CBSE OSM Scam 2026: कल्पना कीजिए – आप दिन में 14 घंटे पढ़ाई करते हैं, आपके माता-पिता अपनी बुनियादी जरूरतों से समझौता करके आपकी फीस भरते हैं। आप CBSE Class 12th के छात्र हैं और अपनी परीक्षा पर पूरा भरोसा है। लेकिन जब परिणाम आता है तो आपके अंक आते हैं single digit में। घबराकर आप भारी-भरकम फीस देकर re-evaluation के लिए आवेदन करते हैं और अपनी answer sheet की scanned copy मांगते हैं। पोर्टल खोलते हैं, स्क्रॉल करते हैं और… आपकी सांसें थम जाती हैं। जो हैंडराइटिंग दिख रही है, वह आपकी है ही नहीं।
यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है। देखा जाए तो यह मई 2026 में CBSE के एक छात्र वेदांत की सच्ची घटना है। और वेदांत अकेला नहीं है – वह देश के उन 4 लाख से ज्यादा छात्रों में से एक है जिन्हें यह एहसास हुआ कि सिस्टम ने उनके साथ न सिर्फ लापरवाही की बल्कि किसी और के नाम से replace कर दिया।
समझने वाली बात यह है कि यह भारत के शिक्षा इतिहास का शायद सबसे बड़ा educational catastrophe है। आज हम इस घोटाले की पूरी परतें खोलेंगे – नई दिल्ली के आलीशान गलियारों से लेकर एक blacklisted tech company के rebranded दफ्तरों तक, और यह भी जानेंगे कि कैसे एक coaching-textbook syndicate ने भारत के State Boards को धीरे-धीरे अपंग बना दिया।
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आंकड़े झूठ नहीं बोलते: संकट का पैमाना
सबसे पहले इस संकट का स्केल समझिए जो मई 2026 में हुआ:
| पैरामीटर | संख्या |
|---|---|
| CBSE परीक्षा में छात्र | 18 लाख |
| पेपर चैलेंज करने वाले | 11 लाख+ |
| Scanned Answer Sheet मांगने वाले | 4 लाख+ |
| पिछले साल से वृद्धि | 400% |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब आपके पूरे छात्र आधार में से लगभग 23% हिस्सा आधिकारिक तौर पर यह कहे कि मूल्यांकन में धांधली हुई है, तो यह कोई technical glitch नहीं है। यह पूरे सिस्टम का collapse है।
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छात्रों की शिकायतें: डरावनी सच्चाई
पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को देखें:
• Answer sheet किसी और की हैंडराइटिंग में
• Scanned copies में पूरे पन्ने गायब या blank
• अंकों में हैरान कर देने वाली गिरावट – जो बच्चा हमेशा 95% लाता था उसे 15 नंबर
• पोर्टल का crash होना, payment gateway block होना
• Roll numbers का आपस में बदल जाना
जब पूरे देश में गुस्सा फूटा तो 28 मई 2026 को खुद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सामने आए और कहा (quote):
“यह पहली बार था जब CBSE ने OSM प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। कुछ विसंगतियां (discrepancies) पाई गई हैं और मैं इसकी पूरी जिम्मेदारी लेता हूं।”
मंत्री जी, जिम्मेदारी लेना press release के लिए तो अच्छा है। लेकिन सवाल यह है – यह नौबत आई क्यों और कैसे?
On-Screen Marking (OSM) System क्या है?
