Dyslipidemia India ICMR Study: क्या आप जानते हैं कि भारत में 10 में से नौ लोगों के दिल पर एक बहुत ही खतरनाक समस्या मंडरा रही है? और सबसे डरावनी बात यह है कि इस बीमारी की कोई बाहरी लक्षण नजर नहीं आते।
हम बात कर रहे हैं डिस्लिपिडेमिया की। यानी हमारे खून में फैट का स्तर अचानक बहुत बढ़ जाना। हाल ही में आईसीएमआर की एक बड़ी स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ज्यादातर भारतीयों में खराब कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर खतरे के निशान के ऊपर है।
यह समस्या धीरे-धीरे और चुपके से आपकी नसों में फैट जमा करती है, जिससे खून का दौरा रुक जाता है। नतीजा – अचानक दिल का दौरा, हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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10 में से 9 भारतीयों में समस्या
आईसीएमआर स्टडी के अनुसार भारत में 10 में से नौ वयस्क यानी 90% के ब्लड में कम से कम एक प्रकार का फैट खराब स्तर पर है। इसे मेडिकल भाषा में डिस्लिपिडेमिया कहते हैं।
इसमें खराब कोलेस्ट्रॉल जिसे LDL या ट्राइग्लिसराइड्स के नाम से भी जाना जाता है, उसका स्तर अचानक बढ़ जाता है। या तो शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) कम हो जाता है। देश में यह दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।
देखा जाए तो यह आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। इसका मतलब है कि हर 10 में से सिर्फ 1 व्यक्ति ही सामान्य कोलेस्ट्रॉल लेवल पर है।
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किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?
वैसे तो यह समस्या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम बहुत ज्यादा होता है:
शहरी लोग: जिनकी व्यस्त लाइफस्टाइल और खराब खानपान इसका जिम्मेदार होता है।
महिलाएं: चौंकाने वाली बात यह है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है।
मध्य भारत के लोग: अगर राज्यों की बात करें तो मध्य भारत में लोगों में इसके ज्यादा केस देखने को मिल रहे हैं।
डायबिटीज, मोटापा या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज: जो लोग पहले से ही इन बीमारियों से जूझ रहे हैं, उन्हें बहुत ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
हालांकि उत्तर पूर्व यानी नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में इसके मामले थोड़े कम हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि वहां भी लगभग 80% आबादी इस खतरे की चपेट में है। यानी देश का कोई भी हिस्सा अब पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है।
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सबसे खतरनाक: बिना लक्षण के बीमारी
डिस्लिपिडेमिया की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके कोई शुरुआती लक्षण नहीं दिखते। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. वी मोहन कहते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स का पता आमतौर पर बिना टेस्ट के नहीं चलता।
यह धीरे-धीरे आपकी नसों को ब्लॉक करता है और जमने लगता है, जो बाद में फट सकता है या खून का बहाव रोक देता है। समझने वाली बात यह है कि जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
चौंकाने वाले आंकड़े
स्टडी में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक:
• 66.8% भारतीयों के शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) की भारी कमी है, जो हमारे दिल की रक्षा करता है
• 49.4% लोगों में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बहुत ज्यादा बढ़ गया है
• करीब 29.5% लोग बढ़े ट्राइग्लिसराइड्स की समस्या से जूझ रहे हैं
डॉक्टरों का कहना है कि जैसे-जैसे हमारा वजन, बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI बढ़ता है, खून में इस गंदे फैट के जमा होने की रफ्तार भी और ज्यादा तेज हो जाती है। इसलिए वजन को काबू में रखना बेहद जरूरी होता है।
30 की उम्र में शुरू हो रही समस्या
चिंता की बात यह है कि अब यह समस्या 30 साल की उम्र से ही शुरू हो रही है। पहले यह 40-50 साल के लोगों में होती थी, लेकिन अब युवाओं में यह तेजी से बढ़ रही है।
डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के साथ यह समस्या और ज्यादा खतरनाक होती जा रही है।
क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
इस समस्या के बढ़ने के मुख्य कारण हैं:
• अनहेल्दी खानपान: ज्यादा तला-भुना, जंक फूड
• शारीरिक व्यायाम की कमी: बैठे रहने वाली जीवनशैली
• तनाव: लगातार मानसिक दबाव
• अनियमित नींद: पर्याप्त आराम न मिलना
• ज्यादा वजन होना: मोटापे की समस्या
यह सारी आदतें मिलकर ब्लड में फैट बढ़ा रही हैं।
इस खतरे से कैसे बचें?
रूटीन चेकअप: 30 साल के बाद हर साल लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराएं
स्वस्थ खानपान: ज्यादा फल-सब्जियां खाएं, साबुत अनाज लें, तेल-घी का इस्तेमाल कम करें
नियमित व्यायाम: रोज कम से कम 30 से 40 मिनट वॉक करें या व्यायाम करें
वजन कंट्रोल: अपने BMI को सामान्य रेंज में रखें
धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये आदतें दिल के लिए बेहद खतरनाक हैं
डॉ. वी मोहन कहते हैं कि जागरूकता बहुत जरूरी है। बिना लक्षण के भी यह समस्या बढ़ती जा रही है। इसलिए नियमित जांच करवाना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है।
दिल की बीमारी भारत में मौत का सबसे बड़ा कारण है। अगर गौर करें तो अभी भी सावधानी बरत लें, तो आने वाले दिनों में हम इस खतरे से काफी ज्यादा बच सकते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
• ICMR स्टडी: 10 में से 9 भारतीयों में एक प्रकार का फैट खराब स्तर पर
• 66.8% में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की कमी, 49.4% में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा
• महिलाओं में पुरुषों से ज्यादा समस्या, शहरी क्षेत्रों में अधिक प्रभाव
• डिस्लिपिडेमिया के कोई बाहरी लक्षण नहीं, टेस्ट से ही पता चलता है
• 30 साल की उम्र से ही समस्या शुरू हो रही है
• अनहेल्दी खानपान, व्यायाम की कमी, तनाव मुख्य कारण
• 30 के बाद हर साल लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूरी













