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The News Air - Breaking News - E-20 Petrol Controversy: केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों को लिखी चिट्ठी

E-20 Petrol Controversy: केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों को लिखी चिट्ठी

अरविंद केजरीवाल का बड़ा सवाल, पुरानी गाड़ियों में E-20 सुरक्षित है तो ओनर मैनुअल क्यों रोकता है? मारुति, टोयोटा और हीरो से एक हफ्ते में लिखित जवाब की मांग, माइलेज घटने या पार्ट्स खराब होने पर मुआवजे का सवाल

Ajay Kumar by Ajay Kumar
बुधवार, 8 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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E-20 Petrol Controversy
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E-20 Petrol Controversy अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को देश की 29 प्रमुख ऑटो निर्माता कंपनियों को चिट्ठी लिखकर एक सप्ताह के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। देखा जाए तो यह मामला अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह करोड़ों वाहन मालिकों के जेब और उनकी गाड़ियों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा मुद्दा बन चुका है।

हैरान करने वाली बात यह है कि मारुति, टोयोटा और हीरो जैसी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने 4 जुलाई को सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में E-20 को पुरानी गाड़ियों के लिए सुरक्षित बताया, लेकिन इन्हीं कंपनियों का ओनर मैनुअल 10 फीसद से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देता। नई दिल्ली में AAP मुख्यालय पर प्रेसवार्ता करते हुए केजरीवाल ने इस विरोधाभास पर तीखे सवाल उठाए।

समझने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक तकनीकी मामला नहीं, बल्कि देश के 14 करोड़ से ज्यादा पुराने वाहनों के मालिकों की जेब से जुड़ा मामला है। अगर E-20 से वाकई माइलेज घटती है या गाड़ी के पार्ट्स खराब होते हैं, तो इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा।

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मारुति, टोयोटा और हीरो को अलग चिट्ठी

अरविंद केजरीवाल ने 29 कंपनियों में से तीन कंपनियों – मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो मोटोकॉर्प को अलग से चिट्ठी लिखी है। इन तीनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने 4 जुलाई 2026 को एक सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया था और कहा था कि पुरानी गाड़ियों में E-20 का इस्तेमाल सुरक्षित है।

अगर गौर करें तो केजरीवाल ने इन कंपनियों से तीन सीधे सवाल पूछे हैं:

  1. क्या पुरानी गाड़ियों में E-20 सुरक्षित है? जबकि आपका ओनर मैनुअल 2023 से पहले बनी गाड़ियों में 10% से ज्यादा एथेनॉल की अनुमति नहीं देता
  2. क्या माइलेज वाकई सिर्फ 4-5% ही घटती है? या इससे ज्यादा नुकसान है
  3. अगर माइलेज 5-10% से ज्यादा घटी या कोई पार्ट खराब हुआ तो क्या आप उपभोक्ता को मुआवजा देंगे?

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केजरीवाल ने कंपनियों से लिखित जवाब की मांग की है, न कि मौखिक बयान की। यह दर्शाता है कि वे इस मामले को कानूनी रूप से मजबूत बनाना चाहते हैं।

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E-20 विवाद की मुख्य जानकारीविवरण
चिट्ठी लिखने वालेअरविंद केजरीवाल, AAP राष्ट्रीय संयोजक
कुल कंपनियां29 ऑटो निर्माता कंपनियां
विशेष चिट्ठीमारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, हीरो मोटोकॉर्प
अन्य कंपनियां26 अन्य ऑटो निर्माता
जवाब की समय सीमाएक सप्ताह (15 जुलाई 2026 तक)
मुख्य मुद्दापुरानी गाड़ियों में E-20 की सुरक्षा
प्रेस कॉन्फ्रेंस8 जुलाई 2026, AAP मुख्यालय, नई दिल्ली
अगला कदमगुरुवार को पेट्रोल पंप और मैकेनिक से मुलाकात
ओनर मैनुअल बनाम सरकारी बयान: विरोधाभास की पहेली

केजरीवाल ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात उठाई है। उन्होंने कहा कि ओनर मैनुअल, जो कंपनी और उपभोक्ता के बीच एक कानूनी समझौता होता है, कुछ और कहता है और कंपनियों के प्रतिनिधि सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाकर कुछ और कह रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि सभी बड़ी कंपनियों के ओनर मैनुअल में साफ लिखा है कि 2023 से पहले बनी गाड़ियों में किसी भी हालत में 10% से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। लेकिन E-20 में तो 20% एथेनॉल है।

