PRTC Workers Strike Punjab की खबर आज सुबह से ही प्रदेश भर में फैल गई और आम यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन गई। पंजाब रोडवेज और पनबस/पी.आर.टी.सी. (PRTC) के ठेका मुलाजमों ने अपनी लंबे समय से लटकी मांगों को लेकर आज से प्रदेश स्तरीय हड़ताल शुरू कर दी है। देखा जाए तो यह हड़ताल पहले से ही घोषित थी, लेकिन सरकार और प्रबंधन की तरफ से कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर यूनियन ने अपना फैसला पक्का कर लिया।
रविवार की आधी रात से शुरू हुई हड़ताल
‘पंजाब रोडवेज, पनबस और पी.आर.टी.सी. कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन‘ के आह्वान पर यह हड़ताल की जा रही है। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने बीती रविवार शाम को एक वीडियो जारी करते हुए बताया कि संघर्षी कर्मचारियों ने सरकार को हड़ताल का नोटिस पहले ही दे दिया था। उन्होंने कहा, “हमने कई बार मांगें पूरी करने के भरोसे दिए गए। बीते गुरुवार को भी ट्रांसपोर्ट प्रबंधकों के साथ हुई बैठक में भरोसा तो दिया गया, लेकिन कोई भी लिखित नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया।”
रेशम सिंह गिल ने आगे कहा, “इसी कारण रविवार आधी रात से ही सभी ठेका कर्मचारियों ने काम छोड़ कर हड़ताल शुरू कर दी है।” यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यूनियन का कहना है कि वे मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें लिखित भरोसा चाहिए।
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क्या हैं ठेका कर्मचारियों की मांगें?
यूनियन की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- 11 से 12 साल से सेवा दे रहे ठेका मुलाजमों को तुरंत पक्का किया जाए
- 15 से 16 साल से आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों को सीधे विभागीय ठेके में लाया जाए
- बीते साल नवंबर में किलोमीटर स्कीम के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान दर्ज किए गए केस वापस लिए जाएं
अगर गौर करें तो ये मांगें नई नहीं हैं। कर्मचारी पिछले कई सालों से यही मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार हर बार टालमटोल की नीति अपनाती रही है।
समझने वाली बात यह है कि जो कर्मचारी 11-12 साल से नियमित रूप से काम कर रहे हैं, उन्हें अभी तक पक्का क्यों नहीं किया गया? यह सवाल यूनियन भी उठा रही है और कर्मचारी भी।
ट्रांसपोर्ट मंत्री से आज होगी अहम मीटिंग
रेशम सिंह गिल ने बताया कि पंजाब विधानसभा के सत्र के मद्देनजर यूनियन की तरफ से मोहाली में भूख हड़ताल करने की भी योजना बनाई गई है। इसके अलावा, सोमवार सुबह 10 बजे ट्रांसपोर्ट मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ एक अहम मीटिंग तय की गई है।
यूनियन के प्रदेशीय प्रवक्ता हरकेश विक्की (पटियाला) ने दबाया कि इस संबंध में सुबह 10 बजे ट्रांसपोर्ट मंत्री के साथ मीटिंग होनी है। उन्होंने कहा, “जेकर मीटिंग बेनतीजा रही तो यह हड़ताल अनिश्चित काल के लिए घोषित दी जाएगी। और अगर सरकार मांगें मान लेती है तो हड़ताल वापस लेने पर भी विचार किया जाएगा।”
दिलचस्प बात यह है कि यूनियन ने मंगलवार से भूख हड़ताल शुरू करने की भी चेतावनी दी है। यानी अगर आज की मीटिंग में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला तो आंदोलन और तेज होगा।
यात्रियों को हो रही भारी परेशानी
हड़ताल के पहले ही दिन बस सेवाओं के ठप होने से स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, दफ्तरी कर्मचारियों और खास तौर पर महिला यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोग निजी और अन्य साधनों का सहारा लेने के लिए मजबूर हैं।
लुधियाना की एक महिला यात्री ने कहा, “मुझे दफ्तर जाना है लेकिन बस नहीं मिल रही। अब ऑटो या कैब से जाना पड़ेगा जिसका खर्च बहुत ज्यादा है।” एक छात्र ने कहा, “मेरी परीक्षा है लेकिन बस न होने से मुझे किसी से लिफ्ट मांगनी पड़ रही है।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब रोडवेज और PRTC की बसें आम आदमी की लाइफलाइन हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए ये बसें ही एकमात्र सस्ता साधन हैं। जब ये बसें नहीं चलतीं तो सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को होती है।
2 अगस्त की शाम से ही बसें जमा कर दीं
यूनियन के प्रवक्ता हरकेश विक्की ने आगे बताया कि इस हड़ताल के संबंध में हड़तालियों की तरफ से 2 अगस्त की शाम को ही अपनी-अपनी बसें संबंधित डिपो में जमा करवा दी गई थीं। यानी तैयारी पहले से थी।
इससे साफ होता है कि यूनियन अपनी मांगों को लेकर गंभीर है। उन्होंने सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से किया है।
सरकार की तरफ से क्या कदम?
अब तक ट्रांसपोर्ट विभाग या सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, ट्रांसपोर्ट मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ आज सुबह होने वाली मीटिंग से कुछ स्पष्टता आने की उम्मीद है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार के लिए यह एक नाजुक स्थिति है। एक तरफ कर्मचारियों की मांगें हैं तो दूसरी तरफ बजट और नीतिगत बाधाएं। लेकिन अगर हड़ताल लंबी खिंची तो यह सरकार के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकती है।
आउटसोर्सिंग बनाम नियमित नौकरी
इस पूरे मामले में एक बड़ा मुद्दा आउटसोर्सिंग का भी है। पिछले कई सालों से सरकारी विभागों में सीधी भर्ती के बजाय ठेके पर और आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारी रखे जा रहे हैं। इससे सरकार को तो फायदा होता है क्योंकि उन्हें पेंशन और अन्य सुविधाएं नहीं देनी पड़तीं, लेकिन कर्मचारियों को नुकसान होता है।
ठेका कर्मचारियों को न तो नौकरी की सुरक्षा मिलती है, न ही पर्याप्त वेतन और सुविधाएं। वे सालों-साल एक ही पद पर काम करते रहते हैं लेकिन उन्हें पक्का नहीं किया जाता।
यही कारण है कि देश भर में ठेका कर्मचारियों के आंदोलन बढ़ रहे हैं। वे अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
आज सुबह होने वाली मीटिंग बहुत महत्वपूर्ण होगी। अगर सरकार यूनियन की मांगों पर कोई लिखित आश्वासन देती है तो हड़ताल वापस ली जा सकती है। लेकिन अगर मीटिंग बेनतीजा रही तो हड़ताल अनिश्चित काल के लिए जारी रहेगी और मंगलवार से भूख हड़ताल भी शुरू हो जाएगी।
इसी बीच, यात्रियों से अपील की जा रही है कि वे वैकल्पिक साधनों का उपयोग करें और यात्रा की योजना पहले से बनाएं।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब रोडवेज और PRTC के ठेका कर्मचारियों ने प्रदेश स्तरीय हड़ताल शुरू की
- यूनियन अध्यक्ष रेशम सिंह गिल की अगुवाई में मांगें: पक्का करना, आउटसोर्सिंग खत्म करना, पुलिस केस वापसी
- आज सुबह 10 बजे ट्रांसपोर्ट मंत्री हरपाल सिंह चीमा से अहम मीटिंग
- विद्यार्थियों, दफ्तरी कर्मचारियों और महिला यात्रियों को भारी परेशानी











