2024 के लिए ‌‌BJP ने खेला सिख कार्ड, भिंडरांवाले को गिरफ़्तार करने वाले पूर्व IPS को..

The News Air- पंजाब के पूर्व IPS इक़बाल सिंह लालपुरा को केंद्र सरकार ने फिर से अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाया है। इक़बाल सिंह लालपुरा ने ही 1981 में जरनैल सिंह भिंडरांवाले को गिरफ़्तार किया था।
केंद्र सरकार ने रोपड़ के गांव लालपुरा के रहने वाले इक़बाल सिंह लालपुरा को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाने की अधिसूचना भी भारतीय गैजेट में प्रकाशित कर दी है। लालपुरा का नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है।

सितंबर 2021 में दी थी पहली नियुक्ति

2022 विधानसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र की भाजपा सरकार ने सितंबर 2021 में सिख कार्ड खेलते हुए लालपुरा को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाया था। चुनाव में लालपुरा को आनंदपुर साहिब से पार्टी की टिकट मिलने के कारण उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया था। हालांकि लालपुरा चुनाव भी हार गए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें दोबारा आयोग की चेयरमैनी दे दी है। केंद्र सरकार ने लालपुरा को 2024 लोकसभा चुनाव में सिख वोटरों को साधने के लिए नियुक्ति दी है।

भारत में पांच समुदाय हैं अल्पसंख्यक

भारत सरकार ने गैजेट में अधिसूचना जारी कर देश के पांच समुदायों को अल्पसंख्यक घोषित कर रखा है। इनमें सिख, ईसाई, बौद्ध, मुस्लिम और पारसी शामिल हैं। अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी इन्हीं समुदायों से बनाया जाता है। पिछली बार की तरह इस बार भी देश की आबादी के दो प्रतिशत हिस्से सिख समुदाय से लालपुरा को अध्यक्ष बनाया गया है।

भिंडरांवाला ने गिरफ़्तारी के लिए रखी थी डिमांड

1981 में अलगाववादी जरनैल सिंह भिंडरांवाला को पकड़ने के लिए पुलिस पुलिस जगह-जगह छापे मार रही थी। भिंडरांवाले ने पुलिस के आगे एक ही डिमांड रखी कि वह अपनी इच्छा से गिरफ़्तारी दे देंगे लेकिन उन्हें गिरफ़्तार करने के लिए सिर्फ़ अमृतधारी सिख अफ़सर को ही भेजा जाए। पंजाब पुलिस ने जरनैल सिंह भिंडरावाला को गिरफ़्तार करने के लिए तीन सिख अफ़सरों का पैनल बनाया था। इस पैनल में अमृतधारी सिख इक़बाल सिंह लालपुरा भी शामिल थे। लालपुरा उस समय इंस्पेक्टर पद पर तैनात थे। दो अन्य अधिकारियों में जरनैल सिंह चाहल और तत्कालीन एसडीएम बीएस भुल्लर शामिल थे। इन तीनों ने 1981 में भिंडरांवाला को गिरफ़्तार कर पूछताछ की थी।

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इक़बाल सिंह लालपुरा 1978 में निरंकारियों से हुए टकराव में भी जांच अधिकारी रहे हैं। आतंकवाद के दौर में बंदूक थामने वाले युवाओं को मुख्यधारा में लाने में भी लालपुरा ने बड़ी भूमिका निभाई। लालपुरा ने आईपीएस बनने तक का सफ़र एनजीओ रैंक से शुरू किया था। 1983 में हरिमंदिर साहिब में मरे जालंधर रेंज के डीआईजी एएस अटवाल के शव को बाहर लाने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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