केंद्र सरकार ने नए आदर्श किरायेदारी अधिनियम को दी मंजूरी

नई दिल्ली, 2 जूनः

केंद्र सरकार ने बुधवार को नए किरायेदारी अधिनियम को मंजूरी दे दी ताकि राज्यों के मौजूदा मकान किरायेदारी संबंधित कानूनों में उचित बदलाव किये जा सके। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की यहां हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस कानून से मकान किरायेदारों और मकान मालिकों दोनों को फायदा होगा और किराये का कारोबार चमकेगा। 

केंद्र के इस आदर्श अधिनियम से देश भर में किराये के आवास के संबंध में कानूनी ढांचे को परिवर्तित करने में मदद करेगा, जिससे इसके समग्र विकास में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य देश में एक जीवंत, टिकाऊ और समावेशी ‘ रेंटल हाउसिंग मार्केट ’ बनाना है। यह सभी आय समूहों के लिए पर्याप्त किराये के आवास के निर्माण के मार्ग को प्रशस्त करेगा जिससे बेघरों की समस्या का समाधान होगा।

इसी के साथ केंद्र सरकार ने सतत् शहरी विकास के क्षेत्र में जापान और मालदीव के साथ सहयोग के लिए दो अलग-अलग समझौता ज्ञापनों को मंजूरी दी है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के दो विभिन्न प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया।

मालदीव के साथ समझौता ज्ञापन के अनुसार शहरी विकास सहयोग पर कार्यक्रमों की रणनीति बनाने और उन्हें लागू करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया जाएगा। संयुक्त कार्य समूह की बैठक वर्ष में एक बार बारी-बारी से मालदीव और भारत में होगी। समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच सतत शहरी विकास के क्षेत्र में मजबूत, गहन और दीर्घकालिक द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देगा।

जापान से किये गए समझौते के मुताबिक आपसी सहयोग पर कार्यक्रमों की रणनीति बनाने और उन्हें लागू करवाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह का गठन भी किया जाएगा। संयुक्त कार्य समूह की वर्ष में एक बार बैठक होगी। यह बैठक बारी-बारी से जापान और भारत में होगी। यह समझौता हस्ताक्षर की तारीख से प्रभावी होगा और पांच साल की अवधि के लिए जारी रहेगा। इसके बाद, इसे एक बार में लगातार पांच वर्षों की अवधि के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है।

यह समझौता दोनों देशों के बीच सतत शहरी विकास के क्षेत्र में मजबूत, गहन और दीर्घकालिक द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देगा। इससे शहरी नियोजन, स्मार्ट शहरों के विकास, किफायती आवास, किराये के आवास , शहरी बाढ़ प्रबंधन, सीवरेज और अपशिष्ट जल प्रबंधन, शहरी परिवहन सहित सतत शहरी विकास के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

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