All Dams of India की बात करें तो भारत में वर्तमान में 5264 बड़े बांध (Large Dams) मौजूद हैं और 437 बांध निर्माणाधीन हैं। Central Water Commission के राष्ट्रीय बड़े बांध रजिस्टर (NRLD – National Register of Large Dams) के अनुसार भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बांध निर्माणकर्ता देश है। बांध सिर्फ बाढ़ नियंत्रण के लिए नहीं, बल्कि सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। पंडित नेहरू ने इन्हें “आधुनिक भारत के मंदिर” (Temples of Modern India) कहा था। आइए जानते हैं भारत के सभी राज्यों में कौन-कौन से प्रमुख बांध स्थित हैं और किस नदी पर बने हैं।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रमुख बांध
जम्मू-कश्मीर में दो प्रमुख बांध स्थित हैं। पहला है बगलीहार डैम जो रामबन जिले में चिनाब नदी पर बना है। इसे बगलीहार हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस बांध का निर्माण 1999 में शुरू हुआ और 2016 में पूरा हुआ।
दूसरा है उरी डैम जो झेलम नदी पर बना 480 मेगावाट क्षमता का हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन है। यह बारामूला जिले के उरी टाउन में स्थित है और नियंत्रण रेखा (LoC) के काफी नजदीक है। 4 जुलाई 2014 को उरी-2 परियोजना का उद्घाटन किया गया जो 240 मेगावाट क्षमता का पावर स्टेशन है।
लद्दाख में दुमखर डैम प्रमुख बांध है जो लेह जिले में सिंधु नदी (Indus River) पर बना है। यह लेह शहर से करीब 138 किमी दूर लेह-बटालिक रोड पर स्थित है। इसका निर्माण 1997 में शुरू हुआ और 2003 में पूरा हुआ।
हिमाचल प्रदेश – 16 बांधों का राज्य
देखा जाए तो हिमाचल प्रदेश में कुल 16 बांध हैं। सबसे प्रसिद्ध है भाखड़ा नांगल डैम। दरअसल भाखड़ा और नांगल दो अलग-अलग बांध हैं जिन्हें एक ही परियोजना के तहत बनाया गया। भाखड़ा हिमाचल के बिलासपुर जिले में स्थित है जबकि नांगल वहां से 10 किमी दूर पंजाब में है।
741 फीट ऊंचाई पर स्थित यह दुनिया के सबसे ऊंचे ग्रेविटी डैम्स में से एक और तेहरी डैम के बाद भारत का दूसरा सबसे ऊंचा बांध है। यह सतलुज नदी (सिंधु नदी की सहायक नदी) पर बना है। इससे बना गोविंद सागर जलाशय भारत का तीसरा सबसे बड़ा जलाशय है जो 9.34 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा करता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस बांध के निर्माण का विचार 1908 में ब्रिटिश जनरल लुई डेन ने दिया था। वे तेंदुए का पीछा करते हुए सतलुज नदी के तट पर पहुंचे और सोचा कि इसका उपयोग बिजली बनाने में हो सकता है। लेकिन ब्रिटिश सरकार ने पैसों की कमी का हवाला देकर प्रस्ताव खारिज कर दिया। आखिरकार 1948 में स्वतंत्रता के बाद यह परियोजना पास हुई। 1951 में काम शुरू हुआ, 1954 में पंडित नेहरू ने इसका उद्घाटन किया और 1963 में इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि भाखड़ा नांगल डैम में 10 पावर जनरेटर हैं जिनकी कुल क्षमता 1325 मेगावाट है। यह हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, चंडीगढ़ और दिल्ली को बिजली सप्लाई करता है।