फरवरी 2026 में CBSE ने बड़े जोर-शोर से On-Screen Marking (OSM) System का ऐलान किया। थ्योरी बहुत शानदार थी:
OSM के वादे:
• कॉपी को एक जगह से दूसरी जगह भेजने का झंझट खत्म
• कॉपियां सुरक्षित local server पर upload
• शिक्षक घर बैठे computer पर डिजिटल मूल्यांकन करेंगे
• Totaling की गलतियां जीरो
• बेहतरीन पारदर्शिता
CBSE के परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examination) संयम भारद्वाज ने इसे “efficiency और speed का क्रांतिकारी कदम” बताया था।
लेकिन इस चमक-दमक के पीछे सिस्टम के अंदर खतरे के सायरन बज रहे थे।
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चेतावनियां जो अनसुनी कर दी गईं
27 फरवरी 2026 को परीक्षाएं शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले:
Delhi Government School Teachers Association ने मंत्रालय को एक लिखित और बेहद जरूरी चेतावनी भेजी:
“हमारे शिक्षकों को डिजिटल evaluation interface की कोई formal training नहीं दी गई है। इसे रातों-रात पूरे देश पर थोपना एक बड़े हादसे को न्योता देना है। इस सिस्टम को रोकिए।”
अगर गौर करें तो CBSE की अपनी Governing Body के members ने भी request की थी कि पहले एक छोटा pilot project चलाकर देख लें।
लेकिन शिक्षा मंत्रालय को बहुत जल्दबाजी थी। उन्हें “Digital India” की branding की जल्दी थी।
• शिक्षकों की चेतावनी को कूड़ेदान में डाल दिया गया
• Pilot project को bypass किया गया
• 1.8 million बच्चों के भविष्य की चाबी किसके हाथ में सौंप दी गई?
Globarena से Compact Edutech तक: एक बदनाम कंपनी की कहानी
CBSE ने पूरे देश की कॉपियों के डिजिटल मूल्यांकन के लिए जो national contract दिया, उस कंपनी का नाम है Compact Edutech।
अगर यह नाम आपको नया लग रहा है तो इतिहास में चलते हैं:
2019, तेलंगाना:
Globarena Technologies नाम की एक कंपनी ने तेलंगाना Board of Intermediate Education की परीक्षा process के लिए ₹4.35 करोड़ का contract लिया।
18 अप्रैल 2019 को जब नतीजे आए तो कोहराम मच गया:
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल छात्र | 9.74 लाख |
| एक झटके में फेल | 3.28 लाख |
| पहले साल 99% लाने वाले को दूसरे साल | Zero या single digit |
| परीक्षा में उपस्थित छात्रों को | Absent दिखाया गया |
दिलचस्प बात यह है कि सिस्टम की इस भयानक क्रूरता और मानसिक प्रताड़ना को न झेल पाने के कारण तेलंगाना के करीब 23 मासूम बच्चों ने suicide जैसा कदम उठाया।
राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्य उच्च स्तरीय तकनीकी समिति ने अपनी जांच में Globarena कंपनी को सीधे तौर पर दोषी पाया।
Activists ने मांग की कि इस कंपनी को हमेशा के लिए blacklist कर दिया जाए।
लेकिन एक compromised corporation पकड़े जाने के बाद क्या करता है?
वह खुद को सुधारता नहीं है। वह अपनी rebranding करता है।
6 महीने बाद:
Globarena ने अपना background नाम background में डाला और सामने आई एक चमचमाती नई कंपनी – Compact Edutech।
• Core team वही
• Software वही
• बस letterhead नया
CBSE Tender Process: कैसे हुई धांधली?