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कहने का मतलब साफ है कि अगर कोई उपभोक्ता E-20 इस्तेमाल करने से अपनी गाड़ी खराब करता है, तो कंपनी कह सकती है कि आपने ओनर मैनुअल का उल्लंघन किया, इसलिए वारंटी रद्द। यह बेहद गंभीर मामला है।

26 अन्य कंपनियों को भी सामान्य चिट्ठी

मारुति, टोयोटा और हीरो के अलावा केजरीवाल ने 26 अन्य ऑटो निर्माता कंपनियों को भी एक सामान्य चिट्ठी लिखी है। इन कंपनियों में होंडा, हुंडई, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, बजाज, TVS, रॉयल एनफील्ड और अन्य दो-पहिया तथा चार-पहिया वाहन बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं।

इन 26 कंपनियों से केजरीवाल ने चार प्रमुख सवाल पूछे हैं:

  1. क्या आपकी 2023 से पहले बनी पुरानी गाड़ियों में E-20 का इस्तेमाल किया जा सकता है?
  2. इससे गाड़ी की माइलेज कितनी कम होगी?
  3. क्या इससे गाड़ी के किसी कंपोनेंट को नुकसान होगा?
  4. अगर नुकसान हुआ तो क्या आप उपभोक्ता को मुआवजा देंगे?

समझने वाली बात यह है कि केजरीवाल ने सभी कंपनियों को सार्वजनिक रूप से अपना स्टैंड स्पष्ट करने को कहा है। यह सिर्फ सरकार को घेरने की राजनीति नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की लड़ाई भी है।

गुरुवार को पेट्रोल पंप, सर्विस सेंटर और मैकेनिक के पास जाएंगे केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि गुरुवार (9 जुलाई 2026) को वे खुद कुछ पेट्रोल पंपों, सर्विस सेंटरों और मिस्त्रियों (मैकेनिक) के पास जाएंगे। वहां वे लोगों से बात करेंगे कि E-20 के बारे में उनका क्या अनुभव है।

यह एक दिलचस्प राजनीतिक रणनीति है। केजरीवाल सिर्फ बयान नहीं दे रहे, बल्कि ग्राउंड पर जाकर आम लोगों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर गौर करें तो यह उनकी पुरानी आम आदमी स्टाइल राजनीति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि सरकार तो जिद पर अड़ी है कि वह E-20 सबके ऊपर थोपेगी, लेकिन जनता क्या कह रही है, जनता का क्या अनुभव है, यह जानना जरूरी है।

माइलेज घटने का सवाल: 4-5% या इससे ज्यादा?

E-20 Petrol Controversy का सबसे बड़ा मुद्दा माइलेज घटने का है। सरकार और कुछ कंपनियां कह रही हैं कि E-20 से माइलेज सिर्फ 4-5% कम होती है, जो नगण्य है।

लेकिन ग्राउंड पर लोगों का अनुभव कुछ और है। सोशल मीडिया पर हजारों लोग दावा कर रहे हैं कि उनकी गाड़ी की माइलेज 10-15% या कुछ मामलों में 20% तक घट गई है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर किसी की बाइक पहले 50 किमी प्रति लीटर देती थी और अब E-20 से 40 किमी प्रति लीटर दे रही है, तो यह 20% की कमी है। इसका मतलब है कि उसे अब हर महीने 20% ज्यादा पेट्रोल खर्च करना पड़ेगा।

कहने का मतलब साफ है कि यह सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर बोझ है। अगर E-20 की कीमत E-10 से थोड़ी कम है, लेकिन माइलेज 15-20% कम हो रही है, तो असली नुकसान उपभोक्ता का ही हो रहा है।

कंपोनेंट खराब होने का डर: इंजन, फ्यूल पंप और रबर पार्ट्स

केजरीवाल ने एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया है – अगर E-20 से गाड़ी के किसी कंपोनेंट को नुकसान हुआ तो क्या होगा?

