Punjab Congress Infighting को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, पंजाब की सियासत में इस समय जो गतिरोध बना हुआ है, वह तब तक जारी रह सकता है जब तक राहुल गांधी अपने विदेश दौरे से वापस नहीं आते। देखा जाए तो कांग्रेस हाईकमान के इस दखल के बिना पंजाब कांग्रेस के दोनों खेमे आपस में बैठने को तैयार नहीं दिख रहे।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच चल रहा मतभेद अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही खेमे राहुल गांधी के आने और उनके फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
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वड़िंग का बड़ा संकेत: 3-4 दिनों में बदलेगा माहौल
मोहाली के सेक्टर 78 में सابका कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू द्वारा आयोजित रात के भोजन में शामिल होते हुए वड़िंग ने एक अहम संकेत दिया। उन्होंने बुधवार शाम कहा कि अगले तीन से चार दिनों के अंदर पंजाब के लोग राज्य में एक नया राजनीतिक माहौल देखेंगे। समझने वाली बात यह है कि वड़िंग ने साफ तौर पर कहा कि अगर पार्टी का कोई भी नेता या कार्यकर्ता उनसे नाराज है, तो वह सभी मतभेदों को सुलझा लेंगे।
वड़िंग ने आगे जोड़ा कि आने वाली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी एकजुट रहेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर दरारें लगातार गहरी होती जा रही हैं।
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भूपेश बघेल ने दिया था 5 दिनों का टाइमलाइन
इससे एक दिन पहले चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पंजाब मामलों के प्रभारी और AICC के जनरल सेक्रेटरी भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं के बीच सभी मतभेदों को सुलझाने के लिए “पांच दिनों के समय” का जिक्र किया था। अगर गौर करें, तो दोनों बयानों में एक समानता दिख रही है जो यह संकेत देती है कि राहुल गांधी की वापसी के साथ ही कुछ बड़ा फैसला आ सकता है।
कांग्रेसी सूत्रों ने बताया कि नाम न छापने की शर्त पर एक कांग्रेसी नेता ने कहा, “वड़िंग और चन्नी दोनों खेमे उनके आने और मतभेदों को सुलझाने की उम्मीद कर रहे हैं। नहीं तो उन्हें मेज पर आने से क्या रोक रहा है।”
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चन्नी खेमे की वफादारी राहुल गांधी के साथ
दूसरी ओर, चरणजीत सिंह चन्नी लगातार राहुल गांधी के प्रति अपनी वफादारी दोहरा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि उनकी वफादारी कांग्रेस पार्टी के साथ बनी हुई है। यह ध्यान देने वाली बात है कि चन्नी पहले भी राहुल गांधी के करीबी माने जाते रहे हैं और उन्होंने कई मौकों पर गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा का इजहार किया है।
कांग्रेसी सूत्रों ने बताया कि पंजाब कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व के बीच चल रही तनावपूर्ण स्थिति पंजाब मामलों के प्रभारी AICC के जनरल सेक्रेटरी भूपेश बघेल को भी “असहज स्थिति” में डाल रही है।
बघेल की भूमिका: ट्रबलशूटर से ज्यादा कुछ नहीं?
एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, “दोनों खेमे राहुल गांधी के आने और फैसला देने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बघेल फिलहाल यहां एक समस्या निपटाने वाले (ट्रबलशूटर) के रूप में आए हैं।” यह बयान साफ करता है कि अंतिम फैसला लेने का अधिकार राहुल गांधी के पास ही है।
कार्यकर्ताओं में निराशा, लेकिन उम्मीद भी
पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ता घटनाक्रम से कुछ निराश हैं, लेकिन वे एक अच्छी बात भी देख रहे हैं कि शीर्ष नेतृत्व के बीच चल रही खींचतान विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार शुरू होने से पहले ही सुलझाई जा सकती है। हैरान करने वाली बात यह है कि पार्टी कार्यकर्ता इस आंतरिक कलह के बावजूद पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध बने हुए हैं।
रात के भोजन में जुटे दिग्गज नेता
इस रात के भोजन में पंजाब विधानसभा के सابका स्पीकर और सभका पंजाब कैबिनेट मंत्री राणा के.पी. सिंह, फतेहगढ़ साहिब के सांसद डॉ. अमर सिंह, सभका विधायक नाभा साधु सिंह धरमसोत, महेंद्र सिंह रिणवा, सभका विधायक हंस राज जोसन, सभका जीरा विधायक कुलबीर सिंह जीरा, फिल्लौर के विधायक विक्रमजीत सिंह चौधरी और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के जनरल सेक्रेटरी कैप्टन संदीप संधू समेत अन्य नेता मौजूद थे।
इस जमावड़े को लेकर पार्टी हलकों में यह चर्चा है कि यह वड़िंग खेमे की ताकत का प्रदर्शन था। देखा जाए तो इस तरह की सार्वजनिक सभाएं अक्सर पार्टी के भीतर एकता दिखाने या अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए की जाती हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले एकता की चुनौती
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब में आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में कांग्रेस के लिए अपने घर को व्यवस्थित करना बेहद जरूरी है। आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए कांग्रेस को एकजुट होना होगा।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर यह आंतरिक विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो यह कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब कांग्रेस में वड़िंग और चन्नी खेमे के बीच गतिरोध राहुल गांधी की वापसी तक जारी रहने की संभावना
- PPCC अध्यक्ष वड़िंग ने 3-4 दिनों में नए राजनीतिक माहौल का संकेत दिया
- AICC जनरल सेक्रेटरी भूपेश बघेल ने 5 दिनों के समय का जिक्र किया था
- चरणजीत सिंह चन्नी लगातार राहुल गांधी के प्रति वफादारी जता रहे हैं
- आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए एकता बहाल करना बड़ी चुनौती













