Body Detox Natural Ways के बारे में बाजार में बहुत भ्रम फैला हुआ है। मार्केट में ऐसे प्रोडक्ट्स की भरमार है जो दावा करते हैं कि उन्हें खाने-पीने से शरीर डिटॉक्स हो जाता है। लेकिन हकीकत तो यह है कि शरीर से टॉक्सिन्स यानी गंदगी बाहर निकालने के लिए आपको किसी सप्लीमेंट या रेडीमेड जूस की जरूरत नहीं है।
देखा जाए तो शरीर नेचुरली खुद को डिटॉक्स कर लेता है। हां, यह जरूर है कि कुछ चीजें खा-पीकर इस डिटॉक्सिफिकेशन प्रोसेस को बेहतर और तेज किया जा सकता है।
क्या होता है बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन?
Max Super Speciality Hospital द्वारका के इंटरनल मेडिसिन डायरेक्टर एंड यूनिट हेड डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा बताते हैं, “डिटॉक्सिफिकेशन एक प्रोसेस है जहां पे टॉक्सिन्स को बॉडी से बाहर निकाला जाता है। बहुत सारे ऐसे प्रोसेसेस हैं, बहुत सारे ऐसे सिस्टम्स हैं। हम अपने खानपान की चीजों में ऐसे चेंजेस कर सकते हैं जिससे हम अपनी बॉडी को डिटॉक्सिफिकेशन में ला सकते हैं।”
समझने वाली बात यह है कि डिटॉक्स कोई जादू नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो शरीर में लगातार चलती रहती है।
डिटॉक्स क्यों जरूरी है?
डॉ. सिन्हा बताते हैं, “डिटॉक्सिफिकेशन हमारी बॉडी के लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट है। क्योंकि जब हमारी बॉडी में टॉक्सिन की मात्रा कम से कम होगी तो हमारी बॉडी के सारे ऑर्गन सिस्टम जैसे कि हमारा सेंट्रल नर्वस सिस्टम, हमारा सर्कुलेटरी सिस्टम, हमारा पल्मोनरी सिस्टम, हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम – सारी चीजें काफी अच्छे से काम करती हैं।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब शरीर में कम टॉक्सिन्स होंगे तो व्यक्ति की वर्क कैपेसिटी ज्यादा अच्छी होती है, वो बहुत हेल्दी फील करते हैं और उनकी नींद की क्वालिटी भी अच्छी होती है।
कौन से अंग करते हैं डिटॉक्स?
डॉ. सिन्हा बताते हैं, “हमारे बॉडी में बहुत सारे ऐसे ऑर्गन्स हैं जो कि हमारे बॉडी से टॉक्सिन्स को निकालने का काम करते हैं। इसमें सबसे मुख्य तौर पे काम होता है हमारे लीवर का। हम जो भी चीजें खाते हैं उसके अंदर कोई भी ऐसी चीज हो जो कि हमारी बॉडी के लिए ठीक नहीं है, उसे मेटाबोलाइज करके लीवर हमारे बॉडी को स्टूल के थ्रू बाहर निकालता है।”
“सेकंड मोस्ट ऑर्गन जो हमारे डिटॉक्स में आता है वो हमारी किडनी का है। किडनी भी वैसे ही हमारी बॉडी में जो हम चीजें खाते हैं उसके पचने के बाद जो नाइट्रोजनस वेस्ट बनते हैं, उसे यूरिन के थ्रू बाहर निकालती हैं।”
“तीसरी चीज हो गई हमारी स्किन। बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो कि हमारी बॉडी के स्किन के थ्रू एक्सक्रीट होती हैं। बहुत सारी ऐसी इनहेलेशनल चीज भी होती हैं जो हमारे लंग्स के थ्रू भी बाहर निकलती हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि हमारा शरीर एक परफेक्ट मशीन है जो खुद ही सफाई कर लेता है।
क्या खाएं-पिएं डिटॉक्स के लिए?
डॉ. सिन्हा कहते हैं, “बहुत सारी चीजें हैं जिसके थ्रू हम अपने बॉडी को डिटॉक्स कर सकते हैं। जैसे कि सबसे पहले हम अपने डाइट में बहुत अच्छा हाइड्रेशन – वाटर इंटेक हम बिल्कुल एडिक्वेट करें। हमें जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके हमें अपने डाइट में वेजिटेरियन डाइट को इंक्लूड करना चाहिए।”
“जहां तक हो सके आजकल जो हम लोग बात करते हैं ऑर्गेनिक फूड्स के लिए – वो ऑर्गेनिक फूड्स बहुत सारे पेस्टिसाइड और जो केमिकल्स होते हैं उनसे फ्री होते हैं। अगर हम उनका सेवन करें तो उससे हमें डिटॉक्सिफिकेशन में मदद मिलती है।”
“बहुत सारे हमारे जैसे हर्ब्स होते हैं, बहुत सारे जैसे ग्रीन लीफी वेजिटेबल्स हैं, स्पिनच है, बीटरूट है – ये सब चीजें हमारे डाइट में इंक्लूड कर सकते हैं जिससे हमारी बॉडी को डिटॉक्सिफिकेशन में मदद मिलती है।”
पढ़ाई में नींद क्यों आती है?
CK Birla Hospital गुरुग्राम के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. तुषार तायल बताते हैं कि अगर पढ़ने से पहले आपने ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाया है जैसे चावल, नूडल्स या कोई मीठी चीजें तो यह पहले शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं लेकिन थोड़ी देर बाद ही एनर्जी डाउन हो जाती है।
अगर आपने ज्यादा तेल, मसाले वाला खाना खाया है तब शरीर इन्हें पचाने में बिजी हो जाता है जिससे नींद आने लगती है। अगर आप बिस्तर पर लेटकर पढ़ते हैं या बहुत आरामदायक जगह पर बैठे हैं तो दिमाग उसे स्लीप मोड से जोड़ लेता है।
समझने वाली बात यह है कि हमारा दिमाग एन्वायरनमेंट के हिसाब से रिएक्ट करता है।
पनीर या टोफू – कौन बेहतर?
वन डाइट टुडे की फाउंडर और सीनियर डाइटिशियन डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि पनीर और टोफू दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। लेकिन इनकी न्यूट्रिशन प्रोफाइल अलग-अलग होती है।
पनीर में प्रोटीन और फैट ज्यादा होता है। जिस वजह से यह कैलोरी और एनर्जी भी ज्यादा देता है। वहीं टोफू लो फैट और लो कैलोरी होता है। इसमें अच्छा प्लांट बेस प्रोटीन और कैल्शियम होता है।
पाचन के लिहाज से टोफू बेहतर है। यह खाने में हल्का और आसानी से पचने वाला होता है। वेट लॉस की बात करें तो टोफू ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि इसमें कैलोरी और फैट कम होता है।
मसल्स बनाने के लिए पनीर ज्यादा बेहतर है। ये एक कंप्लीट प्रोटीन है। इसमें केसिन नाम का प्रोटीन होता है जो धीरे-धीरे डाइजेस्ट होकर मसल्स की रिकवरी और ग्रोथ में मदद करता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- शरीर खुद को नेचुरली डिटॉक्स करता है
- लीवर, किडनी, स्किन और लंग्स डिटॉक्स करते हैं
- ज्यादा पानी पिएं और हरी सब्जियां खाएं
- पढ़ाई में नींद से बचने के लिए लाइट फूड खाएं
- वेट लॉस के लिए टोफू, मसल्स के लिए पनीर बेहतर