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल की ज्यादा मात्रा निम्न चीजों को नुकसान पहुंचा सकती है:

• फ्यूल पंप: एथेनॉल ज्यादा corrosive होता है
• रबर होसेस और सील्स: पुराने रबर पार्ट्स एथेनॉल से सूख सकते हैं
• इंजन का आंतरिक भाग: लंबे समय में wear and tear बढ़ सकता है
• फ्यूल इंजेक्टर: clogging की समस्या हो सकती है

अगर गौर करें तो पुरानी गाड़ियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन नहीं किया गया था कि उनमें 20% एथेनॉल इस्तेमाल होगा। इसलिए तकनीकी रूप से ये समस्याएं आ सकती हैं।

और अगर ये पार्ट्स खराब हुए, तो उनकी मरम्मत का खर्च हजारों रुपए का हो सकता है। केजरीवाल का सवाल जायज है कि इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

मुआवजे की मांग: कानूनी चुनौती

अरविंद केजरीवाल ने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह पूछा है कि अगर E-20 के इस्तेमाल से किसी उपभोक्ता की गाड़ी की माइलेज 5-10% से ज्यादा घटती है या कोई कंपोनेंट खराब होता है, तो क्या कंपनियां उसे मुआवजा देंगी?

यह एक कानूनी चुनौती है। दिलचस्प बात यह है कि अगर कंपनियां यह लिखित में दे दें कि वे मुआवजा देंगी, तो यह एक तरह से स्वीकारोक्ति होगी कि E-20 से नुकसान हो सकता है।

और अगर वे मुआवजा नहीं देंगी, तो यह साफ हो जाएगा कि वे अपने ही दावों पर भरोसा नहीं करतीं। कहने का मतलब साफ है कि केजरीवाल ने कंपनियों को एक catch-22 स्थिति में डाल दिया है।

सरकार पर तीखा हमला: जनता को एंटी-नेशनल कहना बंद करो

केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीच में ये लोग जनता को एंटी-नेशनल कहना शुरू कर देते हैं, कोई लॉबिंग कहना चालू कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि अब तो सरकार के अपने बड़े-बड़े ब्लॉगर और इन्फ्लुएंसर सोशल मीडिया पर E-20 के खिलाफ बोल रहे हैं। इस तरह 140 करोड़ जनता को एंटी-नेशनल और आतंकवादी बोलना सही नहीं है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केजरीवाल ने एक राजनीतिक कार्ड खेला है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता की वाजिब शिकायतों को नजरअंदाज कर रही है और उल्टा उन्हें देशद्रोही कह रही है।

विज्ञान और इंजीनियरिंग के खिलाफ फैसला: केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि E-20 को पुराने वाहनों पर थोपने का यह फैसला विज्ञान, तर्क और इंजीनियरिंग के खिलाफ है। जाहिर तौर पर यह पब्लिक इंटरेस्ट में तो नहीं है। यह किसके इंटरेस्ट में है, यह अभी समझ नहीं आ रहा।

यह एक गंभीर आरोप है। केजरीवाल ने इशारों-इशारों में कहा कि शायद इस फैसले के पीछे किसी और का हित है, न कि आम जनता का।

अगर गौर करें तो E-20 के प्रमोशन से शुगर इंडस्ट्री को फायदा होता है क्योंकि एथेनॉल गन्ने से बनता है। लेकिन इसका खामियाजा वाहन मालिकों को भुगतना पड़ रहा है।

एक हफ्ते की डेडलाइन: कंपनियों के सामने चुनौती

केजरीवाल ने सभी 29 कंपनियों को एक हफ्ते का समय दिया है लिखित जवाब देने के लिए। यानी 15 जुलाई 2026 तक कंपनियों को अपना स्टैंड स्पष्ट करना होगा।

देखना होगा कि कंपनियां इस चुनौती को कैसे लेती हैं। अगर वे जवाब देती हैं, तो उन्हें अपने दावों की जिम्मेदारी लेनी होगी। और अगर नहीं देती हैं, तो यह माना जाएगा कि उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं है।

समझने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक दांव नहीं, बल्कि करोड़ों उपभोक्ताओं की आवाज को मजबूत करने की कोशिश है।

आम आदमी पर असर: गाड़ी मालिकों की दुविधा

इस पूरे E-20 Petrol Controversy का सबसे बड़ा असर आम गाड़ी मालिकों पर पड़ रहा है। देश में लगभग 14 करोड़ से ज्यादा ऐसे वाहन हैं जो 2023 से पहले बने हैं।

इन सभी वाहन मालिकों के सामने दुविधा है:
• E-20 भरें तो माइलेज कम होगी और पार्ट्स खराब हो सकते हैं
• E-10 खोजें तो वह अब मिल नहीं रहा या बहुत कम पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है
• पुरानी गाड़ी बेच दें तो भारी नुकसान होगा

कहने का मतलब साफ है कि आम आदमी फंस गया है। न E-20 भरना सही लग रहा, न कोई दूसरा रास्ता है।

