CBSE 12th Result 2026: परीक्षा परिणामों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। NEET UG पेपर लीक के बाद अब CBSE की 12वीं कक्षा का रिजल्ट भी सवालों के घेरे में आ गया है। छात्रों का आरोप है कि On-Screen Marking (OSM) System की वजह से उनके नंबर उम्मीद से काफी कम आए हैं। देखा जाए तो यह सिर्फ एक-दो छात्रों की शिकायत नहीं है – सोशल मीडिया पर हजारों students अपनी मार्कशीट शेयर करते हुए तकनीकी खामियों और खराब स्क्रीनिंग की बात कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि अच्छे पेपर के बावजूद उनके नंबर 90-95 की उम्मीद से काफी नीचे आए। कई ने तो यहां तक आरोप लगाया कि कॉपी की जांच में Artificial Intelligence (AI) का इस्तेमाल किया गया है। अब इन्हीं गंभीर आरोपों पर Department of School Education and Literacy के सचिव Sanjay Kumar और CBSE के अध्यक्ष Rahul Singh की सफाई सामने आई है।
समझने वाली बात यह है कि इस बार passing percentage भी 88% से घटकर 85% रह गई। और यह गिरावट छात्रों की चिंता को और बढ़ा रही है। आखिर हुआ क्या? OSM System है क्या? AI का इस्तेमाल हुआ या नहीं? और छात्रों को क्या करना चाहिए? आइए विस्तार से समझते हैं।
शिक्षा सचिव ने तोड़ी चुप्पी, बताई असली सच्चाई
School Education Secretary Sanjay Kumar ने आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया में कुछ गलतियां जरूर पाई गई हैं, लेकिन यह बहुत छोटे पैमाने पर हैं।
आंकड़े देखें तो तस्वीर साफ हो जाती है। इस बार लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की जांच हुई। इनमें से करीब 13,000 कॉपियों में सुधार और समीक्षा की जरूरत पाई गई। मतलब सिर्फ 0.13% कॉपियों में ही समस्या आई। और दिलचस्प बात यह है कि OSM System इन कॉपियों को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाया था। बाद में इन सभी मामलों की जांच मैनुअल चेकिंग प्रक्रिया से की गई।
Sanjay Kumar ने OSM System का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई नया concept नहीं है। “ऑन-स्क्रीन मार्किंग न तो कोई नई व्यवस्था है और न ही पहली बार लागू की गई है। CBSE ने सबसे पहले 2014 में OSM System को शुरू किया था। हालांकि उस समय तकनीकी बुनियादी ढांचे की सीमाओं की वजह से इसे जारी नहीं रखा गया। अब इसे फिर से शुरू किया गया है।”
कौन-कौन से संस्थान इस्तेमाल कर रहे हैं OSM?
अगर गौर करें तो On-Screen Marking सिर्फ CBSE तक सीमित नहीं है। बहुत से प्रतिष्ठित संस्थानों में यह पैटर्न लागू किया जा रहा है:
| संस्थान | OSM की स्थिति |
|---|---|
| Mumbai University | लागू |
| Delhi University | लागू |
| ICAI (Chartered Accountants) | लागू |
| IB (International Baccalaureate) | लागू |
| Cambridge Education Board | लागू |
| CBSE | पुनः लागू (2026) |
यह देखकर साफ होता है कि OSM एक globally accepted practice है। लेकिन फिर भी सवाल यह है कि अगर यह इतना reliable है तो छात्रों को कम नंबर क्यों मिले?
CBSE Chairman ने किया AI के इस्तेमाल से इनकार
पेपर चेकिंग में AI का इस्तेमाल हुआ है या नहीं – यह सबसे बड़ा सवाल था। इस पर CBSE के अध्यक्ष Rahul Singh ने साफ-साफ कहा, “पेपर चेकिंग में AI का उपयोग नहीं किया गया है। केवल मार्किंग का तरीका बदला गया है।”
उन्होंने आगे समझाया, “पहले कागज पर जांच होती थी और इस बार ऑन-स्क्रीन जांच हुई है। बस इतना ही फर्क है। मूल्यांकन अभी भी trained teachers द्वारा ही किया गया है, किसी machine या AI algorithm ने नहीं।”
यहां ध्यान देने वाली बात – CBSE Chairman ने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि अगर उन्हें अपनी answer sheet प्राप्त करने के बाद लगता है कि जांच में कोई समस्या है, तो re-correction के लिए जरूर आवेदन करें। शिक्षा बोर्ड उनके हर सवाल का जवाब देगा।
Re-evaluation Process: कैसे करें आवेदन?
अब आते हैं सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर। अगर आपको भी लगता है कि आपके नंबर कम आए हैं तो क्या करें? CBSE ने पूरा process स्पष्ट कर दिया है।
महत्वपूर्ण तिथियां:
छात्र 19 से 22 मई 2026 तक अपनी जांच की गई answer sheet की scanned copy के लिए आवेदन कर सकते हैं।
पहला चरण – Review Process:
- पहले answer sheet देखें
- फिर verification और re-evaluation के लिए apply करें
दूसरा चरण – Fee Structure:
| सेवा | शुल्क | पहले की फीस |
|---|---|---|
| Answer Sheet की Copy | ₹100 | ₹700 (घटाया गया) |
| प्रति Question | ₹25 | – |
तीसरा चरण – Fee Refund Policy:
यहां एक बड़ी राहत की बात है। अगर आपकी request के बाद answer sheet दोबारा check होती है और आपके नंबर बढ़ जाते हैं, तो छात्रों को यह ₹100 और ₹25 की fees वापस कर दी जाएगी। यह एक सराहनीय कदम है।
98 लाख कॉपियों में से 13,000 में मिलीं गलतियां
Evaluation के पैमाने की बात करें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इस साल लगभग 9,86,000 (9.86 lakh) उत्तर पुस्तिकाएं चेक की गईं। इनमें से लगभग 13,000 कॉपियों में गलतियां मिलीं। अब इन्हें manual review किया जाएगा।
कॉपी चेकिंग के लिए 77,000 शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। यह संख्या भी बताती है कि CBSE ने कितनी तैयारी की थी।
OSM System जारी रहेगा, बदलाव नहीं होगा
हालांकि इस बीच बोर्ड ने यह साफ कर दिया है कि OSM System जारी रहेगा। सिर्फ standardization में बदलाव हुआ है। मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं है।
CBSE की official statement के मुताबिक, “OSM System के कारण बोर्ड परीक्षा के result में कमी नहीं आई है। हर साल बोर्ड परीक्षा के result में अंतर होता है। कभी ज्यादा candidates होते हैं तो pass percentage कम हो जाता है। यह एक natural variation है।”
Passing Percentage में गिरावट क्यों आई?