हिमाचल के अन्य प्रमुख बांध हैं – पंडोह डैम (ब्यास नदी पर, मंडी जिला), नाथपा झाकड़ी डैम (सतलुज नदी पर, 1500 मेगावाट क्षमता), और चमेरा डैम (रावी नदी पर, चंबा जिला)। चमेरा डैम तीन चरणों में बना है – चमेरा-1 (540 मेगावाट), चमेरा-2 (300 मेगावाट) और चमेरा-3 (231 मेगावाट)।
उत्तराखंड का गौरव – तेहरी डैम
उत्तराखंड में स्थित तेहरी डैम पूरे भारत का सबसे ऊंचा और दुनिया का 12वां सबसे ऊंचा बांध है। गढ़वाल जिले के पास भागीरथी नदी पर बना यह बांध 260.5 मीटर ऊंचा और 575 मीटर लंबा है।
अगर गौर करें तो यह एक बहुउद्देशीय बांध है जो सिंचाई, पेयजल और 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन का काम करता है। इसका 1000 मेगावाट का वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज स्कीम वर्तमान में निर्माणाधीन है। इसे THDC (Tehri Hydro Development Corporation Limited) द्वारा संचालित किया जाता है जिसे अब NTPC ने अधिग्रहित कर लिया है।
समझने वाली बात यह है कि तेहरी डैम का निर्माण 1978 में शुरू हुआ था लेकिन पर्यावरणविदों के विरोध के कारण यह विलंबित हुआ और 2006 में पूरा हुआ। प्रसिद्ध पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा ने एंटी-तेहरी डैम आंदोलन का नेतृत्व किया था जो 1980 से 2004 तक चला। उन्होंने पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय लोगों के विस्थापन का मुद्दा उठाया था। सितंबर 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि तेहरी डैम का निर्माण कानूनी है और तभी यह विरोध समाप्त हुआ।
उत्तराखंड के अन्य प्रमुख बांध हैं – रामगंगा डैम (रामगंगा नदी पर, पौड़ी गढ़वाल) और धौलीगंगा डैम (धौलीगंगा नदी पर, धारचूला के पास)।
हरियाणा के चार प्रमुख बांध
हरियाणा में चार मुख्य बांध स्थित हैं। पहला है पथराला डैम जो सोन नदी पर बना है। इसका निर्माण 1875-76 में किया गया था। इसकी लंबाई 460 मीटर और ऊंचाई 36 मीटर है।
दूसरा है ओटू डैम (Ottu Dam) जो घग्गर-हकरा नदी पर बना है। इसे ओटू वियर या ओटू हेड के नाम से भी जाना जाता है। यह हरियाणा और राजस्थान में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराता है।
तीसरा है अनंगपुर डैम जो फरीदाबाद जिले के अनंगपुर गांव में स्थित है। इसे तोमर राजवंश के राजा अनंगपाल ने 8वीं शताब्दी ईसा पूर्व में बनवाया था।
चौथा है कौशल्या डैम जो घग्गर-हकरा नदी की सहायक कौशल्या नदी पर बना है। इसकी लंबाई 700 मीटर और ऊंचाई 34 मीटर है। इसे 2008 से 2012 के बीच 18 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया।
राजस्थान के 200+ बांध
राजस्थान में बनास, चंबल और जवाई नदी प्रमुख नदियां हैं। इन नदियों पर 200 से अधिक बांध बने हैं। सबसे महत्वपूर्ण हैं:
बिलासपुर डैम – राजस्थान का क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा बांध। यह बनास नदी पर बना ग्रेविटी डैम है।
माही बजाज सागर डैम – राजस्थान का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण बांध जो बांसवाड़ा के पास माही नदी पर बना है।
राणा प्रताप सागर डैम – चंबल नदी पर रावतभाटा में स्थित यह महत्वपूर्ण बांध है।
गुजरात की लाइफलाइन – सरदार सरोवर डैम