सोशल मीडिया पर गुस्सा: सरकार समर्थक भी नाराज

केजरीवाल ने एक महत्वपूर्ण बात कही कि सोशल मीडिया पर सरकार के अपने बड़े-बड़े ब्लॉगर और इन्फ्लुएंसर भी E-20 के खिलाफ बोल रहे हैं।

यह दर्शाता है कि यह मुद्दा पार्टी लाइन से परे जा चुका है। जो लोग आमतौर पर सरकार का समर्थन करते हैं, वे भी इस मामले में नाराज हैं क्योंकि यह उनकी अपनी जेब का मामला है।

अगर गौर करें तो यह केजरीवाल के लिए एक राजनीतिक अवसर भी है कि वे इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेर सकें।

क्या है E-20 और इसका उद्देश्य?

E-20 का मतलब है 20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल। यानी 80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल का मिश्रण। भारत सरकार ने 2025 तक 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा था।

एथेनॉल एक जैव ईंधन (biofuel) है जो गन्ने या अन्य फसलों से बनाया जाता है। सरकार का तर्क है कि:

• पेट्रोल की आयात निर्भरता कम होगी
• किसानों को फायदा होगा (गन्ने की मांग बढ़ेगी)
• प्रदूषण कम होगा
• स्वदेशी ईंधन से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी

यह सब तर्क सही भी हैं। लेकिन समस्या यह है कि पुरानी गाड़ियां E-20 के लिए डिजाइन नहीं की गई थीं। इसलिए उनमें समस्याएं आ रही हैं।

मुख्य बातें (Key Points)

• अरविंद केजरीवाल ने देश की 29 ऑटो निर्माता कंपनियों को चिट्ठी लिखकर E-20 पर स्पष्टीकरण मांगा है

• मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो मोटोकॉर्प को अलग चिट्ठी भेजी गई है क्योंकि इन्होंने सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में E-20 को सुरक्षित बताया था

• केजरीवाल ने सवाल उठाया कि जब ओनर मैनुअल 10% से ज्यादा एथेनॉल की अनुमति नहीं देता तो सरकारी बयान में कैसे 20% सुरक्षित हो गया

• कंपनियों से पूछा गया कि अगर माइलेज 5-10% से ज्यादा घटी या कोई पार्ट खराब हुआ तो क्या वे मुआवजा देंगी

• गुरुवार को केजरीवाल पेट्रोल पंप, सर्विस सेंटर और मैकेनिक से मिलकर लोगों का अनुभव जानेंगे

• केजरीवाल ने सरकार पर आरोप लगाया कि E-20 का फैसला विज्ञान और इंजीनियरिंग के खिलाफ है और यह पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं है

• सभी कंपनियों को एक हफ्ते (15 जुलाई 2026 तक) में लिखित जवाब देने को कहा गया है


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: E-20 पेट्रोल क्या है और यह विवाद क्यों है?

उत्तर: E-20 का मतलब है 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण। विवाद इसलिए है क्योंकि पुरानी गाड़ियों (2023 से पहले बनी) के ओनर मैनुअल 10% से ज्यादा एथेनॉल की अनुमति नहीं देते, लेकिन सरकार और कुछ कंपनियां E-20 को सुरक्षित बता रही हैं। लोगों की शिकायत है कि इससे माइलेज काफी कम हो रही है।

प्रश्न 2: केजरीवाल ने किन कंपनियों को चिट्ठी लिखी है?

उत्तर: केजरीवाल ने कुल 29 ऑटो निर्माता कंपनियों को चिट्ठी लिखी है। इनमें से मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो मोटोकॉर्प को अलग विशेष चिट्ठी भेजी गई है, जबकि 26 अन्य कंपनियों (होंडा, हुंडई, टाटा, महिंद्रा, बजाज, TVS आदि) को सामान्य चिट्ठी भेजी गई है।

प्रश्न 3: E-20 से माइलेज कितनी कम होती है?

उत्तर: सरकार और कुछ कंपनियों का दावा है कि माइलेज सिर्फ 4-5% कम होती है। लेकिन सोशल मीडिया पर हजारों उपभोक्ता दावा कर रहे हैं कि उनकी गाड़ी की माइलेज 10-20% तक घट गई है। यही मुख्य विवाद का बिंदु है। केजरीवाल ने मांग की है कि कंपनियां सही आंकड़ा लिखित में दें।

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