Punjab grain storage crisis 2026: Punjab में अनाज भंडारण को लेकर बड़ी चुनौती सामने आ गई है। राज्य के गोदाम अनाज से पूरी तरह भर चुके हैं और नए अनाज के लिए जगह नहीं बची है। शेलरों में अभी 45 लाख मीट्रिक टन धान पड़ा है, जिसकी छड़ाई के बाद चावल की डिलीवरी होनी है, लेकिन चावल रखने के लिए खाली गोदाम नहीं हैं।
गोदाम भरे, चावल अटका
अगर गौर करें, तो संकट सिर्फ जगह की कमी का नहीं है। पंजाब में 180 लाख मीट्रिक टन अनाज के लिए गोदाम हैं, जबकि 60 लाख मीट्रिक टन अनाज प्लिंथों पर रखा जाता है। आम तौर पर गेहूं को कवरड और प्लिंथों पर रखा जाता है, जबकि चावल गोदामों में जाता है।
अब जब चावल रखने की जगह नहीं है, तो शेलरों में धान की छड़ाई भी सुस्त पड़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, नए अनाज के लिए एक भी गोदाम खाली नहीं है। यह बात अपने आप में चिंता का विषय है।
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| भंडारण और चुकाई से जुड़े आंकड़े | स्थिति |
|---|---|
| गोदाम क्षमता | 180 लाख मीट्रिक टन |
| प्लिंथ क्षमता | 60 लाख मीट्रिक टन |
| शेलरों में धान | 45 लाख मीट्रिक टन |
| डिलीवर होने वाला चावल | करीब 30 लाख मीट्रिक टन |
| चावल की मौजूदा मासिक चुकाई | 6 से 6.50 लाख मीट्रिक टन |
| गेहूं की मौजूदा मासिक चुकाई | 5 लाख मीट्रिक टन |
| जरूरत बताई गई चुकाई | हर महीने 20 लाख मीट्रिक टन |
| संभावित जगह | 80 लाख मीट्रिक टन |
राइस मिलरों की चिंता
पंजाब राइस मिलर्ज एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण बिंटा बांसल ने कहा कि चावल मिलों की ओर से करीब 30 लाख मीट्रिक टन चावल डिलीवर किया जाना है। इसके लिए खाली गोदाम चाहिए।
दिलचस्प बात यह है कि चावल सरकार को 30 जून तक डिलीवर किया जाना था, लेकिन जगह न होने की वजह से आखिरी तारीख बढ़ सकती है। इससे साफ होता है कि संकट अब कागजों से निकलकर जमीन पर आ चुका है।
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अगले सीजन की असली चिंता
खाद्य और सिविल सप्लाई विभाग के अधिकारी गोदाम खाली कराने के लिए भागदौड़ में हैं। अधिकारियों की चिंता यह है कि अगर शेलरों से चावल नहीं उठाया गया, तो अगली फसल के समय नया संकट खड़ा हो सकता है।
समझने वाली बात है कि अगर शेलर मालिकों के पास पुराना स्टॉक ही पड़ा रहा, तो वे नई फसल लेने से इनकार कर सकते हैं। ऐसा पिछले साल भी हुआ था। ऐसे में किसानों को मंडियों में परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
केंद्र से क्या मांग रखी गई
पंजाब सरकार ने केंद्र से कहा है कि राज्य से अनाज की चुकाई दोगुनी की जाए। अभी हर महीने 6 से 6.50 लाख मीट्रिक टन चावल और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं की चुकाई हो रही है।
देखा जाए तो जुलाई से अक्तूबर तक हर महीने 20 लाख मीट्रिक टन अनाज की चुकाई हो, तभी अगली फसल तक 80 लाख मीट्रिक टन जगह बन सकती है। यही इस पूरे संकट का सबसे बड़ा हल बताया जा रहा है।
साइलो और नए गोदामों का मामला
राज्य में भंडारण क्षमता बढ़ाने की कोशिशें भी अटकती दिख रही हैं। पंजाब सरकार की ओर से बनाए जा रहे साइलो किसान संगठनों के विरोध के कारण लगभग बंद हो गए हैं। अब Food Corporation of India 10 लाख मीट्रिक टन क्षमता के अपने साइलो बना रहा है।
वहीं, चावल भंडारण के लिए 46 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदामों का प्रस्ताव टेंडरिंग प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ सका है। और बस यही देरी अब बड़े संकट में बदलती दिख रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
• पंजाब में नए अनाज के लिए गोदाम खाली नहीं बचे हैं।
• शेलरों में 45 लाख मीट्रिक टन धान पड़ा है।
• करीब 30 लाख मीट्रिक टन चावल डिलीवर होना है।
• अगली फसल से पहले हर महीने 20 लाख मीट्रिक टन चुकाई की जरूरत बताई गई है।