गुजरात में पांच प्रमुख बांध हैं। सबसे प्रसिद्ध है सरदार सरोवर डैम जो नर्मदा नदी पर बना है। यह गुजरात का सबसे बड़ा जलाशय है और इसे “गुजरात की लाइफलाइन” कहा जाता है। गुजरात के अलावा यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को भी पानी उपलब्ध कराता है। इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 1450 मेगावाट है।
दिलचस्प बात यह है कि इस बांध की नींव पंडित नेहरू ने 5 अप्रैल 1961 में रखी थी और निर्माण 1987 में शुरू हुआ। लेकिन नर्मदा बचाओ आंदोलन के कारण सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में इस पर रोक लगा दी थी। 2000-2001 में परियोजना फिर शुरू हुई लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इसकी ऊंचाई घटाकर 111 मीटर कर दी गई। बाद में 2006 में इसे बढ़ाकर 123 मीटर और 2017 में 139 मीटर किया गया। यह बांध 1.2 किमी लंबा है।
2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार सरोवर का उद्घाटन किया और 2021 की गर्मी में इस बांध से पहली बार सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया।
दूसरा है उकाई डैम जो तापी नदी पर बना है। यह सरदार सरोवर के बाद गुजरात का दूसरा सबसे बड़ा जलाशय है। इससे बने जलाशय को वल्लभ सागर के नाम से भी जाना जाता है। 1972 में बना यह बहुउद्देशीय बांध सिंचाई, बिजली उत्पादन (300 मेगावाट) और बाढ़ नियंत्रण का काम करता है। 62,355 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला यह बांध क्षमता में लगभग भाखड़ा नांगल के बराबर है।
अन्य प्रमुख बांध हैं – कदाणा डैम (माही नदी पर) और दांतीवाड़ा डैम (बनास नदी पर)।
महाराष्ट्र – सबसे अधिक बांधों वाला राज्य
समझने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र भारत में सबसे अधिक बांध वाला राज्य है। यहां कुल 1821 बांध हैं (कुछ निर्माणाधीन)।
कोयना डैम महाराष्ट्र का सबसे बड़ा और भारत का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट है। कोयना नदी पर बना यह बांध 1960 मेगावाट बिजली उत्पादन करता है। इसीलिए इसे “महाराष्ट्र की लाइफलाइन” कहा जाता है। मानसून के दौरान बाढ़ नियंत्रण में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
महाराष्ट्र के अन्य प्रमुख बांध हैं:
- येलदारी डैम (पूना नदी पर)
- उजानी डैम (भीमा नदी पर)
- पावना डैम (मावल नदी पर)
- जायकवाड़ी और गंगापुर डैम (गोदावरी नदी पर)
- भात्सा डैम (भात्सा नदी पर)
- विल्सन डैम (प्रवरा नदी पर)
- तानसा डैम (तानसा नदी पर)
- पनशेत डैम (अंबी नदी पर)
- मूला डैम (मूला नदी पर)
- कोल्केवाड़ी डैम (वशिष्ठी नदी पर)
मध्य प्रदेश के चार प्रमुख बांध
मध्य प्रदेश में चार मुख्य बांध स्थित हैं। पहला है बरना डैम जो नर्मदा नदी पर भोपाल से लगभग 100 किमी पूर्व में स्थित है। इसे MP Water Resources Department (MPWRD) ने 1978 में बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था।
दूसरा है बरगी डैम जो मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर बने 30 प्रमुख बांधों में पहला है। इसकी स्थापित क्षमता 105 मेगावाट है।
तीसरा है बाणसागर डैम जो सोन नदी पर बना बहुउद्देशीय बांध है। इसकी जल विद्युत उत्पादन क्षमता 435 मेगावाट है।