साल 2025 में हुए CBSE के tender process को समझिए – यह एक classical उदाहरण है कि जब गांठबंधन बड़े हों तो सरकारी नियमों को कैसे तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है:
फरवरी 2025: GeM Portal पर tender जारी → कुछ ही दिनों बाद बिना कारण बताए रहस्यमई तरीके से वापस
Mid-2025: IT sector की दिग्गज TCS और चार अन्य कंपनियों ने apply किया → सभी को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित करके पुनः tender रद्द
अगस्त 2025: तीसरे प्रयास में यह contract अचानक Compact Edutech को दे दिया गया
क्यों? Financial bids देखिए:
| कंपनी | प्रति Answer Sheet दर |
|---|---|
| TCS | ₹65-66 (टैक्स से पहले) |
| Compact Edutech | ₹24.75 (टैक्स सहित) |
CBSE ने 18 लाख बच्चों के भविष्य को आंकने के लिए देश के सबसे सस्ते bidder को चुना।
Tender में हेरफेर: RTI से खुलासे
सार्थक नाम के एक सजग छात्र ने RTI और सरकारी दस्तावेजों को खंगाला। जो निकला वह चौंकाने वाला था:
आखिरी bidding से ठीक पहले CBSE ने अपने tender नियमों में बड़े बदलाव किए:
• न्यूनतम Net Worth की शर्त → घटा दी गई
• High-tier Security Certification → माफ कर दिया गया
• पुरानी गड़बड़ियों के लिए Cooling-off Period → आधा कर दिया
• Physical और Dedicated Server रखने की अनिवार्य शर्त → हटा दी
• सबसे हैरान करने वाली बात – Bidding बंद होने के कुछ घंटे पहले penalty clause में से “Blacklisting” शब्द ही हटा दिया गया
यहां ध्यान देने वाली बात यह है – नियम एक बदनाम कंपनी के हिसाब से बदले गए।
सरकार का जवाब: गोपनीय जांच
जहां विपक्ष इस पूरे मामले की SIT जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है, वहीं सरकार का जवाब वही पुराना है:
“IIT Madras और IIT Kanpur के विशेषज्ञों की एक समिति बना दी गई है जिसकी अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी। हालांकि वह confidential ही रहेगी।”
Structural Bias: CBSE vs State Boards का गहरा खेल
यह सिर्फ एक vendor fraud नहीं है। यह बहुत बड़े सोचे-समझे structural bias का नतीजा है।
पूरे भारत में स्कूली शिक्षा का भूगोल:
| बोर्ड | स्कूलों का % | छात्रों की संख्या | स्कूलों की संख्या |
|---|---|---|---|
| State Boards (UP Board, Bihar Board, etc.) | 98.1% | 25 करोड़ | 14.4 लाख |
| CBSE | 1.9% | 1.63 करोड़ | 27,915 |
अब यह बड़ा अंतर देखिए:
State Boards जिनके पास 98.1% students हैं
CBSE जिसके पास केवल 1.9% students हैं
तो फिर सवाल यह है:
देश के 98% बच्चे State Boards में पढ़ते हैं। फिर भी:
• हमारी राष्ट्रीय नीतियां CBSE-centric क्यों?
• हमारे Top Central Universities CBSE-centric क्यों?
• हमारे राष्ट्रीय स्तर के competitive exams CBSE-centric क्यों?
• UPSC की तैयारी में कहा जाता है “पहले NCERT पढ़ो” – यह CBSE का syllabus है
त्रिकोण का खेल: तीन खिलाड़ी
इसके पीछे एक त्रिकोण (triangle) काम कर रहा है:
1. Private School की Lobby:
2009 में जब Right to Education Act आया तो कड़े infrastructure नियम आए। Private schools ने रास्ता निकाला:
• CBSE की मान्यता लो
• खुद का premium tag लगाओ
• फीस हजारों से बढ़ाकर लाखों कर दो
• Class barrier (वर्ग भेद) खड़ा कर दो
• State Boards को जानबूझकर “पिछड़ा और second class” साबित करो
2. Textbook और Exam का Cartel:
देश में जितने भी बड़े competitive exams हैं – NEET, JEE, यहां तक कि UPSC Civil Services – इनका base क्या है?
