RTE Act Punjab Supreme Court Notice : देश में शिक्षा के अधिकार को लेकर एक बड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। पंजाब में पिछले 15 सालों से बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (RTE) एक्ट, 2009 को ठीक से लागू नहीं किया गया है। खासतौर पर एक्ट की धारा 12(1)(सी) का पालन नहीं हो रहा, जिसमें प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) और पिछड़े वर्गों के बच्चों के लिए प्रवेश स्तर पर 25 फीसदी सीटें आरक्षित रखने की अनिवार्यता है।
सोमवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को एक जनहित याचिका (PIL) का जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। देखा जाए तो यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि लाखों गरीब और पिछड़े बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। सवाल उठता है कि आखिर 15 सालों तक यह कानून क्यों लागू नहीं हुआ? और सरकार ने इसे नजरअंदाज क्यों किया?
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क्या है RTE एक्ट की धारा 12(1)(सी)?
Right to Education (RTE) Act, 2009 भारत में 6 से 14 साल के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार देता है। इसी एक्ट की धारा 12(1)(सी) में एक बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान है:
“सभी प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को प्रवेश स्तर (कक्षा 1) में कुल सीटों का कम से कम 25 फीसदी हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और पिछड़े वर्ग (Disadvantaged Groups) के बच्चों के लिए आरक्षित रखना होगा।”
इसका मतलब साफ है: अगर किसी प्राइवेट स्कूल में कक्षा 1 में 100 सीटें हैं, तो उसमें से 25 सीटें गरीब और पिछड़े परिवारों के बच्चों को मुफ्त में दी जानी चाहिए। और सरकार इन स्कूलों को उन बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति (reimbursement) करती है।
लेकिन समझने वाली बात यह है कि पंजाब में यह व्यवस्था कागजों पर तो है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
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PIL में क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिकाकर्ता K.S. Raju Legal Trust ने सुप्रीम कोर्ट में गंभीर आरोप लगाए हैं:
1. धारा 12(1)(सी) लागू ही नहीं हुई:
पंजाब में प्राइवेट स्कूलों में EWS बच्चों को 25% आरक्षण नहीं मिल रहा। सरकार ने इसे ठीक से लागू करने में पूरी तरह विफलता दिखाई है।
2. पारदर्शी निगरानी तंत्र का अभाव:
RTE एक्ट के तहत जो डेटा पब्लिक डोमेन में होना चाहिए (कितने स्कूल, कितनी सीटें, कितने EWS बच्चे एडमिट हुए), वह उपलब्ध नहीं है। कोई पारदर्शी डैशबोर्ड या ऑनलाइन सिस्टम नहीं है।
3. आंकड़ों में बड़ा अंतर:
पंजाब सरकार ने पहले एक हलफनामे में बताया था कि प्राइवेट स्कूलों में सिर्फ 476 EWS विद्यार्थी दाखिल हुए हैं। जबकि याचिकाकर्ता का दावा है कि यह संख्या करीब 50,000 होनी चाहिए थी।
हैरान करने वाली बात यह है कि अगर पंजाब में हर साल प्राइवेट स्कूलों में लगभग 2 लाख बच्चे प्रवेश स्तर पर दाखिल होते हैं, तो उनमें से 25% यानी 50,000 सीटें EWS के लिए होनी चाहिए। लेकिन सरकार सिर्फ 476 का आंकड़ा दे रही है!
चीफ जस्टिस ने क्या कहा?
भारत के चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने याचिकाकर्ता को सुझाव दिया कि वे RTI (सूचना का अधिकार) के जरिए फाजिल्का जैसे जिले में मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों की संख्या के बारे में डेटा प्राप्त करें। साथ ही यह भी पता करें कि:
- कितने स्कूल CBSE या State Board से मान्यता प्राप्त हैं
- कुल मंजूरशुदा सीटें कितनी हैं
- दाखिल विद्यार्थियों की संख्या क्या है
- EWS से आने वाले बच्चों की संख्या कितनी है
बेंच ने कहा:
“हम नोटिस जारी कर रहे हैं… इस दौरान, बस यह करो। यह मुद्दे को समझने में हमारी मदद करेगा।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कोर्ट ने सिर्फ नोटिस जारी नहीं किया, बल्कि याचिकाकर्ता को ठोस डेटा जुटाने के लिए भी कहा है। इससे साफ होता है कि कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।
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याचिका में और क्या मांगें की गई हैं?
PIL में केंद्र और पंजाब सरकार से कई ठोस कदम उठाने की मांग की गई है:
1. पारदर्शी और समय-बद्ध सिस्टम:
एक ऐसा तंत्र स्थापित हो जिसमें जनता के लिए उपलब्ध डैशबोर्ड हो। जहां कोई भी देख सके कि कौन से स्कूल में कितनी EWS सीटें हैं और कितने बच्चों को दाखिला मिला।
2. उपलब्ध सीटों का निर्धारण और प्रकाशन:
हर साल स्कूलों को अपनी कुल सीटें और EWS आरक्षित सीटें सार्वजनिक करनी चाहिए।
3. दाखला समय-सारणी का प्रकाशन:
एडमिशन की तारीखें, प्रक्रिया, आवेदन कैसे करना है – सब पहले से स्पष्ट होना चाहिए।
4. आसान आवेदन प्रक्रिया:
गरीब परिवारों के लिए ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन की सुविधा आसान होनी चाहिए।
5. भुगतान संरचना:
सरकार द्वारा स्कूलों को समय पर प्रतिपूर्ति (reimbursement) होनी चाहिए।
6. पालन न करने पर कानूनी परिणाम:
अगर कोई स्कूल 25% आरक्षण नहीं देता, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
दिलचस्प बात यह है कि ये सभी प्रावधान RTE एक्ट में पहले से मौजूद हैं। लेकिन जमीन पर लागू नहीं हो रहे।
सुप्रीम कोर्ट का 2012 का फैसला
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के 2012 के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया, जिसमें RTE Act, 2009 की वैधता को बरकरार रखा गया था। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि:
“शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है। प्राइवेट स्कूलों को भी समाज के प्रति जिम्मेदारी निभानी होगी। 25% आरक्षण संवैधानिक रूप से वैध है।”
लेकिन समझने वाली बात यह है कि 2012 से लेकर 2026 तक—यानी 14 साल बाद भी—पंजाब में यह फैसला ठीक से लागू नहीं हो पाया।
चीफ जस्टिस ने सरकार से पूछा: क्या स्कूलों को मुआवजा दिया जाता है?
सुनवाई के दौरान बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा:
“सरकार की नीति क्या है? क्या वे स्कूलों को मुआवजा देते हैं?… हम उम्मीद करते हैं कि तुम प्राइवेट स्कूलों के लिए नहीं लड़ रहे हो कि वे सरकार से भुगतान करवाना चाहते हैं।”
इस पर याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि वे भारत सरकार में पूर्व संयुक्त सचिव हैं और RTE Act, 2009 का मसौदा तैयार करने में शामिल थे। उनकी प्राइवेट स्कूल सेक्टर में कोई दिलचस्पी नहीं है। वे सिर्फ गरीब बच्चों के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा:
“एक्ट में ही यह व्यवस्था है कि सरकार द्वारा निर्धारित फीस की राशि स्कूलों को दी जानी चाहिए। लेकिन पहले तो एडमिशन हो, फिर भुगतान की बात आएगी।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर सरकार समय पर स्कूलों को reimbursement नहीं करती, तो स्कूल भी EWS बच्चों को एडमिशन देने से कतराते हैं। यह एक दुष्चक्र बन गया है।
पंजाब में असली स्थिति क्या है?
अगर गौर करें तो पंजाब के कई जिलों में RTE के तहत EWS एडमिशन की जानकारी तक सार्वजनिक नहीं है। न तो सरकारी वेबसाइट पर डेटा है, न ही स्कूलों में नोटिस बोर्ड पर जानकारी।
कई गरीब माता-पिता को यह पता ही नहीं होता कि उनके बच्चे को महंगे प्राइवेट स्कूल में मुफ्त एडमिशन मिल सकता है। और जो जानते भी हैं, उन्हें जटिल प्रक्रिया और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है।
इससे साफ होता है कि कानून बनाना एक बात है, लेकिन उसे ईमानदारी से लागू करना बिल्कुल अलग बात है।
आगे क्या होगा?
अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर दिया है। दोनों सरकारों को अपना जवाब देना होगा। अगला सुनवाई में सरकार को यह बताना होगा:
- पिछले 15 सालों में RTE एक्ट लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए
- कितने स्कूलों ने 25% आरक्षण दिया
- कितने EWS बच्चों को एडमिशन मिला
- अगर लागू नहीं हुआ, तो क्यों नहीं हुआ
- आगे क्या सुधार करेंगे
यह मामला न केवल पंजाब, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि कई अन्य राज्यों में भी RTE एक्ट का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा।
मुख्य बातें (Key Points):
✔️ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार को RTE Act लागू न करने पर नोटिस जारी किया
✔️ पिछले 15 सालों से धारा 12(1)(सी) ठीक से लागू नहीं
✔️ प्राइवेट स्कूलों में 25% EWS आरक्षण नहीं मिल रहा
✔️ सरकार के आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी: 50,000 की जगह सिर्फ 476 बच्चे दाखिल
✔️ याचिकाकर्ता K.S. Raju Legal Trust पूर्व संयुक्त सचिव हैं, RTE Act के drafting में शामिल थे