चौथा है गांधीसागर डैम जो चंबल नदी पर बने चार प्रमुख बांधों में से एक है। यह एक मेसनरी ग्रेविटी डैम है जिसकी ऊंचाई 62.17 मीटर है। जवाहरलाल नेहरू ने 7 मार्च 1954 को इसकी नींव रखी थी। इसका पहला चरण 1960 में और दूसरा चरण 1970 में पूरा हुआ।
उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा – रिहंद डैम
उत्तर प्रदेश में आयतन के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा रिहंद डैम स्थित है। इसे गोविंद बल्लभ पंत सागर के नाम से भी जाना जाता है जो भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है।
यह बांध सोन नदी की सहायक रिहंद नदी पर सोनभद्र जिले के पिपरी में स्थित है। इससे बना जलाशय उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर है और यूपी के साथ-साथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को भी पानी सप्लाई करता है। इसकी लंबाई लगभग 934 मीटर, ऊंचाई 91.46 मीटर और स्थापित क्षमता 300 मेगावाट है।
उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख बांध हैं:
- माताटीला डैम और परीछा डैम (बेतवा नदी पर)
- धानरौल या घाघरा डैम (घाघरा नदी पर)
- गंगा बराज (गंगा नदी पर, कानपुर, इसे लवकुश बराज भी कहते हैं)
- शारदा बराज (शारदा नदी पर)
झारखंड के तीन बांध
झारखंड में तीन प्रमुख बांध स्थित हैं। पहला है मैथन डैम जो धनबाद जिले के पास मैथन में बराकर नदी पर बना है। इसे Damodar Valley Corporation द्वारा संचालित किया जाता है। यह बहुउद्देशीय बांध मुख्य रूप से बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाया गया था और 60,000 किलोवाट बिजली उत्पन्न करता है।
अन्य प्रमुख बांध हैं – चंद्रा डैम (स्वर्णरेखा नदी पर) और पंचेत डैम (दामोदर नदी पर)।
ओडिशा के दो विशाल बांध
ओडिशा में दो प्रमुख बांध हैं। पहला है इंद्रावती डैम जो गोदावरी की सहायक इंद्रावती नदी पर बना है। इसकी स्थापित क्षमता 600 मेगावाट है और यह वर्तमान में पूर्वी भारत का सबसे बड़ा बिजली उत्पादक बांध है।
दूसरा है हीराकुंड डैम जो महानदी पर बना है और दुनिया का सबसे लंबा मिट्टी का बांध है। इसकी लंबाई 25.8 किमी और ऊंचाई 60.96 मीटर है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इसकी नींव 1946 में सर होरहोर लुईस ने रखी थी और 1957 में जवाहरलाल नेहरू ने इसका उद्घाटन किया। हीराकुंड जलाशय को 12 अक्टूबर 2021 को रामसर साइट (Ramsar Site) घोषित किया गया था।
आंध्र प्रदेश के दो प्रमुख बांध
आंध्र प्रदेश में दो प्रमुख बांध हैं। पहला है सोमासिला डैम जो नेल्लोर जिले के सोमासिला गांव में पेन्ना नदी पर बना है। इसकी लंबाई 760 मीटर और ऊंचाई 39 मीटर है। इससे बना जलाशय पेन्ना नदी बेसिन का सबसे बड़ा जलाशय है।
दूसरा है श्रीशैलम डैम जो कृष्णा नदी पर बना है और भारत का दूसरा सबसे बड़ी क्षमता वाला कार्यशील हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन है। इसे शुरुआत में 1960 में पावर प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था लेकिन बाद में यह बहुउद्देशीय परियोजना बन गया। यह तेलुगु गंगा प्रोजेक्ट को भी पानी उपलब्ध कराता है जो कृष्णा नदी का पानी चेन्नई शहर को पीने के लिए सप्लाई करता है।
तेलंगाना और कर्नाटक के बांध
तेलंगाना में कई प्रमुख बांध हैं जिनमें शामिल हैं – लोअर मनैर, मिड मनैर और अपर मनैर डैम (मनैर नदी पर), सिंघूर डैम और निजाम सागर डैम (मंजीरा नदी पर)।