NCERT की किताबें।
ये किताबें कहां पढ़ाई जाती हैं? केवल CBSE के syllabus में।
कोई State Board अपने syllabus को NCERT से जितना दूर रखेगा, उसके ग्रामीण और कस्बाई छात्र उन परीक्षाओं में उतने ही ज्यादा पिछड़ेंगे।
इसी पिछड़ेपन का फायदा उठाकर कोटा, दिल्ली, हैदराबाद में ₹60,000 करोड़ का coaching mafia फलता-फूलता है।
3. राज्य सरकारों की नीतिगत निष्क्रियता:
एशिया का सबसे बड़ा exam board: UP Board (उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद)
• हर साल 55 लाख+ छात्र परीक्षा देते हैं
• लेकिन प्रति-छात्र infrastructure investment शर्मनाक रूप से कम
जहां एक elite केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में प्रति-छात्र खर्च काफी ज्यादा होता है, वहीं राज्य के सरकारी स्कूलों में यह खर्च महज ₹8,900 के आसपास होता है।
2021 RTI का चौंकाने वाला खुलासा
2021 में एक RTI में सच सामने आया:
IIT Admissions में State Boards vs CBSE का अनुपात: 1:44
यानी CBSE के सिर्फ 1.9% schools से 44 गुना ज्यादा बच्चे, जबकि State Boards में 98.1% schools हैं।
यह बच्चों की बुद्धि या merit का अंतर नहीं था। यह system के design का अंतर है।
यही वजह थी कि 2022 में CUET लाना पड़ा क्योंकि 12वीं के marks पर आधारित पुरानी admission प्रणाली State Boards के students के साथ लगातार structural injustice कर रही थी।
UPSC Aspirants के लिए: GS Paper-2 Case Study
UPSC की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इस पूरे विवाद को GS Paper-2 (Governance और Social Justice) के एक classical case study के तौर पर देखा जा सकता है:
1. Regulatory Capture:
कैसे corporate companies नियमों और tender की शर्तों को अपने अनुकूल प्रभावित कर लेती हैं
2. Digital Governance की चुनौतियां:
पर्याप्त training, infrastructure और security standards के बिना digital systems को थोपने के नुकसान
3. Federalism और Subsidiarity:
केंद्रीय boards के अत्यधिक प्रभुत्व के कारण राज्य स्तरीय शिक्षा boards की अनदेखी और वित्तीय कमजोरी
4. Social Inclusion:
कैसे शिक्षा नीतियां अनजाने में ग्रामीण-भाषाई और शहरी-अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के बीच गहरी खाई बनाती हैं
समाधान क्या है? ठोस सुधार की जरूरत
Social media पर hashtags और reels से असल में तंत्र को एक ढाल ही मिलती है। narrative को भटका कर रखते हैं जब तक कोई नया topic न आ जाए।
हमें ठोस सुधारों की जरूरत है:
1. तत्काल कार्रवाई:
• Compact Edutech की पूरी जांच
• 4 लाख+ प्रभावित छात्रों की बिना फीस के physical re-evaluation
• IIT Madras/Kanpur की रिपोर्ट को सार्वजनिक करें
2. संस्थागत सुरक्षा:
• सार्वजनिक परीक्षाओं में तकनीक में कोई बड़ा बदलाव बिना multi-tier pilot project के लागू न करें
3. Level Playing Field:
• राज्य सरकारों से जवाब मांगें – अगर UP Board और Bihar Board देश के सबसे बड़े boards हैं तो उन्हें world class क्यों नहीं बनाया गया?
• 25 करोड़ State Board के बच्चे देश के असली human capital हैं – उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार देश के विकास में बाधा है
क्या है पूरा मामला?
2019 में तेलंगाना में जिस Globarena कंपनी की लापरवाही से 23 मासूमों की जान गई थी, उसी कंपनी ने अपना नाम बदला, कागजों में हेरफेर किया और 2025 के भारत के सबसे प्रतिष्ठित केंद्रीय बोर्ड का ठेका हासिल किया।
जब तक इस तंत्र की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक हम यह नहीं मान सकते कि शिक्षा एक पवित्र कार्य है।
मुनाफा कमाने और corporate balance sheet को अच्छा बनाने के लिए बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ एक राष्ट्रीय अपराध है।
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मुख्य बातें (Key Points)
• मई 2026 में CBSE की On-Screen Marking (OSM) System में बड़ी गड़बड़ी
• 4 लाख से ज्यादा छात्रों को मिली गलत या किसी और की answer sheets
• Globarena Technologies (2019 तेलंगाना घोटाला – 23 छात्रों ने की आत्महत्या) ने नाम बदलकर Compact Edutech बनाया
• CBSE tender process में अनियमितताएं – TCS को हटाकर सबसे सस्ते bidder को contract
• Tender rules में bidding से घंटे पहले बदलाव – Blacklisting शब्द हटाया गया
• शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जिम्मेदारी ली लेकिन structural सुधार नहीं
• CBSE में केवल 1.9% schools लेकिन 98.1% State Boards को systematically कमजोर किया गया
• 2021 RTI: IIT में CBSE vs State Board का ratio 44:1
• ₹60,000 करोड़ का coaching mafia इस structural bias से फायदा उठाता है










