Mukhyamantri Swasthya Yojana Punjab ने एक और जीवन बचाया है। बठिंडा की 37 वर्षीय गुरप्रीत कौर का जीवन हृदय की एक गंभीर बीमारी के कारण अचानक संकट में आ गया था। जब उन्हें पता चला कि उनके दिल में 22 मिलीमीटर का बड़ा छेद है, तो न केवल स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा, बल्कि उपचार के भारी खर्च की चिंता भी सताने लगी। लेकिन एम्स बठिंडा में सफल उपचार और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के सहयोग से उन्हें जीवन का नया अवसर मिला।
चंडीगढ़ से 1 जून 2026 को मिली जानकारी के मुताबिक, भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना पंजाब के लोगों को उपचार के खर्च की चिंता से मुक्त करते हुए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार प्रदान किया जाता है।
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45 लाख से अधिक लोगों ने लिया योजना का लाभ
इस योजना को लोगों का व्यापक समर्थन मिला है और अब तक इसमें 45 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण हो चुका है। विशेष रूप से चिकित्सा आपात स्थितियों में हजारों परिवारों को इसका लाभ मिला है और अनेक लाभार्थियों ने इसके लिए सरकार का आभार व्यक्त किया है।
समझने वाली बात यह है कि यह योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए जीवनरेखा बन चुकी है।
गुरप्रीत कौर की कहानी: जब धड़कन में छिपा था खतरा
अधिकांश लोगों के लिए हृदय की धड़कन ऐसी चीज है जिसके बारे में वे कभी सोचते भी नहीं। यह जीवन के हर सुख-दुख के साथ चुपचाप चलती रहती है। लेकिन गुरप्रीत कौर की हर धड़कन अनजाने में एक छिपे हुए खतरे को अपने साथ लिए हुए थी।
अब तक गुरप्रीत का जीवन अपने परिवार की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों के इर्द-गिर्द सामान्य रूप से चल रहा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि वह जन्म से ही हृदय की एक ऐसी बीमारी से पीड़ित थीं, जो वर्षों तक सामने नहीं आई।
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22 मिलीमीटर का एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD)
जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उनके हृदय के ऊपरी दोनों कक्षों के बीच 22 मिलीमीटर का बड़ा एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) था। इसके कारण रक्त प्रवाह में असंतुलन पैदा हो गया था और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि इसका उपचार नहीं किया जाता, तो आगे चलकर यह हृदय विफलता जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता था।
परिवार में चिंता का माहौल, इलाज का खर्च बड़ी चुनौती
बीमारी का पता चलते ही परिवार में चिंता का माहौल बन गया। एक ओर स्वास्थ्य की चिंता थी, दूसरी ओर उपचार का खर्च भी एक बड़ी चुनौती था।
गुरप्रीत कौर बताती हैं, “सबसे पहले मेरे मन में इलाज के खर्च का ही विचार आया। मुझे चिंता थी कि हम इतना खर्च कैसे उठा पाएंगे। ऐसा लग रहा था जैसे हमारा परिवार जीवन के एक बहुत कठिन मोड़ पर खड़ा हो।”
अगर गौर करें तो यह कहानी लाखों भारतीय परिवारों की है जहां बीमारी से ज्यादा डर इलाज के खर्च का होता है।
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एम्स बठिंडा में 5 मई 2026 को हुई सफल प्रक्रिया
एम्स बठिंडा के विशेषज्ञों ने इस समस्या को दूर करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया की सलाह दी। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, 5 मई 2026 को कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब में सामान्य एनेस्थीसिया के तहत यह प्रक्रिया की गई।
इस दौरान 24 मिलीमीटर का एम्प्लाट्ज़र सेप्टल ऑक्लूडर डिवाइस लगाकर हृदय के छेद को बंद किया गया। यह एक अत्याधुनिक और न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें खुली सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।
एक लाख रुपये का खर्च मुख्यमंत्री योजना ने किया कवर
परिवार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना पर भरोसा किया, जिसके तहत लगभग एक लाख रुपये की उपचार लागत कवर की गई। यह प्रक्रिया जोखिमपूर्ण थी और सहमति दस्तावेजों में संभावित हृदय संबंधी जटिलताओं, हीमोडायनामिक अस्थिरता तथा गंभीर चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता जैसी आशंकाओं का उल्लेख किया गया था।
राहत की बात यह है कि परिवार को एक पैसा भी अपनी जेब से नहीं देना पड़ा। सरकार ने पूरा खर्च उठाया।
बाहर प्रार्थना करता परिवार, अंदर जीवन बचाते डॉक्टर
कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब के बाहर परिवार के सदस्य हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहे थे। गुरप्रीत के पति उस समय को याद करते हुए कहते हैं, “हम केवल प्रार्थना ही कर सकते थे। हर मिनट बहुत लंबा लग रहा था। जब डॉक्टर बाहर आए और उन्होंने बताया कि सब कुछ सफल रहा, तो ऐसा लगा जैसे हमारे सिर से बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो।”
दिलचस्प बात यह है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही और कोई जटिलता सामने नहीं आई। गुरप्रीत के लिए यह एक स्वस्थ भविष्य की ओर नई शुरुआत थी।
स्वास्थ्य मंत्री का बयान: गरिमा बनाए रखना जरूरी
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य सहायता के वास्तविक उद्देश्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “किसी भी परिवार को आर्थिक कठिनाइयों के कारण गुणवत्तापूर्ण उपचार से वंचित नहीं रहना चाहिए। गुरप्रीत की स्वस्थता इस बात का प्रमाण है कि समय पर चिकित्सा सुविधा और आर्थिक सुरक्षा न केवल जीवन बचा सकती है, बल्कि परिवारों की गरिमा भी बनाए रख सकती है।”
समझने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य सेवा केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा का सवाल भी है।
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1.75 लाख मरीजों को मिल चुका है लाभ
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 1,75,210 मरीजों को लाभ मिल चुका है और 3,43,370 उपचार किए जा चुके हैं। योजना पर अब तक 581.90 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
यह आंकड़े राज्य में कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
योजना के आंकड़े एक नजर में
| विवरण | संख्या/राशि |
|---|---|
| कुल पंजीकृत लाभार्थी | 45 लाख+ |
| लाभान्वित मरीज | 1,75,210 |
| कुल उपचार | 3,43,370 |
| कुल खर्च | ₹581.90 करोड़ |
| प्रति परिवार वार्षिक कवर | ₹10 लाख |
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना: एक जीवनरेखा
आज गुरप्रीत कौर, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के हजारों अन्य लाभार्थियों की तरह, नई उम्मीद और बेहतर स्वास्थ्य के साथ जीवन की ओर आगे बढ़ रही हैं।
उनकी कहानी न केवल चिकित्सा विज्ञान की सफलता है, बल्कि एक संवेदनशील सरकार की प्रतिबद्धता का भी उदाहरण है जो यह मानती है कि स्वास्थ्य हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, न कि विशेषाधिकार।
मुख्य बातें (Key Points):
- बठिंडा की गुरप्रीत कौर के हृदय में 22mm का एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) था
- 5 मई 2026 को एम्स बठिंडा में सफल कार्डियक प्रक्रिया की गई
- मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत लगभग 1 लाख रुपये का खर्च कवर किया गया
- योजना में अब तक 45 लाख+ पंजीकरण और 1.75 लाख मरीजों को लाभ
- कुल 581.90 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं













