक की कमी हो सकती है
  • असली समस्या मिलावटी पेट्रोल और खराब मेंटेनेंस की हो सकती है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या E20 से इंजन में जंग लगती है?

उत्तर: नहीं। ARAI और NITI Aayog दोनों की रिसर्च में इंजन में जंग लगने का कोई प्रमाण नहीं मिला। मेटल पार्ट्स पर E20 का असर बहुत मामूली है।

प्रश्न 2: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग समस्याएं क्यों बता रहे हैं?

उत्तर: ज्यादातर मामलों में समस्या मिलावटी पेट्रोल, खराब मेंटेनेंस या पुरानी गाड़ी (2019 से पहले की) की हो सकती है। E20 को गलत तरीके से दोषी ठहराया जा रहा है।

प्रश्न 3: क्या मुझे Ethanol Upgrade Kit लगवानी चाहिए?

उत्तर: अगर आपकी गाड़ी 2019 से पहले की है और E20 compatible नहीं है, तो जब upgrade kit उपलब्ध हो तो लगवा सकते हैं। लेकिन नई गाड़ियों को इसकी जरूरत नहीं।

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Ajay Kumar

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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