कर्नाटक में भी कई महत्वपूर्ण बांध स्थित हैं। सबसे प्रसिद्ध है कृष्णा राजा सागर (KRS) जो मांड्या जिले में कावेरी नदी और इसकी सहायक नदियों हेमावती और लक्ष्मण तीर्थ के संगम पर बना है। इसे मैसूर के महाराजा कृष्णा राजा वाडियार चतुर्थ ने बनवाया था। निर्माण 1911 में शुरू हुआ और 1932 से यह चालू हो गया। यह मांड्या, मैसूर और पूरे बेंगलुरु शहर को पेयजल उपलब्ध कराता है।
तुंगभद्रा डैम (पंपा सागर के नाम से भी जाना जाता है) विजयनगर जिले में तुंगभद्रा नदी पर बना है। दिलचस्प बात यह है कि यह भारत के केवल दो गैर-सीमेंट बांधों में से एक है। दूसरा है केरल का मुल्लापेरियार डैम। इसे सुरखी मोर्टार (मिट्टी और चूना पत्थर का मिश्रण) से बनाया गया है।
वाणी विलास सागर डैम वेदावती नदी पर बना है जिसे मैसूर के महाराजाओं ने स्वतंत्रता पूर्व युग में बनवाया था। यह कर्नाटक के सबसे पुराने बांधों में से एक है।
सूपा डैम कर्नाटक का सबसे ऊंचा बांध है। कालिंदी या काली नदी पर बना यह बांध 101 मीटर ऊंचा है। इसकी स्थापित क्षमता 1180 मेगावाट है।
अन्य प्रमुख बांध हैं – लिंगानमक्की डैम (शरावती नदी पर), कादरा डैम (कालिंदी नदी पर), अलामट्टी डैम और नारायणपुर डैम (कृष्णा नदी पर)।
तमिलनाडु के ऐतिहासिक बांध
तमिलनाडु में चार प्रमुख बांध हैं। पहला है वैगई डैम जो वैगाई नदी पर बना है। 1959 में तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री कामराज ने इसका उद्घाटन किया था। यह उन कुछ बांधों में से एक है जो दो पहाड़ों के बीच नहीं बना है, इसलिए यह पूरी तरह अपनी कंक्रीट की मजबूती पर निर्भर है। यह तेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम समेत पांच जिलों के किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान करता है। इसीलिए इसे “किसानों की लाइफलाइन” कहा जाता है।
दूसरा है पेरुंचानी डैम जो कन्याकुमारी में परलियार नदी पर बना है। इसे दिसंबर 1952 में मुख्य रूप से परलियार नदी की बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था।
अगर गौर करें तो कल्लानई डैम भारत का सबसे पुराना बांध है। कावेरी नदी पर बने इस बांध को चोल राजवंश के राजा करिकाला ने 150 ईस्वी में बनवाया था। इसे मुख्य रूप से सिंचाई के लिए बनाया गया था।
मेट्टूर डैम कावेरी नदी पर बना भारत के सबसे बड़े और तमिलनाडु का सबसे बड़ा बांध है। इसकी ऊंचाई 214 फीट और चौड़ाई 171 फीट है। यह तमिलनाडु के 12 से अधिक जिलों को सिंचाई और पानी की सुविधा प्रदान करता है। इसीलिए इसे “तमिलनाडु की जीवन और आजीविका देने वाली संपत्ति” माना जाता है।
केरल के छह प्रमुख बांध
केरल में छह महत्वपूर्ण बांध स्थित हैं:
- मलमपुझा डैम (मलमपुझा नदी पर)
- पीची डैम (मनाली नदी पर)
- इडुक्की डैम (पेरियार नदी पर)
- नेयर डैम (नेयर नदी पर)
- परमबिकुलम डैम (परमबिकुलम नदी पर)
- वाला डैम (वाला नदी पर)
पूर्वोत्तर भारत – भविष्य का पावरहाउस
समझने वाली बात यह है कि प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के कारण पूर्वोत्तर भारत को “भारत का भविष्य का पावरहाउस” माना जाता है। यहां गहरी नदी घाटियों की मौजूदगी के कारण यह मेगा बांध परियोजनाओं के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।
सुबनसिरी डैम (असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर, सुबनसिरी नदी पर) एक निर्माणाधीन बांध है जो 2000 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने की उम्मीद है। पूर्ण होने के बाद यह भारत का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट होगा। इसका निर्माण 2007 में शुरू हुआ था और 2018 तक पूरा होने की उम्मीद थी। लेकिन भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं और विवादों के कारण यह विलंबित हुआ। All Assam Students Union (AASU) और कृषक मुक्ति संग्राम समिति जैसे संगठनों ने पर्यावरणीय प्रभाव के कारण इसका विरोध किया।
रंगित डैम (अरुणाचल प्रदेश में रंगित नदी पर) अरुणाचल में बना पहला मेगा डैम है। इसकी ऊंचाई 68 मीटर है और यह मुख्य रूप से जल विद्युत उत्पादन के लिए बना है।
दिबांग डैम अरुणाचल प्रदेश में योजनाबद्ध दूसरा बांध है जो निर्माण के बाद भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का सबसे ऊंचा कंक्रीट बांध होगा। इसकी योजित स्थापित क्षमता 2880 मेगावाट है।
दोयांग डैम (नागालैंड के बोखा गांव में, दोयांग नदी पर) 92 मीटर ऊंचा रॉकफिल डैम है। इसका जलाशय बिजली उत्पादन और मत्स्य पालन के लिए उपयोग किया जाता है।
खुगा डैम (मणिपुर के चुराचांदपुर में, खुगा नदी पर) एक बहुउद्देशीय बांध है जो मणिपुर और इसके अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को पानी और बिजली की आपूर्ति करता है।
तिपाईमुख डैम मणिपुर में योजनाबद्ध दूसरा एम्बैंकमेंट डैम प्रोजेक्ट है। यह बराक नदी पर 162 मीटर की ऊंचाई पर बनेगा। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण और बिजली उत्पादन है।
तुरियल डैम (मिजोरम में, तुरियल नदी पर) 74 मीटर ऊंचा है और इसकी स्थापित क्षमता 60 मेगावाट है।
गुमटी डैम (त्रिपुरा में, गुमटी नदी पर) 30 मीटर की ऊंचाई पर बना है और 8.6 मेगावाट बिजली उत्पन्न करता है। गुमटी जलाशय में भारतीय बाइसन, बार्किंग डियर और हाथी जैसे कई जंगली जानवर निवास करते हैं।
उमयाम डैम (मेघालय में, उमयाम नदी पर) पूर्वोत्तर भारत में बना पहला बांध था। इससे बना जलाशय सिंचाई, मत्स्य पालन और पेयजल के लिए उपयोग होता है।
रंगित डैम (सिक्किम में, रंगित नदी पर – तीस्ता नदी की सहायक नदी) की ऊंचाई 45 मीटर और लंबाई 100 मीटर है। इसकी भंडारण क्षमता 11.75 लाख क्यूबिक मीटर और स्थापित क्षमता 60 मेगावाट है।
मुख्य बातें (Key Points):
• All Dams of India में कुल 5264 बड़े बांध हैं और 437 निर्माणाधीन हैं, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बांध निर्माणकर्ता
• तेहरी डैम (उत्तराखंड) भारत का सबसे ऊंचा बांध है (260.5 मीटर), भागीरथी नदी पर बना
• महाराष्ट्र में सबसे अधिक 1821 बांध हैं, जबकि भाखड़ा नांगल डैम (हिमाचल-पंजाब) दूसरा सबसे ऊंचा
• हीराकुंड डैम (ओडिशा) दुनिया का सबसे लंबा मिट्टी का बांध है (25.8 किमी), कल्लानई डैम (तमिलनाडु) भारत का सबसे पुराना
• पूर्वोत्तर भारत में सुबनसिरी और दिबांग डैम जैसे मेगा प्रोजेक्ट निर्माणाधीन, सरदार सरोवर (गुजरात) गुजरात की लाइफलाइन