इस बार की passing percentage 88% से घटकर 85% हो गई। यह 3% की गिरावट है। लेकिन CBSE का कहना है कि यह OSM की वजह से नहीं है।
अधिकारियों का तर्क है कि:
- हर साल candidates की संख्या अलग होती है
- पेपर की difficulty level अलग होती है
- छात्रों की तैयारी का स्तर अलग होता है
- 2-3% का उतार-चढ़ाव सामान्य है
लेकिन छात्रों का मानना है कि technical glitches की वजह से उनके genuine marks कम हो गए हैं। कुछ छात्रों को लगता है कि उन्हें वास्तव में मिले अंकों से ज्यादा अंक मिलने चाहिए थे।
Students की चिंताएं और College Admissions
इन तमाम सवालों के बीच एक बड़ी चिंता यह भी है कि सारा process समय पर हो जाए। क्योंकि graduation के लिए कई सारे colleges में admission process में 12वीं के नंबर जरूरी हो गए हैं।
अगर re-evaluation में देरी होती है तो:
- Students की college admission की deadline निकल सकती है
- Counseling process में दिक्कत आ सकती है
- Career planning प्रभावित हो सकती है
इसलिए CBSE ने त्वरित प्रक्रिया का आश्वासन दिया है। लेकिन छात्रों और अभिभावकों की बेचैनी स्वाभाविक है।
OSM System काम कैसे करता है?
चलिए समझते हैं कि आखिर यह On-Screen Marking System है क्या और कैसे काम करता है।
पारंपरिक तरीका (पहले):
- Physical answer sheets को teachers के पास भेजा जाता था
- वे कागज पर ही checking करते थे
- Marks manually enter किए जाते थे
OSM तरीका (अब):
- Answer sheets को scan किया जाता है
- Teachers को computer screen पर digital copies दिखाई जाती हैं
- वे screen पर ही marking करते हैं
- Marks automatically system में enter हो जाते हैं
फायदे:
- Human error कम होती है
- Process faster होता है
- Transparency बढ़ती है
- Records maintain करना आसान
नुकसान (छात्रों के अनुसार):
- Scanning quality खराब हो सकती है
- कुछ answers blur दिख सकते हैं
- Technical glitches हो सकते हैं
- Handwriting पढ़ने में दिक्कत
Teacher Training की कैसे हुई थी?
77,000 teachers को train करना कोई छोटा काम नहीं था। CBSE ने बताया कि:
- विशेष workshops आयोजित की गईं
- Digital marking tools का प्रशिक्षण दिया गया
- Mock evaluation करवाया गया
- Quality control checks लगाए गए
लेकिन फिर भी 13,000 cases में errors आईं। यह बताता है कि system अभी भी perfect नहीं है।
आगे का रास्ता: छात्रों को क्या करना चाहिए?
अगर आप भी CBSE 12th के छात्र हैं और अपने नंबरों से असंतुष्ट हैं:
Step 1: 19-22 मई के बीच answer sheet copy के लिए apply करें
Step 2: ₹100 fee जमा करें
Step 3: Answer sheet मिलने के बाद carefully check करें
Step 4: अगर genuine mistakes दिखें तो re-evaluation के लिए apply करें
Step 5: प्रति question ₹25 की additional fee
Step 6: अगर marks बढ़े तो fee refund मिलेगी
CBSE की credibility पर सवाल
भले ही CBSE कितनी भी सफाई दे या फिर कितने भी दावे करे, लेकिन जब तक students अपने result और review से मिले नंबर से संतुष्ट नहीं होते, तब तक सवाल और आरोप बने रहेंगे।
NEET UG paper leak के बाद यह दूसरा बड़ा विवाद है जो education system की credibility पर सवाल उठा रहा है। Students और parents का भरोसा जीतना CBSE के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- CBSE 12th Result 2026 में OSM System को लेकर विवाद, छात्रों ने कम नंबर आने की शिकायत की
- शिक्षा सचिव Sanjay Kumar ने कहा 98 लाख में से सिर्फ 13,000 कॉपियों में errors मिलीं
- CBSE Chairman Rahul Singh ने AI इस्तेमाल से किया साफ इनकार, केवल marking method बदला
- Passing percentage 88% से घटकर 85% हुई, CBSE ने कहा यह natural variation है
- 19-22 मई तक answer sheet copy के लिए apply कर सकते हैं, fee ₹700 से घटाकर ₹100 की गई
- OSM System 2014 में शुरू हुआ था, अब दोबारा लागू किया गया
- Mumbai University, Delhi University, ICAI, Cambridge भी OSM use करते हैं